नमस्ते दोस्तों, पिछले भाग में हमने देखा की कैसे प्रिया अपने आप को बाथरूम में मुठी से चोदते हुए सोचती है, उसके बेटे कितने पेशेवर है ,और दुसरे कमरे में अमित और आदित्य खुशियाँ मनाते है , की कैसे अब उनकी मुफ्त की चूत की समस्या हमेशा के लिए हो गया है, अगर आपने वो पाठ नहीं पढ़ा है तो यहाँ माँ का रंडी बनने का सफ़र – पार्ट ७ क्लिक करके पढ़ सकते है. अब आगे…
सुबह पाँच बजे का अलार्म बजा, पर प्रिया को इसकी ज़रूरत नहीं थी। वो तो पहले ही जाग चुकी थी, उसके जिस्म की हर मांसपेशी एक अजीब सी गहरी चोट से कराह रही थी। यह दर्द कल रात के उस ‘पाठ’ की याद दिला रहा था—एक मीठा, खुजलाता हुआ दर्द जो उसकी रीढ़ की हड्डी से होता हुआ उसकी चूत तक दौड़ जाता था। उसे अपनी सुहागरात के दूसरे दिन का दर्द याद आया, जब संजय की कमज़ोर, पसीने से तर-बतर कोशिश से उसे थोड़ी सी तकलीफ हुई थी। वह दर्द, इस दर्द के आगे कुछ भी नहीं था। वह एक तुच्छ चोट थी, यह तो एक निशान था, एक ऐसा निशान जो उसे उसके बेटों का बना चुका था।
उसके मन में तुरंत तुलना हो गई। संजय तब भी कमज़ोर था, और आज भी वही कमज़ोर सा नींद में सोया हुआ था, मुँह खोले किसी भद्दे सूअर की तरह खर्राटे मार रहा था। न जाने क्यों, पर अब उसे संजय से घिन आ रही थी—उसकी उपस्थिति, उसकी साँस, उसकी पूरी काया उसे अपने नए, बलशाली स्वामियों के सामने एक बेजान, फेलिया सा महसूस करा रही थी। वह उठी, अपने आपको बाथरूम में खींच ले गई और ताज़े पानी से नहाई। फिर उसने अपना योगा का पैंट और टॉप पहना, मैट उठाया और लिविंग रूम में आ गई।
जैसे ही वो योगा करने के लिए मैट बिछाने लगी, उसकी नज़र अपने आप उसके बेटों के बेडरूम के बंद दरवाज़े पर पड़ गई। उसके दिमाग में एक खयाल आया, पता नहीं आज कौन सा पाठ होगा? पर अचानक उसके बदन की मांसपेशियों ने उसे गुज़ारिश की, आज तो छुट्टी ले ले, प्रिया। आज तेरी ‘पाठशाला’ को छुट्टी दे!।
इसी के साथ वह योगा करने लगी। और उसे एक और सरप्राइज़ मिला। उसका जिस्म, जो कल तक कुछ योगासन करने में असमर्थ था, आज बड़ी आसानी से सारे योगासन कर पा रहा था। वो किसी जिम्नास्टिक की खिलाड़ी की तरह अपने बदन को मोड़ सकती थी, एक आसानी से पीछे की ओर झुककर अपने पैरों के पंजों को छू लेती थी। फिर उसे याद आया कि इसकी वजह कल का उसका “पाठ” था। उसे याद आया की किस तरीके से उसके बेटों ने उसे टांगे फैला-फैलाकर चोदा था, कैसे उन्होंने उसके बदन को, अपने हिसाब से मोडकर चोदा था,
उसने फिर से लड़कों के दरवाज़े की तरफ देखते हुए उनका मन ही मन शुक्रिया किया। उसने सोचा कि लड़कों को पता ही नहीं है कि जाने-अनजाने में वे उसकी ज़िंदगी कितनी तरीकों से बेहतर बना रहे हैं। एक पल के लिए उसे लगा कि चुपके से उनके बेडरूम में जाकर इसका शुक्रिया किया जाए, उन्हें सोते हुए, उनका लंड चूस लिया जाए। इस शरारती विचार ने उसे एक शर्माती हुई हंसी दिला दी और वह अपना सिर हिलाकर वापस योगा करने लगी, सोचते हुए, क्या-क्या नहीं सोचती लेती हूँ मैं! पर उसने महसूस किया कि उसकी दोनों टांगों के बीच की दरार फिर से चिपचिपी हो चुकी थी। वह अपने योगा पैंट पहने ही ऊपर से अपनी चूत को सहलाकर अपनी प्यास बुझा लेती है।
कुछ देर बाद, जब घर के सभी लोग नहा-धोकर नाश्ता करने के लिए टेबल पर बैठे होते हैं, प्रिया जानबूझकर लड़कों से पूछती है, “तो, प्रोफेसर साहब, आज कौन सा पाठ है?” लड़के एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देखते हैं। संजय हैरान होकर पूछता है, “बाप रे! प्रोफेसर की उपाधि! ऐसा क्या सिखा दिया भाई अपनी मम्मी को तुम लोगों ने?”
लड़के तुरंत सफाई देते हैं, “अरे कुछ नहीं पापा, कल हमें कॉलेज से जल्दी छुट्टी मिल गई थी तो हमारे बास्केटबॉल के ट्रेनर ने कुछ योगा की ‘एडवांस पोजीशन’ बताई थीं, वो हमने कल मम्मी को सिखाई थीं।”
प्रिया और लड़के एक शरारती, हवस भरी मुस्कान से एक दूसरे को देखते हैं।
संजय कहता है, “अरे वाह भाई! अच्छी बात है। पर क्या इसीलिए तुम कह रही थी कि बदन दर्द कर रहा है? अरे भाई ज़रा ध्यान से, तुम्हारी मम्मी 42 की है! तुम्हारे जैसी ज़्यादा जवान नहीं है।
अगर गलती से थोड़ा इधर-उधर हो गया तो लेने के देने पड़ जाएँगे।”
प्रिया गुस्से से संजय की तरफ देखते हुए कहती है, “क्या मतलब है आपका? मैं 42 की हूँ? बच्चों, क्या मैं बूढ़ी लगती हूँ?” उसकी आवाज़ में एक ऐसी चुभन थी जो संजय को चौंका दे।
लड़के तुरंत कहते हैं, “अरे नहीं माँ! आपके सामने तो हमारी कॉलेज की लड़कियाँ फीकी पड़ जाती हैं!” प्रिया इस बात पर गर्व करते हुए सिर ऊँचा करके संजय को देखती है, उसकी आँखों में एक जीत का भाव था।
संजय सफाई देता है, “अरे मेरा वो मतलब नहीं था। मैं तो बस लड़कों को कह रहा था कि ज़रा संभल के सिखाए, इंज्यूरी न हो पाए।”
लड़के कहते हैं, “उसकी चिंता मत करो पापा, हम उस बात का पूरा ध्यान रखते हैं और रखेंगे! पर क्या है न, कोई भी नई चीज़ सीखने में शुरुआत में दिक्कत तो होती ही है।
पर मम्मी बहुत मेहनती है और जल्दी सीख जाती है। मम्मी सच में अच्छी विद्यार्थी है।” आदि ने ये कहते हुए प्रिया की तरफ देखा, उसकी आँखों में एक ऐसी गर्माहट थी जो ‘विद्यार्थी’ शब्द को एक नया ही अर्थ दे रही थी।
प्रिया एक्साइटमेंट से पूछती है, “तो फिर आज कौन सा आसन सीखेंगे?” उसकी चूत फिर से चिपचिपी हो जाती है, उसके पैंट के पतले कपड़े के नीचे से एक गर्म नमी महसूस होने लगती है।
लड़के कहने वाले होते हैं, “आज हम…” तभी अमित के फ़ोन पर व्हाट्सऐप पर कॉलेज फ्रेंड ग्रुप का मैसेज आता है।
उन्हें आज उनके बास्केटबॉल कोच ने जल्दी बुलाया होता है। लड़के कहते हैं, “अरे यार, आज तो जल्दी जाना ही पड़ेगा कॉलेज, कोच ने जल्दी बुलाया है।” प्रिया का मुँह गिर जाता है, अमित और आदि भी मायूस हो जाते हैं। प्रिया की उमंग एकदम से बुझ गई थी, जैसे किसी ने उसके ऊपर ठंडा पानी डाल दिया हो।
प्रिया कहती है, “अरे ऐसे कैसे जल्दी बुलाया है? मेरा मतलब है, उन्हें ज़रा सोचना चाहिए न कि लोगों का कुछ प्लान होता है।”
ये सुनकर अमित और आदि खुद हैरानी से एक दूसरे को देखते हैं। उनकी माँ की आवाज़ में एक ऐसी निराशा और छटपटाहट थी जो उन्हें चौंका दे रही थी।
संजय : “अजीब बात करती हो प्रिया तुम भी! अब तुम्हारे योगा के चक्कर में वो अपना बास्केटबॉल करियर छोड़ देंगे क्या? हद है!”
प्रिया : “अरे में कहां उनको…” तभी आदि, बीच में मिया-बीवी की नोंक-झोंक को टोकते हुए,
“माँ अरे वैसेभी जो आगे आसन है योग के उसे सीखने के लिए थोड़ा ज्यादा समय लगेगा.. ‘शॉर्टकट’ से काम नहीं चलेगा।”
प्रिया : “तो आज फिर..छुट्टी?” उसकी आवाज़ में एक बच्चे जैसी उदासी थी।
आदि : “लग तो ऐसा ही रहा है।”
प्रिया : “तो एक काम करो जाने से पहले कम से कम कल के आसन के रिवीजन कर लेते हैं, मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही है वो करने में।”
उसने जल्दी से कहा, जैसे कोई बहाना ढूंढ रही हो। आदि और अमित एक दूसरे को आश्चर्य से देखते हैं। उनकी माँ सेक्स की भूखी हो गई थी। उसकी आँखों में एक ऐसी बेचैनी थी जो साफ कह रही थी कि वह इंतज़ार नहीं कर सकती।
प्रिया : “अरे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा बस एक घंटा।”
संजय : “तुम लोग करो तुम्हारा योगा-शोगा, मुझे देर हो रही है, मैं चला।” ये बोल के वो ऑफिस बैग लेके घर से बाहर चला जाता है।
संजय के ऑफिस के लिए निकलते ही घर का माहौल एक दम बदल गया। वह अब तक का इंतज़ार खत्म हो गया था। जैसे ही प्रिया ने पार्किंग से उसकी गाड़ी को बाहर निकलते देखा, वह एक पिंजरे से आज़ाद, भूखी शेरनी की तरह पलटी। अमित ने इसका फायदा उठाया, झटके से आगे बढ़कर अपना हाथ सीधे उसके ब्लाउज के गले में घुसा दिया।
उसकी उंगलियाँ उसके मोटे, कड़े निप्पलों को ढूंढ गईं और उन्हें कसकर चिमटकर मसलने लगीं। एक तीखी, सुखद पीड़ा की लहर प्रिया के शरीर में दौड़ गई। उसी पल आदि ने भी उसकी साड़ी के ऊपर से ही, अपने हाथ से प्रिया के जांघो के बिच से चूत को चारो उंगलियों से रगड़ना शुरू कर दिया, चूत पर साडी घिसने वाली जगह पर साडी तुरंत गीली हो गयी। संजय की गाड़ी जैसे ही गेट पार करती, प्रिया ने अपने बेटों का कोई आदेश सुने बिना ही एक शैतानी फैसला लिया। उसने अपनी साड़ी के पल्ले को एक झटके से कमर तक ऊपर सरका दिया। वह उसी खिड़की के पास, दीवार के कोने में पीठ टिकाकर, बैठकर एक ऐसी मुद्रा में बैठ गई जैसे वह पेशाब करने वाली हो। उसने अंदर कुछ नहीं पहना था। उसकी गोरी-चिकनी जांघो के बीच, उसकी फैली हुई गुलाबी चिकनी चूत पूरी तरह से उजागर थी, और उसमें से उसकी उत्तेजना का चमकीला रस टपक रहा था।
“साली रंडी को देख भाई,” अमित ने अपनी साँस रोककर कहा, उसकी आँखों में एक जानवरी भूख थी। “बिना चड्डी के घूम रही है छिनाल!”
प्रिया ने उसकी गाली पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उसका ध्यान सिर्फ एक ही चीज़ पर था। उसने जल्दी से हाथ बढ़ाये और दोनों की पैंट की ज़िप खोलने लगी। उसके हाथ कांप रहे थे, उसकी उंगलियाँ बेचैनी से बटन और ज़िप के साथ लड़ रही थीं। उसकी जल्दबाज़ी देखकर आदि और अमित एक-दूसरे को आश्चर्य से देखने लगे। उनकी माँ पहले कभी इतनी भूखी नहीं दिखी थी।
“आराम से माँ, आराम से!” अमित ने कहा, पर प्रिया ने उसकी एक न सुनी।
उसने दोनों के लंडों को बाहर निकाला। वे अभी थोड़े नरम थे, पर जैसे ही प्रियाने उन्हें अपनी गर्म साँसों के नीचे महसूस किया, वे सिहरने लगे और फौलाद की तरह सख्त होने लगे। प्रिया ने एक-एक करके दोनों लंडों को अपने चेहरे के पास लाया और बंद आँखों से उनकी नमकीन पसीने की गंध को साँस में भरा।
यह वही सुगंध थी जिसने उसे कल रात जगाया था—पसीने की कड़वाहट, उसकी त्वचा की कच्ची गंध, और कल रात के वीर्य की महक। वह उस गंध से नशे में धुत हो गई, जैसे कोई मादक पदार्थ पी लिया हो। उसने खुद को खिड़की और दूसरी दिवार के कोने में सेट किया, सिर आगे की तरफ मुँह करके, और बैठकर अपनी टाँगें फैला दीं।
“आदि… नीचे… जल्दी से,” उसने कराहते हुए कहा।
फिर उसने अमित की कमर पकड़कर उसे अपने मुँह के बिल्कुल पास खींच लिया।
“लो बेटा, मुँह चोद जल्दी से। हमारे पास बस एक घंटा है और तुम्हें कॉलेज भी जाना है।”
आदि झटके से नीचे बैठ गया और अपनी माँ की गीली चूत पर अपनी मुँह लगा दिया।
“क्या स्वाद है मम्मी, तुम्हारी चूत का!”
उसने अपनी जीभ निकाली और उसे धीरे-धीरे उसकी चूत की दरार पर घुमाया। प्रिया ने एक सिसकारी भरी और अपने दोनों हाथों से आदि के सिर को अपनी चूत पर दबा लिया। आदि की जीभ अब उसकी योनि के भीतरी होंठों को अलग करते हुए उसकी क्लिटोरिस तक पहुँच गई थी।
उसका मुँह खुला हुआ था, और अमित ने इसका फायदा उठाया। लेकिन आज वह जल्दबाज़ी में नहीं था। उसने अपना मोटा, गर्म लंड प्रिया के नरम, लाल होंठों पर रखा और उन्हें रगड़ा। प्रिया ने अपनी आँखें खोलीं और सीधे अमित की आँखों में देखा। उस नज़र में कोई विनती नहीं थी, बल्कि एक खुली चुनौती थी। ‘देखते है, आज तुम कितना घुसा सकते हो!।’
अमित मुस्कुराया। उसने अपना लंड धीरे-धीरे आगे बढ़ाया, इतनी धीमी गति से जैसे वह रेशम के कपड़े को छेद कर रहा हो। उसका सुपारा उसके मुँह में घुसा, और वह धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा, इंच दर इंच। वह उसकी आँखों से लगातार उसकी हर हरकत पर नज़र रखे हुए था। प्रिया पलक तक नहीं झपकी। आँसू उसकी आँखों में आ गए थे, लेकिन वह नहीं टपक रहे थे, वह सिर्फ भर रहे थे, उसकी दृढ़ता को और पक्का करते हुए।
जब उसका लंड उसके गले की शुरुआत पर टकराया, तो वह रुक गया। वह एक दीवार से टकरा गया था। अब वह उसे देखता रहा, उसकी आँखों में थोड़ी सी चुभन पैदा करने की कोशिश में। पर प्रिया की आँखों की चमक और तेज़ हो गई। उसने अपनी जीभ को हिलाकर अमित के लंड के नीचे से सहारा दिया, एक आमंत्रण दिया।
अमित ने अपना खेल बदला। उसने अपना लंड उसी जगह हिलाना शुरू कर दिया, और साथ ही अपने हाथों से उसके सिर को हल्के से एक तरफ झुकाया। एक अजीब सी हरकत हुई। प्रिया को महसूस हुआ कि उसके गले की मांसपेशियों ने एक पल के लिए रास्ता दिया है।
अमित ने तुरंत इसका फायदा उठाया और अपना लंड उस छोटी सी जगह से और अंदर धकेल दिया। दोनों को ही एक अजीब सी सफलता का एहसास हुआ। अब अमित का लंड उसके गले में घुस चुका था। उसकी गोटियाँ अब प्रिया की ठुड्डी पर टिकी हुई थी, और उसके लाल, लिपस्टिक वाले होंठ उसके लंड के आधार पर चिपके हुए थे।
लेकिन अमित खत्म नहीं हुआ था। वह धीरे-धीरे, एक इंच के दसवें हिस्से की गति से, और भी अंदर धकेल रहा था। प्रिया का सर दिवार के कोने में फिक्स होने की वजह से पीछे नहीं हो रहा था. वह उसकी आँखों में देख रहा था। प्रिया की आँखें अब आँसूओं से लाल और भीगी हुई थीं। वह एक झील की तरह लग रही थी, जिसकी सतह पर एक तूफ़ान आने वाला था। पर वह नहीं झपकी। वह उसे देख रही थी, उसकी आँखों में एक ऐसी अड़ियल चमक थी जो अमित को और भी उत्तेजित कर रही थी। यह एक युद्ध था, और वह जीतना चाहता था। उसने फिर से धक्का दिया। उसका लंड अब उसके गले के सबसे संकरे हिस्से में था। प्रिया को लगा जैसे उसकी साँस ही काट दी गई हो।
उसका जबड़ा निचे से पूरी तरह खिंच चूका था और पूरा लंड गले में होने की वजह से गला फुल चूका था. उसके फेफड़े जलने लगे, पर उसने अपनी आँखें नहीं हटाईं। उसके शरीर ने कांपना शुरू कर दिया, एक नियंत्रण रहित कंपन जो उसकी इच्छा के बाहर था। अमित ने अपना लंड उसी गहराई में रोक दिया। वह उसे अपनी सत्ता महसूस करवाना चाहता था। वह उसे तोड़ना चाहता था।उसने अपने हाथों से उसके सिर को और कोने में दबा दिया, जिससे उसका मुँह और खुल गया और उसका लंड और अंदर सरक गया।
“क्या हुआ, माँ?” अमित ने एक क्रूर, सिसकी भरे स्वर में कहा। “अभी भी हिम्मत है? फिर से चुनौती दे रही है मादरचोद? देख लो, मैं तुम्हारा गला फाड़ कर रख दूँगा। बोलो, हिम्मत है कुछ?”
उसकी बदज़ुबानी ने प्रिया के अंदर का जानवर जगा दिया। आँसू अब उसके गालों पर बह रहे थे, लेकिन उसकी निगाहें अभी भी अड़ी थीं। उसने अपने हाथ उठाकर अमित की जाँघों पर कमज़ोरी से मारने की कोशिश की, एक गुहार, एक संकेत कि वह हार मानने वाली थी। पर उसका सिर दीवारों के बीच इतना फँसा हुआ था कि वह कुछ नहीं कर सकी। उसके हाथ सिर्फ वहाँ फड़फड़ाए।
अमित ने उसकी हालत देखी और एक विजयी मुस्कान दिया। उसने अपना लंड अचानक बाहर खींच लिया। प्रिया ने एक लंबी, कांपती हुई साँस ली और खाँसने लगी। उसका मुँह लार और थूक से लथपथ था, उसके होंठ सूज गए थे और उसकी आँखें लाल थीं। लेकिन उसे आराम करने का मौका नहीं मिला। अमित ने फिर से अपना लंड उसके मुँह में घुसा दिया, इस बार किसी तेज़ रफ़्तार की ट्रेन की तरह। उसने उसका सिर पकड़ लिया और वापस कोने में दबा दिया, पिछेसे देखने पर अमित का कूल्हा उसके चेहरे पर टकराने लगा।
“गाक!.. गाक!!.. गाक!!!..”
वह घृणित आवाज़ अब इस घर की सुबह का प्रभात गीत बन चुकी थी। अमित के झांटे प्रिया की नाजुक त्वचा को रगड़ रहे थे। प्रिया की आँखों से आँसू की नदियाँ बह रही थीं, उसका मस्कारा उसके गालों पर काले धब्बे बना रहा था।
नीचे, आदि ने भी अपनी गति बढ़ा दी थी। उसने अपनी तीनों उंगलियाँ उसकी चूत में घुमा रहा था, और अब उसने अपनी चौथी उंगली भी अंदर डाल दी। प्रिया का शरीर एक झटके से कांपा, उसकी कमर ऊपर की तरफ उठी, पर अमित के लंड ने उसे वहीं दबा कर रखा। आदि समझ गया। उसने अपनी चारों उंगलियाँ एक साथ मोड़ीं और अपना अंगूठा उसके हथेली के नीचे छिपा लिया। उसने अपनी मुट्ठी बना ली—एक ठोस, पत्थर जैसी गोलाई। वह एक पल के लिए रुका, फिर धीरे से चूत में धक्का दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… मम्मीईईईई!”
प्रिया के मुँह से एक दम घुटी हुई, लंबी चीख निकली, जो अमित के लंड में दबकर एक कंपकंपी में बदल गई। उसकी चूत ने आदि की मुट्ठी को झटके से निगल लिया था। कोई रुकावट नहीं थी। कोई दर्द नहीं था। सिर्फ एक अविश्वसनीय, असहनीय परिपूर्णता का एहसास था। वह ऊपर से गले चोदी जा रही थी और नीचे से चूत चोदी जा रही थी, एक साथ, दोनों तरफ से।
आदि ने अपनी मुट्ठी को अंदर घुमाना शुरू कर दिया। वह उसे अपनी कलाई तक अंदर धकेल रहा था, उसकी मांसपेशियों को फैला रहा था, उसके अंदर की हर जगह को छू रहा था। प्रिया का शरीर अब एक लयबद्ध ढोल की तरह धड़क रहा था। ऊपर से अमित के धक्के और नीचे से आदि की मुट्ठी के घूर्णन ने उसे एक ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया था जहाँ वह सिर्फ एक चीज़ महसूस कर सकती थी—कच्ची, जानवरी वासना।
अमित की साँसें तेज़ हो गई थीं, उसके चेहरे पर पसीने की बूँदें थीं।
“ले… साली… ले… मेरा माल… पी जा… पूरा…” उसने कसकर कहा, और फिर उसका शरीर अकड़ गया।
उसने एक ज़ोरदार धक्का दिया और अपना लंड प्रिया के गले के सबसे गहरे हिस्से में धंस दिया। एक गर्म, गाढ़ा फुहारा सीधा उसके गले में उतरा। प्रिया को साँस लेने में तकलीफ हो रही थी, पर उसने अपनी आँखें नहीं हटाईं। उसने निगला, एक बूँद भी बर्बाद न करते हुए। जैसे ही अमित ने अपना लंड बाहर निकाला, प्रिया ने एक लंबी, कांपती हुई साँस ली।
सका मुँह लार और वीर्य से लथपथ था, उसके होंठ सूजे हुए थे, और उसकी आँखें लाल थीं। लेकिन नीचे, आदि अभी भी जारी था। उसने अपनी मुट्ठी को तेज़ी से घुमाया और अपनी जीभ से उसकी क्लिट को रगड़ा। यह सब एक साथ हुआ। प्रिया का शरीर एक तार की तरह तन गया, और फिर ढीला पड़ गया।
एक प्रचंड चीख उसके गले से निकली,
“आह्ह्ह्ह मेरे राजा… आह्ह्ह्ह… मैं गई… मैं गईईईईई…”
उसकी चूत से एक फव्वारे की तरह गर्म पानी फूट पड़ा, जिसने आदि का चेहरा, उसकी छाती, और फर्श तक भिगो दिया। वह लगातार कंपकंपा रही थी, उसके शरीर पर एक भी ऐसी मांसपेशी नहीं थी जो कांप न रही हो। वह ढीली पड़कर दीवार के सहारे फर्श पर गिर गई, एक ऐसी अवस्था में जैसे उसके सारे हड्डी-मांस पिघल गए हों। उसकी साँसें तेज़ और अनियंत्रित थीं, और उसकी आँखों से अभी भी आँसू की धार बह रही थी, लेकिन उनमें अब दर्द या हार नहीं, बल्कि एक अजीब सी शांति और तृप्ति थी।
आदि ने धीरे से अपनी मुट्ठी बाहर निकाली, जिससे ‘पच’ की एक गीली, गंदी आवाज़ आई। प्रिया की चूत अब एक गुलाबी, सूजी हुई गुफा की तरह खुली हुई थी, जिससे उसका रस लगातार बहकर फर्श पर एक छोटी झील बना रहा था। आदि का चेहरा उसके रस से पूरी तरह भीगा हुआ था, उसकी छाती और पेट तक। वह उठकर अपनी माँ को देखकर मुस्कुराया, एक ऐसी मुस्कान जिसमें जीत का गर्व और एक नई खोज की उत्सुकता थी।
“देखो अमित,” आदि ने कहा, अपनी उंगलियों से अपने चेहरे के रस को इकट्ठा करते हुए। “हमारी मम्मी तो पूरी तरह रंडी बन गयी है।”
अमित, जिसने अभी-अभी अपना लंड प्रिया के मुँह से बाहर निकाला था, ने अपने लंड को प्रिया के बालों से साफ किया।
“बनी नहीं है, भाई। अभी तो बस शुरुवात हुई है। यही तो असली रिविजन था।” वह नीचे झुककर प्रिया के कान में फुसफुसाया, “सही कह रहा हूँ ना?, मेरी रंडी माँ?”
प्रिया ने अपनी आँखें धीरे से खोलीं। उसने अमित को देखा और एक कमज़ोर, संतुष्ट मुस्कान दी। वह कुछ नहीं बोली, पर उसकी निगाहों ने सब कुछ कह दिया। वह हार गई थी, और इस हार में ही उसे अपनी असली जीत मिली थी।
“चलो , अब उठो,” आदि ने उसे खींचकर उठाया। “हमें भी तैयार होना है।”
प्रिया के पैर कांप रहे थे, वह खड़ी नहीं हो पा रही थी। लड़कों ने उसे दोनों तरफ से सहारा दिया और उसे सोफे तक ले गए। वहाँ बैठाकर, अमित ने उसके सामने अपना लंड फिर से उसके मुँह के पास कर दिया, जो अभी भी उसके वीर्य और उसकी लार से सना हुआ था।
“इसे साफ करो, माँ। हमें कॉलेज जाना है,जल्दी!।”
प्रिया ने तुरंत एक माँ की तरह, अपने छोटे बच्चों की तय्यारी शुरू कर दी, जैसे वो दोनों अब स्कूल में जा रहे हो, और उनकी बाल संवार रही हो। वह आगे बढ़ी और अपनी जीभ से उसके लंड को चाटने लगी। उसने हर एक बूँद को चाटा, उसकी गोटियों को भी अपने मुँह में लेकर साफ किया। फिर आदि आया, और उसके माँ के चूत के रस से, भीगा हाथ प्रिया के सामने किया। प्रिया ने उसकी उंगलियों को भी एक-एक करके चाटा, अपने ही रस का स्वाद लेते हुए।
यह एक नया नियम था, एक नयी रस्म। बिलकुल एक पालतू कुत्ते की तरह, जो अपने मालिक से प्यार जताने के लिए जीभ से चाटता है. सब चाट के साफ करने के बाद प्रिया कड़ी हुई,अमित ने उसके पास आकर उसकी गांड पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा।
“आह!” प्रिया चीख पड़ी।
“यह तो सिर्फ शुरुआत थी, माँ,” अमित ने कहा, अपनी उंगली उसके गांड के छेद पर रखते हुए। “कल इसकी भी बारी है, सोच-समझकर तैयार होना, क्योंकि कल का पाठ आज से भी कठिन होगा। हम इसे भी फाड़ेंगे, ठीक वैसे ही जैसे तुम्हारी चूत और गला फाड़ा है।”
आदि ने उसके दूसरी तरफ से उसकी चूचियों को दबाया। “हाँ माँ, और तुम्हें इसका और मज़ा आने वाला है।”
आदि ने उसके दूसरी तरफ से उसकी चूचियों को दबाया। “हाँ माँ, और तुम्हें इसका और मज़ा आने वाला है।”
कल का पाठ… गांड का पाठ…
उसे डर तो लग रहा था, पर उस डर के साथ एक ऐसी बेचैनी और उत्साह भी था जो उसे पागल कर रहा था। वह जानती थी कि वह इसके लिए तैयार होगी। वह अपने बेटों की हर इच्छा पूरी करेगी। क्योंकि अब वह उनकी माँ नहीं, उनकी छात्रा थी। उनकी दासी थी।उनकी कुतिया । और वह अपनी इस नई पहचान से प्यार करने लगी थी।