गरीबी का सौदा cuckold बन के किया – १
तपती हुई दोपहर थी, जब आसमान से आग बरस रही थी और ज़मीन के सीने से उठती धूल हर उम्मीद
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तपती हुई दोपहर थी, जब आसमान से आग बरस रही थी और ज़मीन के सीने से उठती धूल हर उम्मीद
बोरीवली की उस पुरानी चाल में हवा का एक हल्का झोंका भी आता तो दीवारों से लगी लकड़ी की शटर