चेन्नई की गर्मी में भी एसी वाले क्लासरूम में एक अलग ही ऊर्जा थी। फाइनल ईयर का तनाव हवा में तैर रहा था, लेकिन नीता के चेहरे पर आत्मविश्वास का एक
स्थिर भाव था। वह बैठी थी, उसकी कमीज की हल्की सिल्क उसके २८ साइज के स्तनों के प्राकृतिक कर्व को उभार रही थी, जो हर सांस के साथ मुलायम तरीके
से उठते-गिरते थे। उसकी गोरी त्वचा क्लास की फ्लोरोसेंट लाइट में चमक रही थी, और उसके लंबे, घने बाल एक तरफ से कंधे पर लहरा रहे थे। उसकी आँखों में
सपने थे – बड़े, चमकदार, और बेहद महत्वाकांक्षी।
उसके बगल में राहुल बैठा था, अपनी नोटबुक में कुछ स्केच बना रहा था। वह लंबा नहीं था, बस औसत कद-काठी का, उसकी शर्ट के बटन उसके छोटे से पेट
पर थोड़े टाइट पड़ रहे थे। मस्कुलर बॉडी नहीं थी उसके पास, लेकिन उसकी आँखें तेज थीं, दिमाग और भी तेज। वह नीता की तरफ देखकर मुस्कुराया। “आज
कैंपस प्लेसमेंट की लिस्ट आई है। तीन कंपनियाँ आ रही हैं अगले हफ्ते,” उसने कहा, अपनी पतली, कलात्मक उंगलियों से पेन घुमाते हुए।
नीता ने बिना उत्साह के एक नज़र उस पेपर की तरफ फेंकी जो बोर्ड पर चिपकाया गया था। “मास-प्रोडक्शन वाली मिलें,” उसने अपनी आवाज़ में थोड़ी
अवमानना घोलते हुए कहा। “यही बनाएंगे? वही पुराने कट, वही फीके फैब्रिक, हज़ारों की संख्या में? यह वो नहीं है, राहुल। यह वो नहीं है जिसके लिए हमने यहाँ
दिन-रात पसीना बहाया है।”
राहुल ने सिर हिलाया, उसकी बात से पूरी तरह सहमत। उसकी नजर नीता के चेहरे पर टिकी थी, उसके होंठों के हिलने पर, जब वह बोल रही थी। वह उसके
आत्मविश्वास से आकर्षित था, उस जुनून से जो उसकी हर अभिव्यक्ति से झलकता था। “हमारा सपना तो रनवे का है,” राहुल बोला, अपनी नोटबुक बंद करते हुए।
“वो लाइट्स, वो म्यूजिक, वो मॉडल… असली कला वहाँ होती है, जहाँ एक डिज़ाइनर की कल्पना सीमाओं को तोड़ती है और कपड़ा सिर्फ कपड़ा नहीं,
एक स्टेटमेंट बन जाता है।”
“बिल्कुल,” नीता ने कहा, उसकी आँखें चमक उठीं। वह आगे की सीट की पीठ पर हाथ रखकर खड़ी हो गई, उसकी स्कर्ट उसकी गोल, भरी हुई गांड के आकार
को उजागर कर रही थी। “हमें किसी ऐसे के साथ काम करना है जो इंडस्ट्री में अपना नाम बना चुका है। जिसकी क्रिएटिविटी की चर्चा हो। जिसके क्लाइंट लिस्ट
में सेलेब्स हों।” , “विशाल मल्होत्रा,” राहुल ने उसके विचार को आवाज़ दे दी। नाम लेते ही क्लासरूम की हवा में एक नया कंपन भर गया, जैसे कोई जादुई शब्द
बोल दिया गया हो।
“विशाल मल्होत्रा,” नीता ने धीरे से दोहराया, जैसे स्वाद ले रही हो। “छः फीट लंबा, परफेक्ट फिट बॉडी, हैण्डसम… और जो डिज़ाइन करता है वह हर फैशन वीक
में सुर्खियाँ बटोरता है। अखबारों में कहते हैं उसका हर कलेक्शन एक क्रांति है। सेलेब्रेटीज़ उसी के पास अपने गाउन डिज़ाइन करवाने जाती हैं।” उसकी आवाज़
में इच्छा थी, ललक थी। यह सिर्फ नौकरी की इच्छा नहीं थी, यह एक पूरी दुनिया में प्रवेश पाने की भूख थी।
राहुल उठ खड़ा हुआ, उसके और नीता के बीच सिर्फ कुछ इंच का फासला रह गया। उसने नीता की आँखों में देखा – वहाँ महत्वाकांक्षा की आग साफ जल रही
थी। “अगर हम उसके साथ जुड़ पाए… तो यह इंडस्ट्री में एंट्री का गोल्डन पास होगा। एक रेफरेंस, एक ऐसा अनुभव जो हर दरवाज़ा खोल देगा।”
“लेकिन ऐसा कुछ भी मिलता है तो उसकी कीमत होती है, राहुल,” नीता ने कहा, उसकी नजरें अब भी दूर, किसी अनदेखे भविष्य पर टिकी हुईं। “कॉलेज की
किताबें सिर्फ फैब्रिक और थ्रेड सिखाती हैं। यहाँ जो सबक मिलने वाला है… वह शायद किसी सिलेबस में नहीं लिखा होता। असली दुनिया के पाठ… वो अलग होते
हैं।” दोनों चुपचाप क्लासरूम से बाहर निकल आए। गलियारे की खिड़की से चेन्नई का तेज सूरज उन पर पड़ रहा था। नीता का आत्मविश्वास उसकी चाल में
झलक रहा था, हर कदम मजबूत और निश्चित। राहुल उसके बगल में चल रहा था, उसका दिमाग विशाल मल्होत्रा के नाम और उसकी दुनिया में प्रवेश के रास्तों
का नक्षा बना रहा था। वे दोनों जानते थे कि छोटी-मोटी कंपनियों में सेटल होना उनके सपनों के साथ विश्वासघात होगा। उनकी भूख बड़ी थी, उनकी कल्पनाएँ
विशाल थीं। लेकिन उस पल, उस गर्म गलियारे में, वे अच्छे से जानते थे कि महत्वाकांक्षा की यह चमकदार सड़क किन-किन मोड़ों से गुजरने वाली है। विशाल
मल्होत्रा का नाम एक सपना था, एक लक्ष्य था – पर सपनों और हकीकत के बीच का फासला अक्सर ऐसे सबक सिखाता है जिनकी कल्पना भी नहीं की जाती।
और यह सबक… यह पाठ… अब शुरू होने ही वाला था।
विशाल मल्होत्रा का ऑफिस चेन्नई के एक शानदार बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में था। शीशे और स्टील की इमारत, जिसके अंदर प्रवेश करते ही एक अलग ही दुनिया का
एहसास हुआ। हवा में महंगे परफ्यूम और कॉफी की खुशबू मिली हुई थी। नीता और राहुल, अपना पोर्टफोलियो बैग संभाले, रिसेप्शन की तरफ बढ़े। उनके
कदमों में आत्मविश्वास था, लेकिन दिल की धड़कनें थोड़ी तेज जरूर थीं।
रिसेप्शन पर एक महिला बैठी थी। उम्र चालीस के आसपास, लेकिन फिट और स्टाइलिश। उसके बाल बखूबी सँवारे हुए थे, उसकी शर्ट और स्कर्ट का कट
उसकी परफेक्ट शेप को दिखा रहा था। उसकी नजरें, जो शायद हर आने वाले को तौलने की आदत से तेज हो चुकी थीं, नीता और राहुल पर ऊपर से नीचे तक
घूमीं। उसने उनके साधारण कॉलेज के कपड़ों, राहुल के थोड़े से टाइट शर्ट पर, और नीता के यूथफुल कॉन्फिडेंस पर एक नजर डाली।
“हैलो, कैन आई हेल्प यू?” उसकी आवाज़ पॉलिश थी, लेकिन उसमें कोई ज्यादा गर्मजोशी नहीं थी।
राहुल आगे बढ़ा। “वेल, वी आर हियर टू आस्क फॉर अ जॉब। असिस्टेंट की पोस्ट के लिए। हम डिजाइनर हैं।”
उस महिला की नजर फिर से दोनों पर पड़ी। एक सेकंड के लिए तो वह चुप रही, फिर अचानक उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आई, जो जल्दी ही
खुलकर हंसी में बदल गई। उसने सिर हिलाया, जैसे कोई बहुत मजेदार चुटकुला सुन लिया हो। “ओह गॉड… किड्स।” उसने कहा, हंसी को थामते हुए। “तुम
लोगों को किसने कहा यहाँ आने के लिए? बस कॉलेज खत्म किया है न? यह जॉब प्रोफेशनल्स के लिए है, फ्रेशर्स के लिए नहीं। यह ‘विशाल मल्होत्रा’ हैं। यह लोगों
के दिल जीतने के लिए डिजाइन करते हैं। इन्हें किसी ऐसे की जरूरत है जिसे पहले से ही इस इंडस्ट्री का एक्सपीरियंस हो। ओके? अब जाओ, और कहीं और
जॉब ढूंढो।” उसकी आवाज़ में मखौल उड़ाने का भाव साफ झलक रहा था। वह उन्हें नीची नजरों से देख रही थी, जैसे वे कोई परेशानी लेकर आए हों।
राहुल का चेहरा लाल हो गया। वह कुछ कहने ही वाला था कि नीता ने एक कदम आगे बढ़ाया। उसका सिर ऊँचा था, आँखों में चुनौती थी। वह इतनी मजबूत
लड़की थी कि किसी की हंसी उसके हौसले को नहीं डिगा सकती थी। “देखिए मिस,” उसकी आवाज़ स्पष्ट और दृढ़ थी, बिल्कुल भी घबराई हुई नहीं। “मैं जानती
हूँ कि विशाल सर बहुत, बहुत टैलेंटेड व्यक्ति हैं और उन्हें किसी अनुभवी की जरूरत है। लेकिन मैं और मेरा बॉयफ्रेंड किसी से कम नहीं हैं। हमारे डिजाइन
बिल्कुल नए और यूनिक हैं। मुझे पूरा यकीन है कि अगर विशाल सर सिर्फ एक मिनट के लिए भी इन्हें देख लें…”
नीता की बात पूरी होने से पहले ही उस महिला की हंसी थम गई। उसने नीता को गौर से देखा, उसके चेहरे के भावों को पढ़ने की कोशिश की। उस लड़की के
अंदर का आत्मविश्वास, उसकी आँखों में चमकता दृढ़ संकल्प… यह सब देखकर वह एक पल के लिए स्तब्ध रह गई। यह साधारण फ्रेशर नहीं लग रही थी। उसने
एक लंबी सांस ली और अपना हाथ आगे बढ़ाया। “ओके। मैं उन्हें दिखा देती हूँ। लेकिन मैं जानती हूँ कि वह तुम्हारे पोर्टफोलियो को सिर्फ एक नजर देखकर
रिजेक्ट कर देंगे। यहीं वेट करो।”
उसने पोर्टफोलियो का फाइल लिया और एक शानदार लकड़ी के दरवाजे वाले केबिन की तरफ चली गई। दरवाजा बंद हुआ।
बाहर, नीता और राहुल एक-दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराए। एक उम्मीद की किरण दिखी थी। राहुल ने नीता का हाथ अपने हाथों में ले लिया। “तुमने तो
उसका मुँ ही बंद कर दिया,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। नीता ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखों में उत्साह था। वे चुपचाप खड़े रहे, आसपास की शानदार
डेकोरेशन और फैशन मैगजीनों के ढेर को देखते हुए। हर सेकंड लंबा खिंच रहा था।
कुछ मिनट बाद दरवाजा खुला। वह महिला बाहर आई। उसके चेहरे के भाव बदल चुके थे। अब उसमें हंसी नहीं, बल्कि एक अजीब सी गंभीरता थी। उसकी
नजर सीधे नीता पर टिकी। “हे गर्ल… नीता, है न? अंदर आओ। बॉस तुम्हें बुला रहे हैं।” उसने फिर राहुल की तरफ देखा। “और तुम लड़के, यहीं इंतज़ार करो।
उन्होंने सिर्फ मेन डिजाइनर को बुलाया है।”
नीता की भौंहें तन गईं। वह एक कदम पीछे हटी, राहुल के पास। “देखिए, हम यहाँ एक टीम हैं। हम दोनों मिलकर काम करते हैं। मैं अकेली अंदर कैसे जा
सकती हूँ?” महिला ने उसकी बात काट दी। उसकी आवाज़ में अब रुखापन आ चुका था, पहले वाली मखौल भरी हंसी गायब थी। “सुनो! तुम्हें यह जॉब चाहिए या
नहीं? मैंने कहा बॉस ने सिर्फ तुम्हें बुलाया है! तो अंदर आओ, नहीं तो घर वापस जाओ!” उसका लहजा आदेशात्मक और बेरहम था।
राहुल ने तुरंत नीता का हाथ थामा। उसकी आँखों में चिंता थी, लेकिन समर्थन भी। “जाओ नीता,” उसने धीरे से कहा। “तुम अकेले ही सब कर सकती हो। मैं यहीं
हूँ।” नीता ने पहले राहुल की आँखों में देखा, फिर उस रुखी महिला की तरफ। उसके चेहरे पर एक जिद्दी भाव आया। उसने अपने कंधे सीधे किए, अपने बैग को
कसकर पकड़ा, और बिना एक शब्द कहे, उस शानदार केबिन के दरवाजे की तरफ कदम बढ़ाया। दरवाजा उसके सामने खुला हुआ था, अंदर का दृश्य दिखाई
नहीं दे रहा था। वह अंदर गई। दरवाजा धीरे से उसके पीछे बंद हो गया, राहुल को बाहर छोड़कर।
केबिन का अंदरूनी हिस्सा बाहर के शोर और चमक से एकदम अलग था। यहाँ शांति थी, और एक गहरी, दबी हुई ताकत का एहसास। विशाल मल्होत्रा अपनी
कुर्सी पर पीछे झुके हुए बैठा था, एक विशाल ग्लास टेबल के पीछे, जिस पर फैशन की किताबों और स्केच के ढेर लगे थे। नीता अंदर आई और दरवाजा उसके
पीछे बंद हो गया। बाहर लॉबी में वह महिला चली गई, और राहुल अकेला अच्छी खबर की प्रतीक्षा में बैठा रहा।
नीता उस प्रसिद्ध विशाल मल्होत्रा के सामने खड़ी थी। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, लेकिन उसने अपने चेहरे पर आत्मविश्वास का एक स्थिर, ठोस
मुखौटा चढ़ा लिया था। विशाल ने उसकी तरफ सीधे देखे बिना, पोर्टफोलियो खोला और स्केच निकालने शुरू किए। वह एक-एक करके उन्हें देख रहा था, उनका
विश्लेषण कर रहा था। उसका चेहरा गंभीर था, आँखों में एक तीखी समझदारी।
“प्लीज हेव अ सीट, मिस नीता,” उसने बिना सिर उठाए कहा, उसकी आवाज़ गहरी और नियंत्रित थी।
“थैंक यू, सर,” नीता ने जवाब दिया और थोड़े झिझकते हुए सामने रखी कुर्सी पर बैठ गई। कुर्सी नरम थी, लेकिन उसे बैठने में असहजता हो रही थी।
“हम्म… इंटरेस्टिंग। योर वर्क इज प्रिटी यूनिक,” विशाल ने कहा, एक पल के लिए नीता की तरफ देखा, और फिर तुरंत पोर्टफोलियो पर नजरें गड़ा दीं।
यह सुनकर नीता के मन में एक हल्की सी राहत की लहर दौड़ गई। खुशी का एक झोंका भी आया। शायद मौका मिल जाए।
“बट… यू नो मिस नीता,” विशाल ने स्केच पलटते हुए जारी रखा, उसकी आवाज़ में एक नया, चुनौतीपूर्ण स्वर आ गया। “मेरे पास ढेर सारे लोग आ रहे हैं जो मुझे
असिस्ट करने के काबिल हैं। वेल एक्सपीरियंस्ड लोग, जो मेरे लिए काम करने को तैयार हैं। मैं तुम्हें हायर क्यों करूँ? तुम्हारे पास क्या खास है? तुम फ्रेशर हो,
बिना किसी एक्सपीरियंस के वर्क प्रेशर को कैसे हैंडल करोगी?”
सवाल सीधा और कठोर था। नीता ने गहरी सांस ली। “वेल सर, जैसा आपने कहा, हमारा वर्क यूनिक है और मुझे यकीन है कि हम आपकी बाकियों से बेहतर
असिस्टेंस करेंगे। चूंकि हम नई जेनरेशन से हैं, हम तेजी से सीखते हैं और लेटेस्ट ट्रेंड्स जानते हैं। और अगर आप हमें एक मौका दें, तो हम दिखा सकते हैं कि
हम इस पोर्टफोलियो और स्केच से भी ज्यादा क्रिएटिव हैं, सर।”
“हमारा? यह ‘हमारा’ मतलब क्या है? क्या यह काम सिर्फ तुम्हारा अपना नहीं है?” विशाल ने सिर उठाकर उसे देखा, उसकी नजरें सीधी और जाँचती हुईं।
“नो सर, मेरा मतलब… मैं और मेरा बॉयफ्रेंड, जो लॉबी में बैठा है… हम साथ मिलकर काम करते हैं, साथ डिजाइन करते हैं। वह भी बहुत इंटेलिजेंट है, असल में ये
स्केच उसके हैं।” ,”तो अगर मैं हायर करना चाहूँ… तो मुझे तुम दोनों को हायर करना होगा? और एक काम के लिए तुम दोनों को पे करना होगा?” विशाल ने
पूछा, उसकी आवाज़ में थोड़ी निराशा घुली हुई थी।
“यस सर, लेकिन डोंट वरी… हम कुछ महीने मुफ्त में काम कर सकते हैं, सिर्फ आपके साथ एक्सपीरियंस के लिए।”
“हम्म…” विशाल ने पोर्टफोलियो बंद कर दिया और अचानक अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ। नीता भी उनके एक्शन को फॉलो करते हुए खड़ी हो गई। वह काले
रंग की ट्राउजर और गहरे बैंगनी रंग की शर्ट पहने हुए था, जो पैंट में ठीक से फिट की हुई थी और उसकी परफेक्ट फिट बॉडी को उभार रही थी। तभी नीता की
नजर उसकी पैंट के जिप वाले हिस्से पर गई। वहाँ एक स्पष्ट उभार था। उसका लंड, खड़ा होकर, कपड़े के अंदर से जिप के ऊपरी हिस्से को उठाए हुए था। नीता
की सांस एक पल के लिए अटक गई।
विशाल टेबल के किनारे की तरफ बढ़ा। “देखो नीता, तुम जानती हो… यह इंडस्ट्री ब्रूटल है। बहुत सारे लोग हैं जिन्होंने सिर्फ एक्सपीरियंस के लिए मेरे साथ काम
किया और फिर चले गए। लेकिन जब वे मेरे साथ का एक्सपीरियंस लेकर मार्केट में जाते हैं, तो उनके करियर में आसमान छूती तरक्की हो जाती है। तो… बताओ,
तुम्हारे पास ऐसा क्या खास ऑफर है जो तुम मुझे दे सकती हो, ताकि मैं तुम्हें मेरे साथ काम करने का मौका दूं?” उसने अपने पैंट के ऊपर, उस उभार पर, एक
बार हल्का सा हाथ फेरा। एक स्पष्ट, बिना शब्दों का इशारा।
नीता ने वह सब देखा और समझ गई कि वह क्या कह रहे हैं। उसका गला सूख गया।
“देखो, मैं तुम्हें फोर्स नहीं कर रहा। अगर तुम्हें यह जॉब नहीं चाहिए… तो तुम आजाद हो जाने के लिए। कोई रोक नहीं रहा है,” विशाल ने कहा, उसकी आँखों में
एक ठंडी, गणना की हुई चमक थी।
नीता एक सेकंड के लिए कुर्सी पर जमी रही, उसके चेहरे पर सब कुछ ठंडा पड़ गया। उसने स्थिति को समझ लिया। वह और राहुल पहले से ही जानते थे कि इस
इंडस्ट्री में ऐसी चीजों के बारे में क्या है। उन्होंने अपने रिश्ते में कई बार इस पर बात की थी। और उनका रिश्ता इस मामले में और परिपक्व, और खुला हो गया
था। कि किसी दिन उन्हें इस तरह की स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए वे दोनों पहले से ही तैयार थे… शारीरिक और मानसिक रूप से।
फिर अचानक, नीता खड़ी हुई। बिना एक शब्द बोले, उसने विशाल की आँखों में सीधा देखा। उसकी अपनी आँखों में अब घबराहट नहीं, बल्कि एक शांत, निर्णय
ले चुकी हुई दृढ़ता थी। वह विशाल के पास चली गई, उसके सामने, टेबल के बगल में। और फिर, उसने घुटनों के बल नीचे झुककर, विशाल के सामने अपने
घुटने टेक दिए। वह ऊपर देख रही थी, उसके चेहरे पर एक आत्मविश्वास भरी, रहस्यमय सी मुस्कान थी, जिसमें सब कुछ जान लेने का भाव था।
विशाल ने समझ लिया। उसके होंठों पर एक संतुष्ट, विजयी सा मुस्कुराहट खेल गई। उसने एक बार फिर नीता की आँखों में देखा, जैसे किसी समझौते की पुष्टि
कर रहा हों। और फिर, उसने अपने पैंट का जिप खोलना शुरू कर दिया।
विशाल ने अपनी पैंट का ज़िप पूरा खोल दिया और अपना लंड बाहर निकाल लिया। लगभग सात इंच लंबा, मोटा और पत्थर जैसा कड़ा। नीता ने अपना मुँह चौड़ा
कर लिया, जैसा कि उसे पता था कि अब यही होने वाला है। उसने अपने नाजुक, नरम हाथों से विशाल के लौड़े को पकड़ा और अपने मुँह में ले लिया, साथ ही
उसे हाथ से ऊपर-नीचे करने लगी। जैसे ही उसकी जीभ और होंठ उसके लंड को छूए, विशाल कराह उठा और संतुष्टि से अपनी आँखें बंद कर ली।
“आह्ह्ह्ह…स्स्स्स…”
फिर नीता ने धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। अपनी जीभ को उसके लंड के ऊपर घुमाती हुई, उसे अपनी लार से गीला करती हुई। वह आँखें बंद किए, एक नए
लंड के स्वाद का आनंद ले रही थी।
“आआआह्ह्ह्ह…स्स…स्स्स…तुम इसमें अच्छी हो!” विशाल ने कराहते हुए कहा और अपने कमर को पीछे-आगे हिलाने लगा, धीरे-धीरे उसके मुँह में अपना लंड
धकेलते हुए। नीता जल्द ही विशाल का लंड गहराई से अपने मुँह में, अपने गले तक ले जाने लगी। उसने चूसते हुए उसके गोटियों को छुआ और एक पेशेवर की
तरह उसकी गोटियों को रगड़ने और दबाने लगी।
“आआह्ह्ह…हाँ…हाँ…आआह्ह्ह…!!!” विशाल जोर से कराह उठा जैसे ही उसने ऐसा किया।
उसके ऑफिस के बाहर, लॉबी में, वह महिला और राहुल ने, विशाल की कराह सुन ली। महिला ने अचानक हिचकिचाते हुए राहुल की तरफ देखा। राहुल ने भी
वह आवाज सुन ली थी। दोनों ने नजरें बदली। लेकिन राहुल ने तुरंत कहीं और देखना शुरू कर दिया, जैसे वह ऑफिस से आ रही आवाजों को अनसुना कर रहा
हो। महिला ने यह नोटिस किया और मुस्कुरा दी। उसने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा, “तुम लोग तो बहुत प्रोफेशनल हो!”
राहुल ने उसे सुना और एक असहज सी मुस्कान दिखाई, और फिर से कहीं और देखने लगा, जैसे पूरी बात को नजरअंदाज कर रहा हो।
अंदर, मुँह मारने का सिलसिला जारी था। लेकिन कुछ मिनटों के बाद ही, एक जोरदार, ऊँची कराह राहुल और उस महिला ने सुनी।
“आआह्ह्ह्हहहह……” उन्होंने फिर एक दूसरे की तरफ देखा। दोनों समझ गए कि अभी क्या हुआ है।
ऑफिस के अंदर, विशाल नीता के गले में गहराई से वीर्य छोड़ रहा था, उसका सिर अपने लंड के खिलाफ दबाए हुए।
“आहहहहह……आह्ह्ह…स्स्स…आआह्ह…ले लो…आआह्ह…स्स…तुम इसमें बहुत अच्छी हो, कुतिया!” उसने कहा और धीरे-धीरे अपना लंड बाहर खींच लिया।
नीता ने उसके वीर्य की हर बूंद निगल ली। उसने अपने रुमाल से चेहरा साफ किया, अपने कपड़े संभाले, बाल ठीक किए, और तुरंत अपने पर्स से लिपस्टिक
निकालकर होंठों पर लगा ली। वह खड़ी हुई और चुपचाप कुर्सी पर बैठ गई।
विशाल ने अपना ढीला लंड पैंट के अंदर डाला और जिप लगाते हुए कहा, “वेल…मिस नीता…मुझे तुम्हारी मेहनत पसंद आई। मैं तुम्हारा और काम देखना चाहूँगा।
लेकिन……वह मैं तब देखूंगा जब तुम कल से यहाँ काम करना शुरू करोगी…” विशाल ने उसकी तारीफ करते हुए उसे नौकरी दे दी।
“थैंक यू सो मच सर! हम दोनों आपको निराश नहीं करेंगे, वादा करती हूँ!” नीता ने कृतज्ञता से जवाब दिया।
“ओह, मैं भूल ही गया…तुम्हारे बॉयफ्रेंड के बारे में। तुम दोनों एक टीम हो…राइट। ओके…मेरी तरफ से कोई प्रॉब्लम नहीं। लेकिन…आ…क्या वह समझेगा…यहाँ
चीजें कैसे चलती हैं?” विशाल ने नीता से पूछा।
“ओह…डोंट वरी सर। हम इस बारे में बहुत ओपन हैं। और समझने के लिए काफी परिपक्व भी,” नीता ने विशाल को आश्वासन दिया।
“वेल देन…तुम कल से जॉइन कर सकती हो, मिस नीता,” विशाल ने नीता को बधाई दी और हाथ मिलाया, और घंटी बजाकर लॉबी से उस महिला को बुलाया।
लॉबी से वह महिला, जिसका नाम रामिया था, अंदर आई। “रामिया…लॉबी से मिस नीता के पार्टनर को अंदर बुलाओ और इन दोनों के पेपर वर्क तैयार करो। ये
लोग कल से मुझे असिस्टेंस करेंगे।”
रामिया बाहर गई और राहुल को अंदर बुलाया। राहुल अंदर आया। जैसे ही वह ऑफिस में आया, उसने तुरंत हवा में वीर्य की गंध महसूस की। लेकिन उसने कुछ
नहीं कहा और न ही कुछ दिखाया, और कुर्सी पर बैठ गया।
“मिस्टर राहुल…मैं तुम्हारे काम से भी बहुत प्रभावित हूँ। तुम दोनों मुझे बहुत टैलेंटेड लगते हो…खासकर मिस नीता,” विशाल ने राहुल का स्वागत किया और नीता
की तरफ एक गंदी नजर डाली। राहुल समझ गया और बोला, “वेल, आपने अभी पूरी क्षमता नहीं देखी है, सर। मुझे यकीन है आपको पछतावा नहीं होगा।”
“आई सी…वेल देन, कल मिलते हैं,” विशाल ने दोनों से हाथ मिलाया। राहुल और नीता ऑफिस से निकल गए।
ऑफिस की चकाचौंध और भारी हवा से बाहर निकलते ही नीता ने गहरी सांस ली। शाम का हल्का सा ठंडा झोंका उनके चेहरे से चिपके तनाव को थोड़ा हटा रहा
था। राहुल उसके बगल में चल रहा था, कुछ देर तक चुप रहा, फिर एकदम से मुस्कुराते हुए बोला, “तो… स्वाद कैसा था?”
नीता ने उसकी तरफ घूरकर देखा, फिर हंसी को दबाते हुए उसके कंधे पर मुक्का मारने का नाटक किया। “क्यों न तुम मुझे चूमकर खुद ही टेस्ट कर लो!”
राहुल जोर से हँसा और उसके मुक्के से बचते हुए एक तरफ हट गया। “सॉरी सॉरी… देखो स्वीट हार्ट, यह होना ही था। मुझे पता था कि विशाल कितना ठरकी है।”
“हाँ, मुझे पता है। फिक्र मत करो। हमारे करियर के लिए मैं जो कर सकती हूँ, करूंगी,” नीता शांत होकर बोली।
“विशाल तो बस हमारी सीढ़ी का पहला कदम है, जानेमन। ऊपर जाने के लिए और भी कदम हैं,” राहुल ने नीता का हाथ थाम लिया। उसकी आवाज में साजिश
और महत्वाकांक्षा का मिश्रण था। “देखना, कल से वह तुम्हें चोदना शुरू कर देगा। उसे इतना इम्प्रेस करो कि हम उसकी असली आर्ट और स्टाइल के और करीब
से देख सकें।” नीता ने उसके हाथ का पकड़ और कस दिया। “मैं उसकी गुड बुक्स में रहने की पूरी कोशिश करूंगी। लेकिन मुझे वादा करो कि तुम खुद को
उससे या किसी और से कम या दुखी महसूस नहीं करोगे। सेक्स हमारे लिए बस एक हथियार है, याद रखो हमने एक दूसरे से क्या वादा किया था। उसे मत
भूलना।” नीता ने उनकी समझदारी की बात दोहराई।
“तुम उसकी फिक्र मत करो मेरी जान… दूसरों द्वारा तुम्हें चोदते देखकर मुझे बुरा नहीं लगेगा, उसकी अब आदत हो चुकी है” राहुल ने उसे अपने पास खींच लिया,
अपना हाथ उसके कंधे पर डाला और सहलाने लगा, जबकि वे दोनों घर की ओर चल पड़े।
यह उनकी स्ट्रैटेजी थी, इस इंडस्ट्री में करियर बनाने की। वे दोनों इस बात पर सहमत थे कि अपने करियर में तेजी से ऊपर चढ़ने के लिए शॉर्टकट के तौर पर यह
सब करेंगे। दोनों बेहद महत्वाकांक्षी थे, और अपनी मंजिल के लिए कुछ भी करने को तैयार थे। और जैसा कि उन्होंने कहा था, वे दोनों सेक्सुअलिटी को लेकर
सचमुच परिपक्व थे, और समझते थे कि इसका इस्तेमाल कैसे अपने समृद्ध भविष्य के निर्माण के लिए किया जा सकता है।
विशाल की असिस्टेंट की नौकरी पाने का यह तरीका, सेक्स के जरिए उसे लुभाना, असल में राहुल का ही आइडिया था। उसने अपनी गर्लफ्रेंड नीता को इस रास्ते
पर चलने के लिए तब समझाया था, जब एक दिन वे अपने कमरे में सेक्स कर रहे थे। पहले तो नीता असहज थी… लेकिन जल्द ही राहुल ने उसे इंडस्ट्री के अंदर
के हालात और उन बड़े नामों के बारे में विस्तार से बताया, जिन्होंने सेक्स के इस्तेमाल से सफलता हासिल की थी। नीता पहले तो मना करती रही पर बाद में मान
गई। दूसरे मर्द के साथ सेक्स करना उसके लिए आसान नहीं था। प्रैक्टिस के लिए, राहुल ने पहले अपने एक दोस्त को नीता से चुदवाया, ताकि नीता दूसरों के
साथ सेक्स में कंफर्टेबल हो सके। और फिर उन दोनों ने यही काम अपने कॉलेज में कई लड़कों के साथ दोहराया। नीता कॉलेज की रंडी बन गई और उसका
बॉयफ्रेंड उसका दलाल। इसी तरह उन्होंने एक दूसरे के साथ गहरा रिश्ता और भरोसा कायदा किया। यह तरीका अनैतिक जरूर था… लेकिन आज के आधुनिक
समाज में, खासकर फैशन, मॉडलिंग, एक्टिंग जैसी इंडस्ट्रियों में, यह एक आम बात बनती जा रही थी। कोई भी सामान्य जोड़ा या लड़की शायद ही ऐसा करने
को तैयार हो, लेकिन राहुल और नीता ने खुद को अलग तरह से ढाल लिया था। और सालों की पढ़ाई, मेहनत और अब सेक्स की इस योजना ने आखिरकार उन्हें
उनकी प्लानिंग का पहला इनाम दे दिया था।
To be continued…