माँ का रंडी बनने का सफ़र – पार्ट ५

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नमस्ते दोस्तों , पिचले भाग में हमने देखा, की कैसे प्रिया ने, अपने दोनों बेटों पर गुस्से की बजाय प्यार और गर्व महसूस हुआ , और उनसे कहा की वो कैसे और इस रोमांच से भरे दुनिया को उजागर करना चाहती है, अमित और आदित्य कहते है की अभी सिर्फ दोपहर हुई है, और वो दुसरे राउंड के लिए तैयार होते है अब आगे पढ़ते है, …अगर आपने वो पार्ट नहीं पढ़ा है तो इस माँ का रंडी बनने का सफ़र – पार्ट ४ लिंक पर क्लिक कर के पढ़े, तो चलिए आगे बढ़ते है,

प्रिया: (उनके बीच में बैठी, उसकी नज़र घड़ी से हटकर उनकी सुइयों पर गई, जो खुलेआम उनके पहले से ही कड़े लिंगों को सहला रही थीं) यह… बहुत लंबा समय है, तक़रीबन ३,४ घंटे है हमारे पास। उससे पहले तुम मुझे क्या नई चीज़ें सिखा सकते हो?” उसकी आवाज़ में एक माँ की कोमलता और एक विद्यार्थी की उत्सुकता का मिला-जुला रूप था।

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आदित्य: (मुस्कुराते हुए, अपने लिंग पर उसकी पकड़ मज़बूत होती जा रही है) “हम अभी इसी बारे में सोच रहे थे, माँ। “हमारे पास आज, हमारी प्यारी विद्यार्थी के लिए… पूरा पाठ्यक्रम तैयार है।लेकिन आपको थोड़ी अपनी सोच खुली रखनी होगी। यह चुदाई, पिछली चुदाई के पाठ की तुलना में, थोड़ी ज्यादा जटिल है।”

अमित: (हँसते हुए, उसकी आवाज़ धीमी गड़गड़ाहट जैसी थी) “हाँ, मम्मी। इसे आप अगले वर्ग में जाने की तरह समझो। क्या आप अपने अगले पाठ के लिए तैयार है?”

प्रिया:(उत्साह से सिर हिलाते हुए, उसकी आँखें भरोसे से बड़ी हो गईं)“बिल्कुल! मैं किसी भी चीज़ के लिए तैयार हूँ। मैं तुमसे सब कुछ सीखना चाहती हूँ। अब आगे बताओ क्या करना है?”

आदित्य:“ठीक है, पहले, हम आपको एक साथ चोदेंगे। एक ही समय पर। मैं आपका मुँह चोदुंगा, और अमित आपकी चूत लेगा। हम आपस में जगह भी बदलेंगे, और ये सुनिश्चित करेंगे कि आप हमें हर जगह महसूस करें।”

प्रिया: (हाँफते हुए, उसकी भौंहें कन्फ्यूजन में सिकुड़ गईं) “एक साथ? लेकिन… कैसे? मेरा मतलब है, मुझे अभी भी एक बार में, एक की आदत पड़ रही है। क्या ऐसी चुदाई… ज्यादा भीड़भाड़ वाली नहीं हो जाएगी? और..और दोनों तरफ से तुम होगे तो, मुझे साँस लेने के लिए वक़्त कब मिलेगा?”

अमित: (उसके बालों को सहलाते हुए बोला, एक ऐसा इशारा, जो आराम देने वाला और मालिकाना दोनों था) “मम्मी, तुम डिटेल्स की चिंता मत करो। हम तुम्हें सिखायेंगे ना। तुम्हें बस हम पर भरोसा करना है और रिलैक्स करना है। इसे डबल पेनेट्रेशन (दोहरा प्रवेश) कहते हैं। यह आजकल बहुत प्रचलित है। लोग अब इसे नियमित रूप से कर रहे हैं।”

प्रिया: (अपने होंठ काटते हुए, थोड़ी कशमकश में, करूँ या ना करूं?..) “अगर तुम कह रहे हो… तो… मुझे तुम पर भरोसा है बच्चों। बस मुझे ये,..सुनने में… बहुत ख़तरनाक लग रहा है।”

आदित्य: “अरे नहीं मम्मी..आप भी ना.. बोहोत डरपोक हो,,..निश्चित रहो बिलकुल!..कुछ नहीं होगा..आपके दोनों बेटे है ना आपके साथ!..”

प्रिया ने मुस्कुराते और साँस छोड़ते हुए, आदित्य की और देखा और सोचा, “मैं भी कितनी बेवकूफ हूँ..,दो दो जवान बेटे साथ होते हुए, किस बात का डर?”

“और यह तो बस शुरुवात होगी।” आदित्य बोला।“उसके बाद… हम दोनों अपने लंड तुम्हारी चूत के अंदर डालेंगे। एक साथ !..।”

प्रिया का चेहरा पीला पड़ गया!.. वह उठकर बैठ गई, उसने डर के मारे,बेडशीट सीने से लिपट ली। “क्या!? दोनों!? एक ही जगह पर, एक साथ!? आदित्य!, “तुम पागल हो क्या? तुम्हारा… तुम्हारा लंड पहले से ही इतना बड़ा है। ये अकेला ही मुझे फाड़ देगा ऐसा लग रहा है। और तुम कह रहे हो दो!..दो तो मुझे बिच से चीर देंगे! यह कैसे हो सकता है?”

अमित:(वह भी उठकर बैठ गया, उसकी आवाज़ शांत और मज़बूत थी, जैसे कोई डॉक्टर कोई ऑपरेशन की प्रोसीजर समझा रहा हो) “माँ, शांत हो जाओ। हमारी बात तो सुनलो पहले..। सोचिये ज़रा.. आपके शरीर ने क्या किया है। आपने हमें जन्म दिया है। आपकी उसी चूत से… हम दो पूरे इंसान बाहर निकले है। क्या आपको नहीं लगता, कि अगर डिलीवरी के वक़्त, चूत इतनी खिंच सकती है, तो यह हमारे दो लंड झेल नहीं सकती ? चूत इसी के लिए ही बनी है। इसमें खास, खिंचने वाली, लचीली मांसपेशिया होती हैं।”

आदित्य:“सही कहा छोटे.., माँ.., शुरुवात में यह ज़रूर टाइट लगेगा, शायद खिंचाव ज्यादा महसूस होगा, पर चूत फटेगी नहीं, हम ये सुनिश्चित करेंगे।”

अमित : “आप टेंशन मत लो माँ,..शुरुवात में हम बोहोत आराम से करेंगे। और फिर, जब आपको इसकी आदत हो जाएगी… मैं वादा करता हूँ, आपके लिए यह, अब तक का सबसे ज़बरदस्त एहसास होगा। दो लंडों से पूरी तरह भरे होने का एहसास। आजकल सभी औरतों की ये डिमांड है मम्मी। और ख़ासकर, हम तीनो माँ बेटों के लिए तो यह, बहुत ज़्यादा भरोसे और खुशी की निशानी होगी।”

प्रिया की सांसें धीमी हो गईं, उसकी आँखों का डर ओझल होने लगा। उसने आत्मविश्वास भरे चेहरे से अमित की तरफ देखा। लडको ने दिया हुआ, तर्क थोड़ा टेढ़ा था, लेकिन उनके मुंह से ये सब सुनना, प्रिया को बहुत सही लग रहा था। यह सोचना कि यह एक नॉर्मल, मॉडर्न काम है, उसे अजीब तरह से तसल्ली दे रहा था।

प्रिया: (फुसफुसाते हुए) “तो… यह सुरक्षित है..है ना? तुम दोनों वादा करो!.., कि इससे मुझे हमेशा के लिए, कोई नुकसान नहीं होगा..कोई इंजुरी वगैरा?”

अमित:“बिलकुल पक्का वादा करते हैं.., हम तुम्हें कभी चोट नहीं पहुँचाएँगे, मम्मी।” “हम बस… वापस एक साथ आपकी चूत के साथ जुड़ना चाहते है, ये हम तीनों का, एक पारिवारिक एहसास होगा, हम तीनों के जननांग, एक साथ जुड़े होंगे.” ,”प्रिया को अच्छा लगा ये सुनकर, की उनके बेटे परिवार की एकता के बारे में कितना सोचते है”

हालाँकि, इस पाठ का एक और हिस्सा है। एक तरह की फाइनल एग्जाम, कह सकती हो।”..आदित्य बोला,..

“और वो क्या है?”..प्रिया ने पुछा,

आदित्य:“जब हम चुदाई खत्म करने वाले होंगे, तो हम दोनों अपने लंड बाहर निकलेंगे और तुम्हारे मुँह में एक एक करके, हमारा माल डालेंगे, उसके बाद आप, हमारा सारा माल इकट्ठा करेंगी, पियेंगी नहीं..बस मुंह में इकट्ठा करेंगी।”

“तो इसमे नया क्या है?..उसका टेस्ट तो पता है मुझे..अभी अभी तो पिया है.., बोहोत आसान है ये तो!”

अमित:“नहीं मां..यंहा एक ट्विस्ट है, यह वह ज़रूरी हिस्सा है, जो अभी सच में ट्रेंड कर रहा है”…,

प्रिया:”क्या ट्विस्ट है?”

अमित :”तुम हमारे माल से गरारे करोगी। उसे अपने मुंह के हर कोने में, चारों ओर घुमाओगी। और फिर, एक ही शॉट में, तुम पूरा लोड निगल जाओगी।”

आदित्य: “और वो सब हम कैमरा पर रिकॉर्ड भी करेंगे!.”

प्रिया का जबड़ा खुला रह गया। “गरारे!?…छी.!.वो भी तुम्हारे वीर्य से!..यक्क!..कैसा लगेगा वो?..छी!..मुझे तो सुनके ही उलटी आ रही है,..और रिकॉर्डिंग क्यों?”प्रिया को ये सब बहुत गंदा, बहुत घटिया लग रहा था।

“अमित: अरे मेरी भोली मम्मी!..(प्रिया के गाल प्यार से उंगलियों से खींचते हुए)..कितनी..बार समझाएं!..ये सारी बातें ..आज कल की फैशन है!..,और रिकॉर्डिंग इसलिए, ताकि हमने सुना है की, कैमरा के सामने वो सब करने पर, महिलाओं को अजीब से उत्तेजना होती है, ये सब आपके लिए है!”

प्रिया को ये आखिरी गरारे वाली बात थोड़ी भद्दी ही लग रही थी, लेकिन जिस तरह अमित ने बड़े लाड़ से, उसके गाल पकड़कर कहा, जैसे यह एक लेटेस्ट फैशनेबल चीज़ हो, उससे उसके अंदर एक अजीब सा रोमांच दौड़ गया। वह पुराने ज़माने की औरतों जैसी नहीं रहना चाहती थी। वह एक कूल, एडवेंचरस माँ बनना चाहती थी, जिसके उसके बच्चे हकदार थे। उसके अन्दर का डर चला गया था, उसकी जगह एक जलती हुई, अजीब सी जिज्ञासा ने ले ली थी। आख़िरकार, प्रिया ने दोनों हाथ अपने कमर पर रखे, उसके चेहरे पर एक धीमी मुस्कान फैल गई,

“ठीक है!..ठीक है!… चलो करते हैं सब कुछ! पहले मुँह और चूत, और फिर क्या था और?.. हाँ!. चूत में दोनों, और फिर… और फिर वो गरारे वाली चीज़!” “क्या लगता है तुम्हे?,मैं पुराने ज़माने की हूँ?,..जो समझ नहीं सकती?.. बड़े आये मुझे महिला की उत्तेजना समझाने वाले!” “शैतान कंही के!..कहाँ से आते है ये नए नये पैतरे तुम्हे?, तुम आजकल के नौजवान… बोहोत तेज हो!” प्रिया ने लाड़ से हसते हुए, अमित को डांट लगाई, और अमित के सर पर हलके से मज़ाक में टपली मारी.. अमित भी, खिलखिलाकर,हँस पड़ा, और उसने भी पलटकर मस्ती में, प्रिया का एक निप्पल खिंच लिया, “ठीक है, ठीक है,,…अब बताओ कहाँ से शुरू करें?..” उसके हाथ बेड पर टिके हुए थे और वह अपने दोनों बेटों के बीच देख रही थी, उसकी आँखें उम्मीद से चमक रही थीं। “पहले क्या करें? क्या हमें… तकिए चाहिए? या मैं बस…” वह रुक गई, उसकी उत्सुकता उसे बेचैन कर रही थी।

आदित्य ने हाथ उठाकर उसे रुकने का इशारा किया, उसके चहरे का भाव अचानक गंभीर हो गया, कुछ देर पहले उसकी शरारती मुस्कान से बिल्कुल अलग। “रुको, माँ। शुरू करने से पहले, हमें तुम्हें कुछ और बताना है। इस… उर्जा के बारे में, कुछ बहुत ज़रूरी बात।” अमित ने सहमति में सिर हिलाया, उसकी अपनी मुस्कान धीरे-धीरे गहरे फोकस में बदल गई। “हाँ। हम जो करने वाले हैं, उसके लिए साधारण, नरमदिली का तरीका काम नहीं करेगा। असल में, वो इस पुरे पाठ को, बर्बाद कर देगा।”

प्रिया ने कन्फ्यूज होकर अपना सिर झुकाया। “बर्बाद कर देगा? लेकिन… अभी तो तुम कह रहे थे, की शुरुवात में तुम धीरे से प्यार से करोगे।” “बिलकुल हम वैसा करेंगे,” आदित्य ने धीमी और अधिकार भरी आवाज़ में साफ किया। “लेकिन यह पूरी बात नहीं है, आपको ये समझने की ज़रूरत है। जिस तरह के तेज़ चरमसुख की हम बात कर रहे हैं—जिससे आप चीख उठें और आपको तारे दिखें—वंहा तक पहुँचाने के लिए हमें… आक्रामक होना पड़ेगा, शायद हिंसक भी।” प्रिया की आँखें चौड़ी हो गईं। “हिंसक? तुम्हारा क्या मतलब है? जैसे… पहले?”

“बिल्कुल पहले जैसा,” अमित ने अपना सर हिलाया, और पास झुकते हुए। “माँ,..ज़रा सोच के देखो। इस खेल में हम मर्द हैं। असली मर्द। और एक औरत को अपनी स्त्री की उर्जा को सच में महसूस करने के लिए, पूरी तरह से समर्पण करने के लिए, और उस तरह के चरमसुख को महसूस करने के लिए, जो आपको हिला दे, उसे उस मर्दानगी की पूरी, प्राक्रितिक ताकत को महसूस करने की ज़रूरत है। उसे लेने की ज़रूरत है।”

प्रिया की साँस अटक गई। उसका दिमाग़ पिछले राउंड पर वापस चला गया, बस थोड़ी देर पहले। उसे याद आया जब आदित्य ने उसे थप्पड़ मारा था और उसके गाल पर चुभन हुई थी। उसे वह झटका और उसके बाद कामोत्तेजना की अजीब, गर्म धक् धक् याद थी। उसे वे गंदे नाम याद आए जो उन्होंने उसे दिए थे—‘रंडी,’ ‘छिनाल,’ ‘लंड की भूकी कुतिया’—ये ऐसे शब्द थे जिनसे उसके मन को चोट लगनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय उसने उसके खून में आग लगा दी थी। और फिर उसे अमित के थूक का अपने चेहरे पर गिरना याद आया, देखा जाये तो वो बेइज्ज़ती की चरमसीमा थी, पर उसे कैसा लगा था?… लाड़-प्यार। अपनापन। उस समय वह अपने प्रतिक्रिया से बहुत भ्रमित थी, लेकिन अब, जब उसके बेटे प्राध्यापकों के जैसे आत्मविश्वास से बात कर रहे थे, तो उसके दिमाग से समझ का एक कोहरा छंट गया। वो सिर्फ़ आकस्मिक हिंसा नहीं थी। वो एक तकनीक थी। उसका एक मकसद था। और मकसद था उसका अपना मज़ा!।

“तुम्हारा मतलब…” प्रिया ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ मुश्किल से फुसफुसाहट जैसी थी जब वह सारी बातें जोड़ रही थी, “जब तुम हिंसंक हो रहे थे… और मुझे वो गालियाँ दे रहे थे… उसकी वजह से मुझे इतना अच्छा लग रहा था? वो सब तुम जानबूझकर कर रहे थे.. अपने दिल से नहीं?”

“नहीं, माँ,” आदित्य ने कहा, उसकी आवाज़ नरम हो गई जैसे उसे अपनी माँ पर गर्व हो, कि उसने इतनी जल्दी अवधारणा को समझ लिया।

“हम जानबूझकर वैसे बने, ताकि आपके अन्दर के, उस स्त्रीत्व के हिस्से को उजागर किया जा सके। एक ऐसा हिस्सा, जिसकी आज़ादी महसूस करने के लिए, उस पर हिंसक मर्दानी काबू पाना ज़रूरी था। उस पल में हम सिर्फ़ आपके बेटे नहीं थे; हम आपके मर्द थे। और आप सिर्फ़ हमारी माँ नहीं थी; आप हमारी औरत थी। हमारी रंडी। और यही एक असली औरत और मर्द के, रिश्ते की खूबसूरत,ताकतवर, प्राक्रितिक चीज़ है।”

प्रिया के मन में गर्व की एक लहर छा गई, इतनी तेज़ कि उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसके बेटे। वे सिर्फ़ मज़बूत और खुबसूरत नहीं थे; वे समझदार थे। वे चाहत और मनोविज्ञान के गहरे, छिपे हुए जटिल तंत्र को समझते थे, ऐसी बातें जिनके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था। वे उसे सिखाने के लिए समय निकाल रहे थे, यह पक्का करने के लिए कि वह इस अविश्वसनीय सफ़र के हर कदम को समझे जिस पर वे साथ थे। उसे उनके प्रति गहरी कृतज्ञता और प्रेम का भाव आया।

उसने सिर हिलाया, अब उसके चेहरे पर शांति से मंज़ूरी थी। “मैं समझती हूँ। मैं समझती हूँ। तुम्हें मेरी इजाज़त है। जैसा तुम्हें होना चाहिए वैसा बनो। जैसा एक ‘असली मर्द’ होना चाहिए। मुझे तुम पर पूरा भरोसा है। मैं वो… उर्जा महसूस करना चाहती हूँ, जिसकी तुम बात कर रहे हो। मुझे तुम दोनों पर गर्व है, इतना कुछ जानने और… मुझे सिखाने के लिए।” आदित्य के चेहरे पर एक बड़ी, जीत वाली मुस्कान फैल गई, और उसने अमित के साथ एक ऐसा लुक शेयर किया जो गहरी, जीत की संतुष्टि से भरा था। “मेरी सबसे अच्छी,..सबसे प्यारी ..रंडी माँ!” आदित्य ने कहा, उसकी आवाज़ एक बार फिर उस शिकारी गुर्राहट में बदल गई जिससे उसका पेट ज़रूरत से सिकुड़ गया। “हमें बस यही सुनना था। अब… अपने घुटनों पर बैठो। यह आपके पहले असली पाठ का समय है।”

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