दोस्तों पिछले भाग में हमने देखा की कैसे निशा ने अपने मम्मी पापा की चुदाई छुपके से देखी और कैसे उसके मन में वासना का जूनून उभर आया , अगर आपने वो भाग नहीं पढ़ा है तो इस निशा की ख्वाहिश, आखिरकार पापा ने पूरी की..पार्ट १ लिंक पर क्लिक कर के पढ़े . अब आगे …
सुबह की हल्की धूप जब निशा की आँखों पर पड़ी, तो वो आँखें मसलते हुए एक अजीब सी खुशी के साथ उठी।
उसने अपने बदन पर चादर की सिकुड़ी हुई बनावट महसूस की।
जब वो बिस्तर से उठी, तो उसने देखा कि उसकी पैंटी उसके घुटनों तक सरक गई थी और वो चिपचिपी और गीली थी।
उसकी चादर भी उसके रस से गीली और चिपचिपी महसूस हो रही थी।
“शीट!” वो पहले तो हैरान हुई, पर अगले ही पल उसे कल रात का सब कुछ याद आ गया।
अपने मम्मी-पापा को चोदते देखने के बाद, न जाने वो कितनी बार अपनी चूत को सहलाते हुए,
उस विशाल लंड के बारे में सोचकर झड़ी थी, और कब वैसे ही थककर सो गई, उसे पता ही नहीं चला।
उसी वक्त, उसके दिमाग में उसके पापा का वो पसीने से चमकता, नंगा बदन और वो भयानक, मोटा लंड फिर से घूमने लगा।
कल की वो चुदाई का नज़ारा उसकी आँखों के सामने आते ही उसकी चूत फिर से गीली होने लगी।
उसकी योनि से एक नई लहलाहट शुरू हो गई।
“अरे नहीं, फिर से नहीं,” वो सिसकी और जल्दी से अपने विचारों को दूर धकेलने की कोशिश की।
तभी नीचे से उसकी माँ गीता की आवाज़ आई, “निशा! उठ गई बेटी? देर हो रही है!”
निशा भागते हुए कमरे से बाहर आई और बालकनी से नीचे देखा। उसकी माँ सज-धज कर खड़ी थीं।
“बेटा, मैं दो दिन के लिए अपने मायके जा रही हूँ। तुम्हारे नाना-नानी का हालचाल लेना है।
शनिवार-रविवार है, तो तुम और तुम्हारे पापा मिलकर खाना बना लेना। और हाँ, अपने पापा को तंग मत करना।”
“ठीक है माँ,” निशा ने कहा, उसके दिमाग में अलग ही सोचें चल रही थीं। “आप फिक्र मत कीजिए, मैं खाना बना लूँगी हमारे लिए।”
उसकी माँ के जाते ही, घर में एक अजीब सी खामोशी छा गई।
निशा तुरंत बाथरूम में गई और ठंडे पानी से नहाकर कल रात की गंदगी और अपनी गीली यादों को धोने की कोशिश की।
पर उसके शरीर पर जो आग लगी थी, वह तो बुझने का नाम ही नहीं ले रही थी।
नीचे किचन में खाना बनाते वक्त, उसके मन में एक शरारती ख्याल आया।
उसने जानबूझकर अपना सबसे एक्सपोज़िव आउटफिट निकाला – एक हल्का फुल्का, कॉटन का शॉर्ट कुर्ता, जो उसकी नाभि के ऊपर तक था,
और साथ में एक शॉर्ट पजामा, जो घुटनों के ऊपर तक ही था। ये कपड़े उसके पिता को बिल्कुल पसंद नहीं थे, पर आज वो उसी बात का फायदा उठाना चाहती थी।
जब वो खाना लेकर लिविंग रूम में गई, तो उसके पापा प्रसाद सोफे पर बैठे क्रिकेट मैच देख रहे थे।
निशा ने खाना टेबल पर रखा और फिर उनके पास जाकर बैठ गई।
“पापा, क्रिकेट छोड़ो ना, फैमिली ड्रामा लगाओ,” उसने ज़िद करते हुए कहा।
“नहीं बेटा, मैच अच्छा चल रहा है,” प्रसाद ने इनकार किया।
निशा ने मस्ती करते हुए रिमोट छीनने की कोशिश की। दोनों बाप-बेटी में रिमोट के लिए खींचतानी होने लगी।
इस दौरान निशा का मुलायम बदन बार-बार उसके पिता के कठोर शरीर से टकरा रहा था। हर टक्कर के साथ उसके अंदर वही वासना फिर से जाग उठी।
अचानक, निशा ने एक शरारत की। वो जानबूझकर प्रसाद की गोद में जाकर बैठ गई।
उसका छोटा कुर्ता ऊपर उठ गया और उसकी नंगी कमर और नाभि उसके पिता की पजामी पर सीधी लग गई।
“बेटा, अब तुम्हारी उम्र नहीं है मेरी गोद में बैठने की,” प्रसाद ने सकते में आवाज़ में कहा, पर उनका शरीर एकदम अकड़ गया था।
“बैठने दो ना पापा,” निशा ने नादानी से कहा, “कितने दिन हो गए आपकी गोद में बैठे हुए। मुझे अच्छा लगता है।”
प्रसाद कुछ नहीं बोले। निशा ने रिमोट लिया और एक फैमिली ड्रामा लगा दिया।
प्रसाद मजबूरी में उसे देखने लगे। उनके हाथ बेचारे निशा के नंगे पैरों पर, घुटनों के ऊपर रखे हुए थे।
तभी टीवी पर ड्रामे में एक इंटीमेट सीन शुरू हो गया। लीड कपल एक-दूसरे को गले लगा रहा था और करीब आ रहा था। प्रसाद असहज महसूस करने लगे।
“बेटा, थोड़ी देर के लिए मैच लगा दो ना। मुझे बस स्कोर देखना है। वैसे भी यहाँ क्या भद्दा रोमांस चल रहा है,” उन्होंने झुंझलाते हुए कहा।
“ओफ्फो पापा,” निशा ने उन्हें डांटते हुए कहा, “आप भी ना पुराने ज़माने की सोच रखते हो। बिना वजह इतना शर्माते हो। चला जाएगा ये सीन, अभी दो मिनट में।”
और वो दोनों वह सीन देखने लगे। स्क्रीन पर इंटीमेसी बढ़ती जा रही थी।
नायक नायिका के गले को चूम रहा था, और उसका हाथ धीरे-धीरे उसकी पीठ पर नीचे की ओर बढ़ रहा था।
टीवी पर चल रहे उस दृश्य के साथ-साथ, सोफे पर भी एक अलग ही कहानी लिखी जा रही थी।
प्रसाद का शरीर अकड़ गया था। उनकी गोद में बैठी अपनी बेटी का मुलायम, गर्म बदन, और ऊपर से चल रहा वो इंटीमेट सीन, उन पर असर करना शुरू कर दिया था।
उनके पजामे के अंदर, वो नाग जो कल रात गीता की चूत को फाड़ रहा था, धीरे-धीरे फिर से जाग रहा था।
उनका 9 इंच का लंड, सोच-समझकर बने रहने की कोशिश के बावजूद, धीरे-धीरे फूलने लगा।
वह एक लोहे की रॉड की तरह कड़क होता जा रहा था, और निशा की नरम गांड के नीचे से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा था।
निशा ने उसे महसूस किया। पहले तो वो एक पल के लिए रुक गई, पर फिर उसके दिल में एक कामुक खुशी की लहर दौड़ गई।
यही वो था, जिसके बारे में वो सोचती थी। उसने जानबूझकर अपनी गांड को थोड़ा और दबा दिया, जिससे उसके पिता का लंड उसकी गांड की दरार में और गहराई तक घुस गया।
प्रसाद के मुँह से एक दबी हुई सिसकारी निकल गई। उनके हाथ, जो निशा के घुटनों पर थे, अब अपने आप धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसकने लगे।
वे उसकी चिकनी जाँघों को छूते हुए आगे बढ़े। टीवी पर, नायक का हाथ अब नायिका की कमर पर था और वो उसे करीब खींच रहा था।
जैसे ही ऑन-स्क्रीन कपल एक-दूसरे के और करीब आया, प्रसाद के हाथ भी अपनी मंजिल पर पहुँच गए। उनकी मोटी, पसीने से गीली उंगलियाँ निशा की नंगी कमर को छू गईं।
निशा के शरीर में बिजली का झटका सा लगा। प्रसाद ने उसकी कमर को दोनों तरफ से कसकर पकड़ लिया।
अब वह खेल और भी गहरा हो गया था। प्रसाद अब सिर्फ़ एक दर्शक नहीं थे। वो अपनी बेटी की कमर पकड़कर उसे अपने खड़े लंड पर ज़ोर-ज़ोर से घिसने लगे।
निशा भी समझ गई थी कि अब मामला बढ़ चुका है। वो भी अपनी कमर धीरे-धीरे हिलाने लगी, उनकी हरकतों का साथ देते हुए। उनकी साँसें अब तेज़ और गर्म हो चुकी थीं।
उन दोनों की निगाहें टीवी पर टिकी हुई थीं, मानो वो वहाँ चल रहे दृश्य को देख रहे हों, पर असलियत में तो वो अपने ही बनाए उस अंधेरे, वर्जित कमरे में खोए हुए थे।
उनके दिमाग में टीवी के किरदार नहीं, बल्कि खुद वो थे। प्रसाद, अपनी बेटी की गांड को मसल रहे थे, और निशा, अपने पिता के लंड का आनंद ले रही थी।
निशा की कमर हिलाने की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी। उसकी चूत उसकी पैंटी में इतनी गीली हो चुकी थी कि उसका पानी अब पजामे के कपड़े को भी भिगोने लगा था।
प्रसाद भी अपनी हद्द से बाहर जा रहे थे। वो उसे अपनी तरफ खींचते हुए उसकी गांड को अपने लंड से इस कदर रगड़ रहे थे, जैसे वो अभी उसी में झड़ जाएँगे।
न ही निशा ने कुछ कहा, न ही प्रसाद ने। शब्दों की कोई ज़रूरत नहीं थी। उनकी तेज़ साँसों और शरीरों के रगड़ने की आवाज़ ही सब कुछ कह रही थी।
वो दोनों एक खतरनाक चरम पर पहुँच रहे थे, एक ऐसी ऊँचाई पर जहाँ से वापस उतरना मुश्किल था।
तभी अचानक, टीवी पर सीन बदल गया। इंटीमेट सीन खत्म होकर एक हास्यास्पद डिटर्जेंट विज्ञापन आ गया – “दाग अच्छे हैं…”
जैसे कोई बिजली कट गई हो। जादुई वातावरण एकदम टूट गया।
दोनों अचानक से होश में आए। निशा को एहसास हुआ कि वो क्या कर रही थी और वो किसकी गोद में बैठी थी।
शर्म और डर की एक लहर उस पर हावी हो गई। वो तुरंत चौंककर उठी और बहाना बनाते हुए बोली, “अरे! मुझे लगता है मैंने गैस पर कुछ रखकर भूल गई!”
यह कहकर वो वहाँ से भागती हुई किचन की तरफ चली गई।
प्रसाद भी समझ गए कि क्या हो रहा था। उनके चेहरे पर अपराधबोध और घबराहट छा गई।
उनका लंड अभी भी तना हुआ था और उन्हें तुरंत अपने कमरे में जाकर शांत करने की ज़रूरत थी।
वो भी जल्दी से उठे और बोले, “हाँ… मुझे भी बाथरूम जाना है।”
यह कहकर वो अपने बेडरूम की तरफ तेज़ी से चल दिए। लिविंग रूम में सिर्फ़ टीवी का शोर और दोनों की तेज़ धड़कनों की आवाज़ बाकी रह गई थी।
निशा किचन से सीधा अपने बेडरूम में भागी। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और उसकी चूत में एक अजीब सी जलन हो रही थी, एक ऐसी आग जो केवल उसके पापा ही बुझा सकते थे।
उसने अपने बिस्तर के पास रखी अलमारी में हाथ डाला और वो रबड़ी वाइब्रेटर निकाल ली, जिसे उसकी सहेलियों ने उपहार में दिया था। उसकी उंगलियाँ कांप रही थीं।
वो एक पल भी नहीं रुकी। उसने जल्दी से अपना शॉर्ट कुर्ता और पजामा उतार फेंका और बिस्तर पर नंगी होकर लेट गई।
उसने अपने पैरों को चौड़ा किया और अपनी चिकनी, गीली चूत पर सीधा वाइब्रेटर लगा दिया। उसके मुँह से एक कामुक सिसकारी निकली, “आह्ह्ह…”
वाइब्रेटर की कंपन से उसका पूरा शरीर कांपने लगा। उसने आँखें बंद कर लीं और अपने पापा के बारे में सोचने लगी।
उसका मन उस वक्त को याद कर रहा था जब वो उनकी गोद में बैठी थी और उनका कड़क लंड उसकी गांड में चुभ रहा था।
“हाँ पापा चोदो… चोदो मुझे…” वो ज़ोर-ज़ोर से बोलने लगी, उसकी आवाज़ वासना से भरी हुई थी।
उसने वाइब्रेटर को अपनी चूत की फांकों पर और ज़ोर से दबा दिया। “मेरी कुंवारी चूत को फाड़ो… प्लीज़ पापा… आ..आआ.आआ..!!”
उसके हाथों में वाइब्रेटर की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी, उसकी कमर उछल रही थी। वो अपने पापा द्वारा चोदे जाने के कल्पनालोक में खो चुकी थी।
उधर, प्रसाद भी अपने बेडरूम में भागकर सीधे बाथरूम में घुसे। उन्होंने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया और अपने पजामे की नाड़ी खींचकर अपना तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया।
उनका लंड असाधारण रूप से कड़क हो रहा था, ऐसी कठोरता जो शायद ही उन्हें अपने युवावस्था के पहले सेक्स के दिनों के बाद महसूस हुई हो।
उसे देखकर लग रहा था जैसे अगर इसमें से वीर्य नहीं निकला, तो यह फट ही जाएगा।
“हाय राम…” उन्होंने सिसकते हुए कहा।
उन्होंने अपनी पत्नी गीता के बारे में सोचकर ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया। उन्हें लगा कि शायद अपनी पत्नी के बारे में सोचकर वो इस हालत से निकल सकेंगे।
पर आज कुछ अलग था। गीता का ख्याल उन्हें वो पुराना आनंद नहीं दे रहा था। वो फिर से आँखें बंद करके गीता को याद करके मुठ मारने लगे, पर इस बार अचानक उनके दिमाग में कुछ और घूमने लगा।
निशा की नंगी कमर और उसकी गोल-मटोल गांड का वह नज़ारा उनकी आँखों के सामने आ गया।
उस वक्त की बात याद आई, जब निशा उनकी गोद में बैठी थी और वो अपनी गांड को उनके लंड पर रगड़ रही थी।
उसकी मादक महक, उसकी गर्म साँसें… सब कुछ उन्हें मदहोश कर रहा था।
उनका लंड और भी ज़्यादा तन गया। अब वो गीता के बारे में नहीं, बल्कि अपनी ही बेटी के बारे में सोचकर मुठ मार रहे थे।
“निशा… मेरी बेटी…” उनके मुँह से धीरे से निकला। वो ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगे, उनकी हथेली अपने लंड पर तेज़ी से ऊपर-नीचे चल रही थी। उनकी साँसें गर्म और तेज़ हो गई थीं।
और फिर एक बड़ी चीख़ के साथ, वो झड़ गए। “आआआ..हह,हा,हाहा,,आआ….” कहते हुए उन्होंने अपने माल की पिचकारी ज़ोर से उड़ाई।
उनका वीर्य बाथरूम की दीवार पर और फर्श पर बिखर गया। वो थके-हारे सिरा दीवार से टिका दिए और साँसें लेने लगे।
उधर, निशा का भी कुछ इसी तरह का हाल था। उसकी आँखें आँसुओं से चमक रही थीं।
वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी, “चोदो न..!!! चोदो चोदो चोदो…. पापा आआआ…” कहते हुए उसकी आँखें गोल घूमकर सफ़ेद हो चुकी थीं।
वो अपने पापा के उस लंड के बारे में सोच रही थी, जो अभी थोड़ी देर पहले उसकी गांड में चुभ रहा था, और साथ ही कल रात का वो लाइव शो भी उसे याद आ रहा था।
वो अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। चीखते-चिल्लाते हुए वो भी ज़ोर से झड़ गई। उसकी चूत से पानी का एक फव्वारा छूटा, जिसने उसकी चादर को और भी गीला कर दिया।
वो बेसुध होकर बिस्तर पर ही गिर पड़ी, उसके हाथ में अभी भी वाइब्रेटर कंपन कर रहा था।
प्रसाद बाथरूम की दीवार से टिके हुए थे, उनकी साँसें फूली हुई थीं। उनका वीर्य फर्श और दीवार पर लथपथ था, एक गंदा, पाप का सबूत।
उन्होंने अपना सिर दीवार पर टिका लिया और आँखें बंद कर लीं। अभी तक जो सुख मिला था, वो अब एक ज़हरीली शर्म में बदल चुका था।
मैं ये क्या सोच रहा था? वो मेरी बेटी है… मेरी निशा!
उनके अंदर घृणा की लहर उठी, खुद के लिए। वो एक पिता थे, एक अनुशासित इंसान, और अभी उन्होंने अपनी ही बेटी के बारे में सोचकर अपना माल निकाला था। उनके हाथ कांप रहे थे।
पर फिर, उस घृणा के बीच में से, एक याद उभरी। लिविंग रूम में निशा का वो चेहरा… वो शरारती मुस्कान।
और फिर उसकी कमर को उन्होंने पकड़ा था… और वो… वो खुद अपनी गांड उनके लंड पर रगड़ रही थी। वो उछल रही थी।
पर वो तो… वो भी तो आनंद ले रही थी!
इस एक विचार ने उनकी शर्म को थोड़ा कम कर दिया। वो अकेले पापी नहीं थे। उन्हें उसकी नर्म कमर, उसके छोटे-से कूल्हे, जो अभी तक किसी के स्पर्श से अछूते थे, याद आए।
उसकी त्वचा कितनी मुलायम थी, कितनी कोमल… उनके दिमाग में उसके मांस की कल्पना ने एक नई आग लगा दी।
और फिर से, उनका लंड जो अभी-अभी शांत हुआ था, एक बार फिर से कड़क होने लगा।
“हे भगवान!” उन्होंने क्रोध से कहा। वो इस स्थिति से परेशान और नाराज़ हो गए। “यह सब उन आधुनिक कपड़ों का किया-धरा है! इन फिल्मों का! ये सब मुझे इस हालत में धकेल रहे है!”
उनका गुस्सा उन पर हावी हो गया और वो फिर से अपना लंड हिलाने लगे, इस बार ज़्यादा ज़ोर से, जैसे वो अपनी ही कामुकता को सज़ा दे रहे हों।
एक तरफ वो निशा के बदन के बारे में सोच रहे थे, उसकी गांड के बारे में, और दूसरी तरफ उनका मन कह रहा था कि उसे सज़ा मिलनी चाहिए।
हाँ, सज़ा मिलनी चाहिए! इसे अपने पिता के साथ ऐसा बर्ताव करने के लिए! मैं इसकी गांड पर अपना हाथ उठाऊँगा… इसे चांटे मारूँगा!
जैसे ही उन्होंने अपनी बेटी की गांड पर चांटा मारने की कल्पना की, उनका शरीर एक बार फिर से कांप उठा और वो एक दूसरी बार, इससे भी ज़ोरदार ढंग से झड़ गए।
उधर, निशा अपने बिस्तर पर थकान से चित पड़ी थी। उसका पूरा शरीर पसीने से तर था, बाल चेहरे से चिपके हुए थे, और चादर उसके रस से एक गीले धब्बे में तब्दील हो चुकी थी।
कई बार झड़ने के बाद वो पूरी तरह से थक चुकी थी, पर उसका दिमाग अभी भी भाग रहा था।
मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए… वो मेरे पापा हैं।
उसे अपने विचारों पर घृणा होने लगी। वो जानती थी कि यह गलत है, पाप है। उसने अपने पिता की बातों को याद किया, उनकी सोच को।
यह सब उन्हीं आधुनिक फिल्मों और कपड़ों का नतीजा है। यही सब इस वासना को जन्म देता है।
उसने खुद को दोष देने की कोशिश की। “अगर मैं उस समय चैनल नहीं बदलती… अगर मैं उस ड्रामे को नहीं लगाती…”
पर जैसे ही उसने ‘अगर’ के बारे में सोचा, उसके दिमाग में वो लम्हा फिर से ताज़ा हो गया।
अगर वो चैनल बदल देती, तो शायद उसके पापा का लंड खड़ा नहीं होता… और उनका वो मोटा, कड़क लंड उसकी गांड में नहीं चुभता…
उसके बदन में फिर से एक करंट दौड़ गया। उसकी चूत, जो अभी-अभी थकी हुई थी, फिर से गीली होने लगी।
उसके पिता के उस लंड की कड़कपन की याद ने उसे फिर से उत्तेजित कर दिया।
वो थक कर भी उठी और अपनी उंगली को फिर से अपनी चूत के दाने की ओर बढ़ाया। अब कोई गुनाह या शर्म नहीं थी, सिर्फ़ एक ललक थी।
उसने अपने पिता के लंड के बारे में, उसकी कठोरता के बारे में सोचते हुए अपनी वर्जिन चूत को मसलना शुरू कर दिया।
और कुछ ही पलों में, वो एक और बार, पहले से भी ज़्यादा ज़ोर से झड़ गई।