माँ का रंडी बनने का सफ़र – पार्ट ३

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हेलो दोस्तों , पिछले भाग में हमने देखा की , कैसे अमित ने और आदित्य ने बारी-बारी से अपने माँ के मुह को चोदा, और कैसे उनकी माँ ने जाना की चरमसुख क्या होता है ,..अब उनकी माँ उनपर गुस्से की बजाय, उनका साथ दे रही थी. और अगर आप ने पार्ट २ नहीं पढ़ा है तो इस लिंक पर क्लिक करे…माँ का रंडी बनने का सफर – पार्ट २

“चलो अब मेरी बारी” कहते हुए अमित अपना लंड प्रिया के मुंह में ठुसने लगा,.. तभी प्रिया ने रुकने को कहा, और बोली ” मै खुद से पूरा अंदर लेने की कोशिश करती हूं,”
उसने सोचा जोर जबरदस्ती से अच्छा है कि वो ही,कोशिश कर के देख ले, वैसेभी कोशिश नाकाम होने पर लड़के कहां रुकने वाले थे।

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उसने दोनों हाथों से अमित का लंड पकड़ा और चूसने लगी और थोड़ा रुक रुक कर ज्यादा से ज्यादा लंड अंदर लेने की कोशिश करने लगी,..
कमरे में चाटने चूसने की और “ग़क..ग़क…ग़क…ग़क…” की आवाज़ आने लगी.. 
तभी अमित बड़बड़ाया…वो आंख बंद करके स्वर्ग की परिक्रमा कर रहा था।..
“क्या चूसती है, साली रंडी!”

“रंडी!”

प्रिया ने वो शब्द सुना.. पर इस बार गुस्से की बजाय उसके बदन में एक बिजली सी दौड़ गई।
उस एक शब्द ने, न जाने कैसे?.. पर, उसके अंदर की वासना को भड़का दिया, उसका एक हाथ अपने आप ही चूत की तरफ चला गया और उसे मसलने लगा।

उसे महसूस हुआ कि जिस मर्दानगी की उसे जरूरत थी, वो जबरदस्ती जो एक मर्द एक औरत को चोदते वक्त करता है,
वो धौंस..वो गालियां..वो ताकत.. जिसके लिए वो बरसों से तरस रही थी, वो उसके बेटों में थी।
उसे वो शब्द अच्छा लगा था!..वो सोच में पड़ गयी की उसे ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए था!!
ये गलत था!.पूरी तरह से गलत!..वो उनकी माँ थी!..और उसीके बच्चे उसे गंदी गालियाँ दे रहे थे!..लेकिन इसके विपरीत, उसका खुदका हाथ निचे तेज़ी से उसकी चूत को मसल रहा था!..

वास्तविकता ये थी, की उसे इस सब में मज़ा आने लगा था, उसकी जिस्म की प्यास उसके नैतिक मूल्यों पर हावी हो चुकी थी, एक ऐसी प्यास जो अपने बेटे के लंड के स्वाद की वजह से बढती ही जा रही थी, उसने सोचा, यही तो चाहिए था उसे!..एक ज़बरदस्त चुदाई!..जो संजय दे नहीं सकता था, और आज उसके बेटे उसकी आपूर्ति कर रहे थे,
उसकी चूत गीली हो कर फर्श पर पानी छोड़ रही थी!..

ये अहसास उसे पहले कभी नहीं हुआ था, चरमसुख का सम्पूर्ण अहसास!..
अपनी पूरी ज़िन्दगी में ये अहसास उसके बेटों की वजह से उसे हुआ था,..उसने सोचा, “शब्दों में वाकई ताकत होती है”
एक गाली की वजह से उसके साथ ये हुआ था, उसे अब हल्का लगा रह था,..उसकी चूत पानी छोड़ चुकी थी.
और ये सब,..सिर्फ और सिर्फ उसकी बेटों की वजह से हो रहा था,..उसका बेटों पर का गुस्सा जा चूका था,…
और उसकी जगह, एक शुक्रगुजारी वाले भाव ने ले ली..

उसे अपने बेटों पर गर्व महसूस हुआ, की उसके बेटे सच्चे मर्द है,..अपने पापा से बिल्कुल विपरित। हट्टे-कट्टे और मजबूत..किसीभी औरत को संतुष्ट करने की ताकत रखने वाले. वो उसके बेटे थे..! अपने बच्चों के ऊपर उसे प्यार उमड़ आया, एक माँ का प्यार!

उसने अपने मुंह से अमित का लंड निकाला और ममता भरी प्यार की नजर से अपने बेटे के चेहरे को देखा,मानों वो उसे शुक्रिया कह रही हो,..पर वो जानती थी , उसके चरमसुख के अनुभूति के अहसान की कीमत, शब्दों से नहीं हो सकती थी..
उसने लार से भरे चिपचिपे लंड को प्यार से सहलाते हुए, उसके टोपे पर एक पप्पी दी, ऐसी पप्पी जो एक माँ अपने लाडले को देती है,

और वापस आंख बंद कर के, पूरे मन से लंड को चूसने लगी। इस बार वो समर्पित मन से अपने बेटे की सेवा कर थी।
वो अपने बच्चे को खुश करना चाहती थी,अपने सुख का क़र्ज़ उतरना चाहती थी, उसने सोचा कि ये भी तो एक तरह की ममता ही है। एक माँ का प्यार,और एक माँ अपने बच्चों से प्यार नहीं करेगी तो कौन करेगा?..उल्टा ये तो उसका फ़र्ज़ था, माँ का फ़र्ज़..!

और उसके बेटों ने माँगा ही क्या था?..शारीरिक सुख?..उसके लिए तो वो खुद भी तरस रही थी,..और भूके बच्चे, अपने माँ से नहीं मांगेगे तो किससे मांगेगे? क्या गलत किया उन्होंने?..बेचारे!..उल्टा उन्होंने उसे कितना कुछ दे दिया इन चंद पलों में ,जिसके लिए वो सालों से तड़प रही थी,..”नहीं!..नहीं!..मेरे बच्चे भी भूके है”, “और अब मेरी बारी है उन्हें खुश करने की!”..

ये सब सोचते हुए वो अब जोर जोर से अमित का लंड चूसने लगी।
इस बार वो खुद ही खुद का सर अमित के लंड पर दबाने लगी, और कोशिश करने लगी कि उसका लंड भी आदित्य की तरह उसके गले में उतरे।..

अपनी मम्मी में आया हुआ ये परिवर्तन देख, लड़के भी खुश हो गए,.. 
“देख साली छिनाल!, अब कैसे मज़े लेके चूस रही है, पहले थोड़ा नाटक कर रही थी!”
आदित्य अपने लंड को मसलते हुए बोला और अमित को एक हाथ से ताली दे कर दोनों हंसने लगे।..

प्रिया ने सब सुना, पर वो अपने कर्तव्य में लगी रही। एक नयी गाली ने उसके अन्दर गर्मी पैदा करदी.
“मां रुको,  तुमसे लंड पूरा गले में नहीं जा पाएगा, मुझे ही जोर से चोदना पड़ेगा” अपने माँ की नाकाम कोशिश को देखते हुए अमित बोला,

प्रिया ने तुरंत, अपने बेटे की बात मानी और लंड मुंह से बाहर निकाला, एक “पॉप” की आवाज के साथ बुलबुले बनाती हुई, ढेर सारी लार निकल रही थी, जो अब उसके मुंह से टपककर छाती पर , उसके स्तनों पर गिर रही थी, उसके बाल बिखरे हुए हो गए थे, मांग का सिंदूर अस्तव्यस्त था, आँखे लाल फूली हुइ, लिपस्टिक पूरी तरीके से गालों के आपस फैली हुई,
और गालों पर सूखे हुए आंसुआ की काजल के साथ की मिश्रित धारा थी, और ताजे थूंक, और लार की वजह से उसका मुह सना हुआ था, अब वो वाकई में रंडी की तरह दिख रही थी.

“ठीक है बेटा, पर बीच बीच में लंड को बाहर पूरा निकाल लेना, मुझे सांस लेने देना” प्रिया ने विनती की।
“ok mom”
कह के अमित ने फिर से लंड मुंह में डाल दिया।
प्रिया को लगा की अमित नर्मी बरतेगा और धीरे धीरे लंड को गले में उतारेगा, पर ..

अमित ने प्रिया के सर के बाल खींच कर, पीछे से पकड़े और जोर का झटका दिया और पूरा लंड एक ही झटके में प्रिया के गले में उतर दिया। अमित उसका मुहं पूरी तरीके से दबाने के लिए, कमर से थोडा आगे की और झुका , और हातों से पूरी जोर से दबाने लगा , प्रिया का पूरा चेहरा , अमित की जांघ में छिप गया, उसका जबड़ा पूरी तरह से खुला हुआ था, जीभ पूरी बाहर थी, और वो अमित की गोटियों के उपर घूम रही थी..

अगले 2 सेकंड के लिए, अपनी मां का सर अमित ने अपने लंड पर दबाए रखा।
और झट से निकाला ,.. पर इस बार प्रिया को सच में तकलीफ महसूस नहीं हुई,
और ये बात अपने आप में एक सबूत थी कि, वाकई उसके गले का सील टुटा नहीं था, उसे आदित्य ने थोड़ी देर पहले तोड़ा था।

उसे लगा ये लड़के इसी तरह से लंड को घुसाएंगे और निकालेंगे, पर अमित ने नोटिस किया कि मां अब पूरी तरह, तैयार है मुंह की चुदाई के लिए,
तो उसने फिर से उसका सर पकड़ा और जोर से लंड को अंदर डाला और जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया।

उसका हर धक्का प्रिया के गले में, लंड को पूरी तरह घुसा रहा था। बाहर से प्रिया के गले में वो बदलाव दिख सकता था।
जब भी लंड गले में जाता उसका गला फूल जाता, और लंड बाहर निकलने पर फिर से सामान्य हो जाता,.. और ये बहुत तेज़ी से चल रहा था।

कमरे में अब “ग़क..ग़क..ग़क..ग़क..ग़क..ग़क..” की आवाज और खांसने के आवाज बड़े शोर के साथ आ रही थी। प्रिया के आंखों से आसूं निकल रहे थे, पर ये आंसू अब खुशी के थे,

“और जोर से चोद कुतिया को!”

आदि चीखा!..अमित कैसे अपने बड़े भाई का आदेश ठुकराता,..
उसने और तेज़ी बढ़ाई.. नजारा कुछ ऐसा था कि , अगर कोई बाजु से देखे तो, अमित का लंड किसी engine के piston की तरह अपनी मां के गले के अंदर बाहर हो रहा था।

उसके लिए चूत और उसके मां के मुंह में कोई अंतर नहीं था। 
कुछ मिनट बाद वो रुका, तो प्रिया भी जोर से खांसते हुए, सांस लेते हुए, अपने गले को छूते हुए, और लार को और आंसुओं को पोंछती हुए.. सांस लेने लगी।

उसे इस तरह के मुंह के चुदाई की उम्मीद नहीं थी। पर उसे याद आए अपने बच्चों के कहे हुए शब्द “पहली बार तो तकलीफ होती ही है”.. 
तभी, आदित्य अपने लंड को मसलते हुए बहुत देर से अपनी बारी का इंतजार कर रहा था, बोला.. 

“अब मेरी बारी”
तभी प्रिया ने पीछे हटते हुए हांफते हुए बोला,
“थोड़ा रुको बेटा”

तभी एक जोरदार थप्पड़ प्रिया के गाल पर पड़ा, और उसके बाल खींच कर आदित्य ने उसका चेहरा अपनी और ऊपर किया,.. ख़राशते हुए अपनी मां के चेहरे पर थूकते हुए गुर्राया..
“चुप!, भोसड़ी की!,.. तेरी मर्जी नहीं चलेगी!”

और उसने प्रिया की नाक पकड़ी और दबाए रखी, ..दूसरे ही पल अपने आप प्रिया ने सांस लेने के लिए अपना मुंह खोला, तो तुरंत मौके का फायदा उठाते हुए, आदित्य ने झटके से अपना लंड ठूंस दिया।..
और लगभग अमित की तेज़ी से ही प्रिया का मुंह चोदने लगा.. अमित बिस्तर पर लेटे लेटे ,लंड को मसलते हुए, हंस रहा था।


तभी एक और चांटे की और थूकने की आवाज कमरे में गूंजी और फिर से .. मुंह चोदने “ग़क..ग़क..ग़क..ग़क..ग़क..ग़क..” की आवाज़े कमरे में किसी गाने की तरह लगातार एक लय में चलने लगी।..
प्रिया को समझ ही नहीं आ रहा था, की अभी अभी उसने वो चांटा क्यों खाया , और उसके मुंह पर थूका गया उसका क्या मतलब है,..

लेकिन, उसे महसूस हो रहा था जैसे कि वो एक गुलाम है,.. और उसके मालिक, उसपर अपने हिसाब से ज्यागती कर रहे है,.. उसे खुद पर हैरानी हो रही थी, क्योंकि उसे ये बर्ताव अच्छा लग रहा था..
उसके बेटों का उसपे चिल्लाना , उसे पीटना, उस पर थूकना,.. सब उसे उसके बच्चों का मर्दानगी भरा प्यार लग रहा था।..
और इसका सबूत उसकी चूत बार बार दे रही थी, वो फिर से चिपचिपी हो चुकी थी! और उसका हाथ निचे कब पहुंचा उसे खुद पता नहीं चला!।.. 

अगले १० मिनट तक आदि उसी तेज़ी से और उसी वहशी तरीके से माँ के मुंह को चोद रहा था।
जब वो रुका, तब प्रिया फिर सांस लेने लगी.. पर उस थकान में भी वो अपने चूत को सहलाने से खुद को रोक नहीं पा रही थी।..

दरअसल, उसे खुद नहीं पता था, की उसे ये वहशीपन, ये दरिंदगी की , ये जबरदस्ती इतनी अच्छी लगती होगी।
वो खुद को आज explore कर रही थी,.. और वो भी अपने बच्चों की वजह से,. मन ही मन वो उनका धन्यवाद भी कर रही थी,.. उसने इस प्रकार की उत्तेजना कभी महसूस नहीं की थी।..

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