शाही राजपुताना परिवार का वासना का खेल – ४

Advertisement

पिछले भाग में हमने देखा, कैसे सुमेर का लौड़ा उसके खुदके माँ ने अपने हाथो से साफ किया और उसे चुदाई की खुली आजादी देते हुए समझाया की , अपने पत्नी को उसे हर वक़्त क्यों चोदना है?…अगर आपने वो भाग नहीं पढ़ा तो यंहा शाही राजपुताना परिवार का वासना का खेल – ३ क्लिक कर के ज़रूर पढ़े , अब आगे …

सुमेर ने कमरे का दरवाज़ा धक्का मारकर खोला और अंदर कदम रखा। उसका लौड़ा अभी भी उसकी मुट्ठी में कसा हुआ था, जैसे कोई सांप फन फैलाए बैठा हो।

Advertisement

वो उसे ऊपर-नीचे कर रहा था, मुट्ठी में फंसी उस नर्म झिल्ली के ऊपर अपना अंगूठा रगड़ते हुए। उसकी सांसें तेज़ थीं, छाती जैसे भट्टा चला रही हो। उसके कानों में ठाकुराइन की वो आवाज़ गूँज रही थी—”वारिस चाहिए… उसे रगड़ दो… रांड है साली।”

लेकिन जैसे ही उसकी नज़र बिस्तर पर पड़ी, उसके पैर जैसे ज़मीन में गड़ गए।

बिस्तर पर गौरी एक टूटी हुई कठपुतली की तरह बैठी थी। वो पूरी नंगी थी, अपने घुटनों को सीने से चिपकाए हुए, और अपना चेहरा उनमें छुपाए बिलख रही थी।

उसके कंधे रोने के मारे ऐसे उछल रहे थे जैसे उसमें जान न हो। सुमेर की निगाहें उसकी खुली जांघों के बीच गईं और जो कुछ उसने देखा, उससे उसका दिमाग सुन्न हो गया।

वहाँ जो कुछ भी था, वो एक खूनी गड्ढा जैसा लग रहा था। गौरी की चूत बुरी तरह से फटी हुई थी, उसके नाजुक होंठ सूजे हुए थे और बाहर की तरफ निकल आए थे।

सफेद रेशमी चादर अब लाल खून से लथपथ थी—गौरी का कौमार्य और सुमेर का वह गाढ़ा वीर्य, दोनों मिलकर एक भयावह चित्र बना रहे थे। खून का गढ़ा धब्बा चादर पर फैला हुआ था।

सुमेर का लौड़ा अभी भी उसके हाथ में खड़ा था, लेकिन उसके अंदर का जोश अचानक ठंडा पड़ गया। शराब का नशा उतर चुका था। उसके सामने अपने ही किए का नतीजा था।

“क्या कर दिया मैंने…” सुमेर ने अंदर ही अंदर सोचा, उसके मन में एक भयानक बुखार सा उठा। “इतनी बेरहमी… इतना खून… माँ ने कहा था वारिस चाहिए, लेकिन क्या इसका मतलब यह था कि मैं अपनी बीवी को एक बकरी की तरह काट दूँ?”

उसके दिमाग में एक जंग लगी सोच थी—औरत केवल बच्चे पैदा करने की मशीन है। लेकिन गौरी के उस टूटे हुए शरीर को देखकर वो सोच टूट गई। वो एक इंसान थी, उसकी बीवी थी, कोई रांड नहीं जिसे सड़क पर उठाकर चोदा जाए।

“वो रांड… नहीं है,” सुमेर ने खुद को रोका। “वो मेरी गौरी है। मेरी बीवी। मैंने उसकी चूत फाड़ दी… , मैंने उसकी जान निकाल दी।”

उसके चेहरे पर एक पश्चाताप की भावना आई। उसे अहसास हुआ कि अगर वो अभी भी अपनी माँ की बातों में आ गया और उसे फिर से तोड़ा, तो शायद वो कभी ठीक न हो पाएगी। और एक टूटी हुई औरत से वारिस कैसे पैदा होगा?

“माँ कहती है चोदो, ठीक है… चोदूंगा,” सुमेर ने दृढ़ संकल्प किया, लेकिन उसकी आँखों में एक नई करुणा थी।

“लेकिन अब मैं इसे जबरदस्ती नहीं चोदूंगा। मैं इसे ऐसा चोदूंगा कि यह खुद मुझसे चुदने को तरसे। मैं इसे अपनी रानी बनाऊंगा, न कि कोई नौकरानी। यह मेरी है… सिर्फ मेरी।”

सुमेर ने अपने लौड़े को मसलना बंद कर दिया, हालांकि वो अभी भी खड़ा था, एक लोहे की छड़ की तरह। वो धीरे-धीरे बिस्तर के पास पहुँचा। उसकी आहट से गौरी काँप उठी। उसने अपना चेहरा उठाया नहीं, बस और कसकर अपने घुटनों से चिपक गई।

सुमेर ने अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और गौरी के बालों में फंसाकर उसके सिर को सहलाने लगा। उसका स्पर्श अब उस जानवर जैसा नहीं था।

“गौरी…” सुमेर की आवाज़ भारी थी, लेकिन उसमें कठोरता नहीं, बल्कि एक अजीब सी नरमी थी।

गौरी ने सिसकते हुए अपना चेहरा उठाया। उसकी आँखें सूजी हुई थीं, भरी हुई थीं डर और आँसुओं से। जब उसने सुमेर को देखा—वो नंगा खड़ा था, उसका लौड़ा अभी भी तना हुआ था—तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

वो डर के मारे पीछे हटने लगी, लेकिन पीछे जाने की जगह नहीं थी। वो जैसे एक भयानक सपने में फंसी हुई थी।

“श्श्श…” सुमेर ने झुककर उसे शांत करने की कोशिश की। “डरो मत, मेरी जान।”

गौरी उसे अविश्वास से देख रही थी। उसके चेहरे पर परेशानी लिखी हुई थी। वो सोच रही थी कि शायद वो फिर से उस पर हमला करेगा।

“मैं जानता हूँ मैंने क्या किया,” सुमेर ने उसके गाल पर अपना अंगूठा फेरते हुए कहा, उसकी आँखों में देखते हुए। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी—एक पश्चाताप की चमक।

“मुझे माफ़ कर दो, गौरी। वो शराब थी… वो मेरे सिर पर चढ़ गई थी। मैंने सोचा नहीं था। मैं… मैं तुम्हें दर्द नहीं देना चाहता था।”

गौरी के दिल का एक पत्थर टूट गया। उसे लगा कि शायद अभी भी उसके जीवन में एक आशा की किरण है। वो उसके चेहरे के भावों को पढ़ने की कोशिश कर रही थी। वो देख रही थी कि उसका पति अब वो जानवर नहीं था जो पहले था।

“माफ़ कर दोगी?” सुमेर ने पूछा, उसका स्वर लगभग टूटा हुआ था।

गौरी ने हिचकिचाते हुए अपना सिर हिलाया। उसकी आँखों से आँसू धार बहकर गिरे, पर इस बार वो राहत के थे। वो बिस्तर पर बैठे ही आगे बढ़ी और सुमेर को गले लगा लिया।

सुमेर खड़ा था, और गौरी बैठी हुई थी, इसलिए उसका चेहरा सीधे सुमेर की कड़की हुई जांघों और उसके उस खड़े लौड़े के पास आ गया। उसके नर्म, गर्म स्तन सुमेर की जांघों से दबकर रह गए।

सुमेर ने मुस्कुराया—एक ऐसी मुस्कान जो गौरी को दिखाई नहीं दी। उसने महसूस किया कि गौरी का शरीर उसके आगोश में काँप रहा था।

उसने अपना वह हाथ जिससे वो अभी-अभी अपना लौड़ा मसल रहा था, गौरी के ठोड़ी के नीचे लगाया और उसका चेहरा अपनी तरफ खींचा।

उसकी उंगलियों पर अभी भी उसके लौड़े की कच्ची, मर्दानी महक और थोड़ा सा वीर्य लगा हुआ था, जो अभी अभी उसके लौड़े के टोपे के ऊपर मसलने की वजह से आया था। वो अपनी अंगुलियाँ गौरी के नम होंठों पर फेरने लगा।

गौरी ने सांस रोक ली। वो उस मजबूत, नमकीन, और खरे लौहे जैसी मर्दाना गंध को महसूस कर रही थी। उसके शरीर में जो दर्द और भय था, वो एक अजीब सी गर्मी में बदलने लगा। वो उस मादक खुशबू के नशे में खो जाना चाहती थी।

उसकी चूत, जो अभी तक सिर्फ दर्द से चीख रही थी, अब एक अलग तरह की खुजली महसूस करने लगी।

“मैं तुमसे प्यार करता हूँ, समझी?” सुमेर ने उसकी आँखों में झांकते हुए कहा, अपनी उंगली उसके नीचे के होंठ पर दबाते हुए। उसकी आवाज़ में एक ज़िद्दी अहंकार था। “तुम मेरी हो, सिर्फ मेरी। मेरी रानी… और मेरी रांड।”

गौरी की आँखों से आँसू बह निकले, पर इस बार वो खुशी के थे। वो इस कब्ज़े में आना चाहती थी। “मैं… मैं भी आपसे प्यार करती हूँ, साहब,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ काँप रही थी।

सुमेर झुका और उसके होंठों को अपने होंठों से मिला दिया। पहले वो चुंबन बहुत ही नरम था, जैसे किसी फूल को सहेजना। गौरी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसका साथ देने लगी।

लेकिन फिर अचानक सुमेर के अंदर का वो जानवर जाग गया। उसने अपना दबाव बढ़ा दिया। उसके होंठ गौरी के होंठों को चीरने लगे। वो उसकी जीभ को अपने मुँह में खींच लिया और ज़ोर से चूसने लगा। यह अब प्यार नहीं, बल्कि एक जुनूनी भूख थी।

सुमेर की सांसें तेज़ हो गईं, वो भभक रहा था। उसकी नाक फूली हुई थी। वो उसे ऐसे चूस रहा था जैसे उसके प्राण निकालने हों। गौरी का सांस टूटने लगी, वो हांफने लगी। उसका शरीर सुमेर के दबाव से झुक गया, लेकिन सुमेर ने उसे अपनी बाहों में ऐसे जकड़ा जैसे वो उसे खा जाएगा।

गौरी का हाथ अपने आप सुमेर के नीचे की तरफ बढ़ गया। उसकी उंगलियों ने उसके उस गर्म, कड़के हुए लौड़े को छुआ। वो बहुत गर्म था, जैसे गला हुआ लोहा।

उसने उसे अपनी मुट्ठी में भर लिया और ऊपर-नीचे करने लगी। उसने खुली आँखों से देखा कि कैसे सुमेर का लौड़ा उसके हाथ में फन फैला रहा है। वो उसे मसलने लगी, अपनी मुट्ठी को कसकर, उसकी नसों को दबाते हुए।

सुमेर का शरीर एक सिहरन से काँप उठा। उसके मुँह से एक कराह निकली—”आह्ह्ह… !”

उसका लौड़ा ऐसे फड़कने लगा जैसे अभी फट जाएगा। वो बहुत कठिनाई से खुद को रोक पा रहा था। उसके दिमाग में एक जंगली सोच अभी भी चल रही थी—साली को अभी चोद दूँ, इसकी चूत फाड़ दूँ—लेकिन उसने खुद को रोका। उसे अपनी योजना पर कायम रहना था।

“रुको… रुको!” सुमेर ने अचानक उसका हाथ पकड़कर रोक दिया। उसकी आवाज़ में कठोरता थी, लेकिन उसकी सांसें बेकाबू थीं। “बहुत हो गया… अभी नहीं।”

गौरी हैरान रह गई। वो उसे देखने लगी, उसकी आँखें इशारे में पूछ रही थीं—क्यों रुके?

सुमेर ने गहरी सांस ली और अपना आपा संभाला। “हम दोनों साफ़ हो जाते हैं,” उसने कहा, उसके गीले बालों को पीछे करते हुए। “यह खून… यह गंदगी… यह सब धो देते हैं। फिर… फिर शुरू करेंगे। नए सिरे से।”

उसने गौरी का हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर से उठाया। गौरी के पैर कांप रहे थे, लेकिन सुमेर ने उसे अपना सहारा दिया। वो उसे बाथरूम की तरफ ले गया।

बाथरूम के दरवाज़े तक पहुँचते-पहुँचते सुमेर का दिमाग फिर से भागने लगा। वो सोच रहा था कि कैसे वो अपनी माँ की उस रांड को अपनी रानी बना देगा। कैसे वो उसे इतना पागल कर देगा कि वो खुद अपनी चूत उसके लौड़े पर रगड़ेगी।

लेकिन अभी के लिए, उसे अपना क्रूर रूप छुपाना था। उसने बाथरूम का दरवाज़ा खोला और दोनों अंदर चले गए।

दोनों बाथरूम के अंदर घुसे। सुमेर ने शावर का नॉब घुमाया और ठंडा पानी उन पर बरसा दिया। पानी की तीखी धार गौरी के शरीर से टकराते ही वहाँ जमी खून और पसीने का मिश्रण बहने लगा।

गुलाबी रंग का पानी उनके पैरों से होता हुआ नाली में जा गिरा। ठंडक ने गौरी की जलती चूत को जैसे जादुई पानी पिला दिया। दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा, और उसकी जगह एक अजीब सी सुन्नता और खुजली ने ले ली।

सुमेर ने गौरी को अपनी बांहों में भर लिया। पानी उनके बीच बह रहा था। वो उसके बालों को पीछे करके उसके गीले गालों को चूमने लगा। उसके चुंबन गर्म थे, प्यार से भरपूर।

गौरी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसके स्पर्श में खो गई। सुमेर का हाथ उसकी पीठ से नीचे की तरफ बढ़ा, उसकी कमर को थोड़ा सा दबाया, और फिर धीरे-धीरे उसकी जांघों के बीच घुस गया।

वो अभी तक उसकी चूत को छु नहीं रहा था। उसने अपना हाथ उसकी चूत के ऊपर रखा और बिना कोई दबाव डाले, बस हल्के-हल्के उसे सहलाने लगा। उसकी पूरी हथेली उसकी फूली हुई चूत पर थी। गौरी ने एक सिसकी भरी। सुमेर ने उसकी आँखों में देखा।

“अभी भी दर्द हो रहा है, मेरी जान?” सुमेर ने धीरे से पूछा, अपने हाथ को धीरे गोलाई में घुमाते हुए। उसकी आँखों में चिंता थी, लेकिन उसकी पलकें कामुकता से झपक रही थीं।

गौरी ने अपना सिर हिलाया। “नहीं…” उसकी आवाज़ फूटी हुई थी। “अब नहीं… अब अच्छा लग रहा है।”

सुमेर मुस्कुराया। उसने रफ़्तार बढ़ाई। वो अब उसकी चूत को रगड़ने लगा, अपनी बिच की उंगली से उसकी दरार के ऊपर ऊपर-नीचे खींचते हुए।

गौरी की सांसें तेज़ होने लगीं। वो पानी के नीचे एक वासना की-भूखी जानवर की तरह तड़प रही थी। उसने अपने पैरों को थोड़ा और खोल दिया, सुमेर को जगह देने के लिए।

सुमेर ने कई मिनटों तक बस उसे सहलाया। वो उसकी चूत के होंठों को मसलता, उन्हें अपनी उंगलियों के बीच दबाता। गौरी की चूत धीरे-धीरे गीली होने लगी।

उसकी चूत से निकलने वाला रस अब पानी के साथ मिलकर बहने लगा। सुमेर का हाथ पूरी तरह से उसकी खुशबू में सना हुआ था।

“तुम बहुत सुंदर हो,” सुमेर ने उसके कान में फुसफुसाया, उसे चूमते हुए। “मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ, गौरी।”

यह सुनकर गौरी का दिल पिघल गया। उसने अपना सिर पीछे किया और सुमेर की गर्दन पर अपना चेहरा दबा दिया। लेकिन सुमेर के अंदर का पशु जाग रहा था। वो उसे चाहता था, उसे पूरी तरह से अपना बनाना चाहता था। प्यार ठीक है, लेकिन कब्ज़ा अलग बात है।

धीरे-धीरे सुमेर का स्पर्श बदलने लगा। वो अब सिर्फ सहला नहीं रहा था, वो दबा रहा था। उसने अपनी एक उंगली उसकी चूत की दरार में डाली और ऊपर की तरफ खींची। गौरी ने एक ज़ोरदार सांस ली। उसके पैर कांपने लगे।

“अभी भी नहीं?” सुमेर ने पूछा, उसकी आवाज़ में अब एक कर्कशता आ गई थी।

“ना… साहब… और करो…” गौरी ने फुसफुसाया।

सुमेर का जबड़ा कस गया। उसकी आँखों में क्रोध और कामुकता का भाव आ गया। वो अब नरम नहीं रहना चाहता था। वो उसे अपनी रांड की तरह चोदना चाहता था।

“तो फिर ये लो!” सुमेर गरजा और अपनी दो उंगलियाँ एक साथ इकट्ठी करके एक झटके के साथ गौरी की चूत में घुसेड़ दीं।

“अईईई… माँ!” गौरी चीख पड़ी और पीछे की तरफ धक्का खाकर दीवार से चिपक गई। दर्द और आनंद का एक भयानक मिश्रण उसके शरीर में फैल गया।

“अब कैसा लग रहा है?” सुमेर ने कसकर पूछा, उसकी उंगलियाँ उसकी चूत की दीवारों को फाड़ रही थीं। “बता मुझे, रांड! अब क्या महसूस हो रहा है?”

गौरी की सांसें फूल रही थीं। वो बोल नहीं पा रही थी। उसने अपना सिर हिलाया, लेकिन यह नहीं पता था कि वो हाँ में हिला रही है या ना में। उसके चेहरे पर दर्द और परमानंद दोनों लिखे थे।

सुमेर को गुस्सा आ गया। वो चाहता था कि वो उसकी आज्ञा माने। उसने अपनी उंगलियों को बाहर निकाला और फिर पूरी ताकत से अंदर धकेल दिया।

वो उन्हें तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। फच!… फच!… फच! उसकी कलाई इतनी तेज़ी से हिल रही थी कि वो एक धुनी हुई चाबी की तरह दिख रही थी।

“बोल, साली!” सुमेर गरज उठा। पानी उसके बालों से होता हुआ उसके चेहरे पर गिर रहा था। “तू मेरी है या नहीं? बोल!”

गौरी का शरीर कांपने लगा। उसने सुमेर के कंधों को दोनों हाथों से ज़बरदस्ती पकड़ लिया। उसके नाखून उसकी त्वचा में घुस गए। उसकी आँखें पीछे की तरफ घूम रही थीं, और उसका मुँह खुला हुआ था। वो बेहोश होने की कगार पर थी, लेकिन वो मज़े में भी डूबी हुई थी।

“हाँ… हाँ साहब!” गौरी चीखने लगी। “मैं तुम्हारी हूँ… बस तुम्हारी! और ज़ोर से!”

सुमेर ने अपने हाथों को और तेज़ कर दिया। उसकी उंगलियाँ उसकी चूत में एक पिस्टन की तरह घूम रही थीं। वो उसे रगड़ रहा था, उसे चीर रहा था, उसे अपना बना रहा था। चूत की फंसी हुई रगड़न की आवाज़ पूरे बाथरूम में गूँज रही थी—फच… फच… फच!

“तू मेरी प्यारी रांड है,” सुमेर ने उसके कान में कहा, अपनी उंगलियाँ उसके अंदर घुमाते हुए।

“हाँ… समझ गई… मैं आपकी रांड हूँ,” गौरी पागलों की तरह बोल रही थी। उसका पेट अंदर से सिकुड़ रहा था। उसे लग रहा था जैसे एक तूफान आने वाला है।

सुमेर ने अपना अंगूठा उसकी चूत के होठों पर रखा और ज़ोर से दबा दिया। इससे गौरी कांप उठी। उसके पैर थर्राने लगे। उसकी सांसें छूट रही थीं।

“अभी आ रहा है… साहब… आ रहा है..हाय..मर गयीईई.ई..ई!!!!…” गौरी चिल्लाई।

सुमेर ने अपना जबड़ा और कस लिया। उसकी नसें फूल गई थीं। वो उसे झड़ाना चाहता था, लेकिन अपनी शर्तों पर। उसने अपना अंगूठा उसकी चूत पर एक बार फिर से कसकर दबाया और फिर घुमाना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियाँ उसकी चूत में एक पिस्टन की तरह घूम रही थीं।

“हाँ, झड़ जा,” सुमेर ने कहा, उसकी आवाज़ में एक विकृत आनंद था। “अपने पति के लिए झड़… मेरे लिए!”

और फिर अचानक, गौरी का शरीर एक झटके से अकड़ गया। उसकी चूत की मांसपेशियों ने सुमेर की उंगलियों को जकड़ लिया, जैसे वो उन्हें अंदर ही रोकना चाहती हो।

“आआआआआह्ह्ह्ह… माँ… मार गई!” गौरी ने ज़ोर से चीखा।

उसकी चूत से एक फव्वारे की तरह पानी निकल पड़ा। वो झड़ गई। उसका पूरा शरीर कांप उठा। उसके पैरों की नसें दिखने लगीं। वो सुमेर के शरीर पर लटक गई।

उसके बाल भीगे हुए थे और उसका चेहरा आनंद और थकान से लाल था। वो नीचे देखकर शर्मा गई, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि भी थी।

सुमेर ने अपनी उंगलियों को धीरे से उसकी चूत से बाहर निकाला। वो पूरी तरह से उसके रस में लथपथ थीं, चिपचिपी और चमकदार। सुमेर ने उन उंगलियों को गौरी के मुँह के पास ले गया। उसके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान थी।

“इसे चाट,” उसने आदेश दिया। “यह तेरा ही स्वाद है, मेरी रानी।”

गौरी ने बिना एक शब्द कहे उसकी उंगलियों को अपने मुँह में ले लिया। वो एक भूखे जानवर की तरह उन्हें चाटने लगी, अपनी जीभ से हर एक कोने को साफ़ करते हुए। वो सुमेर की आँखों में देख रही थी, उसमें एक अंधी श्रद्धा और कामुकता थी। वो अपना ही स्वाद चख रही थी और उसे अपना बना रही थी।

“शाबाश,” सुमेर ने उसके गाल पर थपथपाते हुए कहा, अपनी उंगलियों को उसके मुँह से बाहर निकालते हुए। फिर सुमेर ने उसका हाथ पकड़ लिया। गौरी अभी भी कांप रही थी। उसने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके गीले नंगे शरीर को अपने से चिपका लिया। फिर वो उसे बाथरूम से बाहर ले जाने लगा।

Advertisement

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top