पिछले भाग में हमें देखा की कैसे सुमेर ने फैसला किया की वो गौरी को अपने तरीके से चोदेगा नाकि उसके माँ के इशारे पर ,.. अगर आपने वो भाग नहीं पढ़ा है तो यंहा शाही राजपुताना परिवार का वासना का खेल – ४ क्लिक कर के पढ़ सकते है , अब आगे…
बाथरूम के ठंडे, भरे हुए माहौल से निकलकर दोनों बेडरूम में आ गए। गौरी का शरीर अभी भी गीला था, उसके बालों से पानी टपक रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी।
वो चमक उसकी हालिया उमंग और उस तीव्र झड़ने के बाद की संतुष्टि की वजह से थी। उसके चेहरे पर वो भूख थी जो अभी-अभी शांत हुई थी, लेकिन उसकी आँखों में एक नई उत्सुकता जागी थी।
वो अपने होंठों पर लगे चिपचिपे रस को चाट रही थी। उसके दिमाग में अचानक पुराने, घिनौने और फटे हुए दिनों की याद आ गई।
उसने अपने मुँह में मौजूद नमकीन, थोड़ा खट्टे से स्वाद का अनुभव किया—यह सुमेर की और उसकी अपनी मिली हुई खुशबू थी।
उसने इसकी तुलना उस स्वाद से की जब उसके बापू ने पहली बार उसकी गांड मारी थी और फिर उसी गंदे लंड को साफ़ करने के लिए उसके मुँह में ठूँस दिया था।
वो स्वाद कड़वा, मिट्टी और खून जैसा था, जिसने उसकी आत्मा को तोड़ दिया था। लेकिन यह… यह अलग था। यह गर्म था, जीवंत था, और इसमें एक अजीब सी मिठास थी।
उसे अपना ही स्वाद अच्छा लग रहा था, खासकर तब जब यह सुमेर की प्यार भरी बेरहमी से मिलकर बना था।
गौरी की नज़र सुमेर के नीचे की तरफ गई। वो बिल्कुल नंगा था, और उसका लौड़ा अभी भी एक लोहे की रॉड की तरह खड़ा था।
उसकी नसें फूली हुई थीं, उसका सुपारा गुलाबी और भारी था, जैसे बस फूटने को तैयार था। वो चल रहा था और उसका लौड़ा ऊपर-नीचे हिल रहा था।
देखकर लग रहा था जैसे वो उसे लेकर किसी जंगल की ओर जा रहा हो, जहाँ वो उसे फिर से खा जाएगा। लेकिन इस बार गौरी को डर नहीं लग रहा था। उसे उसके उस भारी हथियार को अपने अंदर लेने की इच्छा हो रही थी।
जैसे ही वो बिस्तर के पास पहुँचे, सुमेर रुक गया। उसने बिस्तर पर फैली उस सफेद चादर को देखा जो अब लाल खून और सूखे हुए वीर्य के धब्बों से दागदार थी।
वह एक जंगली जानवर के हमले का प्रमाण था। सुमेर ने गौरी को बिस्तर के किनारे पर रोका और उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में वह पुराना पागलपन नहीं था, बल्कि एक ठंडा और सोचा-समझा समाधान था।
“इसे बदल दो,” सुमेर ने शांत लेकिन स्पष्ट आवाज़ में कहा। “यह दृश्य अब हमारे लिए नहीं है। नया रास्ता, नई शुरुआत।”
गौरी ने सिर हिलाया। वो अलमारी की तरफ गई और एक नई सफेद चादर निकाली। जब वो बिस्तर पर चादर बिछा रही थी, तो उसका नंगा शरीर झुक रहा था।
उसकी गोल गांड और उसकी सूजी हुई चूत सुमेर की नज़रों के सामने थीं। सुमेर वहाँ एक कुर्सी पर बैठ गया, जो सीधे बिस्तर का सामना करती थी।
उसने अपना लौड़ा हाथ में पकड़ लिया। वो उसे धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगा, अपनी उंगलियों को उसकी नसों पर फेरते हुए। उसकी आँखें गौरी पर टिकी थीं।
वो उसे देख रहा था—कैसे वो खुद को संभाल रही है, कैसे वो उस भयानक याद को मिटा रही है। उसके दिल में उसके लिए एक अजीब सा सम्मान पैदा हो रहा था।
वो उसे अब सिर्फ एक रांड नहीं समझता था, बल्कि एक औरत जिसने उसके सामने आत्मसमर्पण किया था।
“तुम्हें कैसा लगा?” सुमेर ने अचानक पूछा, अपनी आवाज़ को नरम रखते हुए। उसने अपने लौड़े को थोड़ा कसकर पकड़ा। “बाथरूम में… जो मैंने किया? क्या तुम्हें अच्छा लगा? या तुम्हें बुरा लगा?”
गौरी चादर बिछाते हुए रुकी। उसने सुमेर की तरफ पलटकर देखा। उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे, लेकिन उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था। “मुझे… मुझे अच्छा लगा, साहब,” उसने धीरे से कहा, अपनी आँखें झुकाते हुए। “बहुत अच्छा लगा।”
सुमेर ने मुस्कुराते हुए अपना अंगूठा अपने लौड़े के सुपारे पर रखा और उसे घुमाया।
“और वो शब्द… ‘रांड’? तुम्हें बुरा तो नहीं लगा जब मैंने ऐसे बुलाया? मैंने तुम्हें बहुत कठिनाई से… बहुत रूखेपन से छुआ था। क्या तुम्हें तकलीफ़ हुई?”
गौरी ने सिर हिलाया। “नहीं… दर्द तो था, लेकिन वो दर्द अलग था। जब आपने पहली बार मुझे जबरन लिया था, मैं बस मर जाना चाहती थी। मैं डर गई थी।
लेकिन अभी… अभी तो मैं महसूस कर पा रही थी कि आप कर क्या रहे हैं। और मैंने आपको माफ़ भी कर दिया। तो मुझे कोई शिकायत नहीं है।”
सुमेर का चेहरा खिल उठा। उसके चेहरे पर एक राहत और जीत का भाव था। वो जानता था कि वो जीत गया है। उसने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी, उसका लौड़ा अब उसकी मुट्ठी में गर्म हो रहा था।
“अच्छा,” सुमेर ने कहा। “तो बताओ… तुम और क्या करना चाहोगी? हम नई चीज़ें आज़मा सकते हैं। तुम कितना… कितना आगे जाने के लिए तैयार हो? तुम्हें क्या पसंद है, क्या नहीं?”
गौरी वापस चादर बिछाने लगी। उसने अपने बाल पीछे किए और अपना चेहरा छिपाया। उसके दिमाग में एक तूफान आ रहा था।
वो क्या बताए? क्या वो यह बताए कि उसके बापू ने उसे कई बार चोदा है, कि उसने उनका लंड चूसा है, कि उसकी गांड फूल चुकी है? वो यह नहीं बता सकती थी।
उसे एक नई, भोली औरत बनकर रहना था। उसे दिखाना था कि वो सिर्फ सुमेर की है, बिना किसी अतीत के।
“मैं… मैं नहीं जानती,” गौरी ने झूठ बोला, अपनी आवाज़ को थोड़ा कांपने देते हुए। “मैंने पहले कभी ऐसा नहीं किया। लेकिन… लेकिन जो अभी हुआ, मुझे वो पसंद आया। अगर आप कहेंगे, तो मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ।
गौरी ने अपनी बात पूरी की, अपनी आँखें झुकाए हुए। “मैं आपकी हूँ, साहब। आप जो भी करना चाहेंगे, मैं वही करूँगी। मुझे सिर्फ आपका साथ चाहिए।”
सुमेर की मुस्कान और चौड़ी हो गई। उसके चेहरे पर एक जीत का भाव था। उसने अपने लौड़े को एक ज़ोरदार धक्का मारा, जैसे वो उसे चौकन्ना बना रहा हो। उसका सुपारा चमक रहा था, उस पर थोडेसे वीर्य की एक चमकदार परत जम चुकी थी।
“बहुत बढ़िया,” सुमेर ने कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गर्मी थी। “बहुत बढ़िया, मेरी रानी। मैं सिखाऊँगा तुम्हें सब कुछ। मैं तुम्हें ऐसा चोदूँगा कि तुम्हें पता भी नहीं चलेगा कि तुम्हारा शरीर कितने तरीकों से आनंद ले सकता है।
और तुम… तुम खुद मुझसे वो सब माँगोगी। वो दिन दूर नहीं जब तुम खुद मेरे पास आओगी और कहोगी—’साहब, आज मुझे ऐसे चोदो।'”
गौरी ने चादर के कोनों को अंदर डाला और उसे बिस्तर पर कस कर ताना। वो झुकी हुई थी, और उसके चूतड़ एकदम गोल और भारी दिखाई दे रहे थे।
उसकी चूत की फांकें थोड़ी खुली हुई थीं, और उनमें से थोड़ा-थोड़ा रस अभी भी चुआकर बाहर आ रहा था।
सुमेर की निगाहें उसकी गांड पर टिकी थीं। उसे याद आया कि कैसे उसने अभी तक उसकी गांड को नहीं छुआ था। एक ख्याल उसके दिमाग में आया—शायद आज रात वो उसके उस छेद का भी दरवाज़ा खोले।
“बस,” सुमेर ने कहा, जैसे ही गौरी ने तकिये ठीक किए। “अब बस।”
गौरी ने पलटकर देखा। सुमेर अभी भी कुर्सी पर बैठा था, लेकिन अब वो सीधा उसकी तरफ देख रहा था। उसका लौड़ा अपनी पूरी शक्ति में था, वो उसके पेट को छू रहा था।
“तुम बहुत खूबसूरत हो, गौरी,” सुमेर ने धीरे से कहा। “और तुम अब मेरी हो। पूरी तरह से।”
उसने अपना हाथ अपने लौड़े से हटाया और कुर्सी की हत्थी पर रख दिया। उसकी आँखों में एक ठंडा निश्चय था।
वो जानता था कि आज रात वो अपनी पत्नी को एक ऐसी दुनिया में ले जाएगा जहाँ वो पहले कभी नहीं गई थी। और वो इसे सुनिश्चित करेगा कि वो वहाँ से खुश और थकी हुई लौटे।
सुमेर ने धीरे से कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया। उसका लौड़ा हवा में लहरा रहा था, एक भाले की तरह, जो अपने शिकार के लिए तैयार था।
वो बिस्तर के पास खड़ी गौरी की तरफ बढ़ा। उसके कदमों में एक जानवरी ठहराहट थी, लेकिन उसकी आँखों में एक नई, भूखी चमक थी। वो उसके सामने खड़ा हो गया, दोनों के नंगे शरीर एक-दूसरे के बिल्कुल करीब थे। गर्मी उनके बीच बढ़ती जा रही थी।
“मुझे रूखापन पसंद है, गौरी,” सुमेर ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, जबकि उसका एक हाथ उसकी कमर पर मसल रहा था। “मुझे जबरदस्ती पसंद है… वो मज़ा ही अलग है जब औरत तुम्हारी तरह तड़पती है।”
इतना कहकर उसने गौरी का चेहरा अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों को चूम लिया। वो चुंबन गहरा था, उसमें चाहत की कमी नहीं थी। फिर उसने गौरी का हाथ अपने खड़े लौड़े पर रख दिया।
गौरी ने सांस रोक ली, फिर धीरे से उस मोटी, गर्म चीज़ को अपनी मुट्ठी में भर लिया और ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया। उसका स्पर्श बहुत हल्का था, पर उसके हाथ की नरमी सुमेर को पागल कर रही थी।
“अगर आपको रूखापन पसंद है, तो मैं तैयार हूँ,” गौरी ने उसके होंठों को चूमते हुए कहा, अपनी आँखें बंद करते हुए। “मैं आपकी हूँ, आप जैसा चाहेंगे कर सकते हैं।”
सुमेर ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। वो उसके बालों में उंगलियाँ फेर रहा था, लेकिन उसके दिमाग में एक और ख्याल आ रहा था। उसने थोड़ी झिझक के साथ कहा, “गौरी… मैं… मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ।”
गौरी का शरीर अचानक अकड़ गया। उसके चेहरे पर एक हैरानी भरा भाव आ गया। उसके दिमाग में तूफान मच गया।
गांड? अभी? उसने अपने पिता के साथ बिताए उन भयावह पलों को याद किया—उसकी गांड कैसे फट गई थी, उसके पिता का लंड कैसे अंदर घुसा था।
वो जानती थी कि गांड मरवाना कैसे होता है, वो तो इसमे माहिर थी। लेकिन अगर उसने यहाँ अपनी कलाकारी दिखाई, तो सुमेर को शक हो जाएगा। वो समझ जाएगा कि वह इससे पहले भी चुद चुकी है। उसे एक नादान, भोली दुल्हन की तरह काम करना था।
उसके चेहरे का वो अचंभित भाव देखकर सुमेर समझ बैठा कि वो डर गई है। उसके दिल को ठेस पहुँची। उसने तुरंत पीछे हटने की कोशिश की।
“अरे, नहीं… मैं भी क्या सोच रहा था?” सुमेर ने खुद को कोसते हुए कहा। “यह तुम्हारी पहली रात है और मैं तुमसे ऐसी घिनौनी बात कर रहा हूँ। मैं बहुत मूर्ख हूँ। अगर तुम्हें अच्छा नहीं लगता तो ठीक है, मैं समझ सकता हूँ।”
“नहीं नहीं नहीं!” गौरी ने तुरंत उसे रोका, अपना झूठ बुनते हुए। “ऐसा कुछ नहीं है। बस… बस मुझे तो यह पता ही नहीं था कि… कि गांड को भी चोदा जा सकता है। इसलिए मैं घबरा गई।”
सुमेर के चेहरे पर राहत और उत्साह दोनों आ गए। “सच में? तुम्हें पता नहीं था?” वो खुशी से फूट पड़ा। “बहुत अच्छा। तो चलो आज हम इसे भी आज़माते हैं। चलो बिस्तर पर चलते हैं।”
दोनों बिस्तर पर आ गए। नई साफ चादर पर चढ़कर सुमेर ने गौरी को निर्देश दिया, “कुतिया की तरह बनो.”
गौरी जानबूझकर भोली बनी। “कुतिया के जैसे? मैं… मैं कैसे करूँ?”
सुमेर मुस्कुराया। उसे उसकी नादानी प्यारी लग रही थी। उसने उसका हाथ पकड़ा और उसे चारपाई पर कुतिया बनाने में मदद की। “झुक जाओ, मेरी जान। अपना सिर तकिए पर रखो और पेट को नीचे की तरफ झुकाओ। ऐसे कि तुम्हारी गांड ऊपर की तरफ उठी हुई रहे।”
गौरी ने जैसा उसने कहा, वैसा ही किया। वो अपनी पेट को गहराई तक झुकाकर अपनी गोल-मटोल गांड उठा रही थी। उसके चेहरे पर एक छुपी हुई मुस्कान थी—क्योंकि वो जानती थी कि यह कितना आसान है। उसने कई बार अपने पिता के सामने यही मुद्रा बनाई थी।
सुमेर उसकी गांड को देखकर दीवाना हो गया। वो एक भूखे आदमी की तरह उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने अपना लौड़ा हाथ में लिया और उसकी गांड के चारों ओर घुमाने लगा।
उसकी उंगलियाँ उसकी नरम त्वचा को मसल रही थीं। उसने अपनी जीभ को अपने होंठों के चारों ओर घुमाया, मोमबत्ती की रोशनी में उसकी गांड की गहराई निहारते हुए।
फिर उसने अपनी एक उंगली को गीला किया और धीरे से उसकी गांड के छेद पर रख दी। गौरी ने एक सिसकी भरी। उसके शरीर में एक सरसराहट सी हुई। सुमेर ने अपना मुँह भरकर थूक लिया और उसे सीधे उसकी गांड के छेद पर गिरा दिया। ठंडा थूक गर्म छेद पर गिरा और गौरी को एक अजीब सा मज़ा आया।
सुमेर ने अपने लौड़े का सुपारा उसके छेद पर टिकाया। वो अब पशु नहीं बनना चाहता था। वो चाहता था कि उसकी पत्नी को प्यार मिले, भले ही वो गांड मरवा रही हो। उसने धीरे से दबाव डाला।
“आह्ह…” गौरी ने नाटक करते हुए चीखा। वो जानती थी कि आगे क्या होने वाला है, लेकिन उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और दांतों से अपना निचला होंठ काट लिया, जैसे वो तैयार हो रही हो।
सुमेर रुक गया। “क्या हुआ? तुम ठीक हो? क्या मैं रुक जाऊँ?”
गौरी ने अपना चेहरा पीछे मोड़ा, उस पर एक झूठा दर्द भरा भाव था। “नहीं… मैं ठीक हूँ। बस… बस थोड़ा दर्द हुआ। यह मेरी पहली बार है इसलिए… आप धक्का दीजिए। मैं संभाल लूँगी।”
सुमेर ने उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया। और एक ही झटके में अपना पूरा 8 इंच का, 3 इंच मोटा लौड़ा उसकी गांड में घुसेड़ दिया।
“आआआआअह्ह्ह्ह! माँ मार गई!” गौरी की चीख असली थी।
गौरी की चीख इस बार वाकई असली थी। उसके गले से निकली वो आवाज़ इतनी ज़बरदस्त थी कि पूरी हवेली में पसर गई। दीवारें गूँज उठीं।
उसके पिता का लंड भले ही उसे चोदने का आदी था, लेकिन सुमेर का लौड़ा एक लोहे की गर्म सूई थी जो उसकी गांड को फाड़कर अंदर घुस रहा था।
वो पहली बार इतना विशाल कुछ अपने अंदर ले रही थी। उसकी गांड के छेद के चारों ओर की मांसपेशियाँ फट गईं, और उसका शरीर एक झटके के साथ अकड़ गया।
हवेली के दूसरी छोर पर, ठाकुराइन अपने कमरे में अकेली थी। उसने बहू की उस दर्द भरी चीख को सुना और उसके चेहरे पर एक विकृत, संतुष्ट मुस्कान आ गई।
उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने साड़ी के नीचे हाथ डालकर अपनी सूखी, चूत को रगड़ना शुरू कर दिया। “शाबाश बेटा,” उसने सांस छोड़ते हुए कहा। “सीख रहा है… उसे तोड़ दे… मेरे वंश का वारिस पैदा कर।”
वापस बेडरूम में, सुमेर रुक गया। उसका लौड़ा गौरी की गांड के अंदर धंसा हुआ था, और गौरी तड़प रही थी। उसका शरीर बुखार से कांप रहा था। उसकी सांसें छूट रही थीं।
सुमेर को उसका यह हाल देखकर थोड़ी सहानुभूति हुई, लेकिन उसके अंदर का जानवर अभी भी जाग रहा था। उसने अपना लौड़ा वहाँ रोक दिया ताकि वो थोड़ा संभल पाए।
“श्श्श… रुक जाओ,” सुमेर ने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा। “बस एक मिनट… तुम्हारी गांड को ढीला छोड़ दो।”
कुछ पल बीते। गौरी की चीखें धीरे-धीरे सिसकारियों में बदल गईं। उसकी गांड के छेद ने धीरे-धीरे सुमेर के मोटे लौड़े को अपने आसपास ढक लिया। वो अब उसके आकार में ढल रही थी।
जब सुमेर को लगा कि वो अब ठीक है, तो उसने अपना लौड़ा एक झटके से बाहर खींच लिया।
पॉप!
एक ज़ोरदार आवाज़ हुई। सुमेर ने तुरंत गौरी की कूल्हे को अपने दोनों हाथों से फैलाकर उसकी गांड के छेद को देखा। वहाँ एक भयावह गहरा गोल छेद बन गया था—एक छेद जो बंद नहीं हो रहा था।
वो एक पागल वैज्ञानिक की तरह उस नज़ारे को निहार रहा था। फिर उसने अपना लौड़ा देखा। उसके लौड़े पर गौरी की गांड का मैल और कुछ गंदगी चिपकी हुई थी। एक तीखी, कड़वी गंध उसकी नाक में जाकर लगी। उसके चेहरे पर घृणा का भाव आया।
“फूह…” सुमेर ने मुँह फेरा।
उसने गौरी के चेहरे की तरफ देखा। गौरी ने पलटकर उसे देखा। उसकी आँखों में असली दर्द था, लेकिन उसके होंठों पर एक मुस्कान भी थी। उसने सुमेर को धीरे से सिर हिलाकर इशारा किया—जारी रखो।
सुमेर को उसके इस हौसले पर आश्चर्य हुआ। उसने सोचा कि शायद यह भी उसी तरह की पागल है जैसे वो। उसने अपने लौड़े पर थूक लगाया और फिर से उसे उसकी गांड पर सेट किया। इस बार कोई धीरज़ नहीं रखा। उसने पूरी ताकत से धक्का मारा।
“आईईई!” गौरी ने चीखा, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में दर्द के साथ-साथ एक अजीब सी खुशी भी थी।
अब सुमेर ने रफ़्तार पकड़ ली। वो एक जानवर की तरह उसे चोदने लगा। उसका लौड़ा पिस्टन की तरह अंदर-बाहर जा रहा था। धप… धप… धप! आवाज़ इतनी तेज़ थी कि लग रहा था कोई दरवाज़ा पटक रहा हो।
सुमेर ने अपना हाथ उठाया और गौरी की गांड पर ज़ोर से मारा। थपाक!
“ले साली! यह ले! सुमेर गरज रहा था। उसने गौरी के बाल पकड़ लिए और उसका सिर पीछे की तरफ खींच लिया। गौरी का मुँह खुला का खुला रह गया, लार उसके होंठों से टपक रही थी।
“हाँ… हाँ साहब! और मारो! और मारो!” गौरी चीख रही थी। उसका शरीर अब दर्द से नहीं, बल्कि उस जबरदस्त चुदाई के नशे से कांप रहा था।
उसे मालूम था कि वो एक रांड की तरह व्यवहार कर रही है, लेकिन उसे इसी में मज़ा आ रहा था। यह वो बेरहमी थी जिसे वो चाहती थी, लेकिन अपने पिता से कभी नहीं मिली।
सुमेर ने उसकी कमर को दोनों हाथों से ज़बरदस्ती पकड़ा और तेज़ी से धक्के मारने लगा। उसके थप्पड़ उसकी गांड पर लगातार पड़ रहे थे, उसकी गांड अब लाल से नीली पड़ चुकी थी। वो उसे गालियाँ दे रहा था—”तू मेरी रांड है,” “तू एक रंडी है,” “तेरी गांड बस मेरे लिए बनी है।”
यह सिलसिला लगभग 10 मिनट तक चला। सुमेर की सांसें फूल चुकी थीं, लेकिन वो रुकना नहीं चाहता था। उसका लौड़ा अब वीर्य छोड़ने को बेताब था। आखिरकार, उसने एक ज़बरदस्त आवाज़ के साथ अपना अंतिम धक्का मारा।
“आआआआह्ह्ह! ले! सारा ले!”
उसका लौड़ा फट पड़ा और गहराइयों में उसका गाढ़ा, गर्म वीर्य फैल गया। वो उसकी गांड में ही झड़ गया। सुमेर का शरीर ढीला पड़ गया और वो गौरी के ऊपर गिर पड़ा।
कुछ पल बाद, सुमेर ने अपना लौड़ा बाहर खींच लिया। एक गीली, चिपचिपी आवाज़ हुई। उसका लौड़ा पूरी तरह से गंदा था—उसका वीर्य और गौरी की गांड की गंदगी मिलकर उस पर लगी हुई थी।
गौरी बिस्तर पर गिर गई। वो एक घोड़े की तरह सांस ले रही थी, उसका शरीर पसीने से तर-बतर था। उसकी गांड से उसका वीर्य और उसकी गंदगी मिलकर बह रही थी।
सुमेर भी थक चुका था। वो बिस्तर पर गौरी के पास ही गिर गया और अपनी सांसें संभालने लगा। उसने अपने गंदे लौड़े को देखा और फिर गौरी की तरफ देखा।
“देखो,” सुमेर ने थके हुए स्वर में कहा। “इस पर तुम्हारी गंदगी और मेरा वीर्य लगा है। साफ़ कर दो,” सुमेर ने कहा, अपनी आँखें बंद करते हुए। उसे उम्मीद थी कि गौरी अलमारी से कोई तौलिया या कपड़ा निकालेगी और उसके लौड़े को साफ़ कर देगी।
लेकिन अगले पल जो हुआ, उससे सुमेर की आँखें खुल गईं।
गौरी ने कोई कपड़ा नहीं लिया। वो बिस्तर पर घिसटते हुए उसकी टांगों के बीच आ गई। उसने अपना चेहरा उसके कूल्हों के पास लगा दिया, जहाँ उसका गंदा लौड़ा अभी भी लहरा रहा था। सुमेर सन्न रह गया। वो बस यही देख रहा था कि वो क्या करने वाली है।
गौरी ने उसके गंदे लौड़े को अपनी मुट्ठी में भरा। वो उसके सुपारे को अपनी नाक के पास ले गई और गहरी सांस ली।
वहाँ एक तीखी, गंदी गंध थी—उसकी खुद की गांड की महक और सुमेर के वीर्य की मिली-जुली खुशबू। सामान्य औरत को तो उल्टी आ जाती, लेकिन गौरी के चेहरे पर एक अजीब सा तृप्ति का भाव था। उसने उस बदबू को सूंघा, जैसे वो किसी शाही इत्र को सूंघ रही हो।
फिर, सुमेर के होश उड़ गए।
गौरी ने अपनी जीभ बाहर निकाली और सीधे उसके गंदे लौड़े पर रख दी। उसने एक लॉलीपॉप की तरह उसे चाटना शुरू कर दिया। उसकी जीभ उसके लौड़े पर लगी गाढ़ी परत, उसका खुद का गंदा मैल और सुमेर का पिघला हुआ वीर्य—सब कुछ चाट रही थी।
“अरे बाप रे…” सुमेर हैरानी से फुसफुसाया। वो यह देखकर स्तब्ध था कि उसी पत्नी को जिसे वो एक ‘नादान’ समझता था, वो इतनी गंदगी को चाट रही है।
गौरी जी जान से उसे चाट रही थी। उसकी आँखें बंद थीं और वो उस स्वाद का आनंद ले रही थी। उसके मन में अपनी इस बेशर्मी का एक अजीब सा नशा था। उसे अपने ही अपवित्र रस का स्वाद अच्छा लग रहा था। वो उसके सुपारे को मुँह में लेकर चूसने लगी, उसकी जीभ उसके छेद के चारों ओर घूम रही थी।
सुमेर ने देखा कि उसके लौड़े के आखिरी हिस्से में अभी भी थोड़ी सी पीली-भूरी चीज़ चिपकी हुई थी। उसने अपना उंगली उधर इशारा किया। “वहाँ… वहाँ भी बचा है।”
गौरी ने तुरंत अपना ध्यान वहाँ लगाया। उसने जीभ से उसे बारीकी से साफ़ किया। उसकी जीभ और होंठ अब उस गंदगी की वजह से हल्के पीले रंग के हो गए थे। वो एक माहिर रांड की तरह उसे साफ़ कर रही थी, बिना किसी घृणा के।
सुमेर को अपनी पत्नी पर गर्व महसूस होने लगा, लेकिन साथ ही उसके मन में एक सवाल भी पैदा हो रहा था। यह औरत कितनी गहराई तक जा सकती है?
“मुझे पता नहीं था कि तुम्हें इतना मज़ा आएगा,” सुमेर ने कहा, उसके बालों को सहलाते हुए। “तुम तो इसे एक अमृत की तरह चाट रही हो।”
गौरी ने उसका लौड़ा अपने मुँह से बाहर निकाला। उसके होंठ चमक रहे थे। उसने उसे देखा और एक कामुक मुस्कान दी। “मैंने तो आपसे कहा था, साहब… यह सब मेरे लिए नया है। और हाँ, मुझे हर पल, हर स्वाद अच्छा लग रहा है। मैं… मैं इसे और भी आज़माना चाहती हूँ।”
सुमेर मुस्कुरा दिया। उसने उसके गाल पर एक चुंबन लगाया। “तो फिर ठीक है। अब जाओ और खुद को साफ़ कर लो।”
गौरी ने सिर हिलाया और बिस्तर से उतरने लगी। उसने अपने पैर ज़मीन पर रखे। जैसे ही वो खड़ी हुई, उसके शरीर से एक अजीब सी आवाज़ आई। उसकी गांड अभी भी बिल्कुल खुली हुई थी, और सुमेर का वीर्य उसकी गंदगी के साथ मिलकर बाहर बह रहा था।
वो बाथरूम की तरफ बढ़ी। उसकी चाल अजीब थी—वो टांगें फैलाए चल रही थी, एक अंडे की तरह असंतुलित। उसकी टांगों के बीच से गाढ़ा, पीला-सफेद मिश्रण उसकी जांघों पर बह रहा था और उसे चिपचिपा बना रहा था।
वो अपने ही रस से लथपथ थी, लेकिन उसके चेहरे पर कोई शर्म नहीं थी। वो अपने साहब की रांड बन चुकी थी, और उसे इस पर गर्व था।
वो दरवाज़े की तरफ बढ़ी, अपने पीछे छोड़े गए निशानों को छोड़ते हुए।