क्यों बन गया एक पति Cuckold ? – 4

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पाँचों मर्द उसके पीछे खड़े थे. उनके लंड अभी भी गीले थे – पूजा की लार से लथपथ, चमकते हुए. वे सब एक साथ आगे बढ़े और बिस्तर के चारों तरफ जमा हो गए,

अपने-अपने लंडों को सहलाते हुए. उनकी आँखें पूजा के गांड पर टिकी थीं – वहाँ वह ढाई इंच का प्लग लगा हुआ था, उसके होंठों को फैलाए हुए, उसके अंदरूनी हिस्से को खोलने के लिए तैयार.

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मोहित ने आगे बढ़कर अपनी उँगली उस प्लग पर रखी और उसे हल्का सा घुमाया. पूजा के शरीर में एक हलचल हुई – उसने अपने नितंबों को और ऊपर उठाया, जैसे और अधिक स्वागत कर रही हो.

उसने शेखर की तरफ देखा एक चालाक मुस्कान के साथ और पूछा, “शेखर, क्या हम तुम्हारी इस कुतिया की गांड को फाड़ दें?”

शेखर खड़ा हो गया. उसका लंड अब पूरी तरह सख्त था – कई हफ्तों बाद पहली बार इतना सख्त.

वह बिस्तर के पास आया और पूजा के चेहरे के सामने झुक गया. उसने उसकी आँखों में देखा – वही आँखें जो उसने हज़ारों बार देखी थीं, मगर आज उनमें एक अलग चमक थी.

उसने अपना हाथ बढ़ाकर पूजा के गाल को सहलाया और धीमी, गंभीर आवाज़ में कहा, “हाँ. मैं तुम्हें पूरी छूट देता हूँ. इसकी गांड के हर इंच का मज़ा लो. कोई रहम नहीं. कोई दया नहीं. आज यह सिर्फ तुम्हारी है.”

पूजा ने वे शब्द सुने. उसकी आँखें एक पल के लिए बड़ी हो गईं, मगर फिर वह सामान्य हो गईं. उसने शेखर की तरफ देखते हुए अपने होंठों को चाटा – एक ऐसी हरकत जो चुनौती और स्वीकार्यता दोनों थी.

मोहित ने फिर से बात उठाई. उसने सबको रोकते हुए कहा, “एक मिनट रुको सब.

हर कोई यहाँ पहली बार गांड मारने वाला है – पूजा भाभी के लिए भी यह पहली बार है, हम सबके लिए भी. इसलिए मेरा सुझाव है कि राजेश को पहली बार का सम्मान मिलना चाहिए.

वह अब भी कुंवारा है, और उसका लंड लंबा है मगर पतला – पहली बार के लिए एकदम सही.”

सबने मोहित की तरफ देखा और फिर राजेश की तरफ. निखिल ने कहा, “हाँ, राजेश को ही आगे आने दो. वह इस मौके का हकदार है.

आज वह अपना कुंवारापन खोएगा और वह भी दोस्त की बीवी की गांड में.”

राजेश का चेहरा शर्म और उत्तेजना से लाल हो गया. उसने अपने दोस्तों की तरफ देखते हुए कहा, “यार… तुम लोग सच में बहुत अच्छे हो.

मुझे यह मौका देने के लिए शुक्रिया. मैं इसे कभी नहीं भूलूंगा.”

वह आगे बढ़ा, अपने लंड को सहलाते हुए. उसकी साँसें तेज़ थीं, मगर उसके हाथ अब नहीं काँप रहे थे. वह बिस्तर पर चढ़ा और पूजा के पीछे घुटनों के बल आ गया.

उसने अपना एक हाथ पूजा के कूल्हे पर रखा और दूसरे हाथ से धीरे-धीरे उसके गांड में लगे प्लग को पकड़ा.

“अब देखते हैं कि यह कैसा लगता है,” उसने फुसफुसाया और धीरे-धीरे प्लग को बाहर खींचना शुरू किया.

प्लग पूजा के गांड से बाहर आया तो एक हल्की “चप” की आवाज़ हुई. उसकी गांड अब खाली थी – थोडी फैली हुइ, गीली, और एकदम तैयार.

राजेश ने प्लग को अपने हाथ में लिया और शेखर की तरफ फेंकते हुए कहा, “पकड़ लो शेखर!”

शेखर ने उसे एक हाथ से पकड़ लिया.

उसने उसे अपनी नाक के पास ले जाकर गहरी साँस ली – उसकी खुशबू, उसकी पत्नी की खुशबू. फिर उसने पूजा की तरफ देखते हुए उसे एक तरफ रख दिया.

उसकी आँखों में अब एक अजीब सी चमक थी – जैसे वह अपनी पत्नी को किसी नए रूप में देख रहा हो.

राजेश ने पूजा के कूल्हों को अपने हाथों में लिया और उन्हें थोड़ा और फैलाया. उसने पूजा के गांड को ध्यान से देखा – वह थोडी फैली हुइ थी, प्लग के कारण, मगर फिर भी कड़क और तंग.

“अरे यार, देखो तो ज़रा,” राजेश ने दूसरों को बुलाया. “देखो कैसे यह फैली हुइ है और फिर भी कितनि तंग लग रही है.”

बाकी चारों ने झुककर पूजा के गांड को देखा. मोहित ने अपनी उँगली से उसे छुआ – वह नरम और गर्म थी. निखिल ने भी छुआ, फिर अनिकेत ने.

हर एक ने उसे अपनी उँगलियों से महसूस किया, जैसे कोई वैज्ञानिक किसी नई खोज की जाँच कर रहा हो.

“हाँ, राजेश, तू ही इसकी कुंवारी गांड को तोड़ने के लिए सही है,” मोहित ने कहा. “आगे बढ़.”

राजेश ने पूजा के नितंब पर एक जोरदार थप्पड़ मारा – “थप!” की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजी. पूजा के शरीर में एक हलचल हुई, उसके मुँह से एक हल्की कराह निकली.

“तैयार है कुतिया?” राजेश ने पूछा, उसकी आवाज़ में अब कोई झिझक नहीं थी.

पूजा ने कोई जवाब नहीं दिया. वह बस अपनी जगह पर बैठी रही, अपना चेहरा शेखर की तरफ किए हुए.

उसकी आँखों में एक शांति थी – वह शांति जो किसी युद्ध से पहले होती है, जब सब कुछ तय हो चुका हो और अब बस उसका सामना करना बाकी हो.

राजेश ने अपने लंड के सिर को पूजा के गांड के द्वार पर रखा. पूजा ने उसे महसूस किया – वह गर्म, नरम मगर दृढ़ सिर उसके गांड के छल्ले को छू रहा था. उसने अपनी साँस रोक ली.

राजेश ने उसकी कमर को पकड़ा और एक ही झटके में अपने आधे लंड को उसके अंदर धकेल दिया.

“अह्ह्ह्ह!” पूजा के मुँह से एक चीख निकली – दर्द और चौंकने की चीख. उसकी आँखें एकदम फैल गईं, उसके हाथ बिस्तर की चादर को मुट्ठी में जकड़ गए.

उसने सोचा था कि प्लग के कारण उसे इतनी तकलीफ नहीं होगी, मगर यह अलग था.

प्लग एक खिलौना था – उसके नियंत्रण में. यह एक असली लंड था, असली मांस, और ज़बरदस्ती उसके अंदर घुस रहा था. वह दर्द उसकी हड्डियों तक गया, उसकी रीढ़ में सिहरन पैदा कर दी.

शेखर ने उसके चेहरे पर दर्द देखा. उसने एक गहरी साँस ली और फिर अपना हाथ बढ़ाकर पूजा के गाल को थाम लिया.

उसकी उँगलियाँ उसके गाल पर धीरे-धीरे फिर रही थीं, जैसे कोई अपने प्यारे पालतू को शांत कर रहा हो.

उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी – एक संतुष्ट, शांत मुस्कान जो पूजा को बता रही थी कि वह ठीक कर रहा है.

बाकी चारों ने जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया – “हाँ राजेश! पूरा घुसा दे! अंदर तक ले जा!”

राजेश एक पल के लिए रुका. उसने अपनी आँखें बंद करके पूजा के गांड के अंदर के तापमान और दबाव को महसूस किया.

फिर उसने अपने लंड को थोड़ा पीछे खींचा और एक जोरदार, पूरे बल के साथ अपने पूरे लंड को उसके अंदर धकेल दिया – एक क्रूर, बेरहम प्रवेश.

“नहीं!” पूजा चीखी, उसकी आवाज़ में दर्द और सदमा था। मगर वह शब्द उसके गले में अटक गया क्योंकि राजेश का लंड अब उसकी गांड में पूरी तरह से था।

राजेश ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक गहरी, लंबी साँस ली।

उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी – जैसे कोई लंबे इंतज़ार के बाद अपनी मंज़िल पर पहुँच गया हो।

उसने धीरे से कहा, “अरे यार… शेखर, तुझे पता नहीं है कि तेरी बीवी की गांड कितनी तंग है। अंदर कितना गर्म है… ऐसा लग रहा है जैसे कोई मुझे अंदर से दबा रहा हो। यह एहसास… मैं इसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता।”

पूजा का शरीर काँप रहा था। उसके हाथ बिस्तर की चादर में गड़े हुए थे, उसके नाखून कपड़े में धँस गए थे।

उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, मगर वह रो नहीं रही थी – वह दर्द से थी। उसने शेखर की तरफ देखा – शेखर खड़ा था, उसका हाथ अब भी पूजा के गाल पर था, उसे सहला रहा था।

शेखर ने अपना चेहरा पूजा के करीब लाकर फुसफुसाया, “चुप रह, मेरी जान। बस एक पल की बात है। यह दर्द थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा। तू बस मुझे देखती रह।”

पूजा ने उसकी आँखों में देखा – वही आँखें जिनमें उसे प्यार मिलता था, वही आँखें जिनमें अब एक अजीब सी चमक थी। उसने गहरी साँस ली और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया।

बाकी चारों मर्द चिल्ला रहे थे – “हाँ राजेश! देख उस कुतिया को! उसने तो अपनी गांड तैयार ही रखी थी हमारे लिए!”

पूजा ने ‘कुतिया’ शब्द सुना। कुछ दिन पहले यह शब्द उसे चुभता, मगर अब… अब वह इसकी आदी हो चुकी थी।

उसने अपने हाथों को बिस्तर से हटाकर अपने दोनों कूल्हों को फैलाया – एक स्पष्ट संकेत कि वह तैयार थी।

राजेश ने अपनी आँखें खोलीं और पूजा के कूल्हों को पकड़ा। “तैयार है कुतिया?” उसने पूछा।

पूजा ने कोई जवाब नहीं दिया, मगर उसने अपने हाथों से अपने कूल्हों को और फैलाया – एक मूक स्वीकृति।

“यही तो हम देखना चाहते थे!” मोहित चिल्लाया।

राजेश ने अपने लंड को पीछे खींचा – धीरे-धीरे, ताकि पूजा को और दर्द न हो – और फिर एक तेज़, लयबद्ध गति से उसकी गांड को चोदना शुरू कर दिया।

“अह्ह्ह… हाँ… बस यही तो है… यही चाहिए था मुझे,” राजेश बड़बड़ाया, उसकी आवाज़ में उत्तेजना और राहत दोनों थी।

पूजा के मुँह से दर्द और आनंद का मिश्रण निकल रहा था – एक लंबी, खींची हुई कराह जो हर धक्के के साथ और तेज़ होती गई। “हाँ… हाँ… आह्ह्ह… हाँ…”

राजेश की गति तेज़ से और तेज़ होती गई – एक कुत्ते की तरह, बिना रुके, बिना किसी नरमी के। उसके कूल्हे पूजा के नितंबों से टकरा रहे थे, जिससे “थप-थप-थप” की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।

पूजा की गांड अब धीरे-धीरे राजेश के लंड का आकार लेने लगा था। हर धक्के के साथ वह और अधिक फैलती जा रही थी, और दर्द धीरे-धीरे एक अजीब सी अनुभूति में बदल रहा था।

पाँच मिनट तक राजेश ने उसे ऐसे ही चोदा। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं, उसके चेहरे पर पसीना था। आखिरकार उसने अपने लंड को पूजा की गांड से बाहर निकाला – एक “चप” की आवाज़ के साथ।

“देखो सब,” राजेश ने कहा और पूजा के गांड को दिखाया।

वह फैली हुइ थी – एक छोटे से छेद की तरह जो अब एक बड़े, काले गड्ढे में बदल गया था। उसके अंदर की लाल मांस दिख रही थी, चमकदार और गीली।

बाकी चारों ने झुककर उसे देखा। मोहित ने अपनी उँगली उस फैले हुए गांड में डाली – वह आसानी से अंदर चली गई। “वाह… क्या गैप है। राजेश, तूने अच्छा काम किया है।”

निखिल ने भी अपनी उँगली डाली, फिर अनिकेत ने, फिर मयूर ने। वे उसे छू रहे थे, उसे महसूस कर रहे थे, जैसे कोई वैज्ञानिक किसी प्रयोग की जाँच कर रहा हो।

अनिकेत आगे बढ़ा। उसके लंड में राजेश से थोड़ी ज़्यादा मोटाई थी – तीन इंच के करीब। उसने बिना किसी चेतावनी के, बिना किसी झिझक के, अपने लंड को सीधे पूजा के फैले हुए गांड में धकेल दिया।

पूजा फिर से चीख उठी – “आह्ह्ह! नहीं… यह और मोटा है!”

मगर अनिकेत ने उसकी बात नहीं सुनी। वह तुरंत तेज़ गति से चोदने लगा – एक जानवर की तरह, बिना किसी नरमी के। “चुप रह कुतिया। तेरी गांड तो पहले ही फैल चुकी है। अब मेरी बारी है।”

पूजा की गांड और फैल गयी। अनिकेत का लंड उसके अंदर तेज़ी से आ-जा रहा था, हर धक्के के साथ उसकी चीखें और तेज़ होती जा रही थीं।

शेखर ने राजेश को बुलाया, “राजेश, नीचे आ और अपना लंड इसके मुँह में डाल दे। यह बहुत चिल्ला रही है।”

राजेश मुस्कुराया, “जैसा तुम्हारा हुक्म, बॉस।” वह बिस्तर से कूदकर पूजा के चेहरे के सामने आ गया।

उसने उसके बालों को इकट्ठा किया और उसका सिर पकड़कर उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “चूस इसे, कुतिया। अपनी गांड का स्वाद ले।”

पूजा ने पहले तो अपना मुँह फेर लिया – राजेश के लंड से एक तीखी, गंदी खुशबू आ रही थी, उसके खुद के गांड की खुशबू। मगर राजेश ने उसका सिर पकड़ा और ज़बरदस्ती अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया।

पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। वह खुशबू… वह स्वाद… पहले तो उसे चिढ़ हुई, मगर कुछ सेकंड बाद… उसे कुछ अजीब सा लगा।

वह स्वाद – मांसल, तीखा, उसके अपने शरीर का स्वाद – उसे अजीब तरह से पसंद आने लगा। उसने अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया, फिर चूसना, फिर अपने मुँह में गहराई तक ले जाना।

“अरे देखो तो!” राजेश चिल्लाया. “देखो इस कुतिया को! इसे अपना ही स्वाद पसंद आ रहा है!”

अनिकेत ने पूजा के नितंब पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और कहा, “हाँ, यह तो अंदर से असली कुतिया है।”

पूजा राजेश के लंड को चूस रही थी, उसे अपने गले में गहराई तक ले जा रही थी।

उसके मुँह से “गक-गक-गक” की आवाज़ आ रही थी – वह लयबद्ध आवाज़ जब कोई लंड गले में जाता है और वापस आता है। उसकी आँखें खुली हुई थीं और वह शेखर को देख रही थी।

शेखर कुर्सी पर बैठा था, अपने लंड को सहलाते हुए। उसका लंड पूरी तरह सख्त था – पूजा ने यह देखा तो उसकी आँखें और भी बड़ी हो गईं।

उसने देखा कि शेखर का चेहरा एक अजीब सी मुस्कान से भरा हुआ था – एक शैतानी, संतुष्ट मुस्कान। और वह अनिकेत को देख रहा था जो उसकी गांड को चोद रहा था।

पूजा को एहसास हुआ – शेखर यह सब सिर्फ इसलिए करवा रहा था क्योंकि उसे यह पसंद था। यह उसकी कल्पना थी।

और सबसे अजीब बात यह थी कि पूजा को खुद भी यह पसंद आने लगा था। उसने सोचा – ‘अगर शेखर को यह पसंद है, और मुझे भी यह पसंद आ रहा है, तो फिर मैं क्यों न इसका पूरा मज़ा लूं?’

उसने राजेश के लंड को और तेज़ी से चूसना शुरू कर दिया, और अपने हाथ से अपनी चूत को सहलाने लगी।

तभी निखिल ने अनिकेत को पीछे खींचा। “बहुत हो गया। अब हमारी भी बारी है।”

अनिकेत ने माफ़ी माँगी और बिस्तर से उतरकर राजेश की जगह पूजा के मुँह के सामने चला गया।

निखिल ने पूजा के फैले हुए गांड पर थूक दिया और बिना किसी चेतावनी के अपना मोटा लंड उसके अंदर धकेल दिया।

पूजा को फिर से दर्द हुआ – निखिल का लंड अनिकेत से भी मोटा था – मगर अब उसे इस दर्द की आदत हो चुकी थी। उसने बस अपनी आँखें बंद कर लीं और उसे सहन किया।

निखिल ने बेरहमी से चोदना शुरू कर दिया – उसकी गति तेज़, क्रूर, बिना किसी नरमी के। “हाँ… ले इसे कुतिया… यह तेरी गांड की सज़ा है!”

दूसरी तरफ, अनिकेत पूजा के मुँह को चोद रहा था – उसी तेज़ गति से, उसी बेरहमी से। पूजा का मुँह और गांड दोनों एक साथ चुद रहे थे, एक ही लय में, एक ही ताल पर।

उसके मुँह से “गक-गक-गक” की आवाज़ें आ रही थीं और उसकी गांड से “चप-चप-चप” की आवाज़ें।

पूजा के शरीर में वियाग्रा का असर अब पूरी तरह से फैल चुका था। उसकी चूत से पानी बह रहा था, बिस्तर की चादर भीग चुकी थी।

वह निखिल के हर धक्के के साथ अपने कूल्हों को पीछे धकेल रही थी, और अनिकेत के हर धक्के के साथ अपना मुँह आगे बढ़ा रही थी।

वह अब सिर्फ सहन नहीं कर रही थी – वह इसका आनंद ले रही थी।

शेखर कुर्सी से उठा और पूजा के चेहरे के करीब आ गया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी – गुस्सा और उत्तेजना का मिश्रण।

उसने पूजा के बालों को पकड़ा और उसका चेहरा ऊपर उठाया, ताकि वह उसे देख सके।

“क्या तुझे मज़ा आ रहा है, मेरी जान?” उसने पूछा, उसकी आवाज़ में एक क्रूर मिठास थी।

पूजा ने अपनी आँखों से हाँ कहा – वह बोल नहीं सकती थी क्योंकि अनिकेत का लंड उसके मुँह में था। उसने अपना सिर हिलाया, हाँ ।

शेखर मुस्कुराया और निखिल की तरफ देखते हुए कहा, “देख रहा है निखिल? मेरी बीवी को मज़ा आ रहा है। अब और तेज़! इसकी गांड को फाड़ डाल!”

निखिल की आँखों में गुस्सा और उत्तेजना एक साथ चमक उठी।

उसने पूजा की कमर को और मज़बूती से पकड़ा और अपनी गति और तेज़ कर दी – इतनी तेज़ कि उसके कूल्हे उसके नितंबों से टकराकर एक तेज़ “थप-थप-थप” की आवाज़ पैदा कर रहे थे।

पूजा की चीखें दब हो गईं क्योंकि अनिकेत का लंड उसके मुँह में गहराई तक था। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, मगर वह रो नहीं रही थी – वह उत्तेजना से थी।

उसका पूरा शरीर काँप रहा था, हर धक्के के साथ वह और अधिक उत्तेजित होती जा रही थी।

एक मिनट बाद निखिल ने अपना लंड पूजा की गांड से बाहर निकाला – एक जोरदार “पॉप” की आवाज़ के साथ।

वह झटपट पूजा के चेहरे के सामने आ गया और अनिकेत को पीछे धकेलते हुए अपना लंड सीधे पूजा के गले में उतार दिया।

“ले इसे कुतिया! ले अपनी गांड का स्वाद!” निखिल चिल्लाया, उसकी आवाज़ में गुस्सा और उत्तेजना दोनों थी।

उसके लंड से पूजा के गांड की चिकनाई लगी हुई थी – उसका अपना स्वाद।

निखिल ने अपना वीर्य पूजा के गले में उतारना शुरू कर दिया – “आह्ह्ह… ले इसे… ले अपनी गांड की कमाई… आह्ह्ह… आह्ह्ह…”

पूजा ने उसे पूरा निगल लिया – उसकी आँखें शेखर पर टिकी हुई थीं। कुछ वीर्य उसके होंठों के कोने से बाहर निकल आया, मगर उसने उसे भी अपनी उँगली से उठाकर चाट लिया।

मगर वियाग्रा का असर अभी खत्म नहीं हुआ था। निखिल का लंड अब भी सख्त था। उसने बिना रुके फिर से पूजा के मुँह को चोदना शुरू कर दिया।

और पीछे से, मोहित पहले ही पोज़िशन ले चुका था। उसने अपना लंड पूजा के फैले हुए, गीले गांड में एक ही झटके में धकेल दिया और जानवर की तरह चोदना शुरू कर दिया।

“आह्ह्ह… शेखर, यह तो स्वर्ग है! तुझे एक बार अपनी बीवी की गांड ज़रूर आज़मानी चाहिए!” मोहित ने कहा, हाँफते हुए।

शेखर मुस्कुराया, उसके हाथ में उसका लंड था, पूरी तरह सख्त। “हाँ, मैं लूँगा। मगर पहले तुम लोग खत्म करो।”

अगले कुछ मिनट एक नियमित प्रक्रिया बन गए – जो कोई पूजा की गांड को चोदता, वह खत्म करने के बाद उसके मुँह में आकर अपने लंड को साफ करवाता।

मोहित ने पाँच मिनट तक उसकी गांड को चोदा, फिर पूजा के मुँह में वीर्य उतारा। फिर अनिकेत ने फिर से उसकी गांड को चोदा और मुँह में वीर्य उतारा।

राजेश ने फिर से उसकी गांड को चोदा और मुँह में वीर्य उतारा।

हर बार पूजा ने उसे निगल लिया – बिना किसी हिचकिचाहट के। वह अब एक मशीन बन चुकी थी – केवल लेने और निगलने के लिए।

अब केवल मयूर बचा था – चार इंच चौड़ा, आठ इंच लंबा लंड। वह बिस्तर पर चढ़ा और उसने बाकी चारों को बुलाया।

“सुनो सब! इस कुतिया को मजबूती से पकड़ो। मेरा लंड बड़ा है, और यह हिल सकती है।”

चारों ने पूजा को पकड़ लिया – निखिल ने उसका मुँह अपने लंड से भर दिया, राजेश और अनिकेत ने उसके हाथों को पकड़ा, मोहित ने उसके कूल्हों को थामा।

पूजा ने मयूर के उस मोटे, भारी लंड को देखा और उसकी आँखों में डर दौड़ गया।

उसने मुँह से निखिल के लंड को धक्का देकर बाहर निकालने की कोशिश की मगर निखिल ने उसका सिर मज़बूती से पकड़ लिया।

“तैयार?” मयूर ने पूछा, उसके चेहरे पर एक क्रूर मुस्कान थी।

सबने हाँ में सिर हिलाया।

मयूर ने अपने लंड के सिर को पूजा के फैले हुए गांड पर रखा और धीरे-धीरे दबाव डालना शुरू किया।

पूजा के शरीर में एक हलचल हुई – उसके गांड के छल्ले उस मोटाई के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। मयूर ने और ज़ोर लगाया – उसके लंड का सिर अंदर जाने लगा।

पूजा के गले से एक दबी हुई चीख निकली – दबी, मगर दर्द से भरी। उसके शरीर में काँप दौड़ गई।

मयूर ने एक और जोरदार धक्के किया – उसका पूरा लंड पूजा की गांड में समा गया।

पूजा के शरीर में एक सदमा सा लगा – उसकी आँखें पीछे घूम गईं, वह बेहोश होने लगी। उसके शरीर ने हिलना-डुलना बंद कर दिया, एक पल के लिए वह पूरी तरह से शिथिल हो गई।

मयूर ने अपनी आँखें बंद करके उस एहसास को महसूस किया, उसके मुँह से बस एक शब्द निकला, “क्या गांड है… क्या गांड है यार…”

फिर उसने जोर से अपना लंड बाहर खींचा – एक क्रूर, तेज़ गति से। इस दर्द ने पूजा को होश में वापस ला दिया। उसने अपनी आँखें खोलीं – उनमें दर्द और सदमा दोनों था।

“नहीं… यह बहुत बड़ा है… मैं नहीं ले सकती…” पूजा ने कहा, उसकी आवाज़ में दर्द था।

उसने अपने हाथों से मयूर को धक्का देने की कोशिश की, मगर चारों मर्दों ने उसे मजबूती से पकड़ रखा था।

मयूर ने उसकी कमर को फिर से पकड़ा और बिना किसी चेतावनी के अपना लंड वापस उसके गांड में धकेल दिया – इस बार तेज़ी से, जोर से।

पूजा के मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकली – वह सदमे में थी। उसकी आँखें खुली हुई थीं, उसके मुँह से आवाज़ नहीं आ रही थी, उसका चेहरा पीला पड़ गया था।

“हाँ! यही तो हम देखना चाहते थे!” सब चिल्लाए। “इसीकी तो तू हकदार है, कुतिया! ऑफिस में फ्लर्ट करती थी, सबको छेड़ती थी – अब ले इसकी सज़ा!”

शेखर ने पूजा के चेहरे को अपने हाथों में लिया – उसका चेहरा ठंडा और पीला था। उसने धीरे से उसके गाल को सहलाया और फुसफुसाया, “सब ठीक है, मेरी जान। बस कुछ पल और।”

पूजा ने शेखर की आँखों में देखा और धीरे-धीरे उसकी साँसें सामान्य होने लगीं। उसने अपने हाथों को बिस्तर पर रखा और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया।

शेखर ने मयूर की तरफ देखा और कहा, “अब शुरू करो। धीरे-धीरे।”

मयूर ने अपनी गति शुरू की – पहले धीमी, फिर तेज़, फिर और तेज़। वह एक अनुभवी प्रेमी की तरह चोद रहा था – हर धक्के में गहराई थी, हर हरकत में ताल थी।

अब पूजा फिर से सामान्य हो गई थी। उसने खुद निखिल के लंड को पकड़कर अपने मुँह में डाल लिया और उसे चूसने लगी।

“देखो तो कुतिया को,” निखिल ने कहा, उसकी आवाज़ में प्रशंसा और घृणा दोनों थी। “इसे तो एक पल भी मुँह में बिना लंड के नहीं रहना।”

राजेश ने निखिल को हाईफाइव किया और सब हँस पड़े।

पूजा ने उनकी हँसी के बीच भी निखिल के लंड को चूसना जारी रखा – उसकी जीभ हर इंच को साफ कर रही थी, उसके होंठ हर सेंटीमीटर को दबा रहे थे।

उसके गाल अंदर की ओर धँस रहे थे, वह पूरे जोश से उसे चूस रही थी।

मयूर के ज़ोरदार चुदाई के बाद अपना लंड पूजा की गांड से बाहर निकाला और बिस्तर से नीचे उतरकर पूजा के चेहरे के सामने आ गया।

उसने अपने हाथ से उसके बालों को पीछे किया और कहा, “अपना मुँह खोल, कुतिया। मेरा माल ले।”

पूजा ने निखिल के लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और मयूर की तरफ देखते हुए अपना मुँह खोल दिया।

मयूर ने अपना लंड उसके मुँह पर रखा और एक जोरदार धक्के के साथ अपना वीर्य सीधे उसके गले में उतार दिया – “आह्ह्ह… ले इसे… ले अपनी गांड की कमाई… आह्ह्ह…”

पूजा ने उसे पूरा निगल लिया, उसकी आँखें शेखर पर टिकी हुई थीं। उसके होंठों के कोने से कुछ वीर्य बाहर निकल आया, मगर उसने उसे भी अपनी जीभ से चाट लिया।

फिर बारी-बारी से सबने अपना वीर्य पूजा के मुँह में उतारा – निखिल, मोहित, अनिकेत, राजेश। हर बार पूजा ने बिना किसी हिचकिचाहट के सब कुछ निगल लिया।

वह अब एक मशीन बन चुकी थी – केवल लेने और निगलने के लिए।

जब सब खत्म हो गया, शेखर ने धीरे से पूजा के बालों को सहलाते हुए कहा, “जानू, अब हमें दिखाओ कि तुम्हारी गांड कितनी फैल गई है।”

पूजा ने बिस्तर पर पीठ के बल लेटकर अपनी टाँगों को खोला और अपने कूल्हों को फैलाकर अपना फैला हुआ गांड सबको दिखाया।

वह सिर्फ गैप नहीं था – उसकी गांड का भोसड़ा बन चूका था। उसकी अंदरूनी मांसपेशियाँ अब दूर से भी दिख रही थीं। उसका गांड एक डंपिंग होल की तरह दिखता था – फैला हुआ, लाल, चमकदार।

सब हैरानी से देखते रह गए। शेखर ने अपने पाँच इंच के सख्त लंड को हाथ में लिया और धीरे-धीरे पूजा के गांड में डाला – बिना किसी रुकावट के, बिना किसी दर्द के।

पूजा ने कुछ महसूस नहीं किया, मगर उसके चेहरे पर एक खुशी थी – क्योंकि आखिरकार उसके पति का लंड उसके अंदर था।

शेखर ने कुछ ही धक्के में अपना वीर्य उसकी गांड में उतार दिया – “आह्ह्ह… आह… आह्ह्ह… आह… आह…”

सबने तालियाँ बजाईं और चिल्लाए, “हाँ! शेखर! बधाई हो!”

शेखर ने अपना लंड बाहर निकाला और पूजा के पास लेट गया। पूजा ने उसे किस किया – एक गहरा, प्यार भरा किस। सबने यह दृश्य देखा और मुस्कुराए।

मोहित ने कहा, “भाभी, अब नहा लो। फिर हम अगला राउंड शुरू करेंगे।”

पूजा ने शेखर की तरफ देखा और फिर मोहित की तरफ – उसकी आँखों में अब भी वह भूख थी। उसने कहा, “मगर… हमारी समस्या तो हल हो गई ना? अब क्यों?”

राजेश आगे बढ़ा और उसने कहा, “भाभी, यह हमारा डिसाइडेड प्लान नहीं था।

हमने तो तय किया था कि पूरे दिन और रात चलेगा – अल्टीमेट गैंगबैंग, डबल पेनिट्रेशन, और भी बहुत कुछ। अब तुम कैसे मना कर सकती हो?”

बाकियों ने सिर हिलाया। शेखर ने पूजा का हाथ पकड़ा और धीरे से कहा, “जानू, यह सही नहीं होगा कि हम इतने स्वार्थी बनें। इन लोगों ने हमारी मदद की। अब हमारी बारी है।”

पूजा ने गहरी साँस ली और धीरे से सिर हिलाया, “ठीक है… मैं समझ गई।”

वह बिस्तर से उतरी और बाथरूम की तरफ बढ़ी – उसकी चाल अजीब थी, उसकी गांड से शेखर का वीर्य टपक रहा था, उसकी जाँघों पर बहता हुआ। सबने उसे देखा और हँसने लगे।

पूजा ने मुड़कर उनकी तरफ देखा और अपनी उँगली हिलाकर उन्हें डाँटा, “अरे शर्म करो तुम लोग! हँसो मत मेरी हालत पर।” – वही फ्लर्टी, मस्त अंदाज़ जो उसका ऑफिस में था।

फिर वह बाथरूम के अंदर चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया। पानी की आवाज़ आने लगी – वह नहा रही थी, अपने शरीर को साफ कर रही थी।

बाहर पाँचों मर्द एक-दूसरे की तरफ देखे – उनके लंड अब भी पूरी तरह सख्त थे, वियाग्रा का असर अब भी बना हुआ था। उनके चेहरे पर वही भूख थी, वही चमक।

मोहित ने फुसफुसाते हुए कहा, “दोस्तों, अब असली मज़ा शुरू होगा। डबल पेनिट्रेशन का समय आ गया है।”

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