क्यों बन गया एक पति Cuckold ? – 9

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पूजा लिविंग रूम के बीचोबीच नग्न खड़ी थी – उसके पतले, तंग शरीर पर पानी की बूँदें चमक रही थीं, उसके बाल अभी भी गीले थे और उसके कंधों और पीठ पर बिखरे हुए थे।

उसकी त्वचा अब साफ थी, मुलायम, और शावर के बाद की ताजगी से चमक रही थी।

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उसके छोटे, उभरे हुए स्तन सीधे खड़े थे – निप्पल सख्त और उत्तेजना से चुभ रहे थे।

उसके पैरों के बीच, उसकी चूत थोड़ी फूली हुई थी, लाल, पूरे दिन की चुदाई के निशान अब भी उस पर थे – थोड़ी सूजन, थोड़ी लालिमा, मगर वह अब पूरी तरह से तैयार थी।

वह अब पार्टी के लिए पूरी तरह से मूड में थी – उसकी आँखों में वह चमक थी जो पूरे दिन देखी गई थी, मगर अब वह और तेज थी, और गहरी थी।

उसने सबको देखा – उसका पति शेखर, निखिल, मोहित, मयूर, राजेश, अनिकेत – सब अपनी बीयर की बोतलें नीचे रख रहे थे, अपने कपड़े उतार रहे थे।

सबके लंड सख्त थे, खड़े – लगभग सात से आठ इंच लंबे, सिवाय उसके पति शेखर के, जिसका पाँच इंच का था।

मयूर के पास सबसे बड़ा था – मोटा, चार इंच चौड़ाई वाला, लाल और उभरी हुई नसों के साथ।

वे सब तैयार थे – फिर से शेखर की पत्नी को चोदने के लिए, शेखर के इरेक्टाइल डिसफंक्शन पर मिली जीत का जश्न मनाने के लिए।

निखिल ने फिर से वियाग्रा की गोलियाँ निकालीं – नीली गोलियाँ उसके हाथ की हथेली में चमक रही थीं। सबने एक-एक गोली ली।

पूजा ने निखिल की तरफ देखा, उसकी आवाज़ में एक चंचलता थी, “निखिल, मेरे लिए कोई गोली नहीं लाए?”

राजेश ने जवाब दिया – उसकी आवाज़ में एक तीखापन था, मगर उसमें एक प्रशंसा भी थी, “भाभी, तुम जैसी रंडियों को किसी गोली की ज़रूरत नहीं होती।

शराब तुम्हारे अंदर वह सब कर देती है जो तुम्हें चाहिए।” उसने पूजा की तरफ बीयर की एक बोतल धकेल दी।

सबने गोलियाँ निगल लीं – एक साथ, एक लय में। फिर उन्होंने अपनी बीयर की बोतलें उठाईं – “चियर्स!” – और एक ही बार में पूरी बोतलें पी गईं। बोतलें खाली हो गईं, उन्होंने उन्हें मेज पर रख दिया।

तभी मयूर ने कहा, उसकी आवाज़ में एक चालाकी थी, “भाभी, एक मिनट रुको।” वह केक के पास गया – वह केक जो अभी भी आधा कटा हुआ था, उस पर आइसिंग और क्रीम लगी हुई थी।

उसने अपने मोटे, चार इंच चौड़े लंड को केक में डाला – उसे घुमाया, उसे आइसिंग और क्रीम में लपेटा।

फिर वह पूजा के सामने खड़ा हो गया – उसके लंड पर केक लिपटा हुआ था, मीठी क्रीम और चॉकलेट उसकी लाल त्वचा पर चमक रही थी।

“अब इसे मेरे लंड से खाओ,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक आदेश था।

पूजा ने एक नटखट हँसी निकाली – एक गहरी, मादक हँसी जो कमरे में गूँजी।

वह धीरे-धीरे घुटनों पर बैठ गई – उसके घुटने फर्श पर टिक गए, उसके हाथ उसकी जाँघों पर, उसकी पीठ सीधी थी। वह मयूर के सामने थी, उसका चेहरा उसके लंड के ठीक सामने।

शेखर ने दूसरों को सोफे पर बैठने का इशारा किया – “सब लोग बैठ जाओ। मेरी पत्नी एक-एक के पास जाएगी, सबका लंड चूसेगी।”

शराब और वियाग्रा का मिश्रण अब पूरी तरह से असर दिखाने लगा था – मर्दों की आँखें लाल हो रही थीं, उनकी साँसें भारी हो रही थीं, उनके लंड और सख्त हो रहे थे।

पूजा पर भी शराब असर कर रही थी – उसके शरीर में एक हल्कापन था, एक ढीलापन, एक उदासी, और एक गहरी खुशी।

उसने मयूर के मोटे लंड को चाटना शुरू किया – पहले तो उसके सिर को, जहाँ केक लगा हुआ था।

उसकी जीभ ने क्रीम को साफ किया, फिर वह धीरे-धीरे उसके लंड को अपने मुँह में लेने लगी। उसके होंठ फैले, उसके गाल फूले, और उसने उसे अपने मुँह में समा लिया।

मयूर ने अपने लंड को उसके मुँह में धीरे-धीरे डालना और निकालना शुरू किया – उसकी आवाज़ में एक बड़बड़ाहट थी, “क्या रंडी है… क्या रंडी है…”

शुरू के पाँच मिनट धीमी चूसाई थी – पूजा धीरे-धीरे मयूर के लंड को अपने मुँह में लेती, उसे चूसती, अपनी जीभ से उसे सहलाती।

लेकिन फिर मयूर ने गति बढ़ा दी – वह अब बेरहमी से उसके गले को चोदने लगा।

उसने पूजा के बालों को दोनों हाथों से पकड़ा और उसके सिर को अपने लंड पर आगे-पीछे करने लगा – जैसे कोई मशीन हो।

“गक गक गक गक गक गक” की आवाज़ फिर से कमरे में गूँजने लगी – वह गहरी, गीली आवाज़ जो लंड के गले में जाने से आती है।

पूजा अब पूरी तरह से रंडी की तरह व्यवहार कर रही थी – यह कहना मुश्किल था कि यह शराब के कारण था या पूरे दिन के अनुभव के कारण, मगर वह एक शानदार ब्लोजॉब कर रही थी।

लेकिन कुछ ही मिनटों बाद, अनिकेत – जो पूरी तरह से नशे में था – बेचैन हो गया।

उसकी आवाज़ में एक गुस्सा था, “अरे शेखर, अपनी रंडी पत्नी को बोलो कि अब मुझे चूसे! मैं भी इंतज़ार कर रहा हूँ!”

निखिल, जो अनिकेत के पास बैठा था, उसका समर्थन करते हुए बोला, “हाँ, हाँ, इस गंदी कुतिया को यहाँ भेजो!” वह अपना लंड सहला रहा था, उसकी आँखें चमक रही थीं।

लेकिन मयूर रुकने वाला नहीं था – वह अनिकेत और निखिल की बातों को अनसुना करते हुए पूजा के गले को पूरी गति से चोद रहा था।

उसने पूजा के बालों को दोनों हाथों से पकड़ रखा था और उसके सिर को आगे पीछे कर रहा था – जैसे कोई मशीन हो, बिना रुके, बिना थके।

“गक गक गक गक” की आवाज़ अब खतरनाक लगने लगी थी – जैसे कोई गला फाड़ रहा हो।

शेखर खड़ा हुआ ही था कि अनिकेत खुद उठ खड़ा हुआ – वह जोर से मयूर के पास गया और उसने पूजा को उससे छीन लिया, एक तेज, बलपूर्वक गति में।

उसने पूजा को निखिल की तरफ धकेल दिया और मयूर को चुनौती दी – उसकी आवाज़ में एक गुस्सा था, “अरे, तू क्या समझता है? तूने सुना नहीं हमने क्या कहा?”

मयूर गुस्से से अनिकेत के सामने खड़ा हो गया – उसकी आँखों में भी वही चुनौती थी, वही आक्रामकता, “तो क्या हुआ, हुह? क्या करेगा तू?”

पीछे से, “गक गक गक गक” की आवाज़ फिर से शुरू हो चुकी थी – निखिल अपने सोफे पर बैठा था, पूजा के सिर को उसके बालों से पकड़कर ऊपर-नीचे कर रहा था, जैसे कोई सिलाई मशीन हो।

उसका आठ इंच का लंड पूजा के गले में अंदर-बाहर हो रहा था।

शेखर ने अनिकेत और मयूर के बीच कदम रखा – उसकी आवाज़ में शांति थी, मगर उसमें एक दृढ़ता भी थी, “आराम से, दोस्तों। हम यहाँ लड़ने नहीं आए हैं। ठीक है? हर किसी को पूजा मिलेगी, जितना चाहे उतना।

देखो अनिकेत – उसकी गांड को देखो। क्या तुम अपना लंड उसमें नहीं डालना चाहते जबकि निखिल उसका मुँह चोद रहा है? हुह? जाओ वहाँ, और गुस्से को छोड़ दो।”

अनिकेत ने पूजा की तरफ देखा – वह घुटनों पर थी, उसकी गांड हवा में थी, फैली हुई, तैयार। उसने एक गहरी साँस ली और वहाँ चला गया।

शेखर ने मयूर के कंधे पर एक दोस्ताना थपकी दी – “क्या यार तुभी? चलो, बीयर लो।” उसने मयूर को एक बीयर दी।

अनिकेत ने पूजा के पीछे बैठकर अपना लंड उसकी गांड में डाला – पूजा ने कोई आवाज़ नहीं की, कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

वह बस वहीं थी, अपनी जगह पर, निखिल के लंड को अपने मुँह में लिए हुए, अनिकेत के लंड को अपनी गांड में।

“गक गक गक” की आवाज़ के साथ अब गांड चुदाई की आवाज़ भी मिल गई – गीली, थपथपाती आवाज़।

कुछ मिनटों बाद, उन्होंने पोजीशन बदल ली – अब अनिकेत पूजा का मुँह चोद रहा था, और निखिल उसकी गांड।

हर लंड उसके सूजे हुए छेदों में गहराई तक जा रहा था – क्योंकि वह दो बार पहले ही दोनों तरफ से चुद चुकी थी, उसके छेद ढीले हो चुके थे।

लेकिन एक फर्क था – दिन की चुदाई में, पूजा कम से कम शुरू में कुछ दर्द और प्रतिरोध दिखाती थी।

मगर अब, वह ऐसी थी जैसे उसे कुछ महसूस ही नहीं हो रहा हो – चाहे वह उसका गला हो, उसकी गांड हो.

थोड़ी देर बाद निखिल और अनिकेत की चुदाई ख़त्म हुई,

पूजा वहीं फर्श पर पड़ी रही – उसके हाथ और घुटने फर्श पर टिके हुए थे, उसकी पीठ झुकी हुई थी, उसकी गांड हवा में थी।

उसकी साँसें भारी थीं, उसके मुँह से लार और वीर्य का मिश्रण टपक रहा था, उसकी गांड से निखिल का सफेद तरल धीरे-धीरे बह रहा था।

उसने अपना सिर उठाया और अपने चारों ओर देखा – उसकी आँखों में कोई थकान नहीं थी, बल्कि एक और भूख थी, एक और चाहत।

मोहित और राजेश अब उसके सामने आ खड़े हुए – राजेश के हाथ में एक ताजा खुली बीयर की बोतल थी, जिसमें से झाग निकल रहा था।

उनके लंड सख्त थे, तैयार। अनिकेत और निखिल मयूर के पास सोफे पर जा बैठे –

अनिकेत ने मयूर से माफी माँगी, उसकी आवाज़ में अब शर्म थी, “यार, मैं बहुत नशे में था। माफ कर दे।”

मयूर ने सिर हिलाया और उसकी पीठ थपथपाई, और फिर उन तीनों ने बीयर की बोतलें टकराईं – “चियर्स!” – और एक साथ पीना शुरू कर दिया।

लेकिन पूजा का ध्यान अब राजेश और मोहित पर था।

राजेश ने बीयर की बोतल उठाई और पूजा की तरफ बढ़ा दी – “लो भाभी, पहले यह पियो। फिर हम तुम्हारी प्यास और भी बुझाएँगे।”

पूजा ने बोतल ली और एक लंबा घूँट भरा – बीयर उसके गले से नीचे उतरी, ठंडी और कड़वी।

उसने बोतल वापस राजेश को दी, और फिर अपने घुटनों के बल उठकर बैठ गई – उसकी आँखों में एक चुनौती थी, एक निमंत्रण।

राजेश ने अपना लंबा, पतला लंड पूजा के मुँह की तरफ बढ़ाया –

“अब इसका स्वाद लो, भाभी।” पूजा ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसे अपने मुँह में ले लिया – उसके होंठ उसके चारों ओर कसे, उसकी जीभ उसे सहलाने लगी।

इसी बीच, मोहित पीछे से पूजा के पास आया – उसने उसकी कमर को पकड़ा, उसे थोड़ा ऊपर उठाया।

उसका सात इंच का लंड सख्त था, लाल, उत्तेजना से चमकता हुआ। उसने उसे पूजा की चूत की तरफ बढ़ाया – उसकी चूत अब भी गीली थी, दिन भर की चुदाई से ढीली, बिना किसी प्रतिरोध के।

उसने धीरे-धीरे उसे अंदर डाला – पूजा ने एक गहरी साँस ली, मगर कोई आवाज़ नहीं की।

वह बस वहीं रही, अपनी जगह पर, राजेश के लंड को अपने मुँह में, मोहित के लंड को अपनी चूत में।

मोहित ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया – पहले तो धीमी गति से, फिर तेज़। उसकी कमर आगे-पीछे हो रही थी, उसके अंडकोष पूजा की चूत से टकरा रहे थे –

एक गीली, थपथपाती आवाज़ जो कमरे में गूँजने लगी। “थप-थप-थप-थप” – हर धक्के के साथ, पूजा का शरीर हिलता, उसके स्तन झूलते।

राजेश ने पूजा के बालों को पकड़ा और अपने लंड को उसके मुँह में और गहराई तक धकेलने लगा – “गक-गक-गक-गक” की आवाज़ फिर से शुरू हो गई।

इस बार पूजा ने कोई प्रतिरोध नहीं दिखाया – उसने अपना गला पूरी तरह से खोल दिया, राजेश के लंबे लंड को अपने अंदर समा लिया।

उसकी आँखों में पानी आ गया, मगर उसने कोई शिकायत नहीं की।

कमरे में अब सिर्फ यही आवाज़ें थीं – राजेश के लंड के पूजा के मुँह में अंदर-बाहर होने की गीली आवाज़, मोहित के लंड के पूजा की चूत में अंदर-बाहर होने की थपथपाहट,

और बीच-बीच में मयूर, अनिकेत और निखिल की बीयर पीने और हँसने की आवाज़ें।

शेखर धीरे-धीरे मोहित और राजेश के पास आया – उसके चेहरे पर एक हिचकिचाहट थी, मगर उसकी आँखों में एक चाह थी।

उसने अपनी आवाज़ में एक झिझक के साथ कहा, “अरे, क्या मैं तुम दोनों के साथ जुड़ सकता हूँ?”

राजेश, जो अपने पतले लेकिन लंबे लंड को पूजा के गले में जोर-जोर से डाल रहा था, जोर से हँसा।

उसकी हँसी कमरे में गूँजी – एक तीखी, मज़ाक भरी हँसी।

उसने पीछे मुड़कर दूसरों को आवाज़ लगाई, “अरे निखिल, मयूर, अनिकेत! देखो तो! शेखर हमसे अपनी ही पत्नी को चोदने की इजाज़त माँग रहा है! हा हा हा!”

मयूर, निखिल और अनिकेत – जो सोफे पर बैठे बीयर पी रहे थे – सब जोर से हँसे। उनकी हँसी राजेश की हँसी से मिलकर कमरे में भर गई।

वे शेखर की तरफ इशारा करते हुए हँस रहे थे, बीयर के घूँट भरते हुए, उनकी आँखों में मज़ाक और उत्तेजना दोनों थी।

पीछे से “गक-गक-गक-गक” की आवाज़ अभी भी बज रही थी – राजेश का लंड पूजा के गले में अंदर-बाहर हो रहा था, और उसकी गीली, गहरी आवाज़ हँसी के बीच भी सुनाई दे रही थी।

मोहित, जो अपने आठ इंच के लंड को पूजा की ढीली चूत में जोर-जोर से डाल रहा था, भी हँसा।

हर धक्के के साथ, उसकी त्वचा पूजा की चूत से टकराती – “थप-थप-थप” की आवाज़, उसकी चूत से अजीब सी गीली आवाज़ें निकल रही थीं।

उसने कहा, “शेखर यार, तुम भी कितने बेवकूफ हो! भूल गए कि पूजा तुम्हारी अपनी पत्नी है? हमसे इजाज़त लेने की क्या ज़रूरत है?”

शेखर ने एक शर्मिंदा, लाल मुस्कान दी – उसके गाल थोड़े लाल हो गए थे, मगर उसकी आँखों में कोई शर्म नहीं थी।

उसने मोहित से कहा, “मुझे उसके नीचे घुसने दो… मैं उसकी गांड चोदना चाहता हूँ।”

उन्होंने एक-दूसरे को समायोजित किया – एक धीमी, तालमेल भरी हरकत। शेखर फर्श पर लेट गया, उसकी पीठ टाइल्स पर, उसका पाँच इंच का लंड सख्त और तैयार।

पूजा को उसके ऊपर बैठाया गया – उसकी गांड शेखर के लंड के ठीक ऊपर। फिर वह धीरे-धीरे नीचे बैठी, शेखर का लंड उसकी गांड में समा गया – एक गहरी, गीली आवाज़ के साथ।

अब राजेश ने मोहित की जगह ली – उसने अपना लंबा लंड पूजा की चूत में डाला, जो अब तक मोहित के लंड से भीगी और ढीली हो चुकी थी।

मोहित खड़ा हो गया और पूजा के मुँह को चोदना शुरू कर दिया – उसने उसके बालों को पकड़ा और अपने सात इंच के लंड को उसके गले में डालना शुरू किया।

वे तीनों लगभग बीस मिनट तक उसे चोदते रहे – एक के बाद एक, अपनी जगहें बदलते हुए। कभी राजेश पूजा की चूत में होता, कभी मोहित।

कभी शेखर उसके मुँह में, कभी राजेश। हर बार जब वे जगह बदलते, पूजा के छेदों से लंड निकलने पर गीली, चूसने वाली आवाज़ आती – और फिर दूसरा लंड उसी छेद में घुस जाता।

जब तक वे खत्म हुए, पूजा की गांड और चूत एक बार फिर से चौड़ी हो चुकी थीं – उसके छेद अब पूरी तरह से फैले हुए थे, लाल, सूजे हुए।

“गक-गक-गक-गक” की आवाज़ पूरे बीस मिनट बिना रुके गूँजती रही थी – एक लगातार, लयबद्ध आवाज़ जो अब कमरे का हिस्सा बन चुकी थी।

शराब और वियाग्रा के असर ने मर्दों को असामान्य ताकत दी थी – वे तीनों भूखे कुत्तों की तरह उसे चोद रहे थे, बिना थके, बिना रुके।

उनकी साँसें भारी थीं, उनकी त्वचा चमक रही थी पसीने से, उनके लंड लाल और उभरी हुई नसों के साथ सख्त थे।

फिर राजेश, जो उस समय पूजा की चूत में था, जोर से कराहने लगा – “आआआआआ… ह्ह्ह्ह… आआआआआआ…” उसकी कराह कमरे में गूँजी, उसकी आवाज़ में एक गहरी, आदिम रिहाई थी।

वह चिल्लाया, “ले कुतिया…ले!” और उसने अपना वीर्य पूजा की चूत में गहराई तक छोड़ दिया – गर्म, गाढ़ा तरल उसकी चूत में भर गया।

उसी पल, मोहित ने भी पूजा की गांड में एक गहरा धक्का दिया और अपना वीर्य उसकी गांड में छोड़ दिया – उसके लंड से वीर्य की धार उसकी गांड में गहराई तक गई।

और शेखर ने भी अपना वीर्य पूजा के गले में छोड़ दिया – उसने उसके सिर को पकड़ा और अपने वीर्य को उसके गले में गहराई तक डाला।

फिर वे सब बाहर निकल गए – एक-एक करके, उनके लंड पूजा के छेदों से बाहर आए।

और जैसे ही वे बाहर निकले, पूजा के हर छेद से वीर्य बहने लगा – उसके मुँह से सफेद तरल टपक रहा था, उसकी चूत से राजेश का वीर्य धीरे-धीरे बह रहा था, उसकी गांड से मोहित का वीर्य निकल रहा था।

पूजा वहीं फर्श पर पड़ी रही – उसके छेदों से वीर्य टपक रहा था, उसका शरीर ढीला और थका हुआ था, मगर उसके चेहरे पर एक संतुष्टि थी।

शेखर, मोहित और राजेश सोफे पर जा बैठे – उन्होंने एक और बीयर खोली, अपनी साँसें सामान्य करते हुए।

रात के आठ बज चुके थे – बाहर अंधेरा था, मगर कमरे में बीयर, वीर्य और पसीने की गंध भरी हुई थी।

शेखर ने निखिल, मयूर और अनिकेत की तरफ देखा – उसकी आवाज़ में एक घोषणा थी, “अब तुम लोगों की बारी है, दोस्तों!”

तीनों खड़े हुए – उनके लंड अभी भी सख्त थे, वियाग्रा और शराब का असर अभी खत्म नहीं हुआ था।

वे पूजा के पास गए, जो अभी भी फर्श पर पड़ी हुई थी, अपनी गांड और चूत से वीर्य इकट्ठा कर रही थी और उसे चाट रही थी।

उसने अपनी उँगलियाँ अपनी चूत में डालीं, फिर उन्हें बाहर निकाला और चाटा – उसकी आँखें बंद थीं, उसके चेहरे पर एक गहरी तृप्ति थी।

मयूर ने यह देखा और मुस्कुराया – “अरे भाभी, तुम्हें यह चाहिए?”

पूजा ने नशे भरी, अस्पष्ट आवाज़ में जवाब दिया – “हाँ… मुझे यह चाहिए… मगर, यह अंदर गहराई में जमा है… क्या तुम मेरी मदद करोगे?”

मयूर पूजा के पास लेट गया – उसने उसकी एक टाँग उठाई और अपने आठ इंच लंबे, चार इंच मोटे लंड को उसकी गांड में डाला।

मोहित का वीर्य पहले से ही उसकी गांड में था, जो लुब्रिकेंट बन गया – मयूर का लंड एक या दो बार अंदर-बाहर हुआ, वह गांड के अंदर घूमता रहा ताकि मोहित का वीर्य बाहर निकल आए।

फिर वह खड़ा हो गया और पूजा से कहा, “लो भाभी, अब तुम इसे चूस सकती हो।”

पूजा ने घुटनों के बल उठने की कोशिश की, मगर शराब के नशे में वह गिर गई। निखिल, जो थोड़ा नशे में था, उसने उसे पकड़ा – “ओह-ओह, आराम से, रंडी! शेखर! तुम्हारी रंडी पत्नी पूरी तरह से नशे में है!”

इससे पहले कि पूजा मयूर के लंड को पकड़ पाती और उस पर से मोहित के वीर्य को चाट पाती, निखिल ने उसे पीछे खींच लिया और नीचे लिटा दिया।

उसने अपने लंड को पूजा की चूत पर रखा और अंदर डाल दिया – “राजेश का वीर्य तुम्हारी चूत में है, मैं उसे बाहर निकालता हूँ तुम्हारे लिए।”

उसने तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया – उसका लंड पूजा की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था, राजेश के वीर्य को बाहर निकालते हुए।

इधर, मयूर पूजा के मुँह के पास आया – उसने अपना वीर्य-चुपड़ा हुआ लंड पूजा के होंठों पर रखा। लंड पर मोहित के वीर्य की महक थी, और उसके साथ पूजा की गांड का स्वाद भी मिला हुआ था।

पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसे अपने मुँह में ले लिया – उसने उसे पूरी तरह से चूसा, साफ किया।

निखिल नीचे से तेज़ी से चोद रहा था – उसकी त्वचा पूजा की चूत से टकरा रही थी, “थप-थप-थप” की आवाज़ फिर से तेज़ हो गई।

फिर वह भी बाहर निकल गया – वह खड़ा हुआ, उसका लंड राजेश के वीर्य से चुपड़ा हुआ था।

मयूर फिर से लेट गया और पूजा ने उसके लंड को अपनी गांड में ले लिया – धीरे-धीरे, पूरी तरह से।

निखिल ने अपना वीर्य-चुपड़ा हुआ लंड पूजा के मुँह की तरफ बढ़ाया – “लो भाभी, लो इसे।”

पूजा ने उसे चाटना शुरू किया – उसकी जीभ निखिल के लंड के चारों ओर घूम रही थी, राजेश के वीर्य को साफ करते हुए।

गांड फैलने और जाँघों के कूल्हों से टकराने की आवाज़ें फिर से कमरे में गूँजने लगीं – मयूर नीचे से चोद रहा था, उसका मोटा लंड पूजा की गांड को और फैला रहा था।

मगर पूजा व्यस्त थी – वह निखिल के लंड को चाट रही थी, राजेश के वीर्य को अपने मुँह में ले रही थी।

अनिकेत, जो अब तक इंतज़ार कर रहा था, नीचे बैठ गया और मयूर से रुकने को कहा ताकि वह अपना लंड पूजा की चूत में डाल सके।

उसने पूजा की पीठ को थोड़ा पीछे धकेला और अपना लंड उसकी चूत में गहराई तक डाल दिया – जबकि मयूर का मोटा लंड अभी भी उसकी गांड में था।

पूजा ने अपने दोनों हाथों से सहारा लिया – उसने मयूर की छाती पर अपने हाथ रखे, उसकी पीठ एक आर्च बनाती हुई।

उसने अपना सिर पूरी तरह से पीछे की ओर घुमाया – उल्टी स्थिति में, उसके बाल मयूर के चेहरे पर बिखर गए। मयूर ने निखिल से कहा, “अरे निखिल, इसके बाल संभालो।”

निखिल मयूर के ऊपर खड़ा हो गया – उसने अपने दोनों पैर मयूर के कंधों के पास रखे, उसका संतुलन ठीक किया।

फिर वह थोड़ा नीचे झुका, उसने पूजा के बालों को इकट्ठा किया – उन्हें एक हाथ में जकड़ा, उसके सिर को पकड़ा।

फिर उसने अपना लंड पूजा के मुँह की तरफ बढ़ाया और उसे अंदर डाल दिया।

अब तीनों एक साथ थे – एक ही लय में, एक ही ताल में। निखिल ऊपर से पूजा के मुँह को चोद रहा था, उल्टी स्थिति में।

उसका लंड उसके गले में गहराई तक जा रहा था, उसके अंडकोष उसकी नाक से टकरा रहे थे।

नीचे, मयूर अपने मोटे, चार इंच चौड़े लंड को पूजा की गांड में डाल रहा था – हर धक्के के साथ उसकी गांड और फैलती जा रही थी।

और अनिकेत पूजा की चूत में अपना लंड डाल रहा था – उसकी चूत अब पूरी तरह से ढीली हो चुकी थी, बिना किसी प्रतिरोध के लंड को अंदर ले रही थी।

पूजा का छोटा, पतला शरीर अब तीन बड़े, मजबूत शरीरों के बीच फँसा हुआ था – वह हिल नहीं सकती थी, वह सिर्फ ले सकती थी।

और वह ले रही थी – हर इंच, हर धक्का, हर गहराई को। उसकी आँखें बंद थीं, उसका मुँह खुला था, उसकी गांड और चूत फैली हुई थीं।

जल्द ही उन्होंने अपनी पूरी गति पकड़ ली – जैसे-जैसे उन्होंने अपनी स्थितियों को सहज बना लिया, उनकी चाल और तेज़ हो गई।

त्वचा की टकराहट की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी – मयूर की जाँघों का पूजा की गांड से टकराना, अनिकेत के कूल्हों का पूजा की चूत से टकराना।

गांड के फैलने की अजीब सी गीली आवाज़, चूत में लंड के अंदर-बाहर होने की थपथपाहट, और ऊपर से “गक-गक-गक-गक” की वह लय – सब एक साथ मिलकर एक जंगली, आदिम संगीत बना रहे थे।

पूजा के शरीर से अब कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी – वह सिर्फ वहाँ थी, एक गुड़िया की तरह, तीन मर्दों के बीच फँसी हुई।

उसकी साँसें भारी थीं, उसके मुँह से लार टपक रही थी, उसकी चूत और गांड से वीर्य और तरल पदार्थ बह रहे थे।

मगर उसके चेहरे पर कोई दर्द नहीं था – सिर्फ एक गहरी, अंधी तृप्ति थी, एक ऐसी औरत की तृप्ति जो अपनी सीमाओं को पार कर चुकी थी।

लगभग बीस मिनट तक वे तीनों – निखिल, मयूर और अनिकेत – पूजा के साथ खेलते रहे।

उन्होंने कई बार अपनी स्थितियाँ बदलीं – कभी निखिल पूजा के मुँह में होता, कभी मयूर। कभी अनिकेत उसकी चूत में होता, कभी निखिल उसकी गांड में।

हर बार जब वे जगह बदलते, पूजा के छेदों से गीली, चूसने वाली आवाज़ें आतीं – उसकी चूत और गांड अब इतनी ढीली हो चुकी थीं कि लंड आसानी से अंदर-बाहर होते थे।

पूजा का शरीर अब पूरी तरह से टूट चुका था – उसकी मांसपेशियाँ ढीली हो गई थीं, उसके जोड़ों में कोई ताकत नहीं बची थी।

वह बस वहाँ थी, एक गुड़िया की तरह, तीन लंडों के बीच झूलती हुई। हर धक्के के साथ उसका शरीर हिलता, उसके स्तन झूलते, उसके बाल इधर-उधर बिखरते।

जब वे खत्म हो गए, तो वे तीनों उसके सामने खड़े हो गए – उनके लंड अभी भी सख्त थे, वीर्य से चमकते हुए।

मयूर ने आदेश दिया, उसकी आवाज़ में एक दृढ़ता थी, “घुटनों पर बैठो, भाभी।”

पूजा ने धीरे-धीरे अपने आप को घुटनों पर बैठाया – उसकी हरकतें धीमी और अनाड़ी थीं शराब के नशे के कारण।

वह लड़खड़ाई, मगर फिर भी वह घुटनों पर आ गई। उसका चेहरा उन तीनों की तरफ था, उसके आधे बंद, लाल आँखों में एक धुँधली मुस्कान थी।

उसके मुँह से लार टपक रही थी – वह उसकी ठुड्डी से होती हुई, उसकी गर्दन पर, फिर उसके छोटे, उभरे हुए स्तनों पर, और फिर उसके पेट की तरफ बह रही थी।

उसका शरीर चमक रहा था – पसीने, वीर्य और लार के मिश्रण से।

अनिकेत ने अचानक कहा, उसकी आवाज़ में एक चालाकी थी, “रुको दोस्तों, मेरे पास एक आइडिया है। शेखर, ठंडी बीयर देना।”

शेखर, जो सोफे पर बैठा यह सब देख रहा था, तुरंत उठा। उसने मेज से एक ठंडी बीयर की बोतल उठाई और अनिकेत को दे दी।

अनिकेत ने बोतल ली और पूजा के सामने झुका – उसने उसके गालों पर हल्के से थपकी दी, उसे होश में लाने की कोशिश करते हुए। “अरे भाभी, यह बीयर लो।”

पूजा ने धीमी आवाज़ में, अस्पष्ट शब्दों में कहा, “हुंह?… क्या… बीयर?… मुझे बीयर पसंद है…” वह साफ-साफ बोलने की कोशिश कर रही थी, मगर शराब के नशे के कारण उसके शब्द लड़खड़ा रहे थे।

उसने बोतल को अपने हाथों में लिया – उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं।

निखिल, जो खुद भी नशे में था, ने कहा, उसकी आवाज़ में एक हँसी थी, “यह रंडी पूरी तरह से नशे में है, दोस्तों।”

तीनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा – उनकी आँखों में एक समझ थी, एक साझा मज़ाक।

फिर वे सब जोर से हँसे – उनकी हँसी कमरे में गूँजी, बीयर और वीर्य की गंध में मिल गई।

मयूर ने फिर शेखर को आवाज़ लगाई, “अरे शेखर, क्या तुम अपनी रंडी को निगलने में मदद करोगे?”

शेखर फिर से उठा – उसके चेहरे पर एक गर्व था, एक ऐसे पति का गर्व जो अपनी पत्नी की सेवा कर रहा हो। “बिल्कुल।”

वह पूजा के पास आया और उसके सिर को अपने हाथों में ले लिया – उसकी उँगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं।

पूजा ने नशे भरी आवाज़ में कहा, “शेखी… मेरे प्यारे पति… तुम कहाँ थे?” उसके शब्द लड़खड़ा रहे थे, उसकी आवाज़ में एक बचकानी मासूमियत थी।

शेखर ने धीरे से, प्यार से कहा, “हाँ जानू, मैं यहाँ हूँ। अब अपना मुँह खोलो… आआआ… तुम्हें वीर्य पसंद है न?… हुंह?… खोलो जानू… आआआ…” उसने उसके सिर को पकड़ा, उसे स्थिर किया।

पूजा ने अपना मुँह खोला – उसके होंठ फैले, उसकी जीभ बाहर झूल रही थी।

उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, एक बचकानी, मासूम मुस्कान। उसने अस्पष्ट शब्दों में कहा, “आआआ… आआआ… आओ बॉयज़… आआआ…”

तीनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और हँसे – उनके लंड उनके हाथों में थे, वे धीरे-धीरे उन्हें सहला रहे थे।

फिर एक-एक करके, वे उसके सिर के ऊपर आए और अपना वीर्य सीधे उसके खुले मुँह में छोड़ा – गर्म, गाढ़ा तरल उसके मुँह में भर गया।

पहले मयूर, फिर निखिल, फिर अनिकेत – तीन धाराएँ एक के बाद एक उसके मुँह में गिरीं।

फिर अनिकेत ने आदेश दिया, “भाभी, अब अपने मुँह में थोड़ी बीयर डालो और फिर निगलो।”

पूजा ने बोतल उठाई – उसके हाथ काँप रहे थे, बोतल उसके होठों से टकराई।

उसने अपने मुँह में बीयर डाली – वीर्य और बीयर का मिश्रण उसके मुँह में घुल गया। फिर उसने एक बार में सब कुछ निगल लिया – उसका गला हिला, उसकी आँखें बंद थीं।

शेखर ने, उसके बालों को सहलाया।

“मेरी प्यारी पत्नी,” उसने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ में एक गहरा प्यार था।

पीछे से, सोफे पर बैठे मोहित ने एक मज़ाक किया – उसकी आवाज़ में एक तीखापन था, “प्यारी पत्नी नहीं… एक रंडी पत्नी। शेखर, तुम्हें अपनी बात सही करनी चाहिए।”

सब जोर से हँसे – उनकी हँसी कमरे में गूँजी। और पूजा, वह भी हँसी – धीमी, नशीली, टूटी हुई हँसी।

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