शाम के छह बज रहे थे जब मयूर की आँखें अचानक खुल गईं।
उसकी आँखें जल रही थीं, नींद के बोझ से भारी, और उसके कानों में एक तेज़ आवाज़ गूँज रही थी – वह अलार्म जो उसने सोने से पहले सेट किया था।
उसने अपने हाथ से मोबाइल को टटोला और अलार्म बंद कर दिया। फिर उसने समय देखा – शाम के छह बज रहे थे। उसकी नींद उड़ गई, और वह पूरी तरह से सचेत हो गया।
उसने जल्दी से उठकर बाकी सबको जगाना शुरू किया – उसकी आवाज़ में एक हड़बड़ी थी, “उठो यारो! छह बज गए हैं! हमें लेट नाइट पार्टी की तैयारी करनी है!”
सब नींद से उठे – उनके शरीर थके हुए थे, उनकी आँखें लाल थीं, लेकिन उनके चेहरों पर एक संतुष्टि थी।
शेखर ने अपनी आँखें मलते हुए समय देखा और एक गहरी साँस ली – “अरे यार, इतनी देर हो गई! चलो सब तैयार हो जाओ।
मोहित और राजेश, तुम दोनों जाओ और कुछ ड्रिंक्स और खाने का इंतजाम करो।”
निखिल ने यह सुनते हुए एक और बात याद दिलाई – उसकी आवाज़ में एक चालाकी थी, “मोहित भाई, कुछ वियाग्रा भी लेते आना। रात लंबी है।”
सब हँसे। मोहित ने पूछा, “कौन सी ड्रिंक लाऊँ? क्या पसंद है सबको?”
निखिल ने कहा, “मुझे तो कुछ भी चलेगा, लेकिन अगर पूछो तो मैं व्हिस्की पसंद करूँगा।”
लेकिन राजेश ने एक दिलचस्प बात याद दिलाई – उसकी आवाज़ में एक चंचलता थी, “अरे, पूजा भाभी की इच्छा को मत भूलो। गोल्डन शावर का क्या होगा?”
निखिल ने एक पल के लिए सोचा, फिर उलझन में पूछा, “व्हिस्की और गोल्डन शावर में क्या कनेक्शन है? व्हिस्की पीने से हमें पेशाब तो आएगा ही, बस रुकेगा थोड़ी देर।”
शेखर ने सबको समझाया – उसकी आवाज़ में एक तार्किकता थी, “देखो, अगर हम बीयर पीएँगे, तो हमें बार-बार पेशाब आएगा।
इस तरह पूजा की इच्छा पूरी होगी। बीयर में सोडा ज्यादा होता है, इसलिए जल्दी पेशाब आता है।”
पूजा, जो अभी तक बिस्तर पर आधी नींद में पड़ी थी, यह सुनकर अचानक मुस्कुरा दी – उसकी आँखों में नींद और उत्तेजना का मिश्रण था।
उसने धीमी आवाज़ में कहा, “यह तो बहुत इंटरेस्टिंग होगा – लौड़ो से बीयर का स्वाद चखना।”
उसके शब्दों ने कमरे में एक नई ऊर्जा भर दी – सब तैयार होने लगे। मोहित और राजेश ने जल्दी से कपड़े पहने और बाजार की तरफ निकल गए। बाकी सबने नहा-धोकर तैयार होना शुरू किया।
एक घंटे बाद, जब मोहित और राजेश वापस लौटे, तो उनके हाथों में बीयर के कई कार्टन थे, वियाग्रा की गोलियाँ, और ढेर सारा खाना।
उनके पास एक केक भी था – शेखर के लिए, उसकी लंड के खड़े होने पर जीत का जश्न मनाने के लिए।
सबने अच्छे कपड़े पहने थे – वे फोटो खिंचवाना चाहते थे, इस पल को यादगार बनाना चाहते थे।
पूजा ने एक सेक्सी शिफॉन सिल्क की साड़ी पहनी थी – हल्के गुलाबी रंग की, जो उसके पतले शरीर पर बहुत सुंदर लग रही थी।
उसने मेकअप भी किया था – आईलाइनर, लिपस्टिक, बिंदी – वह शानदार दिख रही थी।
लेकिन साड़ी के नीचे वह पूरी तरह से नंगी थी – उसने सिर्फ ब्लाउज पहना था, बिना ब्रा के, क्योंकि वह जानती थी कि कुछ ही पलों में बाकी कपड़े भी उतार दिए जाएँगे।
केक को लिविंग रूम के बीचोबीच रखा गया। शेखर ने मोहित और राजेश की तरफ देखा – उसकी आँखों में आभार था, एक गहरी कृतज्ञता।
उसने अपनी आवाज़ में भावना के साथ कहा, “दोस्तों, तुम लोगों ने मेरी इस स्थिति में बहुत उदारता दिखाई।
मैं तुम सबका शुक्रगुज़ार हूँ कि तुमने पूजा और मेरी शादी को बचाया। तुम सच्चे दोस्त हो, और मैं हमेशा तुम्हारा आभारी रहूँगा।”
फिर उसने केक काटा। पूजा ने पहले शेखर को केक खिलाया – उसने अपनी उँगलियों से थोड़ा केक लिया और उसे शेखर के होंठों पर रखा।
फिर शेखर ने पूजा को केक खिलाया – उसने उसी तरह उसे खिलाया। निखिल ने इस खुशी के पल की तस्वीरें खींचीं।
केक खाने के बाद, शेखर ने फ्रिज से बीयर की बोतलें निकालीं।
मोहित और राजेश बहुत सारी बीयर लाए थे – वे जानते थे कि उन्हें जितना हो सके उतना पेशाब करना होगा, और रात सबसे जंगली होनी चाहिए।
शेखर सबको बीयर बाँट रहा था, जबकि पूजा स्नैक्स सर्व कर रही थी।
एक-दो बीयर के बाद, अनिकेत ने म्यूजिक सिस्टम चालू कर दिया – तेज़, थिरकने वाला संगीत कमरे में गूँजने लगा।
सब डांस करने लगे – पहले तो हल्के-फुल्के स्टेप्स, लेकिन धीरे-धीरे माहौल बदलने लगा। हर मर्द के हाथ पूजा के शरीर के हर हिस्से को छूने लगे – उसकी कमर, उसके कूल्हे, उसके स्तन, उसकी जाँघें।
वे उसे घेरकर डांस कर रहे थे, उसके शरीर को सहला रहे थे, उसे अपने करीब खींच रहे थे।
दो या तीन बीयर पीने के बाद भी, मर्द डांस और खाना जारी रखे हुए थे। लेकिन पूजा ने अचानक डांस करना बंद कर दिया – उसने अपने शरीर से दूसरे मर्दों के हाथों को हटाया, और बाथरूम की तरफ जाने लगी।
उसकी आवाज़ में एक हड़बड़ी थी, “मुझे पेशाब करना है।”
वह बाथरूम की तरफ बढ़ी, और उसके पीछे निखिल भी चलने लगा।
पूजा ने बाथरूम का दरवाजा खोला और अंदर जाने लगी, लेकिन जैसे ही वह अंदर घुसी, उसने देखा कि दरवाजा बंद नहीं हो रहा है – निखिल उसे रोके हुए था।
पूजा ने पीछे मुड़कर देखा – उसकी आँखों में एक उलझन थी, “क्या हुआ? मुझे पेशाब करना है। तुम क्या चाहते हो?”
निखिल ने उसकी आँखों में देखा – उसकी आँखों में एक गहरी चाह थी, एक इच्छा जो अब और नहीं रुक सकती थी। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “मुझे भी पेशाब करना है।”
उनकी नज़रें मिलीं – एक लंबा, गहरा पल। पूजा की आँखों में एक चमक आई – वह समझ गई थी। वह पल, जिसका उसने सपना देखा था, अब हकीकत बनने वाला था।
निखिल ने अपनी पैंट का ज़िप खोलते हुए आदेश दिया, उसकी आवाज़ में एक सख्ती थी, एक ऐसे आदमी की सख्ती जो जानता है कि वह क्या चाहता है – “भाभी, अपना मुँह चौड़ा खोलकर मेरे सामने पेशाब करो!”
पूजा ने एक पल के लिए संकोच किया – उसकी आँखों में एक उलझन थी, एक चिंता। उसने अपने कपड़ों की तरफ देखा, फिर निखिल की तरफ।
उसकी आवाज़ में एक हिचकिचाहट थी, “लेकिन मेरे कपड़े… वे बर्बाद हो जाएँगे! मुझे थोड़ी देर के लिए…”
लेकिन निखिल ने उसकी बात काट दी – उसकी आवाज़ में एक जिद थी, एक ऐसे आदमी की जिद जो अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए अधीर था।
उसने अपनी आँखों में पूजा की आँखों में देखते हुए कहा, “नहीं भाभी, मैं तुम्हें इन्हीं कपड़ों में पेशाब पीते हुए देखना चाहता हूँ। यह मेरी इच्छा है।”
पूजा ने एक गहरी साँस ली – उसके चेहरे पर एक समर्पण था, एक ऐसी औरत का समर्पण जो जानती है कि उसे क्या करना है।
उसने धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक ऊपर उठाया – हल्के गुलाबी रंग की शिफॉन सिल्क की साड़ी उसकी जाँघों के चारों ओर इकट्ठा हो गई, उसकी नंगी चूत को पूरी तरह से उजागर करते हुए।
उसके ब्लाउज के नीचे कोई ब्रा नहीं थी, उसके स्तनों के निप्पल ब्लाउज के पतले कपड़े के नीचे साफ दिख रहे थे।
वह धीरे-धीरे फर्श पर बैठ गई – बाथरूम की टाइल्स ठंडी थीं, मगर उसके शरीर की गर्मी उसे महसूस नहीं होने दे रही थी।
उसी समय, निखिल ने अपना आठ इंच का लंड पूरी तरह से बाहर निकाल लिया था। वह सख्त था, उसकी नसें उभरी हुई थीं, उसके सिर पर उत्तेजना की एक बूँद चमक रही थी।
पूजा ने पेशाब करना शुरू किया – गर्म, साफ तरल उसकी चूत से निकलकर फर्श पर गिरने लगा। एक हल्की सी फुहार की आवाज़ आई, जो बाथरूम की शांति में गूँज रही थी।
निखिल उसे देख रहा था – उसकी नज़र पूजा की पेशाब करती हुई चूत पर टिकी हुई थी, उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान थी।
फिर उसने पूजा की आँखों में देखा – उसकी आवाज़ में एक आदेश था, मगर उसमें एक कोमलता भी थी, “अपना मुँह खोलो भाभी।”
पूजा ने अपनी आँखें निखिल की आँखों से मिलाईं – उसकी आँखों में कोई डर नहीं था, सिर्फ एक गहरी चाह थी।
उसने धीरे-धीरे अपना मुँह खोलना शुरू किया – पहले तो हल्का सा, फिर चौड़ा। उसकी जीभ अंदर दबी हुई थी, उसके होंठ फैले हुए थे।
निखिल थोड़ा करीब आया – उसके कदम हल्के थे, मगर उसके लंड से उत्तेजना टपक रही थी।
उसने अपने लंड को पूजा के खुले मुँह की तरफ निशाना बनाया और पेशाब करना शुरू किया – पहले तो उसका निशाना सही नहीं लगा।
पेशाब की एक धार पूजा के माथे पर गिरी, उसकी बिंदी को धोते हुए, फिर उसके बालों में बह गई। पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी।
निखिल ने अपने लंड की दिशा ठीक की – उसने अपने हाथ से उसे थोड़ा नीचे झुकाया, और अब पेशाब की धार सीधे पूजा के खुले मुँह में जा गिरी।
निखिल की बीयर की गंध वाला पेशाब – गर्म, थोड़ा कड़वा, बीयर की हल्की महक के साथ – पूजा के मुँह में भरने लगा।
कुछ उसके गले में चला गया, कुछ उसके मुँह के कोनों से निकलकर उसकी ठुड्डी पर बहने लगा।
फिर वह उसकी गर्दन पर, उसके ब्लाउज पर, उसकी साड़ी पर बहने लगा।
निखिल का बीयर की महक वाला गर्म पेशाब पूजा के पूरे शरीर पर फैल रहा था – उसके बाल, उसका चेहरा, उसका ब्लाउज, उसकी साड़ी, सब कुछ भीगता जा रहा था।
पूजा की आँखें बंद थीं, मगर उसके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि थी, एक ऐसी औरत की संतुष्टि जो अपनी गहरी इच्छा को पूरा होते देख रही है।
पेशाब की आवाज़ बाथरूम में गूँज रही थी – एक लगातार, बहती हुई धारा जो टाइल्स पर गिर रही थी और शरीर से टकरा रही थी।
बाथरूम में बीयर और पेशाब की मिली-जुली गंध भर गई थी – एक तीखी, तेज गंध जो नथुनों को झकझोर रही थी, मगर पूजा के लिए यह किसी तरह से मादक थी।
थोड़ी देर बाद, निखिल ने अपनी धार रोकी – उसने अपने लंड को थोड़ा ऊपर उठाया और पेशाब बंद कर दिया।
पूजा ने अपनी बंद आँखें खोलीं – उसकी पलकों पर पेशाब की बूँदें चमक रही थीं। उसने अपना पेशाब से भरा मुँह खोला, उसके गाल फूले हुए थे, उसकी आँखों में एक सवाल था।
निखिल ने आदेश दिया, उसकी आवाज़ में एक क्रूरता थी, “अब निगलो, रंडी!”
पूजा ने उसकी आँखों में देखते हुए निगल लिया – उसके गले से एक गटकने की आवाज़ आई, और पेशाब उसके अंदर चला गया। उसने अपना मुँह और चौड़ा खोल दिया, बिना निखिल के किसी आदेश के।
निखिल ने देखा और उसके चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई – “आ गई तुम्हारी असली पहचान, कुतिया भाभी। तुम्हें पसंद आया, है न?”
पूजा ने सिर हिलाया – उसकी आँखों में हाँ थी, उसके चेहरे पर समर्पण था। वह चुप थी, मगर उसकी चुप्पी में सब कुछ साफ था।
निखिल ने फिर से पेशाब करना शुरू किया – गर्म धारा फिर से पूजा के मुँह में जा गिरी। इस बार पूजा ने निखिल के आदेश का इंतज़ार नहीं किया – जैसे ही उसका मुँह भर गया, उसने खुद ही निगल लिया।
फिर मुँह खोल लिया। फिर से धारा। फिर से निगलना। यह एक लय में बदल गया – निखिल का पेशाब करना, पूजा का निगलना, फिर से करना, फिर से निगलना।
बाथरूम में बस यही आवाज़ें थीं – पेशाब की बहती धारा, और पूजा के गटकने की आवाज़।
इस बीच, लिविंग रूम में संगीत बज रहा था, मगर शेखर की नज़र कमरे में घूम रही थी। उसने देखा कि निखिल और पूजा दोनों गायब हैं।
उसने अनिकेत की तरफ देखा – अनिकेत थोड़ा नशे में था, उसकी आँखें लाल थीं, उसके हाथ में बीयर की बोतल थी।
शेखर ने पूछा, “अनिकेत, निखिल और पूजा कहाँ हैं?”
अनिकेत ने अपने नशे भरे अंदाज में जवाब दिया, उसकी आवाज़ में एक लापरवाही थी, “पता नहीं यार… निखिल शायद तुम्हारी रंडी पत्नी को कहीं चोद रहा होगा किसी कोने में।”
सब हँस पड़े – उनकी हँसी कमरे में गूँजी, बीयर और मस्ती के माहौल में। मोहित भी हँसा, लेकिन फिर उसका चेहरा गंभीर हो गया – “हाँ यार, सीरियसली… वे दोनों कहाँ गए?”
शेखर ने अपनी बीयर की बोतल नीचे रखी और लिविंग रूम से बाहर निकला – वह आम गलियारे में आया जहाँ बाथरूम था।
उसके कानों में एक आवाज़ आई – पानी बहने की आवाज़। उसने सोचा कि कोई शॉवर ले रहा है या कुछ और।
लेकिन जैसे ही वह बाथरूम के दरवाजे के पास पहुँचा, उसे असली बात समझ में आ गई।
वह हल्के से मुस्कुराया – एक अजीब सी मुस्कान, जिसमें झटका भी था और संतुष्टि भी।
उसने दरवाजे के पास खड़े होकर अंदर झाँका – और उसने देखा कि निखिल अपने आठ इंच के लंड से पूजा के मुँह में पेशाब कर रहा था, और पूजा उसे पी रही थी।
शेखर ने अपनी आवाज़ में एक मजाकिया लहजे में कहा, “अरे! तुम दोनों ने तो बाकि लोगों के बिना ही शुरू कर दिया!”
पूजा ने उसकी आवाज़ सुनी और उसकी तरफ देखा – उसकी आँखों में कोई शर्म नहीं थी, बल्कि एक गर्व था, एक ऐसी औरत का गर्व जो अपनी सबसे गहरी इच्छा को जी रही है।
वह पूरी तरह से भीगी हुई थी – निखिल का पेशाब उसके पूरे शरीर पर फैला हुआ था, उसके कपड़े चिपचिपे थे, उसके बाल गीले थे।
उसके शरीर से एक तीखी, बीयर और पेशाब की मिली-जुली गंध आ रही थी – बदबूदार, मगर किसी तरह से उत्तेजक।
शेखर ने पूछा, “तुम्हें पसंद आया, स्वीटी?”
पूजा ने सिर हिलाया – उसकी आँखों में हाँ थी।
शेखर ने फिर कहा, “ठहरो, मैं सबको बुलाता हूँ।”
वह लिविंग रूम में वापस गया और सबको आवाज़ लगाई – “अरे दोस्तों, यहाँ आओ! पार्टी शुरू हो गई है!”
मयूर ने संगीत बंद किया, और सब बाथरूम की तरफ आ गए।
वे दरवाजे के पास इकट्ठा हो गए और अंदर देखा – पूजा वहाँ फर्श पर बैठी हुई थी, पूरी तरह से भीगी हुई, उसके कपड़े चिपचिपे, उसके बाल बिखरे हुए, उसका चेहरा पेशाब से लथपथ।
राजेश ने अपना हाथ शेखर के कंधे पर रखा – उसकी आवाज़ में एक प्रशंसा थी, “शेखर भाई, तुम्हारी पत्नी सच में बहुत बड़ी रंडी है!”
फिर उसने अपनी पैंट का ज़िप खोला और अपना लंबा, पतला लंड बाहर निकाला।
निखिल, जो लगभग अपना पेशाब खत्म कर चुका था, बाथरूम से बाहर निकला।
उसकी जगह राजेश ने ली – वह पूजा के सामने खड़ा हो गया और उसके खुले मुँह में पेशाब करना शुरू कर दिया।
शेखर ने दूसरों से कहा, “चलो, सब आ जाओ।”
मोहित, अनिकेत, मयूर और शेखर ने अपने लंड बाहर निकाले – उनके लंड सख्त थे, कुछ अभी भी पिछली बार के उत्तेजना से लाल थे।
वे सब राजेश के साथ एक घेरे में खड़े हो गए और पूजा पर पेशाब करना शुरू कर दिया – चार-पाँच धाराएँ एक साथ पूजा के शरीर पर गिर रही थीं, उसे सिर से पैर तक भिगो रही थीं।
पूजा पर हर तरफ से पेशाब बरस रहा था – उसके सिर पर, उसके चेहरे पर, उसके बालों में, उसके ब्लाउज पर, उसकी साड़ी पर, उसके हाथों पर, उसकी खुली चूत पर।
वह एक जीवंत फव्वारे के नीचे बैठी हुई थी – गर्म, बीयर की महक वाला पेशाब उसकी त्वचा को छू रहा था, उसके कपड़ों को संतृप्त कर रहा था।
पेशाब की आवाज़ बाथरूम में गूँज रही थी – एक साथ कई धाराओं की आवाज़, फर्श पर गिरती बूँदों की आवाज़, और बीच-बीच में पूजा के गटकने की आवाज़ क्योंकि उसका मुँह बहुत तेज़ी से भर रहा था।
पूजा अब पूरी तरह से भीग चुकी थी – उसके कपड़े पूरी तरह से चिपचिपे थे, उससे एक तीखी, बीयर और पेशाब की मिली-जुली गंध आ रही थी – बदबूदार, मगर किसी तरह से मादक।
वह एक असली गंदी, पेशेवर रंडी लग रही थी – बिखरे बाल, चिपचिपी त्वचा, और उसके चेहरे पर एक रंडी जैसी संतुष्टि।
थोड़ी देर बाद, सबने अपना पेशाब खत्म किया। वे एक-एक करके बाथरूम से बाहर निकलने लगे।
मोहित ने शेखर की तरफ देखा और कहा, “शेखर, इसे तैयार करो। चुदाई करने का समय हो गया है।”
सब लिविंग रूम में वापस चले गए – केवल शेखर बाथरूम में रुका, अपनी पत्नी को देखता हुआ।
पूजा वहीं फर्श पर बैठी हुई थी – वह अपने शरीर को साफ करने की कोशिश नहीं कर रही थी, बल्कि उस पल का आनंद ले रही थी।
उसके होंठों पर एक गंदी मुस्कान थी, उसकी जीभ अपने होंठों के चारों ओर घूम रही थी – एक असली रंडी की तरह।
शेखर ने देखा कि पूजा पर शराब का असर हो रहा था – उसके अंदर का असली रंग सामने आ रहा था।
उसने कहा, “चलो अब, शावर ले लो और फिर लिविंग रूम में आ जाओ। असली पार्टी अभी बाकी है।”
शेखर बाथरूम से बाहर निकलते हुए पूजा को वहीं छोड़ गया – उसकी आँखों में एक गहरी समझ थी, एक ऐसे पति की समझ जो अपनी पत्नी की गहरी इच्छाओं को समझ चुका था।
वह लिविंग रूम में वापस आया – उसके दोस्त वहाँ बैठे थे, बीयर पी रहे थे, उसका इंतज़ार कर रहे थे।
पूजा बाथरूम में अकेली रह गई – वह फर्श पर बैठी हुई थी, उसके चारों ओर पेशाब के धब्बे थे।
उसने अपने चारों ओर देखा – बाथरूम का दर्पण उसकी तस्वीर दिखा रहा था, एक ऐसी औरत की तस्वीर जो पूरी तरह से भीगी हुई थी, बिखरी हुई थी, मगर पूरी तरह से संतुष्ट थी।
वह उठी और शावर चालू कर दिया – ठंडा पानी उसके शरीर पर गिरने लगा, पेशाब के निशानों को धोता हुआ।
उसने अपने बाल धोए, अपने शरीर को साफ किया। हर बार जब पानी उसके मुँह में गिरता, उसे निखिल के पेशाब का स्वाद याद आता – वह कड़वा, बीयर जैसा स्वाद जो अब भी उसके मुँह में था।
वह अपने होंठों को चाटती, उसे याद करती।
लिविंग रूम में, मोहित ने शेखर को एक बीयर दी – “लो भाई, ले लो। जिंदगी में आज जैसा दिन फिर नहीं आएगा।”
शेखर ने बीयर ली और एक लंबा घूँट भरा। उसकी आँखों में एक सपना था – वह सोच रहा था कि यह सब उनकी जिंदगी को कैसे बदल सकता है।
बीस मिनट बाद, पूजा बाथरूम से बाहर निकली – उसने अपने शरीर को तौलिए से सुखाया था, मगर उसने कोई कपड़ा नहीं पहना था।
वह पूरी तरह से नंगी थी – उसकी त्वचा साफ और चमकदार थी, उसके बाल अभी भी गीले थे और उसके कंधों पर बिखरे हुए थे।
वह लिविंग रूम में आई – सबकी नज़रें उस पर टिक गईं। मोहित ने एक सीटी बजाई – “वाह भाभी! क्या बात है! अब पार्टी शुरू हो सकती है।”
पूजा ने मुस्कुराते हुए सबको देखा – वह बीच में आकर खड़ी हो गई, उसके हाथों में कोई शर्म नहीं थी। उसने अपनी आँखों से सबको चुनौती दी, जैसे कह रही हो, “चलो कौन है?!”