गैंगबैंग के सफल समापन के बाद, कमरे में एक अजीब सी शांति छा गई थी।
पसीने और वीर्य की गंध हवा में तैर रही थी, और बिस्तर गीला और अस्त-व्यस्त पड़ा था।
मोहित ने अपनी घड़ी की तरफ देखा – उसका चेहरा मुस्कान में खिल उठा जब उसने देखा कि समय दोपहर के 1:30 बज चुके है।
उसने अपने हाथ से अपने माथे का पसीना पोंछा और कहा, “अरे यारो, एक बजकर तीस मिनट हो गए हैं। सबको भूख लगी होगी।
पहले खाना खा लेते हैं, फिर थोड़ा आराम करते हैं। रात को आखिरी गैंगबैंग सेशन करेंगे – उसमें शराब का भी इंतजाम करना है।”
सबने सहमति में सिर हिलाया – उनके चेहरे थकान और संतुष्टि के मिश्रण से भरे हुए थे।
पूजा धीरे-धीरे बिस्तर से उठी – उसके शरीर में दर्द था, उसकी टाँगें काँप रही थीं, उसकी चूत और गांड में जलन थी।
उसने अपने हाथ से अपने मुँह को पोंछा, वीर्य के निशानों को साफ किया, और शेखर की तरफ देखा।
उसकी आवाज़ में एक मजाकिया लहजा था, मगर उसके शब्दों में एक गहरी समझ थी – “शेखी, जाओ और कुछ चिकन तंदूरी और मछली ले आओ, अगर मिले तो।
मैंने तो सबका प्रोटीन चूस लिया है, अब सबको ताकत चाहिए।”
सब जोर से हँसे – उनकी हँसी कमरे में गूँजी, तनाव को तोड़ते हुए।
शेखर ने भी मुस्कुराते हुए कपड़े पहनना शुरू किया – उसने अपनी पैंट पहनी, अपनी शर्ट के बटन लगाए, और अपने जूते पहने।
वह दरवाजे की तरफ बढ़ ही रहा था कि अनिकेत ने अचानक उसे रोका – उसकी आवाज़ में एक चालाकी थी, “शेखर, रास्ते से कोल्ड्रिंक भी लेते आना।”
लेकिन अनिकेत के हाथ पहले ही पूजा को पकड़ चुके थे – उसने उसकी कलाई पकड़ी और उसे वापस बिस्तर की तरफ खींच लिया।
उसकी आवाज़ में एक जंगली आनंद था, “तब तक हम इस रंडी की गांड में कुछ और मसाला डाल देते हैं।”
मयूर भी उनके साथ शामिल हो गया – उसने शेखर की तरफ देखा और कहा, “जाओ शेखर भाई, तुम्हारे आने तक हम इसका मनोरंजन कर लेंगे। चिंता मत करो।”
शेखर ने एक पल के लिए रुका – उसकी आँखों में एक चमक थी, एक समझौता। उसने सिर हिलाया और दरवाजे से बाहर चला गया।
दरवाजा बंद होने की आवाज़ आई, और कमरे में फिर से एक नई ऊर्जा दौड़ गई।
अनिकेत ने पूजा को बिस्तर पर पटक दिया – उसने उसके बालों को पकड़ा और उसे घुटनों पर बैठा दिया।
पूजा ने अपने हाथों को बिस्तर पर टिकाया, अपने शरीर को ढीला छोड़ा।
अनिकेत ने अपने सात इंच के लंड को पूजा के गांड पर रखा और बिना किसी चेतावनी के जोर से धकेल दिया – उसका लंड उसके गांड में गहरे तक चला गया।
पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके मुँह से एक गहरी कराह निकल गई – “आआह्ह्ह… हाँ…”
मयूर सामने से आया – उसने पूजा के बालों को पकड़ा और अपना आठ इंच का लंड उसके मुँह में धकेल दिया।
पूजा ने अपने होंठों को उसके चारों तरफ कसा, अपनी जीभ से उसे सहलाया। “गक गक की आवाज़ फिर से शुरू हो गई।
राजेश, मोहित और निखिल भी उनके साथ शामिल हो गए – वे पूजा के शरीर को घेरकर खड़े हो गए, अपने लंड सहलाते हुए, अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए।
दो घंटे बाद, जब शेखर वापस लौटा, तो उसने देखा कि समय दोपहर के 2 बज चुके हैं।
उसके हाथों में भारी बैग थे – चिकन तंदूरी, मछली, रोटियाँ, और कोल्ड्रिंक की बोतलें। उसने दरवाजे की घंटी बजाई।
दरवाजा खुला, और सामने राजेश खड़ा था – पूरी तरह से नग्न।
उसका लंड खड़ा था, उसके हाथ से सहलाया जा रहा था, और उसके शरीर पर पसीना चमक रहा था। उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, एक संतुष्टि।
शेखर ने उसे देखा और एक गहरी साँस ली – उसकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक सूखा हास्य था,
“मुझे अंदाजा लगाने दो… तुम लोगों ने फिर से शुरू कर दिया जैसे ही मैं गया, है न?”
राजेश ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया – “हाँ।”
शेखर ने अपना सिर हिलाया और अंदर चला गया। उसने बैगों को किचन में रखा,
और उसी पल उसके कानों में आवाज़ें आने लगीं – पुरुषों की कराहें, पूजा की चीखें, और उन अजीब सी चुदाई की आवाज़ें जो उसे बेडरूम की तरफ खींच रही थीं।
वह किचन से बाहर निकला और धीरे-धीरे बेडरूम के दरवाजे की तरफ बढ़ा।
उसने दरवाजे के पास रुककर अंदर झाँका – और जो दृश्य उसने देखा, उसने उसकी साँसें रोक दीं।
कमरे में पाँचों मर्द पूजा को घेरे हुए थे। मयूर बिस्तर पर लेटा हुआ था, और पूजा उसके ऊपर बैठी हुई थी – मयूर का ८ इंच का लंड उसके गांड में गहरे तक धँसा हुआ था।
निखिल सामने से पूजा की चूत में था – उसका आठ इंच का लंड बेरहमी से अंदर-बाहर हो रहा था।
दोनों उसे एक साथ चोद रहे थे, उनकी गति जंगली और बेकाबू थी।
मयूर ने पूजा की कमर को पकड़ रखा था – उसकी उँगलियाँ उसकी त्वचा में धँस गई थीं – और उसे नीचे की तरफ धकेल रहा था ताकि वह उसके गांड में और गहरा जा सके।
निखिल ने पूजा के कंधों और गर्दन को पकड़ रखा था, उसे अपनी तरफ खींच रहा था ताकि वह उसकी चूत में और गहरा जा सके।
वे दोनों बेरहमी से उसे चोद रहे थे, उसके छेदों को फैला रहे थे, हर धक्के के साथ उनमें और चौड़ाई ला रहे थे।
उसके सिर के ऊपर, राजेश, अनिकेत और मोहित एक घेरे में खड़े थे – वे बारी-बारी से उसके मुँह को चोद रहे थे।
“गक गक गक गक” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी, और उनकी कराहें उसमें मिल रही थीं।
पूजा का शरीर एक सेक्स डॉल की तरह इस्तेमाल हो रहा था – उसकी छोटी, पतली टाँगें चौड़ी खुली हुई थीं, बेजान होकर ऊपर-नीचे उछल रही थीं।
उसका शरीर हर धक्के के साथ हिलता था, उसके स्तन उछलते थे, उसके बाल बिखरे हुए थे।
शेखर ने देखा कि अब लड़के और आक्रामक हो रहे थे।
एक पल, पूजा ने अपने दर्द से सिकुड़ते हुए अपनी टाँगों को बंद करने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही उसने ऐसा किया, निखिल ने तुरंत उसकी टाँगों को जबरदस्ती चौड़ा खोल दिया।
जब उसने दर्द से अपना मुँह खोला, तो तुरंत राजेश, अनिकेत या मोहित में से कोई एक उसके चेहरे को अपनी तरफ खींच लेता था, अपने लंड को उसके मुँह में धकेल देता था।
शेखर ने गहरी साँस ली – उसकी आँखों में एक नई चमक थी, एक ऐसे आदमी की चमक जिसने कुछ अनोखा देख लिया था।
वह देख सकता था कि पूजा इस कठोरता का आनंद ले रही थी। उसके चेहरे पर दर्द था, मगर उसकी आँखों में एक चमक थी, एक गहरी संतुष्टि जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी।
वह अपने शरीर के हर हिस्से को इन मर्दों के हाथों में सौंप रही थी, और उसकी आँखों में कोई डर नहीं था – सिर्फ एक जंगली आनंद, एक गहरी तृप्ति।
शेखर के मन में एक विचार कौंधा – एक जंगली, खतरनाक विचार। यह सिर्फ एक सेक्सुअल एक्सपेरिमेंट नहीं था, यह कुछ और बड़ा हो सकता था।
पूजा की यह समर्पण, उसकी यह भूख, उसकी यह ताकत… इसे वे दोनों अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते थे।
उनकी शादी में एक नई गहराई आ सकती थी, और उनकी प्रोफेशनल लाइफ में भी। लेकिन यह सब बाद में – अब उसे सबको रोकना था।
उसने जोर से आवाज़ लगाई – उसकी आवाज़ कमरे में गूँजी, सभी की गतिविधियों को रोकते हुए – “बस करो! खाना तैयार है। पहले खाना खा लो, फिर जो करना है करना।”
सब एक पल के लिए ठिठक गए। मयूर और निखिल ने अपने-अपने लंड पूजा के शरीर से बाहर निकाले – एक चिपचिपी आवाज़ के साथ जो उनके छेदों से हवा निकलने की आवाज़ थी।
राजेश, मोहित और अनिकेत भी पीछे हट गए, उनके लंड अभी भी खड़े थे, उनके शरीर पसीने से तर थे।
पूजा वहीं बिस्तर पर बैठी रही – उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी, सिर्फ उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।
वह अपनी साँसों को सामान्य करने की कोशिश कर रही थी, उसकी आँखें बंद थीं, उसके चेहरे पर एक गहरी शांति थी।
उसकी गांड फैली हुई थी, एक अंडाकार छेद जो धीरे-धीरे बंद होने की कोशिश कर रहा था, और उसकी चूत से सफेद तरल टपक रहा था।
अनिकेत ने एक टिप्पणी फेंकी, उसकी आवाज़ में एक मजाकिया लहजा था, “अरे, इस रंडी की चूत को देखो – कैसे फटी पड़ी है।
मुझे आश्चर्य है कि तुम्हारी यह रंडी पत्नी कल ऑफिस कैसे जाएगी?” बाकी लोग हँसे और बाथरूम की तरफ बढ़ गए, अपने शरीर को साफ करने के लिए।
शेखर बिस्तर के पास आया और पूजा के बगल में बैठ गया। उसने उसकी आँखों में देखा – उसकी आँखों में कोई शर्म नहीं थी, कोई पछतावा नहीं था।
सिर्फ एक गहरी शांति, एक संतुष्टि। उसने अपनी दो उँगलियाँ लीं और उन्हें पूजा की चूत में धीरे-धीरे डाला – उसकी उँगलियाँ गर्म और गीली थीं, निखिल के वीर्य से लथपथ।
उसने धीरे-धीरे अपनी उँगलियाँ बाहर निकालीं, उन पर सफेद तरल चमक रहा था।
फिर उसने उन उँगलियों को पूजा के होंठों पर रखा – पूजा ने अपना मुँह खोला और उन्हें चूस लिया, अपनी जीभ से उन्हें साफ किया, एक भूखी कुतिया की तरह।
शेखर ने धीरे से पूछा, उसकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक गहरी उत्सुकता थी, “पूजा, मैं आज तक नहीं जानता था कि तुम्हें इस तरह का सेक्स पसंद है। यह सब तुम्हारे अंदर कहाँ छिपा था?”
पूजा ने अपनी आँखें खोलीं और शेखर की तरफ देखा – उसकी आवाज़ में एक गहरी ईमानदारी थी, “शेखी, मैं खुद नहीं जानती थी।
पता नहीं यह सब मेरे अंदर कहाँ छिपा हुआ था। लेकिन अब… अब मुझे लगता है कि मुझे ज़िन्दगी में यही तो चाहिए था।”
शेखर ने उसके बालों को सहलाया और कहा, “मेरे मन में कुछ है, पूजा। कुछ जो हम दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
लेकिन इसके बारे में हम कल बात करेंगे।” फिर उसने उसे बिस्तर से उठने में मदद की – पूजा के पैर काँप रहे थे, वह सीधे खड़ी नहीं हो पा रही थी।
उसकी टाँगों के बीच की दूरी असामान्य रूप से चौड़ी थी, और वह अजीब तरह से चल रही थी, हर कदम के साथ उसके शरीर में दर्द दौड़ रहा था।
शेखर ने यह देखकर एक हल्की हँसी निकाल दी – एक मजाकिया, प्यार भरी हँसी।
पूजा ने रुककर उसकी तरफ देखा, उसकी आवाज़ में एक नखरा था, “अरे, मेरा मज़ाक मत उड़ाओ। यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है।”
शेखर ने अपने हाथ उठाए, एक मासूमियत के साथ, “मैं? मैंने तो कुछ किया नहीं। तुम ही सबसे चुदवा रही हो।”
पूजा ने उसकी तरफ एक तीखी नज़र डाली और फिर मुस्कुराते हुए बाथरूम की तरफ चल दी – उसकी चाल अब भी अजीब थी, मगर उसकी आँखों में एक चमक थी, एक संतुष्टि।
बाथरूम का दरवाजा बंद हुआ, और पानी बहने की आवाज़ आई।
शेखर वहीं खड़ा रहा, उसकी आँखों में एक गहरी सोच थी। वह जानता था कि कल एक नया अध्याय शुरू होने वाला था – उनकी ज़िंदगी में, उनकी शादी में, और शायद उनके प्रोफेशनल करियर में भी।