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गर्लफ्रेंड की चुदाई से कामयाबी हासिल हुई – पार्ट ६

गर्लफ्रेंड की चुदाई से कामयाबी हासिल हुई – पार्ट ५

राहुल लिविंग रूम में बैठा नीता की चिंता में डूबा हुआ था। उसका दिमाग बार-बार उसी प्रश्न पर अटक रहा था – संजीव उसके साथ और कितना मज़ा लेगा? वह कल्पना करके ही सिहर उठता था। तभी दरवाज़े की घंटी बजी। राहुल उछलकर दरवाज़े की ओर भागा।

दरवाज़ा खोला तो नीता बाहर खड़ी थी। उसकी मुद्रा थोड़ी अजीब थी, जैसे चलने में तकलीफ हो रही हो, लेकिन उसके चेहरे पर एक विशाल, थकी हुई, पर विजयी मुस्कान थी। राहुल ने राहत की गहरी सांस ली।

उसने उसे तुरंत अपने आप से लिपटा लिया, इतनी ज़ोर से कि नीता की सांस थोड़ी रुक गई। एक मिनट तक वे इसी तरह खड़े रहे, फिर राहुल ने धीरे से उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया और प्यार से उसके माथे, गालों, आँखों पर चुंबन बरसाने लगा।

“हम्म,, हम्म.. हम्म.. ही ही… रुको राहुल! पहले अंदर आने दो, हम घर के बाहर हैं! कोई देख लेगा!”

नीता खिलखिलाई, राहुल के इस शुद्ध, बेबाक प्यार से भरे चुंबनों से खुश होकर। दोनों अंदर आए। राहुल दरवाज़ा बंद कर रहा था और नीता अंदर की ओर बढ़ रही थी। राहुल ने देखा कि नीता की चाल में खिंचाव है।

वह अपने पैरों को सामान्य से ज़्यादा दूर-दूर रखकर चल रही थी, जैसे उसकी जांघों के बीच दर्द हो।

“साले मादरचोद! तुमने मेरी जान के साथ क्या किया!”

उसके मन में गुस्से का विचार कौंधा। लेकिन फिर उसने गुस्से को नज़रअंदाज़ कर दिया और उस सोफे की ओर बढ़ा जहाँ नीता बैठ गई थी।

“तो कैसी हो जान?… देख रहा हूँ तुम सामान्य तरीके से चल भी नहीं पा रही… उन्होंने तुम्हारी गांड को चौड़ा खोल दिया, है ना? वो कमीने!”

राहुल ने गुस्से में धीमी आवाज़ में कहा।

उसकी देखभाल और प्यार देखकर नीता ने एक पल के लिए उसे प्यार से देखा, और बोली,

“सब ठीक है मेरे गुलाबजाम!, हमें शुरू से ही पता था कि हमें इस तरह की चीज़ें करनी पड़ेंगी, तो तुम इसके बारे में ज़्यादा क्यों सोच रहे हो?… खैर , छोड़ो उस बात को… मुझे देखो… मैं पूरी तरह ठीक हूँ!,

और हाँ उन्होंने मुझे बहुत ज़ोर से चोदा, पर किसने नहीं चोदा ये बताओ? जिसके साथ भी मैं सोई, वो जानवर ही निकला, सिर्फ तुम्हारे अलावा! क्योंकि, तुम मेरी परवाह करते हो, तुम मुझसे प्यार करते हो, वे नहीं… तो परेशान मत हो… ,

हे भगवान… लेकिन अब की चुदाई बहुत थका देने वाली थी!, पसीना, थूक, वीर्य सब मेरे शरीर पर लगा है, बदबू आ रही है! क्या तुम मेरे लिए कॉफी बना सकते हो? तब तक मैं शॉवर ले लूँ? मेरे पास हम दोनों के लिए शानदार खबर है!”

नीता ने राहुल को शांत किया और उठकर बाथरूम की ओर चल दी।

राहुल कॉफी बना रहा था।

“मेरे पास भी तुम्हारे लिए अच्छी खबर है मेरी जान!”

उसने मन में सोचा, नीता के बाथरूम से बाहर आने का इंतज़ार करते हुए। कुछ मिनटों बाद नीता बाथरोब में लिपटी बाथरूम से निकली और उसी सोफे पर बैठ गई जहाँ राहुल उसका इंतज़ार कर रहा था। उन्होंने कॉफी के मग उठाए और एक दूसरे से टकराए।

“आआह्ह्ह…. कमरतोड़, थकाऊ चुदाई के बाद गर्म कॉफी पीना सब कुछ दूर कर देता है!”

नीता ने कॉफी का एक गर्म घूँट लेकर कहा।

“अरे!… मै बताना भूल ही गया!… मैंने हमारे चुदक्कड बॉस के सारे डिज़ाइन कॉपी कर लिए हैं! हा हा हा…”

राहुल ने ऐसे घोषणा की जैसे उसने कोई बड़ी जीत हासिल कर ली हो।

“क्या? वाह! अब हम उन डिज़ाइनों का इस्तेमाल करके सीधे नए डिज़ाइन बनाकर अपना ट्रेड पूरा कर सकते हैं!”

नीता राहुल की खबर सुनकर खुश हो गई।

“कौन सा ट्रेड?” राहुल ने उत्सुकता से पूछा।

“अंदाज़ा लगाओ अंदाज़ा लगाओ!!?” नीता ने उसके साथ मज़ाक किया।

“अरे यार खेल मत खेलो, बस सीधे बता दो क्या है?” राहुल ने फिर पूछा।

“वैल मैंने संजीव के साथ अगले ऑर्डर की डील कर ली है!” नीता ने ज़ोर से घोषणा की!

राहुल हैरानी और खुशी से उछलकर खड़ा हो गया।

“क्या!??, तुमने यह कैसे कर लिया?” उसने पूछा।

“विशाल के जाने के बाद, संजीव ने मेरी गांड फिर से चोदी, फिर उसने मेरी चूत चोदी… और सब खत्म होने के बाद… मैंने उससे पूछा कि हम दोबारा कब चोदेंगे?” नीता ने समझाया कि क्या हुआ था।

“फिर?” राहुल ने पूछा।

“फिर संजीव ने मेरी मंशा भांप ली और सीधे पूछा कि मुझे क्या चाहिए, तो मैंने उसे ऑफर दिया कि वह मुझे जब चाहे इस तरह चोद सकता है या कोई और लड़की जो मैं उपलब्ध करा सकती हूँ, और अगर उसने हमें उसके ज़रूरत के कपड़ों के डिज़ाइन का अगला कॉन्ट्रैक्ट दिया तो वह उसमें 50% प्रॉफिट ले सकता है!…”

नीता ने डील समझाई।

“तो उसने क्या कहा?” राहुल ने उत्सुकता से पूछा।

“वह मान गया!”

राहुल खुशी से उछलने और नाचने लगा। उसने नीता को अपने दोनों हाथों में उठा लिया और उसके साथ नाचने लगा।

“येय्य्य्य…!!!!.. हमने कर दिया!!!.. यस्स्स्स!!!..”

राहुल चिल्लाया। नीता उसे इतना खुश देखकर हँस पड़ी। वह भी उसके साथ नाचने लगी। और क्यों न नाचें?, यह उनकी पहली ऑफिशियल बिज़नेस डील थी!

राहुल और नीता ने उस रात अपने पहले बिज़नेस डील का जश्न मनाया। वे अपने फ्लैट की बालकनी में बीयर पी रहे थे। राहुल नीता को किसी शानदार रेस्तराँ में बड़ी पार्टी देना चाहता था, लेकिन नीता ने मना कर दिया।

वह राहुल के साथ प्राइवेटली अपने फ्लैट में ही सेलिब्रेट करना चाहती थी, पर उसने वादा किया कि पहला चेक मिलने के बाद वे राहुल की योजना से भी बड़ा जश्न मनाएँगे।

“मुझे बताओ जानू, हम विशाल को संजीव के साथ अपने सीक्रेट डील के बारे में झूठ कैसे बोलेंगे? आज या कल उसे हमारे बारे में पता चल ही जाएगा,”

राहुल ने नीता से पूछा।

“ओह गॉड! मैं संजीव को बताना भूल गई… स्स्स्स… मुझे मेरा फोन दो… हमें संजीव को यह बताना होगा कि हम नौकरी छोड़ने तक यह बात गुप्त रखे!”

नीता घबरा गई और फोन लेकर संजीव को डायल किया।

“हाँ नीता माई वाइल्ड, स्मार्ट, फेवरेट स्लट! तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ?” संजीव ने फोन पर कहा।

“संजीव… मैं बताना भूल गई थी… प्लीज़ विशाल को तब तक कुछ मत बताना जब तक उसका कॉन्ट्रैक्ट पूरा नहीं हो जाता, उसके बाद हम दोनों नौकरी से इस्तीफा देने वाले हैं… अगर उसे अभी पता चला तो हमारे सामने बहुत बड़ी दिक्कत आ जाएगी!”

नीता ने संजीव से अपने डील को गुप्त रखने की गुज़ारिश की।

“रिलैक्स, मैं इडियट नहीं हूँ नीता… मुझे पता है तुम लोग अभी भी उसके एम्प्लॉयी हो और मैं फिलहाल उसका बिज़नेस पार्टनर हूँ… मैं उसे क्यों बताऊँगा? मैंने भी उसे एक कॉन्ट्रैक्ट दिया है! हमें यह बात उसके कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने तक हमारे बीच ही रखनी होगी,” संजीव ने नीता को शांत किया।

“अब, और क्या कर रही है मेरी रंडी?!… अगर फ्री हो तो यहाँ आ जाओ,” संजीव ने नीता से पूछा।

“हम अपनी बालकनी पर सेलिब्रेट कर रहे हैं,” नीता ने जवाब दिया।

“ओह!! वाउ… मुझे सेलिब्रेशन पसंद है… तुम दोनों यहाँ क्यों नहीं आ जाते? हम साथ में सेलिब्रेट करेंगे, अलग तरीके से हम्म?” संजीव ने फिर पूछा।

“नहीं संजीव आज रात नहीं, मैं पहले से ही थकी हुई हूँ और आज हमारा खास दिन है… इसलिए हम इसे प्राइवेट ही मनाना चाहते हैं, सॉरी!”

नीता ने संजीव के निमंत्रण को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया।

“ओके तो मज़े करो, बाय, गुड नाइट!” संजीव ने जवाब दिया और फोन काट दिया।

“वह क्या कह रहा था?” राहुल ने पूछा।

“वह हमें अपने घर सेलिब्रेट करने के लिए बुला रहा था, लेकिन मैंने मना कर दिया,” नीता ने समझाया।

“मुझे लगता है यह आदमी थोड़ा पागल है, हमें इसके साथ सावधान रहना चाहिए, और जल्द से जल्द दूसरा क्लाइंट ढूँढना चाहिए, हम लंबे समय तक इस पर निर्भर नहीं रह सकते,” राहुल ने कहा।

“हाँ मुझे पता है, पर वह टेंशन कल के लिए है मेरे जानू! अब आज की हमारी उपलब्धियों का जश्न मनाने का समय है!” नीता ने बातचीत का रुख वर्तमान पलों की ओर मोड़ दिया।

“चीयर्स!” दोनों ने बीयर के गिलास टकराए और पीने लगे।

उस रात नशे की हालत में… राहुल ने नीता की गांड भी चोदी। वह इतनी थकी हुई थी कि सोना चाहती थी, इसलिए उसने राहुल से कहा कि वह उसकी गांड तब भी चोद सकता है जब वह सो रही हो, अब उसे दर्द या चोट नहीं लगेगी क्योंकि उसकी गांड अब खिंच चुकी है!

और चूँकि वे दोनों नशे में थे इसलिए राहुल ने उसकी बात मानी और उसकी गांड तब भी चोद रहा था जब वह सो रही थी। राहुल का लंड आसानी से अंदर-बाहर जा रहा था, और नीता को कुछ महसूस नहीं हो रहा था जैसा कि उसने सोने से पहले कहा था।

यह सच था, उसकी गांड वाकई इतनी चौड़ी खिंच चुकी थी कि राहुल का लंड अब उसके लिए कुछ भी नहीं था… इसलिए वह सोई रही।

जश्न की रात के बाद, विशाल के कॉन्ट्रैक्ट पूरे करने में दिन बीत गए। राहुल और नीता दिन-रात काम करते रहे। नीता को ऑफिस में हर रोज़ विशाल द्वारा उसके हर छेद में चोदा जा रहा था, उसके बाद वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ डिज़ाइन पूरे करने में जुट जाती।

नीता वाकई मेहनती औरत थी, वह एक साथ दो ज़िम्मेदारियाँ संभाल रही थी। कभी-कभी विशाल उसे तब भी चोद देता जब वह राहुल के साथ डिज़ाइनिंग में व्यस्त होती, लेकिन अब अपने बॉस द्वारा चोदे जाने से भी वह विचलित नहीं होती थी, क्योंकि राहुल और वह यह कॉन्ट्रैक्ट जल्द से जल्द पूरा करना चाहते थे।

राहुल भी कड़ी मेहनत कर रहा था, वह लगातार स्केच बना रहा था और कभी-कभी नीता का हिस्सा भी कर देता जब वह चुदाई के लिए जाती। वह कभी-कभी विशाल की मदद भी कर देता अगर वह नीता को किसी खास पोज़िशन में पकड़ने के लिए कहता, ताकि वह आराम से उसे चोद सके।

लेकिन फिर भी उन दोनों ने दो महीने के भीतर कॉन्ट्रैक्ट पूरा कर लिया। फिर एक दिन कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद वे ऑफिस में बैठे थे। विशाल अपनी कुर्सी पर बैठा था, राहुल उसके सामने बैठा था।

“गक गक गक गक… कक्क्क्गा… ग्गक्क्ख्ह!!!… गक गक गक गा…” की आवाज़ गूँज रही थी।

“तुम लोगों ने… गक गक गक… आआआह्ह्ह…. गक गक गक… बोहत… वेरी वेरी…. गाख्ह!!… आआआ… ह्ह्ह… स्स्स्स… अच्छा… काम किया है…आआआह्ह्ह्स्स…” विशाल ने कॉम्प्लिमेंट किया।

“थैंक यू सर!… हमने अपना बेस्ट देने की कोशिश की…” राहुल ने कृतज्ञता जताई।

“गक गक गक गकगा…” की आवाज़ बैकग्राउंड में अब भी गूँज रही थी।

विशाल के चेहरे पर पसीना था, उसका शरीर तेज़ी से झटके खा रहा था… उसका हाथ तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था जबकि वह कुर्सी पर बैठा था।

“गक ग्क गक गक…” आवाज़ अभी भी गूँज रही थी… “गक गक गक गा…” और अचानक… “आआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!!!….. गक्ख्ह!!!…. लो ये!… अहह्ह्ह्ह्ह… आआआआह्ह्ह… गक्क्ख्ह!!!.. सब का सब लो!… आआह्ह्ह… गक्ख्स्स्स्स!!!!!!!…. तुम्हारा इनाम लो!… आआआह्ह्ह्ह्ह…” वह चिल्लाया।

नीता विशाल के पास ज़मीन पर घुटनों के बल बैठी हुई थी… करीब दस मिनट से विशाल का लंड अपने गले में ले रही थी। विशाल ने उसके बाल दोनों हाथों से कसकर पकड़ रखे थे और उसके सिर को गुड़िया की तरह इस्तेमाल कर रहा था।

वह उसे अपने लंड पर तेज़ी से ऊपर-नीचे कर रहा था… और अब उसने अपना सारा वीर्य उसके गले में छोड़ दिया था।

राहुल टेबल के उस पार उनके सामने बैठा था, चुपचाप अपने बॉस की कामुकता खत्म होने का इंतज़ार कर रहा था।

“स्स्स्ल्लुर्र्र्प्प..!!.. छ्ह्र्रुप्प्ष्ह्र्प्प!!..”

अब चाटने की आवाज़ धीरे-धीरे सुनाई देने लगी…

“हम्म, अच्छे से चाट पूस के साफ करो !!…”

नीता अब विशाल के लंड को हर कोण से, हर इंच को चाट रही थी… ताकि उसके अपने वीर्य और उसकी लार के अवशेष साफ हो जाएँ… क्योंकि उसके वीर्य का कुछ हिस्सा वापस बहकर उसी के लंड पर बह आया था… ज़्यादातर नीता ने निगल लिया था।

“तुम्हें खुद को थोड़ा इम्प्रूव करना होगा नीता… निगलते समय कोई लीकेज नहीं होना चाहिए,”

विशाल ने अपनी पैंट की ज़िप लगाते हुए और अपने कपड़े ठीक करते हुए नीता को कुछ सलाह दी।

“यस बॉस ऑफ कोर्स!… लेकिन मुझे शक है कि आप मेरा वह इम्प्रूव्ड वर्जन फिर कभी नहीं देख पाएँगे!”

नीता ने जवाब दिया, खड़ी होकर टिश्यू से अपना मुँह पोंछते हुए राहुल के पास वाली कुर्सी पर बैठने के लिए चलकर आई।

“क्या? इसका क्या मतलब है?” विशाल ने उत्सुकता से पूछा।

“इसका मतलब ये है, की हमने इस्तीफा देने का फैसला किया है सर!” राहुल ने कहा।

“क्या!?.. क्यों?.. मेरा मतलब है मैं समझ नहीं पा रहा… हमने अभी-अभी सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट साथ में पूरा किया है… और अब तुम लोग इस्तीफा देना चाहते हो?” विशाल ने हैरान होकर दोनों से पूछा।

“यस बॉस! असल में हम आपको प्रोजेक्ट से पहले बताना चाहते थे, लेकिन आपने पहले कॉन्ट्रैक्ट ले लिया, इसलिए हमने सोचा सब पूरा होने के बाद बताएँ,” नीता ने कहा।

“पर क्यों?” विशाल अभी भी उत्सुक था।

“हम अपना खुद का बिज़नेस शुरू करने की प्लानिंग कर रहे हैं सर, और हमें इन्वेस्टर और क्लाइंट भी मिल गया है…” राहुल ने आखिरकार समझाया।

“क्या!?.. क्या तुम लोग पागल हो!.. इस तरह का बिज़नेस संभालना कोई मज़ाक नहीं है… बिज़नेस चलाने के लिए तुम्हारी लिस्ट में कई क्लाइंट होने चाहिए मूर्खों!.. तुम्हें यह आइडिया किसने दिया?..” विशाल राहुल और नीता की योजनाएँ सुनकर हैरान और जलन से भर गया।

नीता और राहुल आत्मविश्वास से एक-दूसरे की ओर देखे।

“हम जानते हैं सर, लेकिन हमें कहीं न कहीं से शुरुआत करनी ही थी… इसलिए हमने सोचा कि अभी क्यों नहीं, और हमने यह करने का फैसला किया,” राहुल ने दृढ़ता से जवाब दिया।

“ओके तो, सुनो बेवकूफों!.. मैं तुम्हें याद दिला दूँ… बस कुछ ही दिनों में… बस कुछ ही… तुम लोग जान जाओगे कि असल में तुम्हारी हैसियत क्या है! लेकिन तब मुझसे नौकरी के लिए भीख माँगने मत आना!” विशाल गुस्सा हो गया और उन पर चिल्लाने लगा।

“डोंट वरी सर, हम आपके पास दोबारा नहीं आएँगे!”

नीता ने भी गुस्से में जवाब दिया और दोनों के इस्तीफे टेबल पर फेंक दिए!, फिर दोनों उठे और ऑफिस से तेज़ कदमों से बाहर चले गए। हालाँकि वे इस तरह खत्म नहीं करना चाहते थे,

और इसीलिए नीता ने विशाल को आखिरी ब्लोजॉब दिया था, यह सोचकर कि विशाल उसकी सेवा के बारे में सोचेगा… लेकिन जैसे विशाल ने व्यवहार किया, उन्हें भी अनादरपूर्ण व्यवहार करना पड़ा।

इस्तीफे के बाद राहुल और नीता अपने घर के लिविंग रूम में बैठे कॉफी पी रहे थे। हवा में एक अजीब सी खामोशी थी – आज़ादी की खुशी के साथ-साथ अनिश्चितता का एक बोझ भी।

“अब क्या नीता?” राहुल ने पूछा, अपने मग को दोनों हाथों से पकड़े हुए।

“मैं संजीव को कॉल करती हूँ,” नीता ने कहा और फोन उठा लिया। उसने संजीव का नंबर डायल किया।

“रिंग रिंग….रिंग…रिंग……रिंग रिंग…”

फोन बजता रहा, कोई जवाब नहीं। उसने दोबारा कोशिश की। तीन बार। हर बार वही लंबी, बेकार रिंगटोन। नीता का चेहरा थोड़ा सख्त हो गया।

“ओह गॉड!” उसने छोटी सी आह भरते हुए कहा, डर की एक हल्की लकीर उसकी आँखों में दौड़ गई।

“क्या हुआ?” राहुल ने पूछा, अपनी सीट पर सीधा बैठते हुए।

“संजीव फोन नहीं उठा रहा है!” नीता ने बड़बड़ाते हुए कहा, उसकी उँगलियाँ फोन के स्क्रीन पर बेचैनी से टैप करने लगीं।

“क्या!?.. फिर से कोशिश करो!” राहुल हैरानी से उछलकर खड़ा हो गया।

नीता ने फिर से डायल किया। हर रिंग के साथ उनकी साँसें थम सी जातीं। कोई जवाब नहीं।

“नीता, मुझे लगता है संजीव ने हमें फसाया है..! मुझे लगता है उसने तुमसे झूठे वादे किए थे… ओह गॉड हम बर्बाद हो गए..!!

अब विशाल हमें कहीं और भी नौकरी करने नहीं देगा! वह आदमी ताकतवर इंसान है नीता..!!!”

राहुल घबराने लगा, उसने अपने बालों में हाथ फेरा। उसकी कल्पना में उनकी सारी मेहनत और योजनाएँ धूल में मिलती नज़र आ रही थीं।

“शांत हो जाओ राहुल, ऐसा नहीं है, तुम ज़्यादा सोच रहे हो, संजीव हमारे साथ ऐसा नहीं करेगा! उसने वादा किया था! शायद वह व्यस्त है, या कहीं बाहर है… मैं फिर कोशिश करती हूँ…”

नीता ने राहुल को शांत करने की कोशिश की, लेकिन अंदर से वह खुद भी सन्न थी और घबराई हुई थी। उसके हाथ फोन के स्क्रीन पर काँप रहे थे। उसने एक के बाद एक संजीव को कॉल करना शुरू कर दिया, एक जुनून के साथ, मानो फोन उठवाने का दबाव बना रही हो।

और अचानक… कॉल रिसीव हो गई।

“येस माई स्लट!.. हाउ आर यू?.. सॉरी, द फोन वाज समवेयर एल्स,” फोन के दूसरी ओर से संजीव की आवाज़ आई।

“फ्फ्व्वेस्स्स्ह्ह!!!!”

नीता ने चिंता की सारी हवा एक लंबी साँस के साथ बाहर निकाल दी। उसकी आँखें बंद हो गईं। राहुल भी राहत से भरकर वापस अपनी कुर्सी पर गिर गया, जैसे उसकी रीढ़ की हड्डी से तनाव का सारा दबाव एकदम से हट गया हो।

“हाय.. संजीव.. मैं बस तुम्हें बताना चाहती थी कि, हमने आज ही इस्तीफा दे दिया है… और मैंने सोचा हम तुमसे मिलने के लिए तुम्हारे पास आएँ, बस एक फॉर्मल मीटिंग के लिए, ऑफकोर्स अगर तुम फ्री हो!” नीता ने संजीव से पूछा।

“ओह्ह… ऑफ कोर्स..! व्हाई नॉट!.. यू नो वेयर टू फाइंड मी.. कम सून आई एम वेटिंग!.. एंड ब्रिंग राहुल विद यू टू.. आई डिडन्ट पर्सनली मीट हिम,” संजीव ने जवाब दिया।

“ओके तो मैं तुम्हें वहीं मिलती हूँ,” नीता ने कहा और फोन काट दिया और एक बार फिर गहरी साँस ली।

“ओह माई गॉड!.. एक सेकंड के लिए मेरी साँस ही रुक गई थी! तुमने मुझे भी घबरा दिया बेवकूफ!” नीता ने राहुल पर तकिया फेंक मारा, क्योंकि वो घबराया था और उसकी वजह से वह भी घबरा गई थी।

“अरे मुझपर दोष मत डालो… यह उसकी गलती थी, वह फोन उठा ही नहीं रहा था!” राहुल ने जवाब दिया, तकिए को पकड़ते हुए।

“ओके अब सुनो,.. हमें अब उससे मिलना है! और जल्द से जल्द कानूनी तौर पर कॉन्ट्रैक्ट बनाना है, ताकि यह हमारी उसके साथ पार्टनरशिप को कन्फर्म कर दे…” नीता ने कहा, अब उसकी आवाज़ में वही व्यावहारिकता और दृढ़ता लौट आई थी।

“हम्म… तुम सही कह रही हो नीता… हमें कुछ पेपरवर्क पहले ही तैयार कर लेना चाहिए,” राहुल सहमत हुआ।

फिर वे दोनों उठे और संजीव के घर जाने के लिए तैयार होने लगे। अब डर की जगह एक नई, तीव्र उम्मीद ने ले ली थी।

To be continued . . .

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