क्यों बन गया एक पति Cuckold ? – 2

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पिछले कुछ हफ्तों में मोहित का आना-जाना एक नियमित बात हो गई थी। हर रात, ठीक आठ बजे, वह शेखर और पूजा के घर पहुँचता।

शेखर खुद ही दरवाज़ा खोलता, उसे अंदर ले जाता, और फिर तीनों बेडरूम में चले जाते।

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पहली रात की हिचकिचाहट, वह डर, वह अनकहा सवाल – सब कुछ धीरे-धीरे खत्म हो गया था। अब यह उनकी नई ज़िंदगी का हिस्सा बन गया था।

पूजा अब मोहित के सामने बिना किसी शर्म के नंगी हो जाती। वह जानती थी कि शेखर यह सब देख रहा है और उसकी आँखों में अब वह दर्द नहीं था जो पहली रात था।

बल्कि एक अजीब सी चमक थी, एक उम्मीद। शेखर का लंड अब पूरी तरह मुलायम नहीं रहता था – कभी-कभी वह आधा सख्त हो जाता, कभी-कभी पूरी तरह।

पूजा को लगता था कि शेखर ठीक हो रहा है, और यह सोच उसे संतुष्टि देती थी।

मगर मोहित के लिए यह सिर्फ एक “मदद” नहीं रह गई थी।

वह पूजा के शरीर का आदी हो चुका था – उसकी गर्म चूत, उसके छोटे सख्त स्तन, उसकी मुलायम जाँघें, और वह आवाज़ जो वह चरमसुख के समय निकालती थी।

हर रात वह शेखर के घर जाता और हर रात वह पूजा को चोदता। मगर उसे और चाहिए था – नया रोमांच, नया उत्साह।

एक दिन ऑफिस में मोहित ने शेखर और पूजा से कहा, “आज रात अनिकेत की बर्थडे पार्टी है। मैं वहाँ जा रहा हूँ। तुम भी चलो शेखर।”

शेखर ने सिर हिलाकर मना कर दिया। “नहीं मोहित, मुझे नहीं जाना। तू जा। हम कल मिलेंगे।”

मोहित ने कंधे उचकाए और चला गया। शाम को वह पार्टी में पहुँचा – अनिकेत के घर पर बड़ी सी बालकनी में सजावट की गई थी, रंग-बिरंगी लाइटें जल रही थीं, संगीत बज रहा था।

निखिल, मयूर, राजेश और अनिकेत सब वहाँ थे। कुछ और लोग भी थे, मगर देर रात धीरे-धीरे सब चले गए।

सुबह के तीन बजे थे। बालकनी में सिर्फ पाँचों दोस्त बचे थे – मोहित, निखिल, मयूर, राजेश और अनिकेत।

चारों तरफ खाली बोतलें पड़ी हुई थीं, मोहित का सिर घूम रहा था, उसकी आँखें लाल हो गई थीं। उसने बहुत पी लिया था।

“मोहित, तू तो आज कल शेखर से कुछ ज्यादा ही घुलमिल गया है, हमेशा उसके घर ही रहता है,” निखिल ने मज़ाक में कहा, उसकी आवाज़ में शराब का नशा था। “तेरा तो वहीं घर हो गया है, साले।”

मोहित ने ठहाका लगाया। “हाँ यार… शेखर का घर, मगर मैं वहाँ अपनी प्यास बुझाने जाता हूँ।”

“मतलब?” राजेश ने पूछा, उसकी भौंहें सिकुड़ गईं।

मोहित ने एक और घूँट पी ली, फिर अपने हाथ से इशारा करते हुए बोला, “तुम लोग नहीं जानते? शेखर को एरेक्टाइल डिसफंक्शन है।

उसका लंड खड़ा नहीं होता। मैं उसकी बीवी को चोदता हूँ ताकि वह देख सके और उसे एरेक्शन आ जाए।”

चारों की आँखें खुली की खुली रह गईं। वे एक दूसरे को देखने लगे, उनके चेहरे पर हैरानी और अविश्वास था।

“क्या बक रहा है?” अनिकेत ने कहा, उसकी आवाज़ गिर गई थी।

“सच कह रहा हूँ,” मोहित ने कहा, उसकी जीभ लड़खड़ा रही थी।

“पूजा की चूत कितनी टाइट है, मालूम है? और उसका मुँह… वह तो मेरा पूरा लंड ले लेती है… गले तक… मैं तो रोज़ चोदता हूँ उसे… और शेखर देखता रहता है, अपनी बीवी को मेरे नीचे तड़पता हुआ।”

मयूर ने अपनी जीभ से अपने होंठों को गीला किया। उसकी आँखों में एक चमक आ गई। “सच में? पूजा भाभी इतनी हॉट हैं… और तू रोज़ उन्हें चोदता है?”

“हाँ यार, हर रात। मैं आठ बजे जाता हूँ, सीधा बेडरूम में जाता हूँ, और पूजा पहले से तैयार होती है – नंगी, टांगे फैली हुई, मेरी राह देखती,” मोहित ने कहा, उसकी आवाज़ में अहंकार था।

“मैं उसे चोदता हूँ, उसके मुँह में अपना माल छोड़ता हूँ, और फिर शेखर अपने आधे सख्त लंड को देखकर रोता है।”

अनिकेत ने मोहित के कंधे पर हाथ रखा। “मोहित, तूने तो कमाल कर दिया। मगर अब तू हमारे बारे में क्या सोचता है?”

“मतलब?” मोहित ने पूछा, उसकी आँखें आधी बंद थीं।

“हम भी तो चाहते हैं पूजा भाभी को,” राजेश ने कहा, उसकी आवाज़ में एक लालच था। “सब लोग ऑफिस में उन्हें देखते हैं… वह साड़ी में कितनी सेक्सी लगती हैं… हम सब चाहते हैं उन्हें।”

निखिल भी बोल पड़ा, “हाँ यार, अब जब तू रोज़ जाता है, तो हम भी चाहते हैं। शेखर को कोई फर्क नहीं पड़ेगा – एक और दो और चार… उसे तो बस अपनी बीवी को दूसरों के साथ देखना है।”

मोहित ने अपना सिर हिलाया, उसके दिमाग में शराब का नशा था, मगर फिर भी वह समझ गया कि उसने क्या कर दिया है। “नहीं यार… ये तो राज़ था… मैंने शेखर से वादा किया था… पूजा से भी…”

“अब तो राज़ निकल गया,” मयूर ने कहा, उसकी आवाज़ में एक धमकी थी। “अब तो हम सब जानते हैं। और अगर तूने हमें मौका नहीं दिया, तो हम पहले ऑफिस में बताएँगे और बाद में शेखर को बता देंगे कि कैसे तूने शराब पीकर सब बता दिया।”

मोहित ने गहरी साँस ली। उसका सिर घूम रहा था, मगर वह जानता था कि वह फँस चुका है। “ठीक है… मैं बात करूँगा शेखर से… और पूजा से… मगर मैं कुछ वादा नहीं कर सकता।”

अगले कुछ दिनों में ऑफिस में माहौल बदल गया। पूजा को लगता था कि निखिल, मयूर, राजेश और अनिकेत उसे एक अजीब तरह से देख रहे हैं – पहले से ज़्यादा।

उनकी निगाहें उसके शरीर पर रहती थीं, उसकी साड़ी के पल्लू पर, उसकी छाती पर। वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या बात है, मगर उसे बेचैनी होती थी।

उसने शेखर से भी कहा, “शेखर, मुझे लगता है निखिल और मयूर मुझे अजीब तरीके से देख रहे हैं। पहले भी देखते थे, मगर अब… कुछ अलग है।”

शेखर ने कंधे उचकाए। “तू अच्छी लगती है पूजा, देखते होंगे। कोई बात नहीं।”

पूजा चुप हो गई, मगर उसके मन में एक बेचैनी बनी रही।

एक हफ्ते बाद, मोहित रात को उनके घर आया। हमेशा की तरह, वह बेडरूम में गया, पूजा नंगी थी, शेखर कुर्सी पर बैठा था।

मोहित ने पूजा को चोदा, उसके मुँह में अपना वीर्य छोड़ा, और फिर तीनों बातें करने लगे – हमेशा की तरह।

मगर इस रात, मोहित की बातों में एक झिझक थी। वह एक जगह बैठा रहा, अपने हाथों को देखता रहा, बार-बार अपना गला साफ़ करता रहा।

“क्या बात है मोहित?” पूजा ने पूछा, उसने अपने बालों को ठीक किया और चादर से अपने शरीर को ढक लिया। “आज तू चुप क्यों है?”

मोहित ने गहरी साँस ली। “शेखर… पूजा… मुझे तुम दोनों को कुछ बताना है।”

शेखर ने उसकी तरफ देखा। “क्या हुआ भाई? बता।”

“वो… तुम लोगों को पता है न अनिकेत की बर्थडे पार्टी मैं गया था? वहाँ मैंने ज़्यादा पी ली थी…” मोहित ने कहा, उसकी आवाज़ धीमी हो गई।

“हाँ, तो?” पूजा ने पूछा, उसकी आँखों में सवाल था।

“और… मैंने निखिल, मयूर, राजेश और अनिकेत को… हमारे बारे में बता दिया। मैंने उन्हें सब बता दिया – शेखर की समस्या, हमारा सेक्स, और कैसे मैं पूजा को चोदता हूँ।”

शेखर का चेहरा एकदम गुस्से से भर गया। वह अपनी कुर्सी से उठा, उसके हाथ मुट्ठी में बंद हो गए। “क्या? मोहित, तूने क्या कर दिया? हमने तो वादा किया था कि ये राज़ हमारे बीच रहेगा।”

पूजा की आँखों में आग थी। वह गुस्से से काँप रही थी। “तूने सबको बता दिया? हमारा राज़? मोहित, तू पागल हो गया है?

हमने तुझ पर भरोसा किया! मैंने अपना शरीर तुझे दिया, ताकि मेरी शादी बच सके… और तूने जाकर सबको बता दिया?”

“मुझे माफ़ कर दो पूजा, मैंने बहुत पी ली थी, मुझे याद नहीं मैंने क्या कहा,” मोहित ने हाथ जोड़ते हुए कहा, उसकी आँखों में पछतावा था मगर उसकी आवाज़ में वही बेपरवाही भी थी।

पूजा गुस्से से उठी। उसने चादर को अपने शरीर पर कसकर लपेटा और मोहित के सामने खड़ी हो गई। उसकी आँखों में आँसू थे मगर गुस्सा उन पर भारी था।

“अरे तुम लोग पागल हो गए हो? पाँचों एक साथ? मेरा क्या होगा? और तुम क्या समझते हो मुझे?” वह चिल्लाई, उसकी आवाज़ काँप रही थी।

“मैं तुम सबकी रंडी नहीं हूँ मोहित! मैंने सिर्फ अपने पति की खातिर ये सब किया था। अपनी शादी बचाने के लिए।

और तू जाकर सबको बता देता है? और अब वे चारों भी मुझे चोदना चाहते हैं?”

उसने शेखर की तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अपील थी।

मगर शेखर की निगाह अचानक अपने नीचे चली गई। उसकी बातें रुक गईं। उसने अपने लंड को देखा – वह पूरी तरह से सख्त हो चुका था।

कई हफ्तों बाद पहली बार वह पूरी तरह से खड़ा था, उसकी नसें उभरी हुई थीं। जब से यह समस्या शुरू हुई थी, उसने अपने लंड को इतना सख्त कभी नहीं देखा था, जैसे वो नॉर्मल हो गया हो।

“इसे देखो,” शेखर ने कहा, उसकी आवाज़ में हैरानी और उत्तेजना दोनों थी।

पूजा और मोहित दोनों ने नीचे देखा। पूजा की आँखें खुली की खुली रह गईं।

उसने शेखर के लंड को देखा – वह पूरी तरह से सख्त था, उसके सामने खड़ा था, कई हफ्तों बाद पहली बार इतनी ताकत से।

“शेखर… ये तो…” पूजा ने कहा, उसकी आवाज़ में आश्चर्य और राहत दोनों थी। उसने अपना हाथ बढ़ाकर शेखर के लंड को छुआ।

वह सख्त था, गर्म था। उसने उसे अपने हाथ में लिया और धीरे से सहलाया। “ये… ये पूरी तरह से सख्त है।”

शेखर ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसने पूजा के हाथ को अपने लंड पर महसूस किया – वह गर्म, मुलायम स्पर्श।

मगर सबसे ज़्यादा, उसने अपने मन में उस तस्वीर को देखा – पूजा, नंगी, चार या पाँच मर्दों के बीच।

उनके हाथ उसके शरीर पर, उनके लंड उसके मुँह में, उसकी चूत में, उसके गांड में। और वह देख रहा है। वह वहाँ है, देख रहा है अपनी बीवी को…

और उसी सोच ने उसके लंड को और सख्त कर दिया।

तीनों की निगाहें उस लंड पर जमी हुई थीं। वह कुछ सेकंड तक सख्त रहा, फिर धीरे-धीरे मुलायम होना शुरू हो गया।

जैसे ही शेखर का ध्यान अपने विचारों से भटका, वह फिर से ढीला पड़ने लगा।

लेकिन यह सब देखने के बाद, कमरे में एक अलग ही सन्नाटा था। तीनों एक दूसरे को देख रहे थे, और वे सब समझ गए थे कि यह कोई इत्तफ़ाक नहीं था।

मोहित ने धीरे से अपने कपड़े पहनने शुरू किए। वह चुपचाप तैयार हुआ और बाहर जाने से पहले बोला,

“मैं जा रहा हूँ। तुम दोनों जो फैसला करो, मुझे बता देना।” वह बिना किसी और शब्द के चला गया।

पूरी रात पूजा और शेखर चुप रहे। वे बिस्तर पर साथ-साथ लेटे थे, मगर उनके बीच एक अलग ही दूरी थी।

उनके दिमाग में हज़ारों विचार उठ रहे थे – क्या यह सही था? क्या वे इसे कर सकते थे? और अगर करते, तो इसका उनकी शादी पर क्या असर होता?

सुबह के चार बजे थे जब पूजा ने चुप्पी तोड़ी। उसने शेखर का हाथ अपने हाथ में लिया और धीमी आवाज़ में कहा, “शेखर, मैंने तय कर लिया है। मैं यह करूँगी।”

शेखर ने उसकी तरफ देखा, उसकी आँखों में सवाल था। “पूजा, तू पक्का चाहती है? मैं तुझे मजबूर नहीं करना चाहता।”

“तूमने मुझे कभी मजबूर नहीं किया शेखर। मैं खुद चाहती हूँ तुम्हे ठीक देखना। तूम मेरे पति हो, मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ।”

उसने शेखर के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसे चूमा। “और आज तूमने अपनी आँखों से देखा कि यह काम करता है।

जब हमने पाँच मर्दों की बात की, तो तुम्हारा… वह पूरी तरह से सख्त हो गया था। मैंने अपनी आँखों से देखा।”

शेखर की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने पूजा को कसकर गले लगा लिया। माफ़ कर मुझे पूजा, मुझे माफ़ कर दे। मैं तुझे इस सब से गुज़रने पर मजबूर कर रहा हूँ।

“तूम मुझे मजबूर नहीं कर रहे शेखर। मैं खुद कर रही हूँ। क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूँ।”

अगले दिन, ऑफिस के बाद शेखर और पूजा ने मोहित, निखिल, राजेश, अनिकेत और मयूर को कैफेटेरिया में बुलाया।

यह वही कैफेटेरिया था जहाँ दिन में सब लंच करते थे, मगर शाम के समय वहाँ कोई नहीं था। सारे कर्मचारी जा चुके थे, सिर्फ वे छह लोग थे।

शेखर ने बात शुरू की। उसने सबको बताया कि कैसे उसकी समस्या शुरू हुई, कैसे वह डॉक्टर के पास गया, कैसे कुछ काम नहीं किया, और कैसे अंत में उसने मोहित से मदद माँगी।

“मैं जानता हूँ यह सब तुम लोगों को अजीब लगेगा। मगर मेरी शादी खतरे में थी। मैं अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पा रहा था।

और यह एकमात्र तरीका था जो काम करता दिख रहा है,” शेखर ने कहा, उसकी आवाज़ में ईमानदारी थी।

पूजा ने सबको देखा। उसकी आँखों में शर्म थी, मगर दृढ़ता भी थी। “मैं यह सब कर रही हूँ अपने पति के लिए। तुम लोग समझो या न समझो, मुझे फर्क नहीं पड़ता।

मगर एक बात याद रखना – यह हमारा राज़ है। किसी और को नहीं पता चलना चाहिए। कभी नहीं।”

निखिल ने हाथ उठाया। “पूजा भाभी, हम वादा करते हैं। यह हमारे बीच का राज़ रहेगा। कोई नहीं जानेगा।”

राजेश, अनिकेत और मयूर ने भी सिर हिलाया। मोहित ने भी उनका साथ दिया। “हम कभी नहीं बताएँगे, पूजा भाभी। यह हमारा सीक्रेट है।”

फिर मयूर ने सवाल किया, “मगर यह कैसे होगा? मतलब… पाँच आदमी, एक औरत। यह कैसे संभव होगा?”

पूजा ने गहरी साँस ली। “यही तो मैं भी सोच रही थी। मेरी चूत तो सूज जाएगी अगर तुम सब एक के बाद एक मुझे चोदोगे। मैं एक या दो को तो संभाल सकती हूँ, मगर पाँचों को एक साथ?”

वह चुप हो गई।

शेखर कुछ देर सोचता रहा। फिर उसने पूजा की तरफ देखा, उसकी आवाज़ में हिचकिचाहट थी। “पूजा… तूने कभी… एनल ट्राय किया है?”

पूजा की आँखें थोड़ी फैल गईं। उसने नीचे देखा, फिर शेखर की तरफ देखा। “हाँ… एक बार। एक टॉय से। मगर… किसी असली मर्द के साथ नहीं।”

“क्या तू… क्या तू अब इसे ट्राय करने के लिए तैयार है?” शेखर ने पूछा, उसकी आवाज़ में डर था।

पूजा ने गहरी साँस ली, फिर चारों की तरफ देखा। “हाँ… मैं कोशिश कर सकती हूँ। अगर इससे तुम सबको संतुष्टि मिलेगी और शेखर की समस्या ठीक होगी, तो मैं इसे भी सीख सकती हूँ।”

फिर शेखर ने पूरी योजना समझाई। “हम ऐसे करेंगे – एक लंड पूजा की चूत में होगा, एक उसके गांड में, और एक उसके मुँह में। बाकी दो, वह अपने दोनों हाथों से सहलाएगी।

इस तरह सबको एक साथ संतुष्टि मिलेगी, और हम पोजीशन बदलते रहेंगे ताकि हर किसी को हर जगह का मज़ा मिले।”

मोहित ने सिर हिलाया, उसके चेहरे पर एक प्रशंसा भरी मुस्कान थी। “बिल्कुल सही प्लान है शेखर। इस तरह पूजा भाभी को भी अलग-अलग अनुभव मिलेंगे, और हम सबको भी।”

मयूर ने पूजा की तरफ देखा, उसकी आँखों में एक चमक थी। “पूजा भाभी, आज गुरुवार है। हमारा प्लान है कि रविवार को हम ये सब करेंगे। मगर उससे पहले, आपको तैयारी करनी होगी।”

“कैसी तैयारी?” पूजा ने पूछा, उसकी आवाज़ में हल्की सी घबराहट थी।

“आपको आज से ही बट प्लग का इस्तेमाल शुरू करना होगा। ताकि आपकी गांड तीन दिनों में खुल जाए और रविवार तक हमारे लिए तैयार हो जाए,” मयूर ने समझाया, उसकी आवाज़ में एक ठंडक थी।

पूजा ने शेखर की तरफ देखा – शेखर ने उसका हाथ पकड़ा और धीरे से दबाया, जैसे कह रहा हो ‘सब ठीक होगा’।

“ठीक है। मैं करूँगी,” पूजा ने कहा, उसकी आवाज़ अब पहले से ज़्यादा मज़बूत थी।

सबने एक दूसरे को देखा। बिना किसी और शब्द के, वे समझ गए कि अब यह तय हो चुका है। रविवार को सब कुछ बदलने वाला था।

एक-एक करके सब उठने लगे। मोहित ने शेखर के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “चिंता मत कर भाई। हम सब ध्यान रखेंगे।”

शेखर ने सिर हिलाया, मगर उसकी आँखें पूजा पर थीं। पूजा अब भी वहीं बैठी थी, कैफेटेरिया की खाली मेज पर, अपने विचारों में खोई हुई।

पूजा को यकीन नहीं हो रहा था कि वह किस ओर बढ़ रही है। पहले सिर्फ मोहित के साथ एक रात का प्रयोग, फिर हफ्तों का नियमित सेक्स, और अब पाँच मर्दों के साथ एक साथ।

उसके मन में एक डर था, मगर उससे भी बड़ी एक बात थी – उसने शेखर को पिछली रात देखा था, उसके लंड को पूरी तरह सख्त होते देखा था। और वह उस पल को फिर से देखना चाहती थी।

वह जानती थी कि यह रास्ता उसे और गहराई में ले जाएगा, मगर वह रुकना नहीं चाहती थी।

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