क्यों बन गया एक पति Cuckold ? – 1

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शेखर और पूजा की शादी को पाँच साल हो गए थे। दोनों आधुनिक सोच के थे और बेंगलुरु जैसे शहर में रहते थे।

उनकी लाइफस्टाइल भी उतनी ही मॉडर्न थी जितनी उनकी सोच। शेखर का शरीर स्लिम फिट था, उसकी कमर पतली और कंधे चौड़े थे।

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मगर उसका लंड सिर्फ पाँच इंच का था – एक सच जो वो जानता था और पूजा भी जानती थी।

पूजा ने अपनी शादी के पाँच सालों में भी अपना फिगर बिल्कुल पहले जैसा बनाए रखा था।

रोज़ सुबह योगा और शाम को ज़ुम्बा क्लासेज़ ने उसके छोटे लेकिन सख्त स्तनों को और भी टाइट बना दिया था।

उसकी गांड गोल और सख्त थी, जिस पर उसकी स्कर्ट या लेगिंग्स कस कर चढ़ती थीं। उसकी कमर इतनी पतली थी कि लगता था कोई मर्द उसे आसानी से दो हाथों में घेर सकता है।

दोनों ने अपनी पहली डेट पर ही सब कुछ खोल कर रख दिया था – पिछले रिश्ते, बॉडी काउंट, सेक्सुअल फैंटेसीज़। यही वजह थी कि उनकी शादी में कोई झूठ या शर्म नहीं थी।

वो एक दूसरे से सब कुछ शेयर करते थे, खासकर अपनी सेक्सुअल फैंटेसीज़।

उस दिन का मौसम नम था। बेंगलुरु की बारिश ने पूरे शहर को एक अलग ही एहसास दिया था।

ऑफिस की एसी बिल्डिंग नंबर ७, तीसरी मंजिल पर शेखर के केबिन के बाहर पूजा खड़ी थी। उसने आज एक टाइट व्हाइट शर्ट पहनी थी जो उसके नीचे दबे हुए छोटे स्तनों को बिल्कुल उभार रही थी।

नीचे ब्लैक पेंसिल स्कर्ट जो उसकी गोल गांड को इतना टाइट कर रही थी कि हर मूवमेंट पर उसकी गांड का शेप साफ़ दिखता था। उसके पैरों में हील्स थीं और जब वो चलती थी तो उसकी गांड हिलती थी जैसे कोई जानबूझ कर नचा रहा हो।

“शेखर, सुबह से मुझे मिस कर रहे हो?” पूजा ने शेखर के केबिन में घुसते ही सवाल किया, उसकी आवाज़ में एक चिढ़ाने वाली नर्मी थी।

शेखर ने अपनी कुर्सी घुमाई और पूजा को देखा। उसकी नज़र पहले उसके स्तनों पर गई, फिर उसकी कमर पर और फिर उस स्कर्ट पर जो उसकी गांड को इस तरह निचोड़ रही थी।

“यार पूजा, तू जानती है मैं हर रोज़ तुझे मिस करता हूँ। मगर आज तूने तो और भी ज्यादा गर्म टाइट कपड़े पहने हैं,” शेखर ने चिढ़ाते हुए कहा, उसकी आँखों में एक चमक थी।

पूजा ने अपने बालों में हाथ घुमाया, “अच्छा? और तू जानता है ऑफिस के सभी लोग आज मुझे कैसे देख रहे हैं?”

“हाँ हाँ, मैं जानता हूँ। वो सब तेरी चूत का स्वाद लेना चाहते हैं। मगर मैं तो उन्हें जलन में मरता देखना चाहता हूँ,” शेखर ने ज़ोर से हँसते हुए कहा।

शेखर केबिन से बाहर निकला और कैफेटेरिया की तरफ चला गया। वहाँ उसके चार दोस्त बैठे थे – मोहित, निखिल, राजेश, और अनीकेत।

पाँचवाँ मयूर था जो अभी आया नहीं था। सभी अनमैरिड थे और सभी के पास सात-आठ इंच के लंड थे। सभी फिट और हेल्दी थे।

“अरे भाई लोग, सब कैसे हो?” शेखर ने हँसते हुए कहा और उनके बीच बैठ गया।

“शेखर भाई, सब ठीक है। मगर आज पूजा भाभी तो बहुत हॉट लग रही हैं,” मोहित ने कहा, मगर उसकी आवाज़ में हिचकिचाहट थी।

“हाँ यार, वो तो रोज़ ही हॉट लगती हैं। कल रात भी तो देखो क्या कुछ किया,” शेखर ने धीमी आवाज़ में कहा, उसकी आँखों में शरारत थी।

“भाई, प्लीज़ मत बताओ। हम बेचारे अनमैरिड लोग हैं, हमारा दिल जल जाएगा,” राजेश ने अपना चेहरा ढकते हुए कहा।

शेखर ने अपनी कुर्सी आगे बढ़ाई और धीमी आवाज़ में बोलने लगा, “अरे सुनो तो सही..।

पूजा ने मुझे बेड पर लिटाया और… वो मुझ पर ऐसे बैठी जैसे कोई रानी हो….और…छोडो जाने दो, तुम लोग सुन के क्या कर लोगे..ढंग की एक गर्लफ्रेंड नहीं है तुम्हारे पास। लड़कियों से इतना डरते क्यों हो?। कोई लड़की क्यों नहीं पटाते तुम लोग?”

“भाई, तेरी बात तो सही है। मगर पूजा भाभी जैसी लड़की कहाँ मिलती है,” मोहित ने कहा, उसकी निगाहें नीची थीं।

“हाँ, बिल्कुल नहीं मिलती। मेरी पूजा तो बात ही अलग है। वो जानती है मैं उसे कैसे चाहता हूँ और वो भी मुझे वैसे ही चाहती है,” शेखर इतना बोलकर उठ गया और अपने केबिन की तरफ चला गया।

पूजा इस बीच अपने केबिन में फाइल्स लगा रही थी। उसके पीछे का शीशा था जिसमें कई लोग उसकी गांड देख रहे थे, मगर वो जानती थी कि कोई उसके बारे में कुछ नहीं कहेगा क्योंकि वो शेखर की बीवी थी।

अचानक आकाश सिंघानिया का एनाउंसमेंट हुआ। “शेखर, पूजा, मेरे केबिन में आओ।”

दोनों बॉस के केबिन में घुसे। आकाश सिंघानिया ५५ साल का था मगर उसका शरीर जिम मसल्स से भरा हुआ था।

उसकी शर्ट के नीचे उसकी पेक्टोरल मसल्स साफ दिखती थीं और उसकी पतलून में उसका ८ इंच का लंड एक अलग ही उभार बना रहा था।

“बैठो। मैं देख रहा हूँ तुम दोनों का ऑफिस में खूब मज़े चल रहे है,” आकाश ने मुस्कुराते हुए कहा।

“सर, हम तो बस थोड़ा मज़ाक कर रहे थे,” पूजा ने अपनी आवाज़ में शर्म का भाव दिखाते हुए कहा, मगर उसकी आँखों में वही चिढ़ाने वाली चमक थी।

आकाश ने अपनी कुर्सी घुमाई और खिड़की से बाहर देखने लगा। “मैं जानता हूँ तुम लोगों का हालचाल।

तुम दोनों ने अपने रिश्ते को इतना खुला रखा है कि पूरा ऑफिस तुम्हारी बातें करता है। मगर कोई बात नहीं, इससे लोगों का स्ट्रेस कम होता है – ये भी एक तरह का मैनेजमेंट है।”

शेखर ने हँसते हुए कहा, “सर, आप तो बहुत समझदार हैं। हम तो बस अपना काम कर रहे हैं और मज़े कर रहे हैं।”

“अच्छा, अब जाओ। मगर याद रखना, ऑफिस की गरिमा बनी रहनी चाहिए,” आकाश ने हाथ घुमाकर इशारा किया।

दोनों बाहर आ गए। शेखर का चेहरा खिला हुआ था। “देखा पूजा? हमारे बॉस भी हमें सपोर्ट करते हैं।”

“हाँ, मगर वो बहुत खतरनाक लगता है। उसकी निगाहें मुझे अलग ही तरह से घूर रही थीं,” पूजा ने धीमी आवाज़ में कहा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी कँपकँपी थी।

कुछ दिन ऐसेही बीते और एक दिन ऐसा कुछ हुआ जिसने शेखर और पूजा की ज़िन्दगी हमेशा के लिए बदल दी.

शेखर उस दिन ऑफिस से लौटते वक्त अपनी बाइक से गिर गया। बारिश की वजह से सड़क फिसलन भरी थी, और एक तेज मोड़ पर उसका संतुलन बिगड़ गया।

वह सीधे डिवाइडर से जा टकराया। उसकी कमर के निचले हिस्से पर गहरी चोट आई। कुछ देर तो वह बेहोश पड़ा रहा, फिर किसी राहगीर ने उसे उठाकर अस्पताल पहुँचाया।

पूजा को जैसे ही खबर मिली, वह दौड़ती हुई अस्पताल पहुँची। उसकी आँखों में आँसू थे, हाथ काँप रहे थे। शेखर को बेड पर पड़ा देखकर उसका दिल बैठ गया।

पाँच दिन उसे अस्पताल में रहना पड़ा। पूजा ने एक पल भी उसका साथ नहीं छोड़ा। वह उसके बिस्तर के पास ही एक कुर्सी पर बैठी रही, उसके माथे पर हाथ फेरती, उसे पानी पिलाती, उसके घावों पर मरहम लगाती।

पाँचवें दिन जब शेखर थोड़ा ठीक हुआ, तो डॉक्टर ने दोनों को अपने केबिन में बुलाया। डॉक्टर एक अनुभवी सर्जन था, उम्र करीब पैंसठ साल, चेहरे पर गंभीरता लिए, उसने चश्मा उतारकर मेज पर रखा और गहरी साँस ली।

“शेखर बेटा, तुम्हारी चोटें खतरनाक नहीं हैं। हड्डियाँ सही हैं, अंदरूनी खून बहना भी रुक गया है। लेकिन एक बात है जो मैंने अब तक इसलिए नहीं बताई क्योंकि तुम्हें पैनिक अटैक न हो।”

पूजा का चेहरा पीला पड़ गया। उसने शेखर का हाथ कसकर पकड़ लिया। शेखर ने डॉक्टर की आँखों में देखा, “डॉक्टर साहब, क्या हुआ? मुझे सीधे बताइए।”

“बेटा, तुम्हारी कमर पर जो चोट लगी है, वो सिर्फ बाहर नहीं है। अंदर भी कुछ नुकसान हुआ है। तुम्हारी कमर के निचले हिस्से की नसों पर असर पड़ा है। इससे…”

डॉक्टर रुका। उसने पूजा की तरफ देखा, फिर शेखर की तरफ। “इससे तुम्हें इरेक्शन में समस्या हो सकती है। यानी… तुम्हारा लिंग सख्त नहीं हो पाएगा।”

दोनों के चेहरे पर एक ठंडी सन्नाटा छा गया। शेखर की आँखें खुली की खुली रह गईं। उसके होंठ काँपने लगे। पूजा का हाथ उसके हाथ पर से हट गया। वह सिर्फ डॉक्टर को देखती रह गई।

“लेकिन डॉक्टर साहब… मतलब… ये स्थायी है?” शेखर की आवाज़ टूट रही थी।

“नहीं बेटा, ये स्थायी नहीं है। अगर तुम नियमित एक्सरसाइज करो और… सेक्सुअल स्टिमुलेशन हो, तो धीरे-धीरे ठीक हो सकता है। ये तुम पर निर्भर करता है कि तुम कितनी मेहनत करते हो।”

“पर इसमें कितना समय लगेगा?” पूजा ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक घबराहट थी।

“ये तुम दोनों पर निर्भर करता है। कुछ हफ्ते, कुछ महीने… हो सकता है ज्यादा भी। लेकिन कोशिश जारी रखनी होगी। हार नहीं माननी होगी।”

दोनों उस केबिन से बाहर निकले तो उनके पैर ज़मीन पर नहीं पड़ रहे थे। अस्पताल की लॉबी में लोग आते-जाते रहे, मगर वे दोनों एक दूसरे को देखते ही रह गए। शेखर की आँखों में पानी था। पूजा ने उसका हाथ पकड़ा और उसे कार तक ले गई।

घर पहुँचे तो दोनों बिस्तर पर बैठ गए। सामने टीवी चल रहा था मगर देख नहीं रहा था। शेखर ने पूजा की तरफ देखा, “पूजा… मैं… मैं तुझे खुश नहीं रख पाऊँगा।”

“चुप करो शेखर। ये सब बातें नहीं करनी। हम लड़ेंगे इससे। तुम जानते हो मैं कितनी स्ट्रॉन्ग हूँ।”

पूजा ने उसे गले लगा लिया। मगर उसके मन में एक डर था, एक खलबली थी। उनकी शादी की सबसे अच्छी चीज़ थी उनका सेक्सुअल कनेक्शन। और अब वो खतरे में था।

शाम को पूजा ने फैसला किया कि वह कोशिश करेगी। उसने बेडरूम का दरवाज़ा बंद किया, लाइटें धीमी कीं, और अपने कपड़े उतार दिए। वह नंगी होकर शेखर के सामने खड़ी हो गई।

उसके छोटे स्तन सख्त हो गए थे, उसकी चूचियाँ कड़ी हो गई थीं। उसने धीरे से शेखर की पैंट खोली और उसका लंड निकाला।

” शेखर, तूम बस आराम से लेट जाओ। मैं सब करुँगी।”

उसने अपनी जीभ से उसके लंड को चाटना शुरू किया। पहले तो धीरे-धीरे, फिर जोर से। उसने पूरे सिर को अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ उसकी मुरझाए हुए लंड पर घूम रही थी। वह बारी-बारी से चूसती और चाटती रही।

“लग रहा है न कुछ, शेखर? बोलो ?।” पूजा ने कहा, उसकी आवाज़ में उदासी थी।

शेखर ने अपनी आँखें बंद कर लीं। वह मेंटली अराउज़ था, उसका मन चाह रहा था कि उसका लंड खड़ा हो जाए, मगर शरीर जवाब नहीं दे रहा था। वह केवल एक मुलायम, बेजान मांस का टुकड़ा बन गया था।

एक हफ्ता बीत गया। रोज़ रात पूजा कोशिश करती, शेखर को चूमती, उसे छूती, उस पर बैठती, मगर कुछ नहीं हुआ। शेखर की बेबसी बढ़ती जा रही थी। वाह रोज़ अपने आप को कोसता, अपनी कमर को कोसता।

एक रात पूजा ने कहा, “चलो आज कुछ अलग करते हैं। पोर्न देखते हैं।”

उसने लैपटॉप पर एक वीडियो चलाया। दो लोग सेक्स कर रहे थे। पूजा ने अपने कपड़े उतारे और शेखर के सामने बैठकर अपनी चूत पर हाथ फेरना शुरू किया। उसने अपनी उँगलियाँ अंदर डालीं और मुँह से आवाज़ें निकालने लगी।

“देखो शेखर, देखो उन्हें। कितना मज़ा आ रहा है उन्हें। काश तूम भी मेरे साथ ऐसे कर पाते,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी फुसफुसाहट थी।

मगर शेखर का लंड एकदम मुलायम रहा। कोई हरकत नहीं, कोई सख्ती नहीं। उसने अपना चेहरा तकिए में छिपा लिया और सिसकने लगा।

उस रात के बाद से उन दोनों के बीच एक खामोशी छा गई।

दिन में तो वे ऑफिस जाते, काम करते, मगर रातों को वे अलग-अलग करवटें बदलते। शेखर अब खाना भी ठीक से नहीं खाता था। उसका वजन कम होने लगा था।

एक दिन ऑफिस में शेखर अपने केबिन में बैठा था, तो मोहित अंदर आया। मोहित ने उसका चेहरा देखा तो समझ गया कि कुछ गड़बड़ है।

“क्या हुआ भाई, तबीयत तो ठीक है?” मोहित ने पूछा।

शेखर ने चारों तरफ देखा, फिर धीमी आवाज़ में बोला, ” कैफेटेरिया चल। मुझे तुझसे कुछ बात करनी है।”

दोनों कैफेटेरिया में बैठे। वहाँ कोई नहीं था। शेखर ने सब कुछ बता दिया – एक्सीडेंट, डॉक्टर, हर रात की नाकाम कोशिशें। मोहित का चेहरा सुनकर फीका पड़ गया।

“अरे यार, तो इसीलिए इतने दिन से छुट्टी पर था तू?, ये तो बहुत बुरा हुआ। मगर चिंता मत कर, डॉक्टर ने कहा है न ठीक हो जाएगा।”

“हाँ, मगर कब? मोहित, तू समझता है मेरी बीवी को कितना कष्ट हो रहा होगा? वो रोज़ कोशिश करती है, मगर मैं… मैं उसे खुश नहीं कर पाता।”

“शेखर, मैं तुझे एक बात बताता हूँ। मगर पहले वादा कर कि तू मुझे गलत नहीं समझेगा।”

“बता भाई, अब क्या गलत समझूँगा। तू ही तो है जो मेरी बात सुन रहा है।”

मोहित ने अपनी जेब से फोन निकाला और एक वीडियो सर्च किया। उसने अपना फोन शेखर की तरफ बढ़ाया। “ये देख। मैंने कल रात ये देखा था। शायद तुझे भी देखना चाहिए।”

शेखर ने फोन लिया। स्क्रीन पर एक वीडियो चल रहा था – एक आदमी अपनी बीवी को दूसरे आदमी के साथ सेक्स करते हुए देख रहा था।

उसकी पत्नी का चेहरा खुशी से चमक रहा था, उसका शरीर दूसरे आदमी के नीचे तड़प रहा था। और वह आदमी, उसका पति, उसे देख रहा था और उसके हाथ में अपना लंड था जो सख्त खड़ा था।

“ये क्या है मोहित?” शेखर ने पूछा, उसकी आवाज़ में हैरानी थी।

“ये ककॉल्ड पोर्न है शेखर। इसमें आदमी अपनी बीवी को किसी और के साथ देखता है और उससे उसे अराउज़ल मिलता है। बस तू इसे घर ले जा और अकेले में देख। देख क्या होता है।”

शेखर ने फोन मोहित को लौटाया, उसके मन में एक उम्मीद जगी थी।

उस दिन ऑफिस से घर लौटते वक्त उसने वह वीडियो अपने फोन पर डाउनलोड कर लिया। घर पहुँचा तो पूजा अभी आई नहीं थी।

उसने बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया, वहाँ की लाइट जलाई, और फोन पर वह वीडियो चलाया।

वीडियो में एक शादीशुदा जोड़ा था। औरत के पास एक बड़ा सा लंड था जो उसकी चूत में घुस रहा था।

उसका पति पास में खड़ा था, उसे देख रहा था, उसके हाथ में अपना लंड था। औरत की आँखों में सुख था, उसका मुँह खुला था और वह जोर-जोर से चिल्ला रही थी।

“हाँ… और अंदर… और गहरा… हाँ यस,” वह चिल्ला रही थी।

शेखर की साँसें तेज़ हो गईं। उसकी आँखें स्क्रीन पर जमी थीं। वह अपने लंड को छूने लगा।

पहले तो कुछ नहीं हुआ, मगर फिर… धीरे-धीरे… उसे अपने लंड में एक हलचल महसूस हुई। एक छोटी सी, मामूली सी हलचल। मगर वह हलचल थी। उसका लंड थोड़ा सख्त होने लगा था।

“हो रहा है… हो रहा है,” शेखर ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आँखों में खुशी के आँसू थे।

उसने अपने लंड को और जोर से सहलाया, मगर जैसे ही वीडियो खत्म हुआ, उसका लंड फिर से मुलायम हो गया। मगर वह पल काफी था। उसे उम्मीद मिल गई थी।

अगले दिन ऑफिस में शेखर सीधा मोहित के पास गया। “मोहित, वह वीडियो… उसने काम किया। मेरे लंड में हलचल हुई। थोड़ी देर के लिए ही सही, मगर हुई।”

मोहित ने मुस्कुराकर कहा, “देखा, मैंने कहा था न। कभी-कभी नई चीज़ों की ज़रूरत होती है।”

“मगर मोहित, ये सिर्फ वीडियो है। असल ज़िंदगी में मुझे क्या करना होगा? मुझे तो असली में अपनी शादी बचानी है।”

शेखर ने गहरी साँस ली और मोहित की आँखों में सीधे देखा। उसकी आवाज़ काँप रही थी, मगर उसमें एक दृढ़ता भी थी। “मोहित, मैं तुझसे एक बात पूछूँगा। मगर पहले वादा कर कि तू मुझसे नाराज़ नहीं होगा।”

“पूछ भाई, अब क्या पूछेगा?” मोहित ने कहा, मगर उसके दिल की धड़कन बढ़ गई थी। उसे अंदाज़ा था कि शेखर क्या पूछने वाला है।

“मोहित… मुझे तेरी मदद चाहिए। मैं चाहता हूँ… मैं चाहता हूँ कि तू मेरी मदद करे… पूजा को… मेरे सामने चोदने में।”

ये सुनते ही मोहित के होश उड़ गए। उसका दिल जोर से धड़कने लगा। उसकी पैंट के अंदर उसका लंड सख्त हो गया, मगर उसने अपने चेहरे पर एक हैरानी का भाव ला दिया। उसने अपनी आँखें चौड़ी कर लीं और पीछे हट गया।

“क्या? शेखर, तू पागल तो नहीं हो गया? ये तो बहुत गलत बात है। मैं तेरा दोस्त हूँ। मैं तेरी बीवी को… नहीं, ये नहीं हो सकता।”

शेखर ने उसका हाथ पकड़ लिया। “प्लीज़ मोहित, मैं तुझसे भीख माँग रहा हूँ। मेरी शादी बचाने की बात है।

वीडियो काफी नहीं है। मुझे असली चीज़ चाहिए। मुझे पूजा को किसी और के साथ देखना है। तभी मैं ठीक हो सकता हूँ।”

मोहित ने अपना हाथ छुड़ा लिया और सिर हिला दिया। “नहीं शेखर, ये ठीक नहीं है। पूजा भाभी तुझसे प्यार करती हैं। वो कभी इसके लिए राज़ी नहीं होंगी। और मैं भी नहीं कर सकता।”

“पूजा राज़ी हो जाएगी, मुझे पता है। वो मेरी खातिर कुछ भी करेगी। और तू… तू मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। मैं किसी और पर भरोसा नहीं कर सकता। प्लीज़ मोहित, बस एक बार। एक बार मेरी मदद कर दे।”

मोहित ने गहरी साँस ली। उसने अपना सिर झुका लिया, जैसे वह सोच रहा हो। मगर उसके मन में एक अलग ही खुशी थी। शेखर की बीवी की चूत… उसकी गांड… उसके स्तन… वह सब अब उसकी पहुँच में था। मगर उसे एक्ट करना होगा।

“ठीक है शेखर। मगर एक शर्त पर। पहले तू पूजा से बात कर। अगर वो राज़ी होती है, तो मैं… मैं तेरी मदद करूँगा। मगर अगर उसने मना किया, तो ये बात यहीं खत्म।”

शेखर का चेहरा खिल उठा। उसने मोहित को गले लगा लिया। “थैंक यू मोहित, थैंक यू। मुझे पता था तू मेरी मदद करेगा। मैं आज ही पूजा से बात करूँगा।”

मोहित ने उसे गले लगाते हुए अपनी मुस्कान छिपाई। उसके मन में सिर्फ एक ही ख्याल था – पूजा की सख्त जवानी, उसका गोल गांड, उसकी टाइट चूत। और वह सब अब उसका होने वाला था।

शेखर जब ऑफिस से घर लौटा, तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी। पूजा ने दरवाज़ा खोला तो उसे देखते ही समझ गई कि कुछ बदला है।

शेखर की आँखों में वह उदासी नहीं थी जो पिछले कई दिनों से थी। उसके चेहरे पर एक नई उम्मीद झलक रही थी।

“क्या हुआ शेखर? आज बहुत खुश लग रहे हो। ऑफिस में कुछ अच्छा हुआ?” पूजा ने पूछा, उसकी आवाज़ में उत्सुकता थी।

शेखर ने उसे अंदर ले जाकर सोफे पर बिठाया। उसने गहरी साँस ली, फिर पूजा के हाथों को अपने हाथों में लेकर बोलना शुरू किया।

“पूजा, मुझे लगता है मुझे अपनी समस्या का हल मिल गया है।”

पूजा की आँखें चमक उठीं। उसने शेखर का हाथ कसकर पकड़ लिया। “कैसे शेखर? क्या मिला तुम्हे? डॉक्टर के पास गये थे क्या?”

“नहीं, डॉक्टर के पास नहीं। मोहित ने मुझे एक वीडियो दिखाया था। एक खास तरह का वीडियो।” शेखर ने हिचकिचाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में झिझक थी।

“कैसा वीडियो? क्या था उसमें?” पूजा ने पूछा, उसकी भौंहें सिकुड़ गई थीं।

शेखर ने उसे बताया – कैसे मोहित ने उसे वह ककॉल्ड पोर्न दिखाया, कैसे उसने वीडियो देखा, और कैसे उसके लंड में पहली बार कई दिनों बाद कोई हलचल महसूस हुई।

“पूजा, मैं जानता हूँ ये सुनकर तुझे बुरा लगेगा।

मगर सच कहूँ, जब मैंने उस वीडियो में उस औरत को दूसरे मर्द के साथ देखा, उसके पति को उसे देखते हुए… मेरे अंदर कुछ जागा।

वो एहसास… वो उत्तेजना…।”

पूजा का चेहरा पहले तो हैरानी से भर गया, फिर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आई। उसने शेखर को गले लगा लिया।

“मतलब… तूम ठीक हो सकते हो? बस ये देखकर?”

“हाँ पूजा, मगर… बस वीडियो काफी नहीं है। मुझे लगता है मुझे असली चीज़ चाहिए।” शेखर ने कहा, उसकी आवाज़ धीमी हो गई।

“असली चीज़? मतलब?”

शेखर ने पूजा की आँखों में देखा। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसे पता था कि वह जो कहने वाला है, वह उनकी शादी की एक लकीर को पार करने वाला था।

“पूजा… मैं चाहता हूँ… मैं चाहता हूँ कि तू मोहित के साथ… मेरे सामने… करे।”

पूजा के हाथ शेखर के हाथों से छूट गए। वह पीछे हट गई, उसकी आँखें फैल गईं। उसने अपना सिर हिलाया, जैसे उसे यकीन नहीं हो रहा हो कि उसने क्या सुना।

“क्या? शेखर, तूम पागल हो गये हो? तूम क्या कह रहे हो पता भी है? वो मोहित है… तुम्हारा दोस्त… और मैं तुम्हारी बीवी। ये तो… ये तो बहुत गलत है।”

“मुझे पता है पूजा। मुझे पता है ये गलत लगता है। मगर सोचो, हम दोनों ही तो जानते हैं कि ऑफिस के सारे मर्द तुझे कैसे देखते हैं।

और हम दोनों को उसमें मज़ा भी आता था। तू जानती है मुझे कितना अच्छा लगता था जब तू बताती थी कि कौन-कौन तुझे घूर रहा है।”

“मगर शेखर, ये तो अलग बात है। वो सिर्फ देखना था, मज़ाक था। ये तो… ये तो सच में कुछ करना है। मैं किसी और के साथ… तूम देखोगे… मैं ये नहीं कर सकती।” पूजा की आँखों में आँसू आ गए।

शेखर ने उसके करीब जाकर उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “पूजा, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। मैं अपनी शादी बचाना चाहता हूँ।

तूम ही बताओ, हमारी सेक्स लाइफ खत्म हो जाए तो हमारी शादी का क्या होगा? हम दोनों को पता है कि हमारे रिश्ते में ये कितना ज़रूरी है।”

पूजा ने अपने आँसू पोंछे। वह शेखर की आँखों में देखती रही। कुछ देर खामोशी रही। फिर उसने धीमी आवाज़ में पूछा, “और कोई तरीका नहीं है?”

“मैंने बहुत कोशिश की पूजा। तूमने भी देखा। कुछ काम नहीं कर रहा था। मगर आज… आज पहली बार मुझे लगा कि कुछ हो सकता है।

मैं तुमसे वादा करता हूँ, ये सिर्फ तब तक है जब तक मैं ठीक नहीं हो जाता। और कोई नहीं जानेगा। सिर्फ मैं, तू और मोहित। ये हमारे बीच का राज़ रहेगा।”

पूजा ने अपने होंठ चबाए। उसका दिल धड़क रहा था। उसके मन में हज़ारों सवाल थे – क्या ये सही है? क्या वो ऐसा कर सकती है? क्या शेखर सच में ये चाहता है? मगर शेखर की आँखों में वह बेबसी, वह उम्मीद… वह उसे मना नहीं कर सकी।

“ठीक है शेखर। अगर तूम सच में ये चाहते हो… और अगर इससे तूम ठीक हो सकते हो… तो मैं… मैं करूँगी।”

शेखर ने उसे जोर से गले लगा लिया। उसकी आँखों में खुशी के आँसू थे। “थैंक यू पूजा, थैंक यू। मुझे पता था तूम मेरी मदद करेगी। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।”

अगले दिन ऑफिस में शेखर सीधा मोहित के पास गया। उसके चेहरे पर एक चमक थी। “मोहित, पूजा राज़ी हो गई।”

मोहित ने अपना चेहरा गंभीर रखा, मगर अंदर ही अंदर उसका दिल खुशी से उछल पड़ा। उसकी पैंट के अंदर उसका लंड सख्त हो गया।

उसने अपनी आवाज़ को सहानुभूतिपूर्ण रखते हुए कहा, “तूने उसे मना लिया?”

“हाँ भाई। मैंने उसे समझाया कि यही एकमात्र तरीका है मेरी शादी बचाने का। वो मान गई। आज रात को तू हमारे घर आ जा। मैं सब तैयार कर लूँगा।”

मोहित ने सिर हिलाया। उसने शेखर के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “ठीक है भाई। मगर याद रख, ये सिर्फ तेरी मदद के लिए है।

मैं तेरा दोस्त हूँ और तेरी बीवी का सम्मान करता हूँ।”

शाम को आठ बजे मोहित शेखर के घर पहुँचा। उसने ब्लू शर्ट और काली पैंट पहनी थी। उसके बाल गीले थे – उसने घर से निकलने से पहले फ्रेश होकर नहाया था। उसके शरीर से एक ताज़ी खुशबू आ रही थी।

शेखर ने दरवाज़ा खोला। उसने मोहित को गले लगाया। “आ जा मोहित। अंदर आ। सब तैयार है।”

मोहित अंदर आया। लिविंग रूम में मंद रोशनी थी, एक कोने में मोमबत्तियाँ जल रही थीं। फर्श पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी हुई थीं।

हवा में एक मीठी खुशबू घुली हुई थी – चंदन और गुलाब का मिश्रण।

“ये सब तूने किया?” मोहित ने पूछा, उसकी आवाज़ में हैरानी थी।

“हाँ भाई। ये दिन खास है। मेरी ज़िंदगी का सबसे अहम दिन। तू फ्रेश हो जा, मैं पूजा को बुलाता हूँ। बेडरूम में आ जा।”

मोहित बाथरूम में गया। उसने अपने बाल ठीक किए, शर्ट के बटन खोले, फिर कस दिए। उसने शीशे में अपनी तस्वीर देखी – उसका स्लिम फिट बॉडी, चौड़े कंधे, मजबूत बाहें।

उसकी आँखों में एक चमक थी, एक भूख। उसने गहरी साँस ली और बेडरूम की तरफ बढ़ा।

बेडरूम का दरवाज़ा खुला तो उसकी आँखें एक अलग ही नज़ारा देखकर खुली रह गईं। कमरे में मंद, गुलाबी रोशनी थी।

चारों तरफ मोमबत्तियाँ जल रही थीं, उनकी लौएँ दीवारों पर नाच रही थीं। बिस्तर पर लाल रेशमी चादर बिछी थी, उस पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं।

और बिस्तर पर पूजा बैठी थी।

उसने लाल रंग की एक पारदर्शी साड़ी पहनी हुई थी, जो उसके शरीर पर इस तरह लिपटी हुई थी जैसे कोई दूसरी त्वचा हो।

साड़ी के नीचे उसने काली लेस वाली ब्रा और उससे मैच करती हुई पैंटी पहनी थी। उसके बाल खुले हुए थे, उनमें से चमेली की खुशबू आ रही थी।

उसके होठों पर लाल लिपस्टिक लगी हुई थी, आँखों में काजल ने उन्हें और भी गहरा बना दिया था।

बिस्तर के बगल में एक कुर्सी रखी हुई थी। शेखर उस कुर्सी पर जाकर बैठ गया। उसकी आँखें पूजा पर टिकी हुई थीं। उसने एक गहरी साँस ली और मोहित की तरफ देखा।

“मोहित, आ जा। आज रात पूजा पूरी तरह तेरी है।”

मोहित ने शेखर की तरफ देखा, फिर पूजा की तरफ। वह धीरे-धीरे बिस्तर के पास आया और उसके किनारे पर बैठ गया।

उसके और पूजा के बीच कुछ इंच का फासला था। पूजा ने शेखर की तरफ देखा – उसकी आँखों में डर था, हिचकिचाहट थी, मगर उसके साथ-साथ एक उत्तेजना भी थी।

शेखर ने उसे हिम्मत देते हुए सिर हिलाया। “ये सब ठीक है पूजा। मैं यहीं हूँ। तू बस… सारी टेंशन को जाने दे।”

पूजा ने आँखें बंद कीं, फिर खोलीं। उसने मोहित की तरफ देखा। मोहित ने अपना हाथ बढ़ाया और उसके गाल को छुआ।

उसकी उँगलियाँ उसकी त्वचा पर हल्के से फिरीं। पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

मोहित धीरे-धीरे उसके करीब आया। उसने अपने होंठ उसके होंठों से मिलाए। पहला चुंबन हल्का था, कोमल था, जैसे कोई पंख छू रहा हो।

पूजा ने उसका साथ दिया, उसके होंठों ने जवाब दिया। धीरे-धीरे चुंबन गहरा होने लगा।

मोहित ने उसके निचले होंठ को अपने होंठों में लिया और धीरे से खींचा। पूजा के मुँह से एक हल्की सी आवाज़ निकली।

उसने अपनी जीभ से पूजा के होंठों को खोला और अंदर घुस गया। उनकी जीभें आपस में उलझ गईं, एक दूसरे को छूतीं, एक दूसरे का स्वाद चखतीं।

पूजा ने अपनी आँखें खोलीं और शेखर की तरफ देखा। शेखर कुर्सी पर बैठा उन्हें देख रहा था। उसके हाथ उसकी पैंट पर थे, वह अपने लंड को रगड़ रहा था।

उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी – ईर्ष्या भी थी, उत्तेजना भी, बेबसी भी।

पाँच मिनट तक वे चुंबन करते रहे। बीच-बीच में दोनों शेखर की तरफ देखते, जैसे उसकी प्रतिक्रिया जाँच रहे हों। शेखर की निगाहें उन पर जमी हुई थीं। उसके हाथ उसकी पैंट पर तेज़ी से चल रहे थे।

फिर मोहित ने चुंबन की गति बदल दी। वह अब ज़्यादा जोश से, ज़्यादा भूख से पूजा को चूम रहा था। उसके हाथ उसकी कमर पर आ गए, फिर धीरे-धीरे ऊपर बढ़े।

उसने पूजा के छोटे, सख्त स्तनों को अपने हाथों में लिया। ब्रा के ऊपर से ही उसने उन्हें दबाया, निचोड़ा। पूजा के मुँह से एक कराह निकली।

“ह्म्म्म…”

शेखर ने अपनी पैंट पर हाथ और तेज़ कर दिए। उसकी साँसें भारी हो गईं। वह अपने लंड में कोई हरकत महसूस करने की कोशिश कर रहा था, मगर वह मुलायम ही रहा।

मोहित ने धीरे से पूजा की ब्रा के पीछे का हुक खोला। ब्रा ढीली हो गई। उसने उसे आगे की तरफ से खींचकर निकाल दिया।

पूजा के छोटे स्तन सामने आ गए – उनके निप्पल कड़े हो गए थे, हवा में खड़े थे। मोहित ने अपना सिर नीचे किया और उन्हें चूमना शुरू किया।

पहले तो उसने धीरे-धीरे, हल्के-हल्के चुंबन लिए। फिर उसने अपनी जीभ से निप्पल को गोल-गोल घुमाया।

पूजा ने अपना सिर पीछे झुका लिया, उसकी आँखें बंद थीं, उसके होंठ खुले हुए थे। उसके मुँह से निकल रही कराहें कमरे में गूँज रही थीं।

“आह… ओह्ह्ह…”

मोहित ने दस मिनट तक उसके स्तनों को चूसा, चाटा, कभी हल्के से दाँतों से काटा तो कभी जोर से चूसा। पूजा का शरीर उसके हर स्पर्श पर काँप रहा था।

उसने बीच-बीच में शेखर की तरफ देखा – शेखर अब भी उसी कुर्सी पर बैठा था, उसके हाथ उसकी पैंट पर थे, उसकी आँखें उन पर जमी हुई थीं।

फिर मोहित उठा। उसने अपनी शर्ट के बटन खोलना शुरू किए। एक-एक करके, धीरे-धीरे। वह शेखर को देख रहा था जब वह ऐसा कर रहा था।

शर्ट उतारी तो उसकी छाती सामने आई – चौड़ी, मांसल, बालों से ढकी हुई। उसकी मसल्स साफ दिख रही थीं, हर हरकत पर उनमें हलचल होती थी।

फिर उसने अपनी पैंट खोली और उसे उतार दिया। उसके नीचे काली बॉक्सर थी।

उसके अंदर उसका लंड एक बड़ा उभार बना रहा था – साफ दिख रहा था कि वह कितना बड़ा और सख्त है। मोहित ने बॉक्सर को नीचे खींचा और उसका लंड बाहर निकल आया।

पूजा की आँखें फैल गईं। उसने अपना मुँह खोल दिया। वह आठ इंच का लंड उसके सामने खड़ा था – मोटा, सख्त, उसकी नसें उभरी हुई थीं, उसका सिर लाल-गुलाबी चमक रहा था।

पूजा ने शेखर की तरफ देखा, फिर मोहित के लंड की तरफ। वह अपने पति के पाँच इंच के लंड की आदी थी, ये तो उससे कहीं बड़ा था।

मोहित ने पूजा का सिर पकड़ा और धीरे से उसे अपने लंड के करीब लाया। उसने उसके सिर को लंड के पास पहुँचाया। पूजा ने शेखर की तरफ देखा – शेखर ने सिर हिलाया, ‘हाँ’ कहते हुए।

पूजा ने अपना मुँह खोला और मोहित के लंड के सिर को अपने होंठों से छुआ। पहले तो उसने हिचकिचाते हुए, धीरे से उसे चूमा।

फिर उसने अपना मुँह खोला और उसे अंदर ले लिया। उसकी जीभ उसके सिर पर घूम रही थी, हर बार उसे और अंदर ले जाने की कोशिश कर रही थी।

मोहित ने अपना सिर पीछे झुका लिया। “हाँ… ऐसे… और लो अंदर,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।

पूजा ने अपना मुँह और खोला। उसने मोहित के विशाल लंड को और गहराई तक लेने की कोशिश की।

उसकी जीभ उसके लौड़े पर चारों तरफ घूम रही थी, हर बार उसे और अंदर ले जाने की कोशिश कर रही थी।

उसकी आँखों से पानी बहने लगा, मगर वह रुकी नहीं। उसके मुँह से निकलने वाली चूसने की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं – चप-चप, चप-चप।

मोहित ने अपना हाथ पूजा के सिर पर रखा और धीरे से उसे दबाया, उसे और अन्दर तक लेने का इशारा किया।

पूजा ने अपना सिर और नीचे किया – उसकी नाक मोहित के जाँघों से छू गई, उसका पूरा लंड उसके गले में समा गया। उसके गले से ‘ह्क्क… ह्क्क…’ की आवाज़ निकल रही थी, मगर वह रुकी नहीं।

शेखर यह सब देख रहा था। उसकी पूजा – उसकी बीवी – अपने दोस्त के आठ इंच के लंड को पूरा निगल रही थी।

उसके मुँह से लार टपक रही थी, वह सब कुछ भूलकर सिर्फ उसे चूस रही थी। शेखर के दिल में एक अजीब सी भावना उठ रही थी – उसे ईर्ष्या हो रही थी, मगर साथ ही वह देखकर उत्तेजित भी हो रहा था।

पूजा ने अपना सिर ऊपर-नीचे करना शुरू किया। उसकी गति धीरे-धीरे तेज़ होती गई।

मोहित का लंड उसके मुँह से बाहर-अंदर हो रहा था, हर बार चूसने की एक तेज़ आवाज़ के साथ। पूजा के मुँह से निकलने वाली लार मोहित के लंड पर चमक रही थी, नीचे उसके अंडकोषों पर टपक रही थी।

शेखर ने अपनी पैंट पर हाथ और तेज़ कर दिए। उसकी साँसें भारी हो गई थीं।

वह अपने लंड में किसी भी तरह की हलचल महसूस करने की कोशिश कर रहा था – एक धड़कन, एक स्पंदन, कुछ भी। मगर वह मुलायम ही रहा।

दस मिनट तक पूजा मोहित के लंड को चूसती रही। उसके हाथ उसकी जाँघों को सहला रहे थे, उसके अंडकोषों को धीरे-धीरे मसल रहे थे।

उसका मुँह पूरी तरह से गीला हो गया था, उसकी लार मोहित के पूरे लंड पर फैल गई थी।

तब मोहित ने पूजा का सिर पकड़ा और उसे रोका। “रुको… अब बहुत हो गया,” उसने कहा।

पूजा ने अपना मुँह उसके लंड से हटाया। उसके होंठ लाल हो गए थे, उसकी आँखों में पानी था, उसकी ठुड्डी पर लार टपक रही थी।

उसने शेखर की तरफ देखा – शेखर कुर्सी पर बैठा उसे देख रहा था, उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।

मोहित ने पूजा को बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया। उसने धीरे-धीरे उसकी साड़ी खोलना शुरू किया। पहले उसने साड़ी के पल्लू को हटाया, फिर उसे पूरी तरह से खोल दिया।

उसके बाद उसने पेटीकोट को खोला – वह उसकी पतली कमर पर कसा हुआ था। पेटीकोट नीचे सरक गया।

अब पूजा सिर्फ अपनी काली लेस वाली पैंटी में थी। मोहित ने उस पैंटी के किनारों को पकड़ा और धीरे-धीरे उसे नीचे खींचा।

उसकी उँगलियाँ पूजा की त्वचा पर फिसल रही थीं, हर इंच को छूती हुई। पूजा ने अपनी कमर उठाई ताकि पैंटी निकल सके। पैंटी उसके पैरों से निकल गई और बिस्तर के कोने पर जा गिरी।

पूजा पूरी तरह नग्न हो गई। उसके छोटे, सख्त स्तन उसकी छाती पर सीधे खड़े थे। उसकी पतली कमर, उसके गोल कूल्हे, उसके पैर जो उसने थोड़े खोल रखे थे।

और उसके पैरों के बीच – उसकी चूत – वह नम थी, उसके होंठ हल्के से सूजे हुए थे, उनके बीच से रस चमक रहा था।

मोहित ने उसके पैरों को पकड़ा और धीरे से उन्हें चौड़ा किया। पूजा का पूरा निचला शरीर खुल गया। उसकी चूत पूरी तरह से दिखाई दे रही थी – उसकी गुलाबी, चमकती हुई चूत।

मोहित ने शेखर की तरफ देखा और एक छोटी सी मुस्कान दी। फिर उसने अपना सिर नीचे किया और पूजा को चाटना शुरू किया।

उसकी जीभ पहले उसकी चूत के बाहरी होंठों पर घूमी – ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर। फिर उसने उन होंठों को अपने मुँह में लिया और धीरे से चूसा। पूजा के मुँह से एक लंबी, गहरी कराह निकली।

“आह्ह्ह… मोहित…”

मोहित ने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर डाला और घुमाना शुरू किया। उसकी जीभ उसकी चूत के अंदर-बाहर घूम रही थी, उसकी दीवारों को छू रही थी, उसके हर कोने को चाट रही थी।

पूजा ने अपनी उँगलियाँ मोहित के बालों में डाल दीं और उसका सिर अपनी चूत पर दबा दिया।

“हाँ… वहीं… और चाटो… ओह्ह्ह…”

शेखर यह सब देख रहा था। उसने अपनी पैंट का बटन खोल दिया और अपना हाथ अंदर डाल लिया। वह अपने मुलायम, बेजान लंड को सहला रहा था, उसे कुछ महसूस करने की उम्मीद कर रहा था।

वह सब देखकर मानसिक रूप से पूरी तरह उत्तेजित था – उसकी बीवी को उसका दोस्त चाट रहा था, उसकी चूत से आवाज़ें आ रही थीं, वह कराह रही थी, उसका शरीर मोहित के हर स्पर्श पर काँप रहा था।

दस मिनट तक मोहित ने पूजा को चाटा। उसकी जीभ ने उसकी पूरी चूत को चाटा था, उसकी भोंजी को चूसा था, उसकी चूत के छेद में गहराई तक जाकर घुमाया था।

पूजा पूरी तरह से पिघल चुकी थी, उसका शरीर बिस्तर पर फैला हुआ था, उसकी आँखें बंद थीं, उसका मुँह खुला था और उससे लगातार कराहें निकल रही थीं।

तब मोहित उठा। उसने अपने घुटनों को बिस्तर पर टिकाया और पूजा के फैले हुए पैरों के बीच में खुद को रखा। उसने अपने हाथ में अपने आठ इंच के सख्त लंड को पकड़ा और उसे पूजा की चूत के सामने लाया।

लंड का लाल सिर उसकी चूत के होंठों को छू रहा था, उसकी चमक से गीला हो गया था।

पूजा ने अपनी आँखें खोलीं और अपने पति की तरफ देखा। शेखर ने भी उसे देखा – उसकी आँखों में एक सवाल था – ‘क्या ये सही है?’

शेखर ने गहरी साँस ली और सिर हिलाया। उसकी आँखें पूजा की आँखों से मिलीं – एक पल के लिए उनके बीच एक खामोश संवाद हुआ। पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया।

मोहित ने अपने लंड के सिर को पूजा की चूत के होंठों पर रखा। वह एक पल रुका, उसकी साँसें भारी थीं, उसका शरीर तन गया था। फिर उसने धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू किया।

पूजा के मुँह से एक गहरी साँस निकली जब मोहित का लंड उसके अंदर घुसने लगा। उसकी चूत के होंठ उसके चारों तरफ फैल गए। मोहित ने आधा लंड अंदर डाला और रुक गया।

पूजा ने अपनी आँखें खोलीं और नीचे देखा – उसके शरीर में उसका केवल आधा लंड था, और वह भी उसके पति के पूरे लंड से बड़ा था।

“ओह… ये तो… बहुत बड़ा है,” पूजा फुसफुसाई, उसकी आवाज़ में हैरानी और डर दोनों था।

मोहित ने उसे एक मुस्कान दी और फिर धीरे से आगे बढ़ा। उसने बाकी का आधा लंड भी अंदर डाल दिया – अब उसका पूरा आठ इंच का लंड पूजा की चूत के अंदर था।

पूजा ने अपना मुँह खोल दिया और एक लंबी, गहरी कराह निकली – जैसे कोई साँस जो बहुत देर से रुकी हुई थी, अब छूट रही हो।

“आह्ह्ह्ह… हे भगवान…”

पूजा की चूत की दीवारें मोहित के लंड के चारों तरफ सिकुड़ रही थीं, उसे अंदर खींच रही थीं। उसकी आँखों में पानी आ गया – दर्द से, सुख से, या दोनों से – वह खुद नहीं जानती थी।

उसने शेखर की तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अपील थी – ‘देख, मैं ये कर रही हूँ, तेरे लिए।’

शेखर ने उसे देखा और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। मगर वह रो नहीं रहा था – वह सब कुछ देख रहा था, महसूस कर रहा था।

वह अपनी पैंट के अंदर अपने लंड को रगड़ रहा था, उम्मीद कर रहा था कि उसमें थोड़ी सी भी हरकत हो।

मोहित ने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। पहले तो उसकी गति धीमी थी – धीरे-धीरे अंदर, धीरे-धीरे बाहर।

उसका लंड पूजा की चूत के अंदर सरक रहा था, हर बार उसकी दीवारों को छूता हुआ। पूजा के मुँह से हर धक्के पर एक छोटी सी कराह निकल रही थी – “हाँ… ह्म्म्म… ओह…”

धीरे-धीरे मोहित की गति तेज़ होने लगी। उसकी साँसें भारी हो गईं, उसके शरीर पर पसीना चमकने लगा।

वह पूजा के ऊपर झुका हुआ था, उसकी छाती पूजा की छाती से सटी हुई थी, उसके मुँह से निकलने वाली गर्म हवा पूजा के चेहरे पर पड़ रही थी।

“हाँ पूजा… तू बहुत टाइट है… बहुत गर्म है,” मोहित ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक कच्ची भूख थी।

पूजा ने उसकी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। उसका शरीर उसकी हर हरकत पर हिल रहा था, उसके छोटे स्तन उसकी छाती पर उछल रहे थे।

उसने अपना सिर पीछे झुका लिया, उसकी आँखें बंद थीं, उसका मुँह खुला हुआ था।

“हाँ… और तेज़… और जोर से,” वह चिल्लाई, उसकी आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।

मोहित ने अपनी गति और तेज़ कर दी। अब वह पूरे जोर से उसे चोद रहा था – उसका लंड पूजा की चूत के अंदर तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था।

हर धक्के के साथ एक गीली, चिपचिपी आवाज़ आ रही थी – क्योंकि पूजा की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी।

“चप-चप… चप-चप…”

यह आवाज़ कमरे में भर गई थी। पूजा की कराहें, मोहित की भारी साँसें, बिस्तर की चरमराहट – सब कुछ एक साथ मिलकर एक कामुक संगीत बना रहे थे।

शेखर ने अपनी पैंट का बटन खोल दिया और उसे नीचे खींच लिया। उसका लिंड बाहर निकल आया – मुलायम, बेजान। उसने उसे अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगा।

वह अपनी आँखें बंद करके महसूस करने की कोशिश कर रहा था – पूजा की कराहें सुनकर, उनकी आवाज़ें सुनकर, अपनी बीवी को किसी और के नीचे तड़पता देखकर।

मोहित ने पूजा के पैरों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया। इस पोजीशन में वह और गहरा अंदर जा सकता था।

उसने अपने कूल्हों को और तेज़ चलाया – उसका लंड पूजा के अंदर गहराई तक जा रहा था, हर बार उसकी कोख तक पहुँच रहा था।

“आह्ह्ह… मोहित… ये बहुत गहरा है… ओह्ह्ह… मैं… मैं पागल हो रही हूँ,” पूजा चिल्लाई।

उसके शरीर पर पसीना चमक रहा था। उसके बाल बिखर गए थे, चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई थी। वह अपनी बाँहों को फैलाकर लेटी हुई थी, पूरी तरह से मोहित के हवाले।

शेखर ने अपने लंड को सहलाना जारी रखा। उसकी आँखें सामने के दृश्य पर जमी हुई थीं।

उसने देखा कि कैसे मोहित का आठ इंच का लंड पूजा की चूत में घुस रहा है और निकल रहा है – उसका पाँच इंच का लंड कभी भी उसे इस तरह नहीं खोल सकता था।

उसने देखा कि कैसे पूजा का शरीर मोहित की हर हरकत पर हिल रहा है – वह उसकी बीवी को इस तरह चोद रहा था जैसे वह उसकी अपनी हो।

और फिर, धीरे-धीरे, शेखर को अपने हाथ में कुछ महसूस हुआ। पहले तो वह हल्का सा स्पंदन था – बस एक धड़कन। फिर दूसरी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस एहसास पर ध्यान केंद्रित किया।

उसका लंड… वह थोड़ा सख्त हो रहा था। पूरी तरह से नहीं, मगर पिछले कई दिनों में पहली बार उसमें कोई जान आई थी।

उसने अपनी आँखें खोलीं और सामने के दृश्य को देखा – मोहित पूजा को चोद रहा था, दोनों के शरीर पसीने से भीगे हुए थे, उनकी आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं।

उसने अपने लंड को देखा – वह अब मुलायम नहीं था, बल्कि आधा सख्त हो गया था।

पूजा ने अपनी आँखें खोलीं और शेखर की तरफ देखा। उसने देखा कि शेखर का हाथ उसके लंड पर था – और वह पिछले दिनों की तरह मुलायम नहीं था। पूजा की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।

“शेखर… वो हिल रहा है,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में भावना थी।

मोहित ने पीछे मुड़कर देखा। उसने शेखर के लंड को देखा – वह पूरी तरह सख्त नहीं था, मगर निश्चित रूप से मुलायम से कहीं ज़्यादा था। वह मुस्कुराया और पूजा की तरफ मुड़ा, उसे और तेज़ चोदने लगा।

“देखो… तुम्हारा पति देख रहा है… वह देख रहा है कि मैं उसकी बीवी को कैसे चोद रहा हूँ,” मोहित ने फुसफुसाते हुए कहा।

पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस पल में खो गई। वह अपने पति के लिए यह कर रही थी, और वह काम कर रहा था – शेखर अपनी समस्या से लड़ रहा था।

मोहित ने अपनी गति और तेज़ कर दी। अब वह पूरे जोर से उसे चोद रहा था – उसके अंडकोष पूजा के नितंबों से टकरा रहे थे, हर धक्के पर एक थपकी की आवाज़ आ रही थी।

पूजा का शरीर हर धक्के पर बिस्तर पर उछल रहा था, उसके स्तन उसकी छाती पर नाच रहे थे।

पूजा के मुँह से एक लंबी, गहरी कराह निकली – और फिर उसका शरीर अकड़ गया। उसकी चूत की दीवारें मोहित के लिंड के चारों तरफ सिकुड़ गईं, उसे अंदर कसकर पकड़ लिया।

वह चरमसुख तक पहुँच गई थी – उसके पैर मोहित की पीठ पर जोर से दब गए, उसके नाखून उसकी पीठ पर गहरे गड़ गए।

“ओह्ह्ह… हे भगवान… मैं… मैं आ गई,” वह चिल्लाई, उसकी आवाज़ काँप रही थी।

मोहित ने उसे चोदना जारी रखा – धीमी गति से, उसके चरमसुख को लंबा करते हुए। पूजा का शरीर बिस्तर पर लहरा रहा था, हर धक्के पर एक छोटी सी कराह निकल रही थी।

तब मोहित ने अपना लंड पूजा की चूत से बाहर निकाला। एक गीली, चिपचिपी आवाज़ के साथ वह बाहर आया – उसका आठ इंच का लंड पूजा के रस से पूरी तरह भीगा हुआ था, उसकी चमक कमरे की मंद रोशनी में चमक रही थी।

पूजा की चूत से उसका रस टपक रहा था, बिस्तर की लाल चादर पर गीले धब्बे बन रहे थे।

मोहित बिस्तर पर खड़ा हो गया। उसका लंड अभी भी पूरी तरह सख्त था, उसकी नसें उभरी हुई थीं, उसका सिर लाल-गुलाबी चमक रहा था।

उसने पूजा की तरफ देखा और अपने लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगा।

“आ… मेरे पास आ,” मोहित ने कहा, उसकी आवाज़ में एक आदेश था।

पूजा ने शेखर की तरफ देखा – एक आखिरी बार, एक आखिरी मंजूरी के लिए। शेखर ने सिर हिलाया, उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी।

पूजा धीरे-धीरे बिस्तर पर घुटनों के बल उठी और मोहित के पास गई। वह उसके सामने घुटनों पर बैठ गई, उसका चेहरा सीधे मोहित के लंड के सामने था।

उसने अपना मुँह खोला और अपनी जीभ बाहर निकाली – वो इंतज़ार कर रही थी।

मोहित ने अपने लंड को अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। उसकी साँसें भारी हो गईं, उसके चेहरे की मांसपेशियाँ तन गईं।

पूजा ने अपनी जीभ से उसके लंड के सिर को छुआ – हल्का सा, बस एक स्पर्श।

“हाँ… ऐसे… मेरा सारा माल ले,” मोहित ने कहा, उसकी आवाज़ में काँप थी।

फिर उसने अपने हाथ की गति तेज़ कर दी। उसकी मुट्ठी उसके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी, उसकी साँसें और तेज़ हो गईं। पूजा ने अपना मुँह और खोला, अपनी जीभ बाहर निकाली – तैयार।

“आह्ह्ह… ले… मैं आ रहा हूँ… पूरा ले,” मोहित चिल्लाया।

उसका शरीर अकड़ गया। उसके अंडकोष सिकुड़ गए और फिर उसके लंड से एक सफेद, गाढ़ा धार फूटकर निकला।

पहला धार पूजा के मुँह में गिरा, उसकी जीभ पर। फिर दूसरा, तीसरा – उसका वीर्य पूजा के मुँह में जा रहा था, उसके होंठों पर, उसकी ठुड्डी पर।

पूजा ने अपना मुँह बंद किया और निगलने लगी – उसके गले की हरकत साफ दिख रही थी, ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे।

मोहित ने अपना लंड और हिलाया, आखिरी बूँदें निकालने के लिए। फिर वह थककर बिस्तर पर बैठ गया, उसकी साँसें अभी भी भारी थीं।

पूजा ने अपना मुँह साफ किया और अपनी जीभ से अपने होंठों को चाटा। फिर उसने मोहित के लंड को देखा – वह अब भी सख्त था, मगर धीरे-धीरे मुलायम हो रहा था।

उसने झुककर उसके लंड को चूमा, फिर अपनी जीभ से उसे साफ किया – उसका अपना रस और मोहित का वीर्य, सब चाट कर साफ कर दिया।

फिर दोनों ने शेखर की तरफ देखा। शेखर अभी भी कुर्सी पर बैठा था – उसकी पैंट खुली हुई थी, उसका हाथ उसके लंड पर था, और उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

“शेखर… कैसा है?” पूजा ने धीमी आवाज़ में पूछा, उसकी आवाज़ में डर और उम्मीद दोनों थी।

शेखर ने अपना हाथ हटाया और अपनी पैंट को नीचे खींच लिया। उसने अपने लंड को देखा – वह पूरी तरह सख्त नहीं था, मगर वह मुलायम भी नहीं था।

कई दिनों में पहली बार, उसके लंड में जान आई थी – वह आधा सख्त हो गया था, उसकी त्वचा में हल्की लाली आ गई थी।

पूजा की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे। वह दौड़कर शेखर के पास गई और उसके सामने घुटनों पर बैठ गई।

उसने उसके लंड को अपने हाथ में लिया – वह सख्त था, पिछले दिनों से कहीं ज़्यादा सख्त।

“शेखर… ये… ये काम कर रहा है,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में आँसू थे। “देखो… तुम्हारा लंड… वह हिल रहा है… वह सख्त हो रहा है।”

शेखर ने अपना सिर पीछे झुका लिया और अपनी आँखें बंद कर लीं।

उसकी साँसें भारी हो गईं – उसने अपनी बीवी के हाथ में अपने लंड को महसूस किया, उसकी उँगलियाँ उसके चारों तरफ सिकुड़ रही थीं। उसने पूजा की आवाज़ सुनी, उसकी खुशी, उसकी उम्मीद।

“हाँ… मैं महसूस कर रहा हूँ… पूजा, मैं कुछ महसूस कर रहा हूँ,” उसने कहा, उसकी आवाज़ काँप रही थी।

पूजा ने उसे गले लगा लिया। उसके आँसू शेखर के कंधे पर गिर रहे थे। “थैंक यू शेखर… तूने हार नहीं मानी… हम इसे ठीक कर देंगे।”

मोहित खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहनने लगा। शेखर ने उसकी तरफ देखा – उसकी आँखों में कृतज्ञता थी, और एक नई समझ भी।

“मोहित… धन्यवाद,” शेखर ने कहा, उसकी आवाज़ में भावुकता थी। “तूने मेरी शादी बचा ली।”

मोहित ने अपनी शर्ट पहनते हुए कहा, “ये तो फ्रेंड्स का फर्ज़ है, शेखर। मगर याद रख, ये अभी शुरुआत है। तुझे और प्रैक्टिस की ज़रूरत होगी।”

“हाँ… मैं जानता हूँ,” शेखर ने कहा, उसकी आवाज़ में एक नई दृढ़ता थी। “मोहित, तू आता रहेगा न? मतलब… जब तक मैं पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता?”

मोहित ने शेखर की तरफ देखा, फिर पूजा की तरफ। उसकी आँखों में एक चमक थी जिसे वह छिपा नहीं सकता था। “हाँ शेखर, तू चिंता मत कर। मैं आता रहूँगा। जब भी तू कहे।”

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