रविवार के दिन कैफेटेरिया में तय की गई रणनीति के बाद पूजा और शेखर घर लौट आए। पूजा चुप थी, उसके दिमाग में हज़ारों विचार चल रहे थे।
वह अपने जूते उतार रही थी कि अचानक उसे कुछ याद आया और वह ठिठक गई।
“अरे!” पूजा ने कहा, अपना माथा थपथपाते हुए।
“क्या हुआ?” शेखर ने पूछा, वह अपनी शर्ट उतार रहा था।
“मैं मयूर से एक बात पूछना भूल गई। बहुत ज़रूरी बात।”
“कौन सी बात?”
पूजा ने शेखर की तरफ देखा, उसकी आँखों में चिंता थी। “प्लग की चौड़ाई। मयूर ने कहा था कि मुझे बट प्लग लगाना शुरू करना है, मगर उसने यह नहीं बताया कि कितने इंच चौड़ा प्लग लेना होगा।
लंबाई तो कोई मायने नहीं रखती, मगर चौड़ाई… उनके लौड़ो की मोटाई ही तो असली चुनौती होगी।”
शेखर ने सिर हिलाया। वह समझ गया कि पूजा सही कह रही थी। अगर प्लग बहुत पतला होगा, तो उसकी गांड तैयार नहीं होगी,
और अगर बहुत मोटा होगा, तो वह दर्द सहन नहीं कर पाएगी। उसने अपना फोन निकाला और मयूर को कॉल लगा दिया।
मयूर ने फोन उठाया। “हाँ शेखर, क्या बात है?”
“मयूर, पूजा ने पूछा है कि प्लग कितने इंच चौड़ा लेना चाहिए। तुमने तो बता दिया था कि लगाना शुरू करे, मगर चौड़ाई के बारे में कुछ नहीं कहा।”
मयूर ने कुछ पल सोचा, फिर बोला, “देख शेखर, हम सबके लंड अलग-अलग मोटाई के हैं। मोहित का आठ इंच लंबा है मगर मोटाई लगभग ढाई इंच है।
निखिल और राजेश के भी करीब-करीब वही हैं। अनिकेत का थोड़ा पतला है। मगर मेरा… मेरा लगभग चार इंच चौड़ा है।”
“चार इंच?” शेखर के मन में हैरानी थी।
“हाँ भाई। जेनेटिक्स का खेल है। तो कुल मिलाकर, अगर हम सबको संतुष्टि चाहिए और पूजा भाभी को भी परेशानी न हो, तो तीन इंच या साढ़े तीन इंच का प्लग सही रहेगा।
मगर मैं कहूँगा कि तीन इंच का ही ले लो। क्योंकि अगर प्लग बहुत मोटा होगा और उसकी गांड बहुत ढीली हो जाएगी, तो हमें कोई मज़ा नहीं आएगा।
हमें उसकी गांड की मांसपेशियों का वह ग्रिप चाहिए, वह कसावट। इसलिए तीन इंच का प्लग लो – उसे तैयारी भी हो जाएगी और हमें भी अच्छा अनुभव मिलेगा।
गैप तो प्राकृतिक रूप से हो जाएगा जब हम सब एक के बाद एक उसकी गांड को चोदेंगे।”
शेखर ने सब कुछ सुन लिया। उसने मयूर को धन्यवाद दिया और फोन रख दिया। वह कुछ पल खड़ा रहा, सोचता रहा।
उसके दिमाग में एक तस्वीर आई – पूजा को दर्द हो रहा है, वह कराह रही है, उसकी आँखों से आँसू बह रहे हैं,
मगर वह चुपचाप सब सहन कर रही है… और वह तस्वीर उसे उत्तेजित कर रही थी। उसे अपने लंड में एक हल्की सी हलचल महसूस हुई।
उसने पूजा की तरफ देखा। पूजा अब भी उसे देख रही थी, इंतज़ार कर रही थी।
“क्या बोला मयूर?” पूजा ने पूछा।
शेखर ने झूठ बोलने का फैसला किया। उसकी आवाज़ में कोई झिझक नहीं थी जब उसने कहा, ढाई इंच का ले लो। क्योंकि पहली बार में तीन इंच का प्लग डालना तेरे लिए मुश्किल होगा। ढाई इंच से शुरू करो, फिर धीरे-धीरे बढ़ाना।”
पूजा ने सिर हिलाया, उसके चेहरे पर भरोसा था। “ठीक है, ढाई इंच का ही ले लेती हूँ।”
वह सीधा बाथरूम में गई और तैयार होकर बाजार चली गई। शाम तक उसने २.५ इंच चौड़ा बट प्लग खरीद लिया।
उसे कोई अंदाज़ा नहीं था कि शेखर ने उससे झूठ बोला है – कि असली सुझाव तीन इंच का था, ढाई का नहीं।
शेखर के मन में एक क्रूर इच्छा थी – वह पूजा को थोड़ा दर्द झेलते हुए देखना चाहता था, उसकी गांड को उन बड़े लंडों के लिए पूरी तरह से नहीं खोलना चाहता था, ताकि जब वे सब उसे चोदें, तो उसे वह कसावट महसूस हो, वह तकलीफ, वह फैलाव।
और वह सब देखकर शेखर के अपने लंड में फिर से जान आ जाएगी।
उस रात पूजा ने पहली बार प्लग को अपने गुदा में डाला। वह बाथरूम में खड़ी थी, प्लग को तेल से चिकना करके धीरे-धीरे अंदर धकेल रही थी।
पहली बार में उसे जलन हुई, उसके गुदा के होंठ उस प्लग के चारों तरफ फैल गए। उसने दाँत भींच लिए और धीरे-धीरे उसे पूरा अंदर धकेल दिया।
फिर वह बाहर आई और बिस्तर पर लेट गई, प्लग को पूरी रात लगाए रखने के लिए।
अगले दिन ऑफिस में, जब वह अपनी सीट पर बैठी थी, राजेश उसके पास आया। शेखर पास ही खड़ा था, किसी से बात कर रहा था।
राजेश ने पूजा के पीछे खड़े होकर उसके नितंबों को छुआ – पहले तो हल्का सा, फिर उसने दबाकर महसूस किया। पूजा चौंकी मगर उसने कुछ नहीं कहा।
राजेश ने उसके कान में फुसफुसाया, “प्लग लगाया है न भाभी?”
पूजा ने चारों तरफ देखा – कोई ध्यान नहीं दे रहा था। उसने सिर हिलाया, हाँ।
राजेश मुस्कुराया और चला गया।
उस दिन और अगले दिन – शनिवार तक – पूजा ने वही रूटीन फॉलो किया। रात को प्लग लगाकर सोना, सुबह नहाते समय निकालना, फिर थोड़ी देर बाद फिर से लगाना।
धीरे-धीरे उसे प्लग की आदत हो गई। और फिर एक दिन उसने देखा कि जब वह प्लग को अंदर ले जाती है और धीरे-धीरे घुमाती है, तो उसकी चूत से पानी टपकने लगता है।
वह अब इस क्रिया में आनंद लेने लगी थी – वह भराव, वह दबाव, वह फैलाव – सब कुछ उसे और अधिक उत्तेजित कर रहा था।
शनिवार की रात को बिस्तर पर लेटे हुए पूजा ने शेखर से कहा, “शेखर, मुझे लगता है मैं अब तैयार हूँ। मेरी गांड ने उस प्लग को अपना लिया है।
मुझे अब उसके बिना अजीब लगता है।”
शेखर ने उसे देखा। उसके मन में संतुष्टि थी – मगर वह संतुष्टि उस तथ्य से नहीं थी कि पूजा तैयार थी, बल्कि इस बात से थी कि कल वह पूजा को उन पाँच लौड़ो के नीचे तड़पता देखेगा –
और उसकी गांड उनके लिए अभी पूरी तरह से तैयार नहीं होगी, क्योंकि उसने जानबूझकर छोटा प्लग लेने को कहा था।
“हाँ पूजा, कल सब कुछ बदल जाएगा।”
रविवार की सुबह सात बजते ही मयूर के घर के सामने सब इकट्ठा हो गए। मोहित, निखिल, राजेश, अनिकेत और मयूर – पाँचों ने एक ही कार पकड़ी और शेखर के घर की ओर निकल पड़े।
मयूर गाड़ी चला रहा था, मोहित आगे बैठा था, और बाकी तीन पीछे की सीट पर। गाड़ी के अंदर एक अजीब सी खामोशी थी – हर कोई अपने-अपने विचारों में खोया हुआ था।
मोहित पहले से ही जानता था कि क्या होने वाला है, इसलिए वह थोड़ा शांत था। मगर राजेश और अनिकेत के लिए यह पहला अनुभव था – वे अपने हाथों को रगड़ रहे थे, उत्तेजना और घबराहट के मिश्रण से भरे हुए थे।
रास्ते में निखिल ने अपना फोन निकाला और शेखर को कॉल लगाया। शेखर ने कॉल उठाई तो निखिल ने बिना किसी भूमिका के कहा, “शेखर, एक काम करना।
पूजा भाभी से कह दो कि एनीमा ले लें। गांड की अंदर से पूरी सफाई हो जाएगी। हम उनकी गांड को चोद के मुँह फिर से मुंह में लंड डालेंगे – असली मज़ा तो तब है जब सब कुछ साफ हो। उनके अपने ही फायदे के लिए है यह।”
शेखर ने एक पल की चुप्पी के बाद कहा, “ठीक है, मैं कह देता हूँ।”
उसने फोन रखा और पूजा की तरफ देखा। पूजा उसके सामने खड़ी थी, अपने नाखूनों से खेल रही थी। वह पहले से ही नर्वस थी – उसकी साड़ी के पल्लू को वह बार-बार ठीक कर रही थी, अपने बालों को पीछे धकेल रही थी।
“पूजा,” शेखर ने उसके पास जाकर उसका हाथ पकड़ा, “निखिल ने कहा है कि तू एनीमा ले ले। ताकि गांड के अंदर से सब कुछ साफ हो जाए। वे बोले कि वे गांड को चोदने के बाद मुँह में चुसवायेंगे, इसलिए सफाई ज़रूरी है। तेरे ही लिए अच्छा होगा।”
पूजा ने गहरी साँस ली और सिर हिलाया। उसकी आवाज़ में बस एक शब्द था, “ठीक है।”
वह बाथरूम में चली गई। पानी की आवाज़ें आ रही थीं, एनीमा किट के साथ वह अपने गांड के अंदरूनी हिस्से को साफ करने में लग गई।
बीस मिनट तक वह वहाँ रही – बार-बार पानी भरना, फिर उसे निकालना, फिर से भरना। आखिरी बार जब वह बाहर निकली तो उसका शरीर हल्का काँप रहा था, मगर वह पूरी तरह तैयार थी।
उसने खुद को पोंछा, फिर अपने गांड में वह ढाई इंच का प्लग दोबारा लगा लिया – वही प्लग जो वह रात भर लगाए हुए थी और सुबह उतार दिया था।
अब वह फिर से अंदर था, उसके अंदरूनी हिस्से को फैलाए हुए। फिर उसने अपने ऊपर एक बाथरोब लपेट लिया और बाहर आकर बिस्तर पर बैठ गई।
उसकी साँसें तेज़ थीं। उसने दीवार पर टंगी घड़ी को देखा – आठ बजने में पाँच मिनट थे। वह जानती थी कि वे किसी भी समय आ सकते थे।
उसने अपने हाथों को देखा – वे हल्के काँप रहे थे। न जाने क्यों, उसका शरीर पहले से ही गर्म हो रहा था, उसके पेट के निचले हिस्से में एक हलचल सी हो रही थी।
शेखर ने उसे देखा। उसने पूजा के पास आकर उसका हाथ पकड़ा और धीरे से कहा, “तू तैयार है न?”
पूजा ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में आत्मविश्वास नहीं था, मगर एक दृढ़ता थी – वह दृढ़ता जो केवल वही पत्नी रख सकती है जो अपने पति के लिए कुछ भी करने को तैयार हो।
“हाँ, मैं तैयार हूँ। और तूम? तूम तैयार हो यह सब देखने के लिए?”
शेखर ने सिर हिलाया। “मैं तैयार हूँ। मैं तो बस यही चाहता हूँ कि आज के बाद हम फिर से वह बन सकें जो पहले थे।”
पूजा ने उसके होंठों को चूमा – एक हल्का, मीठा चुम्बन। “हम वही रहेंगे शेखर। हमेशा।”
“तो चलो फिर आखरीबार ठीक से नहा लो”
“ठीक है” कहकर पूजा नहाने चली गयी,
थोड़ी देर बाद दरवाजे की घंटी बजी। शेखर खड़ा हो गया, उसके चेहरे पर एक गंभीरता आ गई। उसने दरवाज़ा खोला – सामने पाँचों खड़े थे।
मोहित ने सबसे आगे आकर उससे हाथ मिलाया, फिर निखिल, राजेश, अनिकेत और मयूर ने भी। सब एक के बाद एक अंदर आए और ड्राइंगरूम में बैठ गए।
“आओ-आओ,” शेखर ने कहा, अपनी आवाज़ को सामान्य रखने की कोशिश करते हुए, “बैठो। कोल्ड्रिंक लोगे?”
“हाँ भाई, ले आ,” मयूर ने कहा और सबसे पहले सोफे पर बैठ गया।
कुछ देर तक ड्राइंगरूम में हल्की-फुल्की बातें चलती रहीं। मोहित ने शेखर के ऑफिस के किस्से सुनाए, निखिल ने अपनी नई गाड़ी के बारे में बताया।
राजेश चुप था, बस बार-बार गिलास में पानी पी रहा था और अपनी घड़ी देख रहा था।
अनिकेत भी शांत था, मगर उसकी आँखें बेडरूम के दरवाज़े पर टिकी हुई थीं – वह दरवाज़ा जिसके पीछे पूजा बैठी थी, बाथरोब में लिपटी हुई, अंदर से पूरी तरह नग्न और उसके गुदा में प्लग लगा हुआ।
दस मिनट बाद निखिल ने बातचीत को समाप्त किया। उसने शेखर की तरफ देखा और कहा, “चलो, बहुत हुई बातें। अब काम की बात पर आते हैं।”
सब उठ गए। शेखर उन्हें लेकर बेडरूम में दाखिल हुआ। बेडरूम का दरवाज़ा खुला तो पूजा बिस्तर के किनारे बैठी हुई थी, बाथरोब में लिपटी हुई।
उसने सबको देखा और एक बार फिर से उसका गला सूख गया। उसने अपने होंठों को चाटा और अपनी जगह पर बैठी रही।
बेडरूम का माहौल बदल गया था। अब यह सिर्फ एक बातचीत का कमरा नहीं रह गया था – यह वह मंच था जहाँ कुछ ऐसा होने वाला था जो उन सबकी ज़िंदगी बदल सकता था।
शेखर अपनी पुरानी कुर्सी पर चला गया, वही कुर्सी जहाँ वह हर रात बैठता था और मोहित को पूजा को चोदते देखता था। वह बैठ गया और अपने सामने का दृश्य देखने लगा – उसकी पत्नी, पाँच मर्दों के बीच।
अनिकेत ने अपनी जेब से एक छोटी सी पन्नी निकाली। उसने उसे खोला तो उसमें से पांच नीली और एक पिली गोलियाँ निकलीं। उसने उन्हें अपनी हथेली पर रखा और सबको दिखाया।
“यह क्या है?” शेखर ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी हैरानी थी।
अनिकेत मुस्कुराया – एक ऐसी मुस्कान जिसमें एक चालाकी थी। “यह वियाग्रा है। लीजिए, सबको लेनी होगी।”
“वियाग्रा?” पूजा ने पूछा, उसकी आवाज़ में सवाल था। “हमें वियाग्रा की क्या ज़रूरत है? मैं औरत हूँ, मुझे इसकी क्या ज़रूरत?”
निखिल ने समझाया, “पूजा भाभी, हम सुबह से शुरू करके रात तक आपको चोदेंगे – और हो सकता है कि आज रात भी काफी न हो। इतने लंबे समय तक टिकने के लिए हमें इसकी ज़रूरत है।
और आपको इसलिए क्योंकि इस तरह के काम के लिए आपमें भी भारी मात्रा में उत्तेजना होनी चाहिए, ताकि आप भी इसका आनंद ले सकें, आपके लिए ये एक पिली वाली गोली है, औरतों का वियाग्रा अलग होता है।
आखिरकार, यह सब शेखर के इरेक्शन के बारे में है – जब तक शेखर को इरेक्शन नहीं आ जाता, हम नहीं रुक सकते।”
पूजा ने निखिल के चेहरे की तरफ देखा – उसमें कोई मज़ाक नहीं था। वह पूरी तरह गंभीर था। उसने अनिकेत के हाथ से पिली गोली ली और बिना किसी हिचकिचाहट के उसे अपने मुँह में डाल लिया। एक घूँट पानी के साथ उसने उसे निगल लिया।
बाकी पाँचों ने भी ली।
शेखर ने आखिरी गोली ली और उसे अपने मुँह में डाल लिया. उसने एक घूँट पानी पिया और गोली को निगल लिया.
उसकी आँखें पूजा पर थीं – पूजा अब भी बिस्तर के किनारे बैठी थी, बाथरोब में लिपटी हुई. उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं.
अनिकेत ने सबको देखा और कहा, “अब दस मिनट में दवा असर दिखाना शुरू कर देगी. तब तक हम तैयार हो जाते हैं.”
पाँचों मर्द एक के बाद एक अपने कपड़े उतारने लगे. मोहित ने सबसे पहले अपनी शर्ट उतारी – उसका शरीर दुबला-पतला था, मगर उसकी मांसपेशियाँ साफ दिख रही थीं.
उसने अपनी पैंट उतारी और उसके नीचे से उसका लंड बाहर निकला – सात इंच लंबा, सीधा खड़ा. वह जानता था कि आज वह सिर्फ शुरुआत है.
निखिल ने अपनी टी-शर्ट उतारी – उसका शरीर थोड़ा भारी था, मगर उसकी छाती पर बाल घने थे. उसने अपनी पैंट उतारी तो उसका लंड बाहर निकला – आठ इंच, मगर मोटाई में दूसरों से अलग.
उसकी मोटाई तीन इंच से भी ज़्यादा थी, उसके हाथ में वह भारी लग रहा था.
राजेश ने झिझकते हुए अपने कपड़े उतारे. वह पहली बार किसी औरत के सामने नंगा हो रहा था. उसका लंड साढ़े सात इंच का था, पतला मगर लंबा. उसके हाथ काँप रहे थे जब उसने अपना आखिरी कपड़ा उतारा.
अनिकेत ने चुपचाप अपने कपड़े उतारे – उसके शरीर पर कोई बाल नहीं था, साफ-सुथरा. उसका लंड सात इंच का था, मगर सबसे अलग बात यह थी कि वह सबसे ज़्यादा समय तक सख्त रहने के लिए जाना जाता था.
और फिर मयूर ने अपने कपड़े उतारे. पूजा ने उसे देखा तो उसका गला सूख गया. मयूर का लंड आठ इंच लंबा था – मगर उसकी चौड़ाई ने सबको चौंका दिया.
लगभग चार इंच चौड़ा, एक मोटा, भारी लंड जो उसकी जाँघों के बीच लटक रहा था, अब धीरे-धीरे सख्त हो रहा था. उसकी नसें उभरी हुई थीं, उसका सिर लाल और चमकदार था.
पूजा ने उसे देखकर अपना गला साफ किया. उसने गहरी साँस ली और अपने बाथरोब को कसकर पकड़ लिया.
पाँचों मर्द उसके पास आए. मोहित ने सबसे पहले हाथ बढ़ाया और उसके बाथरोब के बंधन को खोला. बाथरोब पूजा के शरीर से फिसलकर नीचे गिर गया –
वह पूरी तरह नंगी थी, उसके छोटे-छोटे स्तन उभरे हुए थे, उसकी चूत के होंठ चमक रहे थे, और उसके गांड में वह ढाई इंच का प्लग लगा हुआ था.
शेखर ने उसे देखा – उसकी पत्नी को पाँच नंगे मर्द घेरे हुए थे. उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसने अपने लंड पर हाथ रखकर उसे सहलाना शुरू कर दिया.
मोहित ने पूजा के स्तनों को अपने हाथों में लिया – वे छोटे थे, उसकी हथेलियों में पूरी तरह समा जाते थे.
उसने उन्हें दबाया और निचोड़ा, उसकी उँगलियाँ उसके निपल्स पर घूम रही थीं. पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसकी छाती से एक हल्की कराह निकली.
राजेश उसकी तरफ से खड़ा था – उसने अपना हाथ पूजा की चूत पर रखा और उसके होंठों के बीच अपनी उँगली घुमाने लगा. पूजा की चूत पहले से ही गीली थी, और राजेश की उँगली उसके अंदर आसानी से चली गई. एक उँगली, फिर दो, फिर तीन.
निखिल पीछे से आया और उसने पूजा के नितंबों को अपने हाथों में लिया. उसने उन्हें दबाया और फैलाया – प्लग का सिरा बाहर झाँक रहा था. उसने प्लग को हल्का सा घुमाया तो पूजा की साँसें और तेज़ हो गईं.
अनिकेत और मयूर पूजा के सामने खड़े थे, अपने लंडों को सहलाते हुए. वे देख रहे थे कि कैसे चार हाथ पूजा के शरीर को छू रहे हैं,
कैसे उसके स्तन मोहित के हाथों में दब रहे हैं, कैसे राजेश की उँगलियाँ उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रही हैं, कैसे निखिल उसके नितंबों को फैला रहा है.
पूजा ने अपनी आँखें खोलीं और शेखर की तरफ देखा – वह गर्मी से, उत्तेजना से पसीने से लथपथ थी.
शेखर की आँखों में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी – उसका लंड आधा सख्त हो चुका था, और वह उसे लगातार सहला रहा था.
दस मिनट बीत चुके थे. वियाग्रा का असर अब सभी में दिखने लगा था. उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं, उनकी आँखों में एक चमक आ गई थी.
मोहित के लंड की नसें और उभर आई थीं, निखिल का लंड और भी मोटा और सख्त हो गया था, राजेश के हाथ अब काँपने की बजाय और मज़बूती से पूजा के शरीर को पकड़ रहे थे,
अनिकेत की आँखों में एक ठंडा संकल्प था, और मयूर का चार इंच चौड़ा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था – उसकी नसें उभरी हुई, उसका सिर लाल और चमकदार.
राजेश ने सबको देखा और अपनी आवाज़ को ऊँचा किया, “बहुत हो गई छेड़खानी. अब हम सीधे उसकी गांड में घुसेंगे. एक-एक करके. सबको मौका मिलेगा.”
सब ने सिर हिलाया. शेखर ने अपनी कुर्सी पर आगे झुककर और ध्यान से देखना शुरू किया. उसका हाथ अब भी अपने लंड पर था, धीरे-धीरे सहला रहा था.
मगर निखिल ने एक हाथ उठाकर सबको रोका. “मगर पहले, हम एक लाइन बनाएँगे. पूजा भाभी को हम सबके लौड़ो को चूसना होगा –
एक-एक करके. उनकी लार, गांड में जाने के लिए सबसे अच्छा लुब्रिकेशन होगी. इससे हमारे लंड गीले हो जाएँगे और उनकी गांड में आसानी से जा सकेंगे.”
“हाँ, यह सही है,” मोहित ने समर्थन किया. “उसकी लार सबसे अच्छा तेल है. और इससे वह भी थोड़ी गर्म हो जाएगी.”
पूजा ने एक बार फिर शेखर की तरफ देखा. शेखर ने उसे देखा – उसकी आँखों में कोई दया नहीं थी, बल्कि एक उत्तेजना थी. उसने पूजा की तरफ सिर हिलाया – हाँ में.
पाँचों मर्द बिस्तर के पास एक लाइन में खड़े हो गए. पूजा बिस्तर से उतरी और उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई. वह नंगी थी, उसके गांड में वह ढाई इंच का प्लग लगा हुआ था, और उसके सामने पाँच सख्त, खड़े लंड थे.
पूजा ने गहरी साँस ली. उसके हाथ उसकी जाँघों पर थे, काँप रहे थे. उसने अपना मुँह खोला और सबसे पहले मोहित के लंड को अपने होंठों के बीच ले लिया.
मोहित के मुँह से एक लंबी, गहरी कराह निकली. “आह्ह्ह… भाभी… तेरा मुँह… बहुत गर्म है…”
मोहित ने उसके सिर को अपने हाथों में लिया और धीरे-धीरे उसे अपने लंड पर आगे-पीछे करना शुरू किया.
पूजा ने अपना मुँह और खोला और उसे और गहराई तक ले गई. उसकी जीभ उसके लंड के चारों तरफ घूम रही थी, उसके सिर को चाट रही थी.
“चप-चप… चप-चप…” उसके मुँह से आवाज़ आ रही थी. उसकी लार मोहित के लंड पर बह रही थी, उसे चिकना कर रही थी.
राजेश, जो लाइन में दूसरे नंबर पर खड़ा था, ने मोहित के कंधे पर हाथ रखा. “अरे यार, आसानी से ले. अभी बाकी सब भी हैं. इतनी जल्दी क्या है?”
मोहित ने अपनी गति थोड़ी धीमी की, मगर पूजा ने खुद ही अपना सिर और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया. वियाग्रा ने उसके शरीर को भी उत्तेजित कर दिया था.
उसके हाथ उसकी चूत पर थे, वह खुद को सहला रही थी, और उसका मुँह मोहित के लंड को चूस रहा था.
शेखर ने देखा कि पूजा खुद ही अपनी चूत पर हाथ फेर रही है. उसकी एक उँगली उसकी चूत के होंठों पर घूम रही थी, उसके अंदर-बाहर जा रही थी.
शेखर के लंड में एक हल्की सी हलचल हुई – वह पहले से ज़्यादा सख्त हो गया.
पाँच मिनट बाद पूजा मोहित से अलग हुई और राजेश के सामने आ गई. राजेश का लंड सख्त खड़ा था, उसका सिर चमक रहा था.
पूजा ने उसे अपने मुँह में लिया – राजेश ने अपना सिर पीछे झुका लिया और उसके मुँह से एक लंबी कराह निकली.
“आह्ह्ह… पूजा भाभी… आप तो… आप तो यकीनन सेक्स की देवी हैं…” राजेश बड़बड़ाया, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी भक्ति थी.
उसने शेखर की तरफ देखा और कहा, “शेखर, तू बहुत भाग्यशाली है. तेरी बीवी… वाह… क्या औरत है.”
शेखर मुस्कुराया. उसे अच्छा लग रहा था कि उसकी पत्नी को इतना सराहा जा रहा था. उसने अपने लंड को और तेज़ी से सहलाना शुरू किया.
राजेश ने पूजा के मुँह में अपने लंड को गहराई तक धकेला, फिर बाहर निकाला, फिर अंदर – एक लय में. पूजा ने अपना सिर उसी लय में हिलाया –
आगे-पीछे, आगे-पीछे. उसके मुँह से “गक-गक-गक” की आवाज़ आने लगी – वह आवाज़ जब कोई लंड गले में गहराई तक जाता है और मुँह से हवा निकलती है.
“गक-गक-गक… गक-गक-गक…”
वह आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी – उत्तेजना और कामुकता से भरी एक लय.
राजेश के बाद वह निखिल के पास गई. निखिल का लंड मोटा था – तीन इंच चौड़ा, आठ इंच लंबा.
पूजा ने उसे अपने मुँह में लेने की कोशिश की, मगर उसकी मोटाई के कारण उसके होंठ और ज़्यादा फैल गए. वह पीछे हटना चाहती थी, मगर निखिल ने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर से अपने कूल्हों को आगे बढ़ाया.
“पीछे मत हटो भाभी,” निखिल ने कहा, उसकी आवाज़ में एक क्रूरता थी जो पहले नहीं थी. “हमें तो अभी शुरू करना है.”
उसने अपना पूरा लंड पूजा के मुँह में धकेल दिया. पूजा के गले से एक दबी हुई आवाज़ निकली – घुटन की आवाज़. उसकी आँखें फैल गईं, मगर उसने विरोध नहीं किया.
दूसरे लोग चिल्लाए, “हाँ! बस ऐसे! इस राँड को मत छोड़ो!”
पूजा ने ‘राँड’ शब्द सुना. एक पल के लिए उसके दिमाग में कुछ कौंधा – मगर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
शायद इसलिए कि वियाग्रा ने उसे इतना उत्तेजित कर दिया था कि वह कुछ सुनना या समझना नहीं चाहती थी. या शायद इसलिए कि वह जानती थी कि यह सब शेखर के लिए है – और वह कुछ भी सहन करने को तैयार थी.
निखिल ने उसके मुँह को तीन-चार मिनट तक ऐसे ही चोदा – एक मशीन की तरह. उसका मोटा लंड पूजा के मुँह के अंदर तेज़ी से आ-जा रहा था, हर बार उसके गालों को फुलाता हुआ. पूजा की लार हर जगह फैल गई थी – उसके होंठों पर, उसकी ठुड्डी पर, उसके स्तनों पर.
फिर वह अनिकेत के पास गई. अनिकेत के मन में कुछ और ही था. उसने पूजा के बालों को एक हाथ से पकड़ा और उसका सिर पीछे खींचा.
फिर उसने अपना सात इंच का लंड उसके मुँह में डाला और उसे गहराई तक धकेल दिया – इतना गहरा कि वह उसके गले में जा लगा.
फिर वह रुक गया.
“एक… दो… तीन… चार…” अनिकेत ने गिनती शुरू की.
पूजा के गले से घुटन की आवाज़ें आने लगीं. उसका चेहरा लाल हो गया, उसकी आँखों से पानी बहने लगा. वह अपने हाथो से मार रही थी, मगर अनिकेत ने उसे जाने नहीं दिया.
पाँच सेकंड बाद उसने उसे छोड़ा और पूजा ने ज़ोर से हाँफते हुए साँस ली.
“एक और बार,” अनिकेत ने कहा और फिर से उसे धकेल दिया. इस बार छह सेकंड. फिर तीसरी बार – सात सेकंड.
हर बार पूजा को और ज़्यादा तकलीफ होती थी, मगर वह अपनी जगह से नहीं हटी. उसके चेहरे पर आँसू और लार मिले हुए थे, मगर उसकी आँखें बंद नहीं हुईं – वह शेखर को देख रही थी.
चार मिनट के बाद अनिकेत ने उसे जाने दिया और वह मयूर के पास आ गई.
मयूर का लंड चार इंच चौड़ा था – सबसे चौड़ा, सबसे भारी. उसका सिर पूजा के सामने था, लाल और चमकदार. पूजा ने उसे देखा तो उसकी साँसें थम गईं.
उसकी आँखें उस मोटाई को नाप रही थीं – चार इंच. वह अपने गले में एक पल के लिए सोची, कैसे यह उसके मुँह में समाएगा.
मगर तभी शेखर ने अपनी कुर्सी से कहा, उसकी आवाज़ में एक गरमाहट थी जो पहले कभी नहीं थी, “मयूर, इसके मुँह को अच्छी तरह से चोदो. इसके मुँह को ऐसे चोदो जैसे तुम किसी राँड को चोदते हो.”
पूजा ने शेखर की तरफ देखा – उसकी आँखों में एक चमक थी जो उसने पहली बार देखी थी.
वह चमक उसे बता रही थी कि शेखर इस सब में पूरी तरह से डूब चुका था. उसने शेखर की तरफ देखकर एक हल्की सी मुस्कान दी – एक ऐसी मुस्कान जो कह रही थी कि वह भी तैयार थी.
शेखर के शब्दों ने कमरे में एक लहर पैदा कर दी. सब चिल्लाए, “वाह! अब तो पति-पत्नी दोनों ही इसका मज़ा ले रहे हैं!”
मयूर ने पूजा की तरफ देखा, उसके जबड़े भिंच गए. उसने पूजा के बालों को पकड़कर उसका सिर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “सुना तूने, कुतिया? तेरा पति चाहता है कि मैं तेरे मुँह को अच्छी तरह से चोदूं. तू क्या कहती है?”
पूजा ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके लंड के सिर को चाटना शुरू कर दिया.
उसकी जीभ उसके चारों तरफ घूम रही थी, उसे गीला कर रही थी. फिर उसने अपना मुँह खोला और उस मोटे, भारी लंड को अपने होंठों के बीच ले लिया.
मयूर ने एक लंबी, गहरी साँस ली. उसने पूजा के सिर को पकड़ा और अपने कूल्हों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया.
पूजा के होंठ उसकी चौड़ाई के कारण और ज़्यादा फैल गए – वे उसके चारों तरफ खिंच गए थे. उसकी आँखों से पानी बहने लगा, मगर उसने अपना मुँह और गहराई तक खोला.
“हाँ… बस ऐसे… बिल्कुल ऐसे,” मयूर ने फुसफुसाया और फिर तेज़ी से अपने कूल्हों को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.
उसका चार इंच चौड़ा लंड पूजा के मुँह के अंदर तेज़ी से आ-जा रहा था, हर बार उसके गालों को फुलाता हुआ, हर बार उसके गले में गहराई तक जाता हुआ.
उसकी लार हर जगह बिखर गई थी – उसके होंठों पर, उसकी ठुड्डी पर, उसकी गर्दन पर, उसके स्तनों पर.
उसकी आँखों से लगातार पानी बह रहा था, मगर वह अपनी आँखें बंद नहीं कर रही थी – वह शेखर को देख रही थी, और शेखर उसे देख रहा था.
शेखर का हाथ उसके लंड पर तेज़ी से चल रहा था – उसका लंड अब आधे से ज़्यादा सख्त हो चुका था.
उसकी आँखें पूजा पर टिकी थीं, और उसके चेहरे पर एक ऐसी अभिव्यक्ति थी जो पूजा ने पहले कभी नहीं देखी थी – गर्व और उत्तेजना का मिश्रण.
चार-पाँच मिनट तक मयूर ने पूजा के मुँह को ऐसे ही चोदा, जब तक मोहित ने आकर उसके कंधे पर हाथ नहीं रखा.
“बहुत हो गया, यार. अब कुछ और शुरू करते हैं,” मोहित ने कहा, उसकी आवाज़ में एक शांति थी मगर उसकी आँखों में जलन थी.
मयूर ने एक बार और गहराई तक जाकर पूजा के मुँह को चोदा, फिर उसके बालों को पकड़कर उसे खींचकर खड़ा कर दिया.
पूजा के चेहरे पर लार और आँसू मिले हुए थे, उसके होंठ लाल और सूजे हुए थे, मगर वह मुस्कुरा रही थी.
मयूर ने शेखर की तरफ देखा और पूछा, “शेखर, अब क्या चाहिए? आखिर यह तुम्हारा शो है.”
शेखर खड़ा हो गया. उसका लंड अब लगभग पूरी तरह सख्त था – कई हफ्तों बाद पहली बार इतना सख्त.
उसने उसे अपने हाथ में लेकर सहलाया और कहा, उसकी आवाज़ में एक कमांड थी, “अब उसकी गांड को चोदो. मैं वो देखना चाहता हूँ.”
मयूर ने सिर हिलाया. उसने पूजा को कंधे से पकड़ा और बिस्तर की तरफ धकेला. “झुक जा. डॉगी पोज़िशन में. और अपना मुँह शेखर की तरफ रख – वह देखना चाहता है तुझे.”
पूजा ने आज्ञा का पालन किया. वह बिस्तर पर झुक गई – अपने हाथों और घुटनों के बल. उसने अपने नितंबों को ऊपर उठाया और अपना चेहरा शेखर की तरफ कर लिया.
उसके गांड में प्लग लगा हुआ था, और उसकी चूत से पानी टपक रहा था, बिस्तर की चादर पर गिर रहा था.
पाँचों मर्द उसके पीछे खड़े थे.