बाथरूम का दरवाज़ा बंद हुआ और पानी की आवाज़ आने लगी। लिविंग रूम में पाँचों मर्द नंगे बैठे थे, उनके शरीर वियाग्रा के असर से तप रहे थे।
उनके लंड खड़े थे, सख्त, बेकाबू – मानो उनमें कोई जान डाल दी गई हो जो अब सिर्फ एक ही चीज़ चाहती थी।
फर्श पर बिछे दरी पर कुछ तकिए बिखरे हुए थे, दीवार पर लगी घड़ी टिक-टिक कर रही थी, और कमरे में केवल उनकी साँसों की आवाज़ थी – भारी, गर्म, बेचैन।
निखिल ने अपना सिर उठाया। उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी, वह शर्मिंदगी से अपनी जाँघों को देख रहा था।
उसने गहरी साँस ली और शेखर की तरफ देखते हुए बोला, “सुनो यार शेखर… मुझे बहुत बुरा लग रहा है।”
शेखर ने उसकी तरफ देखा, उसकी भौहें उठ गईं। “किस बात का भाई?”
निखिल ने अपना हाथ अपने सिर पर रखा और धीरे-धीरे बोला, “वो सब… जो हम पूजा भाभी को बुला रहे थे।
‘कुतिया’, ‘रंडी’, ‘साली’… वो सब। मेरा मतलब वो नहीं था कि मैं उन्हें नीचा दिखाऊँ या उनका अपमान करूँ।”
उसने अपनी आँखें शेखर से मिलाईं – उनमें सच्चा पश्चाताप था। “और मुझे लगता है कि बाकी सब भी ऐसा ही सोचते हैं, है ना दोस्तों?”
राजेश ने तुरंत सिर हिलाया, उसके चेहरे पर भी वही भाव थे। “हाँ भाई, बिल्कुल। मैं भी माफ़ी चाहता हूँ। हम सब गलत थे, वो जरा गर्मागर्मी में वैसी गालियाँ निकल ही जाती है।”
अनिकेत ने भी अपनी बात रखी, “हमने सोचा नहीं था कि हम इतना गाली गलोच करेंगे। बस… वो पल था, वो उत्तेजना थी।”
मोहित और मयूर ने भी सिर हिलाकर सहमति जताई।
सबकी आँखें शेखर पर टिकी थीं, उनके चेहरों पर एक बचकानी मासूमियत थी – वही मर्द जो कुछ मिनट पहले तक पूजा की गांड को फाड़ रहे थे, अब अपने शब्दों के लिए शर्मिंदा थे।
शेखर हँसा – एक हल्की, गर्म हँसी। उसने अपने हाथ से हवा में लहराया और बोला,
“अरे यार, तुम लोग इतना क्यों सोच रहे हो? मैं भी कभी-कभी उसे वही शब्द बोलता हूँ जब हम रोज़ चुदाई करते थे। और सुनो – उसे यह सब पसंद भी है।”
मयूर ने अपनी भौहें सिकोड़ीं, “लेकिन शेखर, तुम उसके पति हो। तुम्हारा रिश्ता अलग है।
हम तो तुम्हारे और उसके सहकर्मी और दोस्त हैं, हमारा उसे ऐसे बुलाना ठीक नहीं था।”
शेखर ने मयूर के कंधे पर हाथ रखा और समझाते हुए बोला, “अरे रिलैक्स यार।
मुझे पूरा यकीन है कि उसे बिल्कुल बुरा नहीं लगा। अगर तुम लोगों को इतना ही शक है, तो रुको – उसे बाहर आने दो, और खुद से पूछ लो।”
जैसे ही शेखर ने यह कहा, बाथरूम का दरवाज़ा खुला। पूजा बाहर निकली – पूरी तरह नंगी।
उसके शरीर पर पानी की बूंदें चमक रही थीं, उसका छोटा सुडौल शरीर लाइट में जगमगा रहा था।
उसके स्तनों से पानी टपक रहा था, उसकी चूत पर पानी चमक रहा था, उसकी जाँघों पर अब भी शेखर के वीर्य के निशान थे।
वह एक तौलिये से अपने बाल सुखा रही थी – उसके लंबे काले बाल गीले थे, उसके चेहरे पर एक ताजगी थी।
उसने कमरे में आते ही सबको देखा – सब नंगे, सबके लंड खड़े, सबकी आँखें उस पर टिकी हुई।
वह मुस्कुराई और बोली, “क्या हुआ तुम लोगों को? कौन सा टॉपिक चल रहा है… सेक्स पोजीशन?”
राजेश ने हिम्मत करके कहा, “नहीं भाभी… हम उस बारे में बात कर रहे थे कि हमने तुम्हें ‘कुतिया’ और ‘रंडी’ और ऐसे ही और गंदे शब्द बुलाए जब हम तुम्हें चोद रहे थे।
हमें बहुत शर्म आ रही है। हमारा मतलब वह नहीं था… हम तुम्हारा अपमान नहीं करना चाहते थे… बस…”
पूजा ने उसे बीच में ही रोक दिया। वह अनिकेत और मयूर के बीच में आकर बैठ गई – उसकी जाँघें फर्श से छू रही थीं, उसके नितंब दरी पर दब रहे थे।
उसने तौलिये को एक तरफ रखा और अपने बालों को हिलाया, जिससे पानी की बूंदें चारों तरफ उड़ गईं।
“अरे रिलैक्स करो यार तुम लोग। मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगा,” पूजा ने कहा, उसकी आवाज़ में एक आत्मविश्वास था।
“तुम लोग क्या समझते हो कि मैं पुराने ज़माने की औरत हूँ? चुदाई में नैतिकता और अनुशासन ढूँढ़ने वाली? मैं जानती हूँ कि मर्दों को बिस्तर पर थोड़ी गंदी बातें करना,
थोड़ा गुस्सा दिखाना, थोड़ा बेरहम होना पसंद होता है। और सच कहूँ तो… मुझे भी यह पसंद है। आखिरकार, वह कैसा मर्द जो बिस्तर पर आक्रामक न हो?”
शेखर ने सबकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “देखा मैंने क्या कहा था?”
सबके चेहरे पर एक राहत आई। उनके कंधे ढीले हुए, उनकी साँसें सामान्य हुईं। राजेश ने एक गहरी साँस ली और कहा, “वाह भाभी… तुम वाकई कमाल हो। हमें लगा कि तुम नाराज हो जाओगी।”
पूजा ने राजेश की तरफ देखा और शरारती मुस्कान से बोली, “नाराज? मैं तो अभी और भी ज्यादा तैयार हूँ।”
निखिल ने अपनी बात आगे बढ़ाई, अब उसके चेहरे पर एक उत्सुकता थी।
“तो भाभी, यह बताओ… तुम्हारी और क्या सीमाएँ हैं? मेरा मतलब, तुम कितनी दूर तक जाना चाहती हो? तुमने अब तक क्या अनुभव किया है? तुम्हें क्या पसंद है? हमें बताओ ताकि हम अगले सेशन में वही कर सकें।”
पूजा ने अपनी ठुड्डी पर हाथ रखा और सोचने लगी। उसकी आँखें छत पर टिक गईं, उसके होंठ हिल रहे थे जैसे वह अपने मन में सूची बना रही हो। “ओह… मुझे सोचने दो तो…”
वह थोड़ा रुकी, फिर बोली, “मुझे निगलना पसंद है – जैसा कि अब तुम सब जानते हो।”
सबकी हँसी फूट पड़ी – एक हल्की, गर्म हँसी। निखिल ने कहा, “हाँ वो तो हमें पता चल गया!”
पूजा भी हँसी, फिर उसने आगे कहा, “और दूसरी बात… मुझे अभी-अभी अपनी गांड का स्वाद पता चला है। मुझे वह भी पसंद है।”
अनिकेत ने अपनी भौहें उठाईं, “वाह भाभी, तुम तो और भी खुल रही हो।”
पूजा ने शरारती अंदाज़ में अपनी आँखें घुमाईं और बोली, “हाँ, और भी बहुत कुछ है। मगर अभी याद नहीं आ रहा… रुको, मुझे सोचने दो।”
वह चुप हो गई, उसकी आँखें फिर से छत पर टिक गईं। उसके होंठ हिल रहे थे, उसकी उँगलियाँ अपनी जाँघ पर थिरक रही थीं। फिर उसकी आँखों में एक चमक आई – उसे कुछ याद आ गया।
“हाँ! एक चीज़ है जो मैं ज़रूर ट्राई करना चाहती हूँ,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक उत्तेजना थी।
शेखर ने पूछा, “क्या है वो, जानू?”
पूजा ने गहरी साँस ली और फिर धीरे से कहा, “गोल्डन शावर।”
कमरे में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। सबकी आँखें फैल गईं, सबके चेहरे पर हैरानी थी।
निखिल का मुँह खुला रह गया, राजेश ने अपनी आँखें मलीं, अनिकेत ने अपना सिर हिलाया जैसे उसे ठीक से सुनाई नहीं दिया।
मयूर ने तोड़ा सन्नाटा, “सच में भाभी? तुम सच में यह ट्राई करना चाहती हो?”
राजेश ने चारों तरफ देखा – सबके चेहरे हैरान थे, मगर वह सबसे ज्यादा कन्फ्यूज था।
उसने अपना हाथ उठाया और बोला, “माफ करना भाभी, लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आया। गोल्डन शावर क्या है? क्या कोई मुझे समझा सकता है?”
अनिकेत ने राजेश की तरफ देखा और शांति से समझाया, “भाभी चाहती हैं कि हम उनके मुँह में पेशाब करें।”
राजेश का चेहरा सदमे से फैल गया। उसकी आँखें गोल हो गईं, उसने पूजा की तरफ देखा जैसे उसने कोई अपराध सुन लिया हो। “क्या!? तुम सच में यह चाहती हो भाभी?”
शेखर ने पूजा की तरफ देखा – उसकी आवाज़ में थोड़ी हैरानी थी, मगर गुस्सा नहीं। “जानू, तुमने मुझसे पहले क्यों नहीं बताया इस बारे में?”
पूजा ने शेखर का हाथ पकड़ा और उसकी आँखों में देखते हुए बोली,
“मैं तुम्हें बताने वाली थी, शेखी… लेकिन फिर वह एक्सीडेंट हो गया।
तुम्हें याद है न, उस दिन जब मैंने तुमसे कहा था कि मुझे तुमसे कुछ खास बात करनी है? बस उसी दिन ऑफिस का वो मामला आ गया और सब बदल गया।”
शेखर ने याद करने की कोशिश की – उसकी आँखों में एक पहचान सी आई। “हाँ… वो दिन जब तुम घर आई थीं और बहुत उदास थीं?”
“वही,” पूजा ने कहा। “मैं तुमसे यही बात करना चाहती थी। मगर फिर मोहित का फोन आया और सब कुछ अलग हो गया।”
अब मोहित बोला, उसकी आवाज़ में एक व्यावहारिकता थी,
“बात कर रहे हैं पेशाब की, तो भाभी… पेशाब करने के लिए हमें पहले हाइड्रेट होना होगा।
तुमने हमारी बॉल्स तो खाली कर दी हैं, हमारी एनर्जी भी लगभग खत्म हो गई है।
क्यों न तुम पहले हमारे लिए नींबू पानी बनाओ? ताकि हमें कुछ एनर्जी मिले और फिर हम अपनी ब्लैडर भर सकें।”
पूजा का चेहरा खिल उठा। वह फौरन उठ खड़ी हुई और बोली, “बिल्कुल! अभी बनाती हूँ।”
वह किचन की तरफ बढ़ी – उसकी चाल अब भी अजीब थी, उसकी गांड अब भी फैली हुई थी, उसकी जाँघों पर वीर्य के सूखे निशान थे।
वह थोड़ा लंगड़ाकर चल रही थी, हर कदम के साथ उसके शरीर में दर्द की लहर दौड़ती होगी।
जैसे ही वह अनिकेत के पास से गुज़री, अनिकेत ने अपना हाथ बढ़ाकर उसके नितंब पर एक जोरदार थप्पड़ मारा – “थप्पड़” की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँजी।
पूजा ने चौंककर “आऊच!” कहा और मुड़कर अनिकेत की तरफ देखा – उसकी आँखों में नाराज़गी नहीं, बल्कि एक शरारत थी।
उसने अपनी उँगली हिलाकर उसे डाँटा, “अरे ठरकी! रुक जा, पहले पानी पी लेने दे।”
सब ज़ोर से हँसने लगे – एक गर्म, खुशी भरी हँसी जो पूरे कमरे में गूँज गई। पूजा मुस्कुराती हुई किचन में चली गई, और वहाँ से बर्तनों की आवाज़ आने लगी।
पाँचों मर्द एक-दूसरे की तरफ देखे – उनके लंड अब भी खड़े थे, अब भी सख्त।
उनकी आँखों में वही चमक थी, वही भूख। वे जानते थे कि जो हुआ वह सिर्फ शुरुआत थी, और जो आने वाला था वह और भी गहरा, और भी गंदा, और भी अधिक होगा।
पूजा किचन से वापस आई, उसके हाथ में एक बड़ी ट्रे थी जिसमें नींबू पानी के गिलास रखे हुए थे।
उसके नंगे शरीर पर अब भी पानी की बूंदें चमक रही थीं, उसके बाल अब थोड़े सूख गए थे और उसके कंधों पर लहरा रहे थे।
वह धीरे-धीरे चल रही थी, उसकी चाल में अब भी वह अजीब सी लंगड़ाहट थी – उसकी फैली हुई गांड अब भी उसे परेशान कर रही थी, मगर उसके चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान थी।
वह पहले शेखर के पास गई और उसे गिलास दिया, फिर निखिल को, फिर मोहित को, फिर अनिकेत को, फिर मयूर को, और अंत में राजेश को।
जैसे ही वह राजेश को गिलास देने के लिए झुकी, उसके नितंब ऊपर उठ गए और उसका फैला हुआ गुदा साफ दिखाई देने लगा।
निखिल ने मौका नहीं गंवाया – उसने अपनी उँगली बढ़ाकर पूजा के गुदा में डाल दी और जोर से हँसने लगा।
पूजा चौंककर सीधी खड़ी हो गई, उसने पलटकर निखिल की तरफ देखा और अपनी उँगली हिलाते हुए बोली, “रुको तुम… बदमाश कहीं के!”
सब जोर से हँसने लगे – उनकी हँसी पूरे कमरे में गूँज गई। पूजा ने भी एक मुस्कान दबाई और फिर सबको नींबू पानी पीने का इशारा किया।
सबने गिलास उठाए और पीना शुरू कर दिया – ठंडा नींबू पानी उनके गले को तर कर रहा था, उनके शरीर में ऊर्जा भर रहा था।
थोड़ी देर बाद मयूर ने घड़ी की तरफ देखा और बोला, “ठीक है दोस्तों, चलो वापस काम पर लगते हैं। साढ़े ग्यारह बज गए हैं।
हमें कम से कम दो बजे तक खत्म करना होगा, फिर लंच करेंगे।”
सबने सिर हिलाकर सहमति जताई और धीरे-धीरे बेडरूम की तरफ बढ़ने लगे।
राजेश पूजा के पास आया और चलते-चलते उसके कूल्हों को दबाया – उसके हाथ उसकी कमर पर थे, उसकी उँगलियाँ उसके नितंबों में धँस रही थीं।
फिर उसने बिना रुके दो उँगलियाँ पूजा के गुदा में डाल दीं और उन्हें हिलाते हुए बोला, “हम फिर से तोड़ेंगे तुम्हें भाभी।”
पूजा ने उसकी तरफ देखा – उसकी आँखों में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि वही फ्लर्टी अंदाज़ था।
उसने अपना सिर थोड़ा झुकाया और फिर दाएँ-बाएँ हिलाया, जैसे कह रही हो, “तुम बड़े शरारती हो, राजेश।”
बेडरूम में पहुँचकर सब बिस्तर के चारों तरफ खड़े हो गए। बिस्तर पर चादर बिछी हुई थी, तकिए बिखरे हुए थे, और कमरे में एक गर्म, नम हवा थी।
पूजा ने सबकी तरफ देखा और पूछा, “ठीक है, अब हम कहाँ से शुरू करें? फिर से चूसना?”
“हाँ, मगर इस बार करवट लेटकर,” शेखर ने सुझाव दिया, उसकी आवाज़ में एक योजनाकार की समझदारी थी।
“ताकि कोई ऊपर से तुम्हारा मुँह ले सके, और कोई नीचे से तुम्हारी चूत को चाट सके।”
पूजा ने शेखर की तरफ देखा और मुस्कुराई, उसकी आँखों में एक शरारत थी।
“मेरा प्यारा पति… हमेशा मेरी फिक्र करता है। तुम ये क्यों नहीं कहते कि तुम मुझे चाटना चाहते हो जान, हाँ?”
शेखर ने अपने पाँच इंच के सख्त लंड को सहलाते हुए मुस्कुराकर जवाब दिया, “हाँ मेरी जान, मैं चाटना चाहता हूँ। खुश?”
बाकी सब भी बोल उठे – “हाँ भाभी, यह हमारा भी फर्ज है। हम सब तुम्हें चाटेंगे, अपने चारों तरफ घेरकर।”
निखिल ने बिना समय गंवाए बिस्तर पर छलांग लगाई और सीधा लेट गया – उसका लंड सख्त खड़ा था,
उसकी छाती पर बाल थे, उसके हाथ अपने सिर के नीचे थे जैसे वह आराम से हो। उसने कहा, “परफेक्ट। तो आओ भाभी, पहले मुझे चूसो।”
पूजा बिस्तर पर लेट गई – पहले उसने करवट ली, फिर अपने सिर को निखिल की कमर के पास ले जाकर अपनी कोहनी के बल पर थोड़ा ऊपर उठाया।
उसके नीचे शेखर आ गया – उसने पूजा की एक टाँग को हवा में उठाया और अपनी जीभ उसकी प्यासी चूत पर रख दी।
पूजा ने कराहना शुरू कर दिया – “आह्ह्ह… इतने दिनों बाद… शेखर… मेरी जान…”
उसकी आवाज़ में एक भावुकता थी, एक लंबे इंतज़ार के बाद मिली संतुष्टि।
शेखर की जीभ उसकी चूत के हर कोने को चाट रही थी, उसकी उँगलियाँ उसके अंदर जा रही थीं।
निखिल ने पूजा के बालों को अपने हाथ में इकट्ठा किया – उसने उसके सिर को पकड़ा और अपने खड़े लंड की तरफ धकेलते हुए बोला, “मुझे मत भूलो भाभी।”
पूजा ने अपना मुँह खोला और निखिल के लंड को अपने होंठों के बीच ले लिया।
नीचे शेखर और भी जोर से चाट रहा था – उसने पहले एक उँगली डाली, फिर दो, और उन्हें हिलाते हुए अपनी जीभ से उसकी चूत को चूसने लगा।
पूजा के शरीर से रस निकलने लगा – उसकी प्यासी चूत से सफेद, चिपचिपा तरल बह रहा था।
शेखर ने अपना सिर ऊपर उठाया, उसके होंठों पर उसका रस चमक रहा था, और बोला, “मम्म्म… मैंने इतने दिनों बाद इस रस को चखा है।”
पूजा निखिल के लंड को चूस रही थी – उसका सिर ऊपर-नीचे हो रहा था, उसके होंठ उसके लंड के हर इंच को दबा रहे थे।
उसने निखिल के लंड को अपने मुँह से बाहर निकाले बिना ही बुदबुदाया, “तो चाटो इसे जानू… यह रस सब तुम्हारा है…”
निखिल ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी – वह नीचे से पूजा के मुँह को चोद रहा था, उसने उसके बालों को उसके सिर के ऊपर पकड़ा और जोर से नीचे धकेला।
“गक गक गक गक” की आवाज़ फिर से कमरे में गूँजने लगी।
निखिल ने उसके मुँह को चोदते हुए कहा, “मगर भाभी, तुम्हारे मुँह और गले की कोई बराबरी नहीं कर सकता। तुम बहुत ही जबरदस्त रंडी हो।”
फिर उसने पूजा के सिर को और जोर से नीचे धकेला – उसका पूरा लंड पूजा के गले में चला गया। कुछ सेकंड तक वह वहीं रुका रहा, फिर उसने उसे छोड़ दिया।
पूजा ने हाँफते हुए अपना सिर ऊपर उठाया – उसका पूरा मुँह लार से भरा हुआ था, उसकी ठुड्डी से निचे लार टपक रही थी और निखिल के जांघो पर गिर रही थी।
उसकी आँखों में पानी था, मगर वह मुस्कुरा रही थी – एक संतुष्ट, गर्व भरी मुस्कान।
उसने अपनी जीभ से अपने होंठों को गीला किया और निखिल की तरफ देखते हुए बोली, “वाह… तुमने तो मेरा गला ही साफ कर दिया।”
शेखर नीचे से बोला, उसकी आवाज़ में मज़ाक था, “अरे इसे तो और भी गहरा जाना है जानू। अभी तो बस शुरुआत है।”
निखिल नीचे उतर आया और शेखर बाहर निकल गया। निखिल ने शेखर से कहा, “शेखर, मुझे भी चखने दो उसका स्वाद।”
शेखर ने सिर हिलाया, “बिल्कुल भाई, ले लो।”
शेखर बाहर निकल गया और अनिकेत ने निखिल की जगह ले ली – वह पूजा के सिर के पास लेट गया और अपना लंड उसके होंठों पर रख दिया।
पूजा ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना मुँह खोला और अनिकेत के लंड को चूसना शुरू कर दिया।
नीचे निखिल ने पूजा की चूत को चाटना शुरू किया, मगर कुछ ही सेकंड में उसने अपनी उँगलियाँ उसके गुदा में डाल दीं और उन्हें हिलाने लगा।
पूजा ने अनिकेत के लंड को चूसते हुए कराहना शुरू कर दिया – उसके शरीर में कंपन दौड़ गया।
निखिल ने अचानक रुककर शेखर से कहा, “शेखर, क्या तुम कृपया भाभी की टाँग को ऊपर पकड़कर रख सकते हो? ताकि मैं ठीक से मज़े ले सकूँ?”
शेखर तुरंत आगे बढ़ा और पूजा की एक टाँग को हवा में उठाकर पकड़ लिया। अनिकेत, जो पूजा के मुँह को चोद रहा था, ने मज़ाक में कहा, “हाँ, अपनी रंडी पत्नी को सपोर्ट दो।”
मयूर, राजेश और मोहित खड़े होकर अपने लंड को सहला रहे थे और लाइन में इंतज़ार कर रहे थे। वे सब हँस दिए – उनकी हँसी कमरे में गूँजी।
फिर अनिकेत नीचे आ गया और पूजा की चूत को चाटने लगा।
मोहित ने अनिकेत की जगह ले ली – उसने जल्दी से पूजा के सिर को पकड़ा और बिना किसी देरी के अपना लंड उसके गले में धकेल दिया। एक बड़ी “गक्क्क्क…” की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजी।
शेखर ने उसे टोका, “अरे धीरे चोदो भाई, इतनी जल्दी क्या है?”
मोहित ने अपनी आँखें बंद करके पूजा के मुँह को चोदते हुए जवाब दिया, “मैं क्या करूँ शेखर… मैं इतने टाइम से भाभी के मुंह को चोदने के लिए तरस रहा था, भाभी का मुँह तो स्वर्ग है।”
उसने पिस्टन की तरह अपनी रफ्तार बढ़ा दी – “गक गक गक गक गक…” की आवाज़ लगातार आ रही थी।
पूजा की आँखों से पानी बह रहा था, मगर वह पूरी तरह से समर्पित थी – उसका शरीर हिल रहा था, उसके हाथ मोहित की जाँघों पर थे।
करीब पाँच मिनट बाद मोहित नीचे उतर आया और पूजा की चूत को चाटने लगा।
अनिकेत ने अपना मुँह पोंछते हुए शेखर से कहा, “भाई, तुम्हारी पत्नी का स्वाद बहुत अच्छा है। मैं तो इस चूत में अपना लंड डालने के लिए बेताब हूँ।”
शेखर मुस्कुराया, “हाँ, वह तो है।”
नीचे मोहित पूजा की चूत को चूस रहा था, मगर उसकी असली दिलचस्पी उसके गुदा में थी – वह अपनी जीभ से पूजा के फैले हुए गुदा को चाट रहा था,
और अपनी उँगलियाँ उसकी चूत में डालकर हिला रहा था।
पूजा को इतना अच्छा लग रहा था कि वह राजेश के लंड को चूसते हुए भी जोर से कराह रही थी – उसने अपने हाथों से मोहित के सिर को अपनी गांड और चूत की तरफ और जोर से दबाया।
राजेश धीरे-धीरे पूजा के मुँह का आनंद ले रहा था – उसकी आँखें बंद थीं, उसका चेहरा शांत था, वह हर पल को महसूस कर रहा था जैसे वह स्वर्ग में घूम रहा हो।
मयूर, निखिल और अनिकेत राजेश पर मज़ाक कर रहे थे – “देखो उस हरामी को… हर पल का आनंद ले रहा है जैसे वह स्वर्ग में घूम रहा हो।”
शेखर ने गर्व से कहा, “यह उसकी गलती नहीं है। पूजा में मर्दों को खुश करने की गजब की कला है।”
राजेश ने अचानक पूजा के मुँह को चोदना बंद किया और उसका सिर ऊपर उठाकर उसकी आँखों में देखा – उसकी आँखों में एक गंभीरता थी।
“वादा करो भाभी… तुम मेरे लिए भी एक ऐसी ही रंडी लड़की ढूँढ़ोगी जैसे तुम हो। वादा करो।”
पूजा ने सिर हिलाया, उसकी आँखों में एक वादा था, “ज़रूर, राजेश। वादा किया।”
राजेश फिर से पूजा के मुँह को चोदने लगा – उसकी रफ्तार धीमी थी, मगर गहरी थी।
कुछ ही मिनटों में मयूर बिस्तर पर आ गया और उसने जोर से राजेश को पीछे धकेलते हुए कहा, “हट जा हरामखोर… मैं इतनी देर से इस रंडी के मुँह को चोदने का इंतज़ार कर रहा हूँ।”
राजेश नीचे उतर गया और मोहित ऊपर से बाहर निकल गया। राजेश नीचे आकर शेखर की तरफ देखा, जो अब भी पूजा की टाँग को हवा में पकड़े हुए था ताकि लोग आराम से चाट सकें।
राजेश ने पूछा, “शेखर, मुझे बताओ कि मैं कैसे चाटूँ? और पूजा भाभी को किस जगह पर सबसे ज्यादा मज़ा आता है? मैं सच में उन्हें खुश करना चाहता हूँ।”
शेखर ने उसे समझाते हुए कहा, “अरे राजेश, तुम बहुत दयालु हो यार। बस उसकी भोंगी को चाटो और थोड़ा दबाओ।
फिर उँगलियों से चोदते हुए उसके मटर को रगड़ो। बस इतना ही – वह कुछ ही मिनटों में झड जाएगी।”
निखिल ने मज़ाक में कहा, “सच में? तुम इसे मटर कहते हो?” और हँसने लगा।
राजेश नीचे गया और शेखर के निर्देशों का पालन करने लगा। ऊपर मयूर पूजा के मुँह को चोद रहा था – उसका लंड उसके गले में अंदर-बाहर हो रहा था।
शेखर और निखिल बातें कर रहे थे, लगभग पूजा और मयूर को नज़रअंदाज करते हुए। पृष्ठभूमि में “गक गक गक गक गक गक” की आवाज़ लगातार आ रही थी।
शेखर ने समझाया, “अरे, यह हमारा रोमांटिक और सीक्रेट कोड है। मैं हमेशा ऑफिस में पूजा को छेड़ता था कि मैं स्टाइल में मटर खाना चाहता हूँ, ताकि वह उत्तेजित हो जाए।”
“गक गक गक गक गक गक” की आवाज़ अब भी पृष्ठभूमि में बज रही थी।
निखिल कुछ कहने की कोशिश कर रहा था, “मगर मैं कह रहा हूँ…”
“गक गक गक गक गक गक…”
दोनों ने आवाज़ से परेशान होकर अपना सिर घुमाया और मयूर को चुप कराने के लिए कहा – “अरे मयूर, थोड़ा शांत रहो न!” – मगर जब उन्होंने वह दृश्य देखा, तो वे सदमे में आ गए।
मयूर ऊपर-नीचे नहीं हो रहा था, बल्कि उसने पूजा के सिर को पकड़ रखा था और उसे ऐसे ऊपर-नीचे कर रहा था जैसे कोई सिलाई मशीन हो – एक सुई जो ऊपर और नीचे जाती है, उसी गति से।
वह इतनी तेज़ गति से हो रहा था कि शेखर और निखिल की आँखें फैल गईं।
शेखर चिल्लाया, “अरे! तुम क्या कर रहे हो? रुको!”
मयूर रुका और उसने पूजा के मुँह से अपना लंड निकाला। दोनों ने पूजा की तरफ देखा। पूजा ने पूछा, “क्या हुआ?”
शेखर हैरान था, “क्या तुम ठीक हो?”
पूजा ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा, “बिल्कुल ठीक हूँ। अब हमें परेशान मत करो।”
और उसने मयूर का लंड वापस अपने मुँह में डाल लिया और उसे इशारा किया कि वह फिर से वही करे।
मयूर ने शेखर की तरफ देखते हुए कहा, “तुम्हारी रंडी पत्नी को जंगली तरीका पसंद है शेखर। चिंता मत करो।” और वह फिर से वही तेज़ गति से पूजा के मुँह को चोदने लगा –
“गक गक गक गक” की आवाज़ फिर से शुरू हो गई।
नीचे राजेश ने अपना मुँह पूजा की चूत से हटाया और बोला, उसके होंठों पर उसका रस चमक रहा था,
“मम्म्म्म… क्या स्वाद है। सच में शेखर, यह रंडी… तुम्हारी रंडी पत्नी… वाकई में वह सब पसंद करती है जो हम करते हैं। देखो इसकी चूत को – मैंने इसे चाटा और चखा भी।”
पूजा की चूत से सच में सफेद, गाढ़ा तरल बह रहा था – वह पहले ही चरमसुख तक पहुँच चुकी थी, मगर मुँह की चुदाई में किसी को पता नहीं चला।
उसका शरीर कांप रहा था, उसकी साँसें तेज़ थीं, मगर वह अब भी मयूर के लंड को अपने गले में लिए हुए थी।
मयूर ने यह सुनते ही अपनी गति रोक दी – उसने पूजा के सिर को पकड़कर ऊपर उठाया और जल्दी से उसकी चूत की तरफ झपटा।
उसने राजेश को धक्का देते हुए कहा, “हटो, मुझे भी चखने दो… मुझे भी भाभी का रस चखने दो।”
राजेश पीछे हट गया, उसके चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान थी, “हाँ भाई, ज़रूर, आनंद लो।”
मयूर ने पूजा को धीरे से बिस्तर पर पूरी तरह लिटा दिया – उसकी पीठ बिस्तर पर थी, उसके स्तन ऊपर की तरफ उठे हुए थे, और उसकी साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं।
मयूर ने उसकी टाँगों को चौड़ा फैलाया और अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया – एक कुत्ते की तरह चाटने लगा, अपनी जीभ को अंदर-बाहर करते हुए।
“स्लर्प स्लर्प स्लर्प…” की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजने लगी।
पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने सिर को पीछे की तरफ झुका लिया – उसकी उँगलियाँ बिस्तर की चादर को पकड़ रही थीं, उसके पैर की उँगलियाँ मुड़ रही थीं।
वह कराह रही थी, उसकी आवाज़ में एक गहरी तृप्ति थी।
अचानक मयूर रुका और उसने ऊपर देखा – उसके होंठ और ठुड्डी पूजा के रस से चमक रहे थे। “मम्म्म… क्या स्वाद है।
शेखर, तुम भी चखना चाहोगे? माफ करना, ज्यादा नहीं बचा है… मगर थोड़ा सा अभी भी है।”
शेखर, जो अब तक पूजा की टाँग पकड़े हुए था, आगे बढ़ा – उसकी आँखों में एक चमक थी।
“हाँ, ज़रूर… मैं स्वाद जानता हूँ, मगर फिर भी… तुम्हें पता है…” उसने मयूर की जगह ली और अपना मुँह पूजा की चूत पर रख दिया।
शेखर ने धीरे-धीरे, प्यार से अपनी जीभ से पूजा की चूत के हर कोने को चाटा –
उसने उसकी भोंगी को चूसा, अपनी जीभ को अंदर डाला, और धीरे-धीरे उसके सारे रस को साफ किया। पूजा कराह उठी – “आह्ह्ह… शेखर… जानू…”
शेखर ने अपना मुँह तब तक नहीं हटाया जब तक उसकी चूत पूरी तरह साफ नहीं हो गई – उसने हर बूंद को चाटा, हर कोने को साफ किया।
फिर उसने अपना सिर उठाया – उसकी आँखों में पूजा के लिए प्यार था, और उसके होंठों पर एक संतुष्ट मुस्कान थी।
पूजा ने अपनी आँखें खोलीं और शेखर की तरफ देखा – उसकी आँखों में आभार था, प्यार था, और एक गहरा संबंध था। उसने धीरे से कहा, “धन्यवाद, शेखी… मुझे तुम्हारी जीभ की बहुत याद आई थी।”