क्यों बन गया एक पति Cuckold ? – 6

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निखिल ने अपना हाथ उठाकर सबको रुकने का इशारा किया – उसकी आँखों में एक शिकारी की चमक थी, एक ऐसे आदमी की जो अब खेल का रुख बदलने वाला था।

उसकी आवाज़ कमरे में गूँजी, गहरी और आदेशात्मक, “बस अब बहुत हुआ चाटना और चूसना। अब समय आ गया है इसके छेदों को भरने का।”

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वह बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी पीठ के बल लेट गया – उसका आठ इंच का लंड अपनी पूरी महिमा में खड़ा था।

निखिल का शरीर दुबला-पतला मगर फौलादी था, उसकी छाती पर बालों की एक पतली लकीर थी जो उसके पेट से होती हुई नीचे तक जाती थी।

उसने अपने हाथ से अपने लंड को सहलाते हुए पूजा की तरफ देखा – उसकी आँखों में एक चुनौती थी, एक माँग। “भाभी, अब मेरे लंड पर बैठो।”

पूजा के शरीर में एक हलचल सी हुई – उसकी साँसें तेज़ हो गईं, उसके दिल की धड़कन बढ़ गई। वह बिस्तर पर खड़ी हो गई, उसके पैर बिस्तर के गद्दे में धँस गए।

उसने अपनी पीठ निखिल की तरफ कर ली – अब उसका सामना बाकी मर्दों से था जो कमरे में खड़े थे।

राजेश, अनिकेत, मयूर और मोहित – सब अपने-अपने लंड को सहला रहे थे, उनकी आँखें पूजा के शरीर पर टिकी थीं।

कमरे में सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ और बिजली के पंखे की घरघराहट सुनाई दे रही थी।

पूजा ने अपने हाथ पर थूका – उसकी लार गर्म थी, उसके हाथ पर चमक रही थी। फिर उसने अपनी उँगलियों को अपने गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया।

उसके गांड के आसपास की त्वचा तन गई, उसकी उँगलियाँ अंदर तक गईं, उसे चिकना कर रही थीं। उसकी आँखें बंद थीं, उसके चेहरे पर एक गहरी एकाग्रता थी।

फिर उसने अपना दूसरा हाथ पीछे ले जाकर निखिल की छाती पर टिकाया – उसकी उँगलियाँ उसके छाती के बालों में समा गईं।

उसने अपने पैरों को चौड़ा फैलाया, उसकी जाँघें काँप रही थीं, उसके पैर की माँसपेशियाँ तन गई थीं।

वह धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी, निखिल के लंड को अपने गांड के छेद पर रखते हुए।

निखिल ने कराहना शुरू किया – “आह्ह्हा… क्या गांड है… भाईईई..!!…”

पूजा धीरे-धीरे बैठी, निखिल का लंड उसके गांड में धीरे-धीरे अंदर जा रहा था।

उसने अपने होंठों को काटा, दर्द और आनंद के बीच की रेखा पर चलते हुए।

लेकिन निखिल खुद को रोक नहीं सका। उसने अचानक पूजा की कमर को पकड़ा – उसकी उँगलियाँ उसकी त्वचा में धँस गईं – और नीचे से ऊपर की तरफ जोर का धक्का मारा।

एक ही झटके में उसका पूरा आठ इंच का लंड पूजा के गांड की गहराई तक चला गया। उसकी गोटियाँ उसके शरीर से टकराए।

पूजा की आँखें दर्द से फैल गईं – उसकी पुतलियाँ सिकुड़ गईं, उसके मुँह से एक चीख निकल गई, “आआआआह… स्स्स्स्स…” उसकी रीढ़ में एक झटका सा लगा, उसके हाथों की उँगलियाँ निखिल की छाती पर और जोर से दब गईं।

शेखर चिल्लाया, उसकी आवाज़ में चिंता और गुस्सा दोनों थे, “अरे! धीरे करो ना यार! उसे चोट लगेगी!”

निखिल ने माफी माँगी, उसकी आवाज़ में पछतावा था मगर उसकी आँखों में वही जंगली चमक थी, “माफ कर दो शेखर… मैं खुद को रोक नहीं पाया। भाभी की गांड इतनी टाइट है, इतनी गर्म… मैं पागल हो गया।”

पूजा ने गहरी साँस ली, अपने शरीर को ढीला छोड़ा, दर्द को अपने में समाहित किया।

उसकी आँखों में आँसू थे मगर वह मुस्कुरा रही थी – एक अजीब सी संतुष्टि, एक आत्मसमर्पण।

कुछ सेकंड बाद, मोहित ने शेखर से कहा – उसकी आवाज़ में एक साज़िश थी, “शेखर, तुम बैठो और अपनी रंडी के डबल चुदाई का नज़ारा देखो। पहले हम चोदते हैं, फिर तुम शामिल होना।”

शेखर अपनी कुर्सी पर बैठ गया – वह कुर्सी जो उसने खुद लाई थी, जिस पर वह बैठकर अपनी पत्नी को देखता था।

उसने अपने पाँच इंच के लंड को सहलाना शुरू किया, उसकी आँखें पूजा पर टिकी थीं। उसके चेहरे पर गर्व था, उत्तेजना थी, और कुछ गहरा – एक मालिकाना संतुष्टि।

मोहित बिस्तर पर कूद गया। उसका शरीर भारी था, मजबूत – वह एक मजदूर की तरह दिखता था, उसके हाथ बड़े और खुरदरे थे।

पूजा ने अपने हाथों को निखिल की छाती पर टिकाकर अपने शरीर को पीछे झुका लिया – उसकी पीठ को एक धनुष जैसे ऊपर की तरफ मोड़ा, उसके स्तन ऊपर की तरफ उठे हुए थे, उसके निप्पल सख्त हो गए थे।

मोहित ने अपने सात इंच के लंड को पूजा की चूत के छेद पर रखा – वह मोटा था, उसकी नसें उभरी हुई थीं।

उसने धीरे-धीरे दबाव डाला, पूजा के शरीर को जाँचते हुए। पूजा की आँखें फैल गईं, उसका मुँह खुला रह गया जब मोहित का लंड उसकी चूत में धीरे-धीरे अंदर जाने लगा।

उसने अपनी साँस रोक ली, अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया।

मोहित ने एक गहरा धक्का मारा – उसका पूरा लंड पूजा की चूत में समा गया।

अब दोनों लंड पूजा के शरीर में दबे हुए थे – निखिल का आठ इंच का लंड उसके गांड में, और मोहित का सात इंच का मोटा लंड उसकी चूत में।

शेखर साफ देख सकता था कि उसकी पत्नी के दोनों छेद बड़े-बड़े लंडों से भरे हुए हैं – उसकी चूत का माँस मोहित के लंड के चारों तरफ फैला हुआ था, उसकी गांड निखिल के लंड को कसकर पकड़े हुए थी।

सबने तालियाँ बजाईं और चिल्लाए – “वाह! पहली डबल पेनेट्रेशन सफल हुआ! भाभी तो कमाल की रंडी निकली!”

शेखर ने उनसे जल्दी करने को कहा, उसकी आवाज़ में एक अधीरता थी, “जल्दी करो दोस्तों, मैं भी शामिल होना चाहता हूँ। यह देखना मुझे पागल कर रहा है।”

मोहित और निखिल ने एक साथ धीरे-धीरे चोदना शुरू किया – वे एक ताल में थे जैसे जुड़वाँ पिस्टन हों।

निखिल का शरीर दुबला और फुर्तीला था, उसकी गति तेज़ और सटीक थी। मोहित भारी था, उसकी गति धीमी मगर गहरी थी, हर धक्के के साथ वह पूजा के शरीर को हिला देता था।

जब निखिल अंदर जाता, मोहित बाहर आता, और फिर उल्टा। उनकी गति धीमी थी, मगर गहरी थी – हर धक्का पूजा के शरीर को झकझोर रहा था।

पूजा ने कराहना शुरू किया – उसकी आवाज़ धीमी थी, मगर उसमें आनंद था।

“आआह्ह्ह… आह्ह्ह… आह्ह…” उसके शरीर में एक नई ऊर्जा दौड़ गई, उसकी चूत और गांड दोनों एक ही समय में भरे हुए थे, दो अलग-अलग संवेदनाएँ एक साथ उसके शरीर में दौड़ रही थीं।

मोहित ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक चंचलता थी, “भाभी, क्या हम तेज़ी बढ़ा दें?”

पूजा ने सिर हिलाया – हाँ। उसकी आँखों में एक चमक थी, एक माँग।

दोनों ने अपनी गति बढ़ा दी। पूजा जोर से कराहने लगी – “आआआह्ह्ह… आह्ह्ह… आह्ह…” उसकी आवाज़ कमरे में गूँज रही थी, उसके स्तन हर धक्के के साथ उछल रहे थे।

कुछ मिनट बाद, उसने और माँग की, उसकी आवाज़ में एक अधीरता थी, “और तेज़… और तेज़ करो…”

यह सुनकर राजेश, अनिकेत और मयूर, जो खड़े होकर अपने लंड सहला रहे थे, चिल्लाए – “हाँ! रंडी जोर से चुदना चाहती है! और तेज़ करो दोस्तों!”

निखिल और मोहित ने और गति बढ़ा दी – वे अब बेरहमी से चोद रहे थे, बिना किसी परवाह के।

निखिल का पतला शरीर पिस्टन की तरह ऊपर-नीचे हो रहा था, उसका लंड पूजा के गांड में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था।

मोहित भारी साँसें ले रहा था, उसका मोटा लंड पूजा की चूत को चौड़ा कर रहा था, हर धक्के के साथ एक चिपचिपी आवाज़ आ रही थी।

पूजा चिल्लाने लगी – “आआआह्ह्ह… आह्ह… आआआआह्ह… हाँ… आआआआह्ह्ह्ह… मुझे जोर से चोदो… आआआआह्ह्ह्ह…”

निखिल ने यह सुनकर अपनी गति और बढ़ा दी – उसकी आवाज़ में एक क्रूरता थी, “हाँ… यह हमारी रंडी है… हमारी कुतिया… तुम्हें पसंद है न? तुम्हें पसंद है, रंडी?”

पूजा ने कराहते हुए जवाब दिया, उसकी आवाज़ में एक गहरी समर्पण थी, “हाँ… आआआह्ह्ह्ह… हाँ… प्लीज़ मुझे और जोर से चोदो… आआआह्ह्ह… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… मैं तुम्हारी कुतिया हूँ…”

मोहित ने भी अपनी गति बढ़ा दी – उसकी आवाज़ में एक जंगली आनंद था, “ले ले रंडी, ले ले। आज हम तेरे दोनों छेद फाड़ देंगे, अभागी रंडी! तू यही चाहती है न?”

शेखर अपनी कुर्सी पर तेज़ी से अपने लंड को सहला रहा था – उसकी आँखें इस दृश्य पर टिकी थीं, उसके कान इन आवाज़ों से भरे हुए थे।

उसके चेहरे पर पसीना था, उसकी साँसें भारी थीं। वह अपनी पत्नी को दो मर्दों के बीच पिसते हुए देख रहा था – उसका छोटा, सुडौल शरीर दो विशाल शरीरों के बीच दबा हुआ था।

पूजा की टाँगें, बेजान होकर, ऊपर-नीचे उछल रही थीं – हर धक्के के साथ उसके पैर हवा में लहराते थे।

निखिल का पतला, मांसल शरीर पिस्टन की तरह काम कर रहा था – उसका आठ इंच का लंड पूजा के गांड में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था,

और हर बार जब वह अंदर जाता, तो पूजा के गांड का माँस उसके चारों तरफ से सिकुड़ जाता था। मोहित का भारी, मोटा शरीर पूजा की चूत को चौड़ा कर रहा था –

उसके अंडकोष हर धक्के के साथ पूजा के शरीर से टकराते थे, एक गीली, चिपचिपी आवाज़ के साथ।

कमरे में अब सिर्फ चुदाई की आवाज़ें थीं – गीली, चिपचिपी आवाज़ें, शरीरों के टकराने की आवाज़ें, और पूजा की लगातार कराहें।

उसके फैले हुए छेदों से अजीब सी हवा निकलने की आवाज़ें आ रही थीं – एक सीटी जैसी आवाज़ जो हर धक्के के साथ बदलती थी।

पाँच से दस मिनट तक उसके शरीर को रौंदने के बाद, निखिल और मोहित थककर रुक गए। उनकी साँसें तेज़ थीं, उनके शरीर पर पसीना चमक रहा था।

उन्होंने पूजा को एक तरफ कर दिया – वह बिस्तर पर पड़ी थी, उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी, सिर्फ उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।

पूजा ने अपनी आँखें खोलीं और उनकी तरफ देखा – उसकी आवाज़ में एक चुनौती थी, “क्या हुआ? थक गए?”

निखिल ने हाँफते हुए जवाब दिया, उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, “नहीं, रंडी। हम थोड़ा आराम कर रहे हैं जबकि दूसरे हमारी जगह लेंगे।

शेखर, आओ। और अनिकेत, तुम आओ। राजेश और मयूर, तुम दोनों आखिरी में चोदो, ठीक है?”

सबने सहमति जताई – उनके चेहरों पर एक अलग ही तरह की चमक थी, एक शिकारी की चमक। निखिल और मोहित बिस्तर से उतरकर कोने में बैठ गए, अपनी साँसें सामान्य करते हुए।

अब शेखर बिस्तर पर लेट गया – उसका पाँच इंच का लंड खड़ा था, सख्त और तैयार। उसने पूजा की तरफ देखा और उसे इशारा किया।

पूजा उठी और उसके ऊपर बैठ गई – उसने शेखर के लंड को अपनी चूत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठी।

शेखर का लंड उसकी चूत में गहरे तक चला गया – उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, अपने सिर को पीछे झुका लिया।

फिर अनिकेत आया – उसका शरीर लंबा और पतला था, उसके हाथ लंबे थे। उसने अपने सात इंच के लंड को पूजा के गांड पर रखा और धीरे-धीरे दबाव डाला।

पूजा ने अपने होंठों को काटा जब अनिकेत का लंड उसके गांड में जाने लगा। अनिकेत ने एक गहरा धक्का मारा – उसका पूरा लंड पूजा के गांड में समा गया।

शेखर और अनिकेत ने एक साथ चोदना शुरू किया – उनकी गति धीमी थी, मगर गहरी।

शेखर की गति कोमल थी, प्यार भरी – वह पूजा की कमर को सहला रहा था, उसकी आँखों में उसके लिए प्यार था।

अनिकेत की गति कठोर थी, बेरहम – वह पूजा के गांड को फाड़ रहा था, उसकी आवाज़ में एक जंगली आनंद था।

पूजा कराह रही थी – “आआआह्ह्ह्ह्ह… हाँ… यह… आआआह्ह्ह…”

तभी मोहित और निखिल, जो कोने में बैठे थे, खड़े हो गए। निखिल ने कहा, उसकी आवाज़ में एक साज़िश थी, “भाइयों, चलो इस रंडी का मुँह बंद कर दें।”

वे बिस्तर पर चढ़ गए और पूजा के सिर के पास आकर खड़े हो गए। निखिल ने पूजा के बालों को पकड़ा – उसके बाल उसकी मुट्ठी में लिपट गए – और उसका सिर अपने लंड की तरफ घुमाया।

उसका आठ इंच का लंड पूजा के होंठों पर था, उसके सिर पर वीर्य की एक बूँद चमक रही थी।

पूजा ने अपना मुँह खोला और निखिल के लंड को अपने होंठों के बीच ले लिया – उसने अपनी जीभ से उसके सिर को सहलाया, उसे चूसा, और फिर उसे अपने गले में ले लिया।

निखिल ने कराहते हुए उसके मुँह को चोदना शुरू किया – “गक गक गक” की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी।

दस मिनट तक यह सिलसिला चलता रहा – शेखर और अनिकेत नीचे से पूजा को चोद रहे थे, निखिल और मोहित बारी-बारी से उसके मुँह को चोद रहे थे।

पूजा का शरीर चारों तरफ से घिरा हुआ था, उसके हर छेद में एक लंड था।

फिर, जब शेखर और अनिकेत थक गए, तो राजेश और मयूर बिस्तर पर आए। राजेश का शरीर मोटा और भारी था – उसका लंड लंबा और पतला था, मगर उसमें एक अलग ही ताकत थी।

वह बिस्तर पर लेट गया और उसने पूजा को इशारा किया – “आओ भाभी, मेरे लंड पर बैठो, घोड़ी की सवारी की तरह।”

पूजा ने उसकी बात मानी – वह राजेश के ऊपर बैठ गई और उसके लंड को अपनी चूत में धीरे-धीरे लेने लगी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके चेहरे पर आनंद फैल गया। “आआह्ह्ह… हाँ…”

फिर मयूर पीछे से आया – उसका शरीर दुबला-पतला था, मगर उसमें एक अजीब सी ताकत थी।

उसने अपने आठ इंच लम्बे और चार इंच चौड़े लंड को पूजा के गांड पर रखा और जोर से धकेल दिया। पूजा चिल्ला उठी – “हे भगवान… हाँ…”

अब चारों मर्द पूजा को चोद रहे थे – राजेश उसकी चूत में, मयूर उसकी गांड में, और शेखर और अनिकेत उसके मुँह में।

कोई तालमेल नहीं था, कोई सिंक्रोनाइज़ेशन नहीं, हर कोई बस अपने हिसाब से तेज़ी से धक्के लगा रहा था, जैसे किसी को एक दुसरे की पड़ी ना हो – बस एक जंगली, बेरहम चुदाई।

पूजा का छोटा शरीर चारों तरफ से घिरा हुआ था, उसके हर छेद में एक लंड था.

एक घंटे तक यह सिलसिला चलता रहा – पोजीशन बदलती रहीं, लंड बदलते रहे, छेद बदलते रहे। हर किसी ने हर छेद को कम से कम तीन बार चोदा।

पूजा का शरीर पूरी तरह से रौंद दिया गया था – उसकी चूत लाल और सूजी हुई थी, उसका गांड फैली हुइ थी, उसका मुँह लार और वीर्य से भरा हुआ था।

अंत में, जब सब थक गए, शेखर ने आदेश दिया – उसकी आवाज़ में एक मालिकाना अधिकार था, “पूजा, नीचे उतरो और अपने घुटनों पर बैठो।

अपना मुँह चौड़ा खोलो ताकि हर कोई आकर अपना वीर्य तुम्हारे मुँह में डाल सके।”

पूजा बिस्तर से उतरी और फर्श पर अपने घुटनों के बल बैठ गई – उसके बाल बिखरे हुए थे, उसके चेहरे पर लार और पसीना था, उसके शरीर पर चोट के निशान थे।

उसने अपना मुँह चौड़ा खोल दिया, अपनी जीभ बाहर निकाल दी, और अपनी आँखों से सबकी तरफ देखा – उसकी आँखों में एक गहरी समर्पण थी, एक पूर्ण आत्मसमर्पण।

शेखर नीचे उतरा और उसके सामने आया – उसने अपने लंड को सहलाते हुए पूजा के सिर को सहलाया। उसकी आवाज़ में प्यार था, “बस ऐसे ही, मेरी रंडी।”

फिर उसने अपना लंड पूजा के मुँह के ऊपर रखा और अपना वीर्य उसके मुँह में डाल दिया – सफेद, गाढ़ा तरल उसकी जीभ पर गिरा, उसके होंठों पर चमक रहा था।

“अभी निगलो मत, जानू। पहले हम सबका बीज इकट्ठा करो, फिर एक साथ निगलो,” शेखर ने आदेश दिया।

बाकी सबने भी हाँ में सिर हिलाया।

राजेश आगे बढ़ा – उसका शरीर भारी और मजबूत था, उसकी चाल में एक गर्व था, एक ऐसे आदमी का गर्व जिसने अभी-अभी एक औरत को अपने काबू में किया था।

उसका लंड अभी भी सख्त था, उसके सिर पर वीर्य की एक बूँद चमक रही थी, सफेद और गाढ़ी।

उसने अपने हाथ से अपने लंड को सहलाते हुए पूजा के सामने घुटने टेके – उसका चेहरा उसके मुँह के ठीक सामने था, उसकी आँखों में एक गहरी संतुष्टि थी।

उसने अपनी आवाज़ में एक गहराई के साथ कहा, “भाभी, तुम सच में एक रंडी हो। एक असली, पक्की रंडी।

मैंने आज तक ऐसी औरत नहीं देखी जो इतने मर्दों को इतनी खुशी से अपने शरीर पर हुकूमत करने दे।”

फिर उसने अपना लंड पूजा के खुले मुँह पर रखा और अपना वीर्य उसके मुँह में डाल दिया – गाढ़ा, गर्म तरल उसकी जीभ पर गिरा, उसके मुँह के कोनों से टपकने लगा।

पूजा ने अपनी आँखें बंद कर लीं – उसके चेहरे पर एक शांति थी, एक संतुष्टि। उसने राजेश के वीर्य को अपने मुँह में महसूस किया, उसका स्वाद चखा – नमकीन, कड़वा, मगर किसी तरह से मीठा भी।

उसने अपनी जीभ से उसे अपने मुँह में फैलाया, अपने गालों में भर लिया।

फिर निखिल आगे बढ़ा – उसका दुबला, फुर्तीला शरीर अब भी ऊर्जा से भरा हुआ था। उसके बाल बिखरे हुए थे, उसके चेहरे पर पसीना चमक रहा था।

वह पूजा के सामने बैठ गया, उसकी आँखों में एक चमक थी – एक ऐसे आदमी की चमक जिसने अभी-अभी एक औरत को अपने वश में किया था।

उसने अपने हाथ से पूजा की ठुड्डी पकड़ी और उसका मुँह और चौड़ा खोल दिया – उसकी उँगलियाँ उसकी त्वचा पर दब गईं।

“अब मेरी बारी, रंडी,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक क्रूरता थी।

उसने अपना लंड पूजा के मुँह के ऊपर रखा और अपना वीर्य उसके मुँह में डाल दिया – एक लंबी, गहरी धारा जो उसके गले में जा गिरी।

पूजा ने गटकने की कोशिश की मगर उसे रोक दिया गया – उसने अपना सिर हिलाया, अपनी आँखों से शेखर की तरफ देखा।

शेखर ने सिर हिलाया – “अभी नहीं, जानू। और आने वाले हैं।”

मोहित आगे बढ़ा – उसका भारी शरीर फर्श पर भारी कदमों से आया।

उसने अपना लंड पूजा के मुँह पर रखा और अपना वीर्य उसके मुँह में डाल दिया – गाढ़ा, सफेद तरल जो उसके होठों पर चमक रहा था।

अनिकेत आगे बढ़ा – उसका लंबा, पतला शरीर एक छाया की तरह आया। उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी, एक ऐसे आदमी की मुस्कान जो जानता है कि उसने क्या किया है।

फिर उसने अपना लंड पूजा के मुँह पर रखा और अपना वीर्य उसके मुँह में डाल दिया।

अंत में मयूर आगे बढ़ा – उसका सबसे बड़ा और चौड़ा लंड, और ताकतवर शरीर तेज़ी से आया। उसके चेहरे पर एक चंचलता थी, एक ऐसे आदमी की जो सब कुछ एक खेल की तरह लेता है।

फिर उसने अपना लंड पूजा के मुँह पर रखा और अपना वीर्य उसके मुँह में डाल दिया – एक छोटी, मगर गाढ़ी धारा जो उसकी जीभ पर गिरी।

अब पूजा का मुँह पूरी तरह से वीर्य से भरा हुआ था – सफेद, गाढ़ा तरल उसके मुँह के कोनों से टपक रहा था, उसकी ठुड्डी पर गिर रहा था, उसके स्तनों पर चमक रहा था।

उसकी आँखों में आँसू थे, मगर वह मुस्कुरा रही थी – एक अजीब सी संतुष्टि, एक पूर्ण समर्पण।

मयूर ने कहा, उसकी आवाज़ में एक आदेश था, “अब निगलो, रंडी भाभी। तीन की गिनती पर।”

पूजा ने सिर हिलाया – उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, अपने शरीर को तैयार किया।

“एक…”

“दो…”

“तीन!”

पूजा ने अपना सिर पीछे झुकाया और सारा वीर्य एक साथ निगल लिया – उसके गले से एक गटकने की आवाज़ आई, उसकी गर्दन की माँसपेशियाँ हिलीं, और फिर वह खाली हो गई।

उसने अपनी आँखें खोलीं और सबकी तरफ देखा – उसके चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान थी, उसकी आँखों में एक चमक थी।

सबने तालियाँ बजाईं और चिल्लाए – “भाभी, तुम सच में एक गंदी रंडी हो!”

अनिकेत ने कहा, उसकी आवाज़ में प्रशंसा थी, “भाभी, तुम सच में एक गंदी रंडी हो। मैंने आज तक ऐसी औरत नहीं देखी।”

पूजा ने अपने चेहरे पर टपके हुए बचे हुए वीर्य को अपनी उँगलियों से इकट्ठा किया – सफेद तरल उसकी उँगलियों पर चमक रहा था – और उसे अपने मुँह में डालकर निगल लिया।

फिर उसने अपने स्तनों पर टपके हुए वीर्य को भी इकट्ठा किया और उसे भी निगल लिया।

वह मुस्कुराई – उसकी आँखों में एक गहरी संतुष्टि थी, एक पूर्ण शांति। वह थकी हुई थी, उसका शरीर दुख रहा था, मगर वह खुश थी – पूरी तरह से संतुष्ट थी, पूरी तरह से रंडी थी।

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